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Kathakar Premchand

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भाई जाफ़र रज़ा प्रेमचन्द साहित्य के एक जाने-माने विद्वान् हैं। हिन्दी तथा उर्दू दोनों भाषाओं पर अपने समान अधिकार, शोध और गवेषणा में अपनी गहरी रुचि, और अपनी स्वच्छ समीक्षा-दृष्टि के आधार पर उन्होंने अपनी इस पुस्तक में प्रेमचन्द साहित्य के कई ऐसे पहलुओं को उजागर किया है, जिनसे हिन्दी संसार भी अभी यथेष्ट परिचित न था। उसी तरह उर्दू में प्रेमचन्द को हिन्दी से अपरिचित रहकर देखनेवालों ने बड़ी गुमराही पैदा की है और ऐसे अनेक पहलू आँख से ओझल हो गए हैं, जिनके बिना प्रेमचन्द साहित्य का ठीक-ठीक अध्ययन असम्भव हो जाता है। डॉक्टर जाफ़र रज़ा ने अपनी इस पुस्तक में बहुत-सी एतद्विषयक सूचनाएँ और आवश्यक तथ्य प्रस्तुत किए हैं, जो प्रेमचन्द-साहित्य के गम्भीर अध्ययन के लिए अपरिहार्य हैं। भाई जाफ़र रज़ा ने प्रेमचन्द के उर्दू-हिन्दी उपन्यासों और कहानियों का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करके प्रेमचन्द को ठीक से समझने के लिए नए रास्ते खोले हैं। उदाहरण के लिए प्रेमचन्द की रचना-प्रक्रिया को समझने के लिए उनकी रचनाओं के उर्दू और हिन्दी दोनों ही पाठों को देखना ज़रूरी है, क्योंकि उसके बिना लेखक के साथ न्याय नहीं किया जा सकता। भाई जाफ़र रज़ा ने शुद्ध पाठों को अपनी खोज, विभिन्न पाठों की समस्याओं और नई रचनाओं की अपनी खोज के आधार पर प्रेमचन्द के साहित्य और उसकी रचना प्रक्रिया को समझने की दिशा में बड़ा सुन्दर कार्य किया है। इतना निर्विवाद है कि उनकी यह पुस्तक प्रेमचन्द-सम्बन्धी आलोचना-साहित्य को उनकी एक विशिष्ट देन है। —अमृत राय, इलाहाबाद गणतंत्र दिवस, 1983

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भाई जाफ़र रज़ा प्रेमचन्द साहित्य के एक जाने-माने विद्वान् हैं। हिन्दी तथा उर्दू दोनों भाषाओं पर अपने समान अधिकार, शोध और गवेषणा में अपनी गहरी रुचि, और अपनी स्वच्छ समीक्षा-दृष्टि के आधार पर उन्होंने अपनी इस पुस्तक में प्रेमचन्द साहित्य के कई ऐसे पहलुओं को उजागर किया है, जिनसे हिन्दी संसार भी अभी यथेष्ट परिचित न था। उसी तरह उर्दू में प्रेमचन्द को हिन्दी से अपरिचित रहकर देखनेवालों ने बड़ी गुमराही पैदा की है और ऐसे अनेक पहलू आँख से ओझल हो गए हैं, जिनके बिना प्रेमचन्द साहित्य का ठीक-ठीक अध्ययन असम्भव हो जाता है। डॉक्टर जाफ़र रज़ा ने अपनी इस पुस्तक में बहुत-सी एतद्विषयक सूचनाएँ और आवश्यक तथ्य प्रस्तुत किए हैं, जो प्रेमचन्द-साहित्य के गम्भीर अध्ययन के लिए अपरिहार्य हैं।

भाई जाफ़र रज़ा ने प्रेमचन्द के उर्दू-हिन्दी उपन्यासों और कहानियों का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करके प्रेमचन्द को ठीक से समझने के लिए नए रास्ते खोले हैं। उदाहरण के लिए प्रेमचन्द की रचना-प्रक्रिया को समझने के लिए उनकी रचनाओं के उर्दू और हिन्दी दोनों ही पाठों को देखना ज़रूरी है, क्योंकि उसके बिना लेखक के साथ न्याय नहीं किया जा सकता। भाई जाफ़र रज़ा ने शुद्ध पाठों को अपनी खोज, विभिन्न पाठों की समस्याओं और नई रचनाओं की अपनी खोज के आधार पर प्रेमचन्द के साहित्य और उसकी रचना प्रक्रिया को समझने की दिशा में बड़ा सुन्दर कार्य किया है। इतना निर्विवाद है कि उनकी यह पुस्तक प्रेमचन्द-सम्बन्धी आलोचना-साहित्य को उनकी एक विशिष्ट देन है।

—अमृत राय, इलाहाबाद गणतंत्र दिवस, 1983

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2014
Weight
332 grams
ISBN-13
9788180319303
Pages
324
Reading time
~11 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 21 cm
Language
Hindi

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