Hum, Bharat Ke Rajyon Ke Log
Author:
Sanjeev ChopraPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics0 Ratings
Price: ₹ 796
₹
995
Available
भारत के नौ प्रान्त तथा वे 562 रियासतें जो अगस्त, 1947 में मौजूद थीं, आज आज़ादी के 75वें साल में देश के नक़्शे पर कहीं दिखाई नहीं देतीं, यह तथ्य अपनी राजनीतिक व प्रशासनिक सीमाओं को लेकर अपने नागरिकों को विश्वास में लेने की राष्ट्र की क्षमता को दर्शाता है। राज्यों के मद्देनज़र भारत की पुनर्कल्पना की प्रक्रिया एक तरफ़ जहाँ प्रशासनिक ज़रूरतों से प्रभावित हुई, वहीं आन्तरिक सीमाओं का पुनर्गठन विभिन्न भाषायी और जातीय समूहों की आकांक्षाओं को समायोजित करने के लिए भी हुआ, वे समूह जो राज्य और संघीय राजनीति में अपना स्थान चाहते थे।
प्रस्तुत अध्ययन डॉ. संजीव चोपड़ा ने राज्य अभिलेखों और भूमि बन्दोबस्त के लिए भूमि मापन उपकरणों पर शोध के रूप में शुरू किया था, जो होते-होते राज्य सीमाओं के मानचित्रण तथा भारत के भूगोल के माध्यम से इसके समकालीन राजनीतिक इतिहास के आख्यान के रूप में बदल गया। इस पुस्तक में राज्य पुनर्गठन आयोग, भाषायी पुनर्गठन आयोग, राजकीय दस्तावेजों और विदेश तथा राष्ट्रमंडल कार्यालय के दस्तावेजों से ली गई मूल्यवान सामग्री के साथ इस आख्यान को रचा गया है।
राज्यों तथा केन्द्रशासित प्रदेशों के 1947 से अब तक हुए एकाधिक सीमा-निर्धारणों के बारे में यह पुस्तक प्रामाणिक तथ्यों के साथ प्रकाश डालती है। यह बताती है कि भारत ने कैसे अपने आपको लगातार पुनर्परिभाषित किया है और कर रहा है।
ISBN: 9789360861117
Pages: 364
Avg Reading Time: 12 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Dekho Hamri Kashi
- Author Name:
Hemant Sharma
- Book Type:

- Description: काशी ज्ञान की शलाका है और बनारस औघड़ों का ठहाका है। काशी रहस्यों की गहराई है, बनारस किस्सों की ठंडाई है। काशी दिव्य है, बनारस भव्य है। काशी प्रणम्य है, बनारस रम्य है | काशी मुक्ति है, विरक्ति है; लेकिन बनारस हेमंतजी की परम आसक्ति है। यदि काशी में बनारस की तलाश है तो “देखो हमरी काशी ' की उँगली पकड़िए'''रस-ही- रस। गद्य में पद्य का रस, राग और लय का आनंद इस पुस्तक की हर कथा की प्रत्येक पंक्ति में है। इन कथाओं में तथ्य, तर्क और भाव-प्रवाह भरपूर है। जैसा रस “बैताल पचीसी' की कथाओं में है कि उन्हें कोई सामान्य पाठक भी पढ़े तो उसका मनोरंजन होगा। कोई समझदार व्यक्ति पढ़े तो उसे जहाँ ज्ञान प्राप्त होगा, वहीं उसे जीवन जीने का मार्ग भी मिल सकता है। यही बात हेमंतजी की इन कथाओं में है । इसमें ऐसे पात्र हैं, जो हेमंतजी के या हमारे-आपके अपने रोजमर्रा के जीवन के ताने-बाने में गुँथे हुए हैं । वे इतने अभिन्न हैं कि उन्हें अलग-अलग देखना संभव नहीं हो पाता । यह पुस्तक संस्मरण विधा में एक नवोन्मेष है। यह संस्मरण काशी की संस्कृति और बनारसी जीवन का रंगमंच प्रतीत होता है। इसमें वर्णित व्यक्तियों के जरिए काशी की संस्कृति, परंपरा और जीवनधारा की खोज की गई है। जो सदियों से सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन के अपरिहार्य अंग रहे हैं । ऐसे लोगों को केंद्र में रखकर कथा बुनी गई है । इस पुस्तक के पात्र चाहे जो हों, वे सामाजिक जीवन में साधारण भले माने जाते हों, पर कथा में वे असाधारण हैं ।
Chocolate Ki Vaishvik Rajdhani Belgium
- Author Name:
Ramesh Pokhriyal 'Nishank'
- Book Type:

- Description: "बेल्जियम की एक समृद्ध ऐतिहासिक विरासत और संस्कृति रही है, जिसका चित्रों, संगीत, साहित्य, नक्शानवीसी और वास्तुकला में साक्षात् दर्शन कर सकते हैं। बेल्जियम भले ही सबसे छोटे यूरोपीय देशों में से एक है, फिर भी इसके पर्यटन स्थल पर्यटकों से भरे रहते हैं। ये पर्यटन स्थल इस देश के समृद्ध इतिहास और परंपराओं की कहानियाँ बयाँ करते हैं। बेल्जियम के बारे में कई अनूठी, बेजोड़ बातें हैं, जो अनायास ही सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लेती हैं। बेल्जियम में दुनिया की सबसे बड़ी संख्या में प्रति वर्गमीटर महल हैं। कुछ क्षेत्रों में प्रति गाँव दो महल भी हैं। इनमें से कुछ को यूनेस्को द्वारा धरोहर घोषित किया गया है। बेल्जियम में विश्व के श्रेष्ठ संस्थानों के कॉर्पोरेट मुख्यालयों की बड़ी संख्या है। बेल्जियम में समृद्ध विरासत एवं परपंराएँ, विश्वविद्यालय, स्थापत्य कला को समेटे भवन, शिक्षा के उत्कृष्ट केंद्र, युद्ध स्मारक, मनमोहक प्राकृतिक छटा के अतिरिक्त अत्यंत दोस्ताना संबंध वाले लोग हैं। प्रस्तुत पुस्तक बेल्जियम के विषय में एक हैंडबुक है जो वहाँ की संपूर्ण जानकारी कम शब्दों में, रोचक शैली में देती है। "
Khalji Kaleen Bharat
- Author Name:
Saiyad Athar Abbas Rizvi
- Book Type:

-
Description:
प्रस्तुत ग्रन्थ ख़लज़ी बादशाहों के, समय के लिहाज़ से अल्प किन्तु महत्त्व की दृष्टि से अत्यन्त आवश्यक शासनकाल (1290-1320 ई.) से सम्बन्धित है।
डॉ. अतहर अब्बास रिज़वी ने इस पुस्तक में जिन तत्कालीन ग्रन्थों के परम आवश्यक उद्धरणों का समावेश किया है उनमें हैं—ज़ियाउद्दीन बरनी की ‘तारीख़े फ़ीरोज़शाही’, ‘अमीर ख़ुसरो’ के पाँच ऐतिहासिक ग्रन्थ (‘मिफ़ताहुल फ़ुतूह’, ‘ख़ज़ाइनुल फ़ुतूह’, ‘दिवलरानी ख़िज्र ख़ानी’, ‘नुह सिपेहर’ और ‘तुग़लक़नामा’), साथ ही मुहम्मद बिन तुग़लक़ की मृत्यु से कुछ ही पहले लिखनेवाले एसामी की ‘फ़ुतूहुस्सलातीन’।
इब्ने बतूता की यात्रा के उल्लेख से भी ख़लज़ी वंश से सम्बन्धित उद्धरण दिए गए हैं। कुछ काल पीछे के लिखे हुए तीन अन्य ग्रन्थों का भी समावेश इसलिए कर लिया गया है कि जिन मूल ग्रन्थों के आधार पर वे लिखे गए हैं, उनके अप्राप्य हो जाने के कारण उनकी अहमियत बढ़ गई है। ये ग्रन्थ हैं यहया बिन अहमद का ‘तारीख़े मुबारक शाही’, अबुल क़ासिम हिन्दू शाह फ़रिश्ता अस्तराबादी का ‘गुलशने इब्राहीमी’ जिसकी प्रसिद्धि ‘तीरीख़े फ़रिश्ता’ के नाम से है, और जफ़रुलवालेह के नाम से प्रचलित अरबी में लिखा हुआ गुजरात का इतिहास।
विद्वान अनुवादक ने इन ग्रन्थों का आलोचनात्मक विवेचन किया है जिसके चलते यह पुस्तक इतिहासज्ञों के साथ-साथ सामान्य पाठकों के लिए भी सुग्राह्य हो गई है।
Badhti Duriyan Gaharati Darar
- Author Name:
Rafiq Zakaria
- Book Type:

-
Description:
भारत–विभाजन के बाद, इन क़रीब पचास सालों में, हिन्दू–मुस्लिम रिश्तों में सबसे ज़्यादा गिरावट आई है। प्रस्तुत गवेषणापूर्ण अध्ययन में डॉ. रफ़ीक़ ज़करिया ने दोनों समुदायों के बीच आई टूटन के कारणों पर गहन विचार किया है।
अपने विश्लेषण की शुरुआत उन्होंने भारत पर मुहम्मद बिन कासिम (सन् 711) और महमूद गज़नवी (सन् 1020) के हमलों के परिणामों से की है। उसके बाद उन्होंने दिल्ली के सुल्तानों और बाद में मुग़लों के अधीन भारत की स्थितियों पर और दोनों समुदायों के समन्वित हितों के लिए की गई पहलक़दमियों पर नज़र डाली है। फिर वे, हिन्दुस्तान पर अंग्रेज़ी हुकूमत, उसकी ‘फूट डालो, राज करो’ की नीति और मुहम्मद अली जिन्ना द्वारा प्रस्तावित ‘दो–राष्ट्र सिद्धान्त’ का परीक्षण करते हैं। विभाजन की वजहों पर उन्होंने बड़ी गहराई से चिन्तन किया है और उसके दूरगामी परिणामों पर बड़े विस्तार से चर्चा की है। वे, अपने अध्ययन का समापन, एक चुनावी–शक्ति के रूप में हिन्दुत्व के उभार, 1992 में बाबरी मस्जिद की शहादत के परिणाम और भारत के वित्तीय नाड़ी–तंत्र मुम्बई में भाजपा–शिवसेना गठबन्धन की जीत से करते हैं। अपने प्रमेय का विकसन करते–करते डॉ. ज़करिया, दोनों समुदायों के बारे में प्रचलित अनेक ऐतिहासिक, धार्मिक और राजनीतिक भ्रमों–मिथकों को ध्वस्त करते चलते हैं।
डॉ. ज़करिया बड़े गम्भीर विद्वान और वरिष्ठ राजनेता हैं। ज़मीन से जुड़े होने की वजह से उन्हें यथार्थ की प्रत्यक्ष जानकारी है। अपने व्यापक ज्ञान और अनुभव का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने ऐसी पुस्तक की रचना की है जो नए मार्ग प्रशस्त करती है, सत्याग्रही अन्तर्दृष्टि प्रदान करती है और हिन्दुस्तान के हिन्दुओं और मुसलमानों को अलग–अलग बाँटनेवाली समस्याओं के सही स्वरूप से जुड़े अहम सवालों का जवाब देती है। सबसे महत्त्वपूर्ण बात तो यह है कि यह पुस्तक बड़े व्यावहारिक सुझाव देकर यह बताती है कि दोनों समुदायों के बीच की गहरी दरारों को कैसे पाटा जा सकता है।
Namo Vani
- Author Name:
Ed. Arun Anand
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Aadi Turk Kaleen Bharat (1206-1290)
- Author Name:
Saiyad Athar Abbas Rizvi
- Book Type:

-
Description:
आदि तुर्क वंश के इस इतिहास में 1206 ई. से 1290 ई. तक समस्त प्रमुख फ़ारसी तथा अरबी इतिहास ग्रन्थों का हिन्दी अनुवाद है। इसमें मिनहाज सिराज की ‘तबक़ाते नासिरी’ तथा ज़ियाउद्दीन बरनी की ‘तारीख़े फ़ीरोज़शाही’ को मुख्य आधार माना गया है।
दूसरे भाग में समकालीन इतिहासकारों की कृतियों का अनुवाद है। इनमें फ़ख़रे मुदब्बिर की ‘तारीख़े फ़ख़रुद्दीन मुबारकशाह’, ‘आदाबुल हर्ब वश्शुजाअत’, सद्रे निजशमी की ‘ताजशुल मआसिर’, अमीर ख़ुसरो के ‘दीवाने वस्तुल हयात’ एवं क़ेरानुस्सादैन के संक्षिप्त तथा परमावश्यक अंशों का अनुवाद भी सम्मिलित है। बाद के भी दो प्रमुख इतिहासकारों की रचनाओं के अनुवाद किए गए हैं—एसामी की ‘फ़ुतूहुस्सलातीन’ का और अरबी में लिखी हुई इब्ने बतूता की यात्रा के वर्णन का।
मध्यकालीन भारतीय इतिहास पर प्रामाणिक रोशनी डालनेवाले इन ग्रन्थों का अनुवाद कुछ विद्वानों ने अंग्रेज़ी में भी किया था, लेकिन उनमें पारिभाषिक शब्दों के अंग्रेज़ी अनुवादों में दोष रह गए हैं। इस कारण अनेक भ्रम-पूर्ण रूढ़ियों को आश्रय मिल गया है। इस प्रकार की त्रुटियों से बचने के उद्देश्य से प्रस्तुत ग्रन्थ में पारिभाषिक और मध्यकालीन वातावरण के परिचायक शब्दों को मूल रूप में ही ग्रहण किया गया है और उन शब्दों की व्याख्या पाद-टिप्पणियों में कर दी गई है।
Tughluq Kaleen Bharat : Vol. 1
- Author Name:
Saiyad Athar Abbas Rizvi
- Book Type:

-
Description:
यह ग्रन्थ तुग़लक़ बादशाहों के महत्त्वपूर्ण कालखंड सन् 1320 से 1351 ई. पर केन्द्रित है। इस दौर में शासन की बागडोर सुल्तान ग़यासुद्दीन और मुहम्मद बिन तुग़लक़ जैसे बादशाहों के हाथों में थी। यह ग्रन्थ उस युग की अत्यन्त महत्त्वपूर्ण और प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध कराता है।
फ़ारसी, अरबी, अंग्रेज़ी और हिन्दी के विद्वान और इतिहासकार डॉ. सैयद अतहर अब्बास रिज़वी ने इस ग्रन्थ का सम्पादन-अनुवाद किया है। उन्होंने इस ग्रन्थ में तत्सम्बन्धी अरबी और फ़ारसी में उपलब्ध तमाम ऐतिहासिक दस्तावेज़ों और सामग्रियों का उपयोग किया है जिनमें ज़ियाउद्दीन बरनी, एसामी, बद्रे चाच, अमीर ख़ुर्द, इब्ने बतूता, शिहाबुद्दीन अल उमरी, यहया, मुहम्मद बिहामद ख़ानी, निज़ामुद्दीन अहमद, अब्दुल क़ादिर बदायूँनी, अली बिन अज़ीज़ुल्लाह तबातबा, मीर मुहम्मद मासूम और फ़िरिश्ता जैसे विद्वान लेखकों, इतिहासकारों के ग्रन्थ शामिल हैं।
अनुवाद में फ़ारसी, अरबी के प्रचलित नियमों को, जिनका पालन इतिहासकार करते रहे हैं, ध्यान में रखा गया है। साथ ही आवश्यक टिप्पणियाँ भी जगह-जगह दर्ज कर दी गई हैं ताकि पाठकों को विषय को समझने में सुविधा हो।
इतिहास के छात्रों, शिक्षकों, शोधार्थियों और इतिहासकारों के साथ-साथ इतिहास में रुचि रखनेवाले आम पाठकों के लिए भी ग्रन्थ संग्रहणीय है।
Sanasdeeya Pranali
- Author Name:
Arun Shourie
- Book Type:

- Description: हमारे 99 फीसदी विधायक अल्पमत निर्वाचकों द्वारा चुने जाते हैं, उनमें से कई डाले गए वोटों का महज 15-20 फीसदी वोट पाकर निर्वाचित हो जाते हैं—यह आबादी का बमुश्किल 4-6 फीसदी बैठता है। तो हमारी संसदीय प्रणाली कितनी प्रतिनिधि प्रणाली है? लोकसभा में 39 पार्टियों के साथ, 14 पार्टियों से मिलकर बनी सरकार के साथ, क्या यह प्रणाली मजबूत, संशक्त और प्रभावी सरकारें प्रदान कर रही हैं, जिसकी हमारे देश को जरूरत है? क्या यह प्रणाली ऐसे व्यक्तियों के हाथों में सत्ता सौंप रही है, जिनके पास मंत्रालयों को चलाने की, विधायी प्रस्तावों का आकलन करने की, वैकल्पिक नीतियों का मूल्यांकन करने की क्षमता, समर्पण और निष्ठा है? या यह खराब-से-खराब लोगों को विधायिका और सरकार में ला रही है? जब वे सत्ता में होते हैं तो क्या यह उन्हें लोगों का भला करने के लिए प्रेरित करती है, या यह उन्हें कहती है कि कार्य-प्रदर्शन मायने नहीं रखता है, कि ‘गठबंधनों’ को बनाए रखना कार्य-प्रदर्शन का स्थानापन्न है? क्या यह प्रतिरोधी और बाधा खड़ी करनेवाली राजनीति को अपरिहार्य नहीं बनाती है? इससे पहले कि हम यह निष्कर्ष निकालें कि इस प्रणाली का समय पूरा हो गया है, शासन का कितना पूजन हो, ताकि हमें लगे कि हमें अवश्य ही विकल्प तैयार करना चाहिए? वह विकल्प क्या हो सकता है? तब क्या होता है, जब ये विधायक ‘संप्रभुता’ का दावा करते हैं और उसे अपना बना लेते हैं? न्यायपालिका ने जो बाँध खड़ा किया है—कि संविधान के आधारभूत ढाँचे को बदला नहीं जा सकता— राजनीतिक वर्ग के खिलाफ एक आवश्यक सुरक्षा नहीं है? लेकिन क्या कोई वैकल्पिक प्रणाली तैयार की जा सकती है, जो इस आवश्यक बाँध को तोड़ेगी नहीं, उसका उल्लंघन नहीं करेगी? उस विकल्प का मार्ग कौन प्रशस्त करेगा? उसकी अगुवाई कौन करेगा? इस झुलसानेवाली समालोचना में अरुण शौरी इन सवालों और अन्य मुद्दों को उठाते हैं। हमारे वक्त के लिए अनिवार्य। हमारे देश की दृढता के लिए आवश्यक।
Unneesaveen Sadi Ka Aupniveshik Bharat : Navjagaran Aur Jaati-Prashna
- Author Name:
Rupa Gupta
- Book Type:

- Description: उन्नीसवीं सदी उनमें से ज़्यादातर मूल्यों की जन्मदाता रही है जो बीसवीं सदी में भारत के जन-गण, राजनीति और सामाजिक गति-प्रगति के आधार-मूल्य रहे। आधुनिकता का विचार इनमें सबसे महत्त्वपूर्ण है जो इसी सदी में भारत आया और जिसने हमें अपनी चारित्रिक बनावट को देखने के लिए एक नई दृष्टि दी। राष्ट्र का विचार और विभिन्न सांस्कृतिक प्रश्नों का उत्तर खोजने की ललक भी इसी सदी में पैदा हुई। परम्परा और आधुनिकता, तर्क और आस्था, विज्ञान और धर्म के तार्किक घात-प्रतिघात का यह समय आनेवाली सदियों में हमारी चिन्तनधारा की पृष्ठभूमि होना था। यह पुस्तक इस आलोड़नकारी समय में जाति के प्रश्न को टटोलती है। क्या आर्थिक आत्मनिर्भरता, विदेशी शोषकों के विरोध, स्त्री-शिक्षा और सामाजिक उत्थान के अन्य प्रश्नों की चेतना का यह दौर जाति को लेकर भी उतना ही उद्विग्न था? या फिर भारतीय समाज को आज तक अपने चंगुल में दबोचे रखनेवाली 'जाति' देश के जातीय पुनर्जागरण की समग्र धारणा में कहीं पीछे छूट गई थी? छूट गई थी तो क्या वह निष्क्रिय भी थी? क्या वह देश और मनुष्यता के बोध को भीतर-भीतर खा नहीं रही थी? और भारत का अग्रणी बौद्धिक वर्ग उसे लेकर कितना सचेत और विचलित था? यह सुदीर्घ पुस्तक इन्हीं प्रश्नों का उत्तर तलाशते हुए नवजागरणकालीन हिन्दी साहित्य को लेकर हुए नए शोध-कार्यों की रोशनी में एक सन्तुलित दृष्टि बनाने की कोशिश करती है। भारतेन्दुकालीन साहित्य और पत्रकारिता आदि के परिप्रेक्ष्य में जाति और स्त्री विषयक चिन्तन को लेकर जो एकांगी मान्यताएँ इधर प्रचलन में आई हैं, इसमें उनका भी निवारण करने का प्रयास किया गया है। इतिहास और साहित्येतिहास की श्रेणी से स्वयं को बाहर रखते हुए भी यह शोध-ग्रंथ इन दोनों विधाओं को जोड़ते हुए आलोचना की एक नई समझ का विस्तार करता है। भाषा की सामाजिक व्याप्ति, सत्ता की भाषा, वर्ण-धर्म-जाति के समीकरण, 1857 के स्वाधीनता संग्राम में जातियाँ और जातीय बोध आदि कई विषयों को व्यापक अध्ययन के आधार पर विश्लेषित करते हुए यह पुस्तक पाठकों, शोध-छात्रों और अध्येताओं को दृष्टि तथा ज्ञान, दोनों स्तरों पर समृद्ध करेगी।
Aapatkal Aakhyan : Indira Gandhi Aur Loktantra Ki Agni Pariksha
- Author Name:
Gyan Prakash
- Book Type:

-
Description:
लोकतांत्रिक भारत के इतिहास के सबसे अँधेरे पलों में से एक का प्रभावी और प्रामाणिक अध्ययन, जो हमारे वर्तमान दौर में, लोकतंत्र पर मँडरा रहे वैश्विक संकटों पर भी रौशनी डालता है।
—सुनील खिलनानी; इतिहासकार, राजनीति विज्ञानी
एक ऐसे दौर में, जब दुनिया एक बार फिर अधिनायकवाद के ज़लज़लों से रू-ब-रू हो रही है, ज्ञान प्रकाश की किताब ‘आपातकाल आख्यान’ आपातकाल (1975-77) को बेहतर ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में समझने के लिए हमें इतिहास के उस दौर में ले जाती है, जब भारत ने स्वतंत्रता हासिल की थी। यह किताब इस मिथक को तोड़ती है कि आपातकाल एक ऐसी आकस्मिक परिघटना थी जिसका एकमात्र कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री का सत्तामोह था, इसके बरक्स यह तर्क देती है कि आपातकाल के लिए जितनी ज़िम्मेदार इन्दिरा गांधी थीं, उतने ही ज़िम्मेदार भारतीय लोकतंत्र और लोकप्रिय राजनीति के बनते-बिगड़ते नाज़ुक सम्बन्ध भी थे। यह ऐसी परिघटना थी जो भारतीय राजनीति के इतिहास में निर्णायक मोड़ साबित हुई।
ज्ञान प्रकाश आपातकाल के ठीक पहले के वर्षों में घटी घटनाओं का विस्तार से लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हुए बताते हैं कि लोकतांत्रिक बदलाव के वादे के अधूरे रह जाने ने कैसे राज्य सत्ता और नागरिक अधिकारों के बीच मौजूद नाज़ुक सन्तुलन को हिला दिया था। कैसे उग्र होते असन्तोष ने इन्दिरा गांधी की सत्ता को चुनौती दी और कैसे उन्होंने वैध नागरिक अधिकारों को निलम्बित करने के लिए क़ानून को ही अपना हथियार बनाया। जिसने भारत की राजनीतिक व्यवस्था पर कभी न मिटने वाले घाव के निशान छोड़े और निकट भविष्य में जाति और हिन्दू राष्ट्रवाद की राजनीति के लिए द्वार खोल दिये।
SAKSHI BHAV
- Author Name:
Narendra Modi
- Book Type:

- Description: "उज्ज्वल भविष्य का प्रकाश-पुंज दिखाई देता है। यहाँ तप-तपस्या जैसे शब्दों का उपयोग नहीं है। यहाँ किसी देवात्मा का अधिष्ठान खड़ा नहीं किया गया है यहाँ तो उसके हृदय में विवेकानंद के कथनानुसार दरिद्रनारायणों की कामना ही झंकृत की गई है यह सत् शक्ति का मिलन है। मेरे नए उत्तरदायित्व के विषय में बाह्य वातावरण में तूफान लगभम थम गया है। सबका आश्चर्य, प्रश्न आदि अब पूर्णता की ओर है अब अपेक्षाओं का प्रारंभ होगा। अपेक्षाओं की व्यापकता और तीव्रता खूब होगी तब मेरे नवजीवन की रचना ही अभी तो शेष है। मुझे किसी को मापना नहीं है मुझे अपनी श्रेष्ठता सिद्ध नहीं करनी है। मुझे तो नीर-क्षीर के विवेक को ही पाना है। मेरी समर्पण-यात्रा के लिए यह सब जरूरी है। इसीलिए इस शक्ति की उपासना का केंद्र स्व का सुख नहीं बनाना है। माँ...तू ही मुझे शक्ति दे—जिससे मैं किसी के भी साथ अन्याय न कर बैठूँ, परंतु मुझे अन्याय सहन करने की शक्ति प्रदान कर। —इसी पुस्तक से श्री नरेंद्र मोदी केवल एक राजनीतिक कार्यकर्ता ही नहीं बल्कि एक कविहृदय साहित्यकार भी हैं। यह ग्रंथ डायरी रूप में जगज्जननी माँ से संवाद रूप में व्यक्त उनके मनोभावों का संकलन है, जिसमें उनकी अंतर्दृष्टि, संवेदना, कर्मठता, राष्ट्रदर्शन व सामाजिक सरोकार स्पष्ट झलकते हैं। हृदय को स्पंदित करनेवाले मर्मस्पर्शी विचारों का अनंत सोपान है यह संकलन।"
Lahooluhan Afganistan
- Author Name:
Shridhar Rao +1
- Book Type:

- Description: अफ़ग़ानिस्तान की भौगोलिक संरचना उसकी स्थिति को अनूठा बनाती है। सभ्यता की शुरुआत से ही ये विभिन्न क़ाफ़िलों के आने-जाने का मार्ग रहा है। जो भी सुदूर पूर्व या भारत के जंगलों तथा नदियों की तरफ़ जाना चाहता, उसे अफ़ग़ानिस्तान की घाटियों तथा पहाड़ियों को ज़रूर पार करना पड़ता। एशिया और यूरोप, अरब दुनिया और दक्षिण एशिया और मध्य एशिया एवं पश्चिम एशिया के बीच स्थित होने की वजह से ये हर किसी को लुभाता है। क्या तालिबान के हटने तथा नई सत्ता के आने से ये लोभ-लालच ख़त्म होगा? पाँच साल के तालिबान शासन ने अफ़ग़ानिस्तान को सदियों पीछे ढकेल दिया है। शासकों ने बामियान की बौद्ध मूर्तियों के रूप में अपनी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर खो दी। ये एक तरह से द्वेष में आकर अपनी ही नाक काट लेने जैसा था, क्योंकि दुनिया ने तालिबान के तौर-तरीक़ों तथा विश्व आतंकवाद के निर्माता के रूप में उसे नामंज़ूर कर दिया था। काबुल के संग्रहालय को प्रसिद्ध गांधार चित्रों तथा प्रतिमाओं से वंचित कर दिया गया। कम्युनिस्ट शासन के दौरान महिलाओं को काम करने की पूरी आज़ादी थी, मगर अफ़ग़ानिस्तान इस स्थिति से उस स्थिति में ले जाया गया जहाँ तालिबान का राज था और जिसमें महिलाएँ दरवाज़ों के पीछे क़ैद कर दी गईं। स्कूल-कॉलेज तथा कामकाज की जगहों से हटाकर उन्हें बलात्कार के लिए छोड़ दिया गया। अपने समूचे ख़ूनी इतिहास में सम्भवतः एक बरबाद समाज ने सबसे ज़्यादा विधवाएँ और अनाथ देखे। इससे भी बुरा ये हुआ कि जो भी पढ़ा-लिखा था और मुल्क से जा सकता था, वो अपनी ज़िन्दगी की हिफ़ाज़त के लिए चला गया। क्या उनमें से कुछ लोग वापस लौटेंगे? उम्मीद करनी चाहिए कि लौटेंगे, मगर कुछ समय के बाद ही क्योंकि आज की हालत डरावनी है। अब इतिहास ने अफ़ग़ानिस्तान को एक और मौक़ा प्रदान किया है। विश्व बिरादरी के लिए भी ये एक अवसर है जब वो अफ़ग़ानिस्तान में एक सामूहिक भूमिका अदा कर सकती है। अफ़ग़ानिस्तान के अतीत और वर्तमान पर एक अनिवार्यतः पठनीय पुस्तक।
Madhyakalin Bharat mein Prodhyogiki
- Author Name:
S. Irfan Habib
- Book Type:

-
Description:
‘भारत का लोक इतिहास’ श्रृंखला की यह कड़ी भारतीय इतिहास के उस पहलू पर दृष्टिपात करती है जिस पर अभी तक बहुत कम काम हुआ है। इसमें आमजन के साधारणतम औज़ारों से लेकर खगोल-वैज्ञानिकों के उपकरणों और युद्ध में काम आनेवाले हथियारों तक के विकास को रेखांकित किया गया है। अध्ययन का मुख्य तत्त्व यह है कि यह पूर्णतया ऐतिहासिक है, तकनीक के विकास-क्रम की खोज न सिर्फ़ प्रमाणों के साथ की गई है, बल्कि उनके सामाजिक और आर्थिक परिणामों को भी विस्तार से समझा गया है।
श्रृंखला की अन्य पुस्तकों की तरह इसमें भी मूल दस्तावेज़ों के उद्धरणों और आधुनिक-पूर्व तकनीक के विषय में विशिष्ट सूचनाएँ दी गई हैं। तकनीकी शब्दावली, तकनीक के ऐतिहासिक स्रोतों और भारत से बाहर विकसित होनेवाली मध्यकालीन तकनीक पर विशेष टिप्पणियाँ भी दी गई हैं।
छात्रों और सामान्य पाठकों को ध्यान में रखते हुए कोशिश की गई है कि प्रामाणिकता को हानि पहुँचाए बिना पुस्तक जितनी सरल हो सकती है, उतनी हो सके। उम्मीद है कि सिर्फ़ इतिहासकारों को ही नहीं, हर उस पाठक को यह प्रस्तुति मूल्यवान लगेगी जो यह जानना चाहते हैं कि प्राचीन युग में जनसाधारण, आम स्त्री और पुरुषों ने अपने हाथों और औज़ारों से क्या कुछ किया।
Aadhar Se Kiska Uddhar
- Author Name:
Reetika Khera
- Book Type:

-
Description:
‘‘रीतिका खेड़ा की किताब भारी सरकारी प्रचार के साथ सारे देश में लागू की गई विवादित आधार योजना के बारे में एक सामयिक और सटीक दस्तावेज़ है। यह बताती है कि कैसे सर्वोच्च न्यायालय और जानकारों की सलाह की अनदेखी करते हुए सरकार ने आधार कार्ड को फटाफट तमाम सरकारी कल्याण योजनाओं के लाभार्थियों के लिए अनिवार्य बना दिया। इससे उपजी विसंगतियों और जनता के संवैधानिक अधिकारों को पहुँचे गम्भीर नुकसान पर लेखिका ने बड़ी ईमानदारी से रोशनी डाली है। किताब हमको आधार से जमा किए गए भारतीय उपभोक्ता की बाबत अनमोल डाटा का, आगे मुनाफ़ाख़ोर बाज़ार द्वारा सम्भावित दुरुपयोग के ख़िलाफ़ चेतावनी देती है। एक जटिल विषय के सहज हिन्दी अनुवाद ने इस किताब को सरल और आमफ़हम बनाया है।’’
—मृणाल पाण्डे
Agnipath Se Nyaypath
- Author Name:
Deokinandan Gautam
- Book Type:

- Description: यह पुस्तक उस बालक की कहानी है, जिसने जीवन में संघर्ष को उत्सव और उत्कर्ष का सोपान बनाने का प्रयत्न किया। बुंदेलखंड के पिछड़े क्षेत्र में साधारण किसान परिवार में जनमे इस बालक ने अभावों में अपनी भाव-भंगिमा को ईश्वर के सहारे सार्थकता से युक्त रखा। श्रीमद्भगवद्गीता, उसमें दिए गए ध्यान के प्रयोग उसके पाथेय रहे। पढ़-लिखकर पुलिस सेवा को एक मिशन के तौर पर लिया और यथाशक्त निर्वाह किया। थपेड़े खाए, पर न्यायपथ पर डटा रहा। भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से पुलिस विभाग के शीर्षस्थ पद से कुछ बड़े परिवर्तनों का वाहक बनने का निमित्त बना। जीवन में अनेक महान् विभूतियों के दर्शनों का सौभाग्य उसे मिला। पुस्तक के आकार की मर्यादा का ध्यान रखते हुए लेखक ने विभिन्न प्रकरण संक्षेप में दिए गए हैं। अनेक को स्थान नहीं मिल पाया है। बहुत से प्रकरण इसलिए भी छोड़ने पड़े कि उनमें आत्मश्लाघा की बू आने लगती अथवा ऐसे गंभीर ऑपरेशनल मैटर्स एवं विभागीय कमियों का ब्योरा आ जाता जिसका लाभ देश-विरोधी ताकतों को मिल जाता। जीवनमूल्यों की स्थापना करते हुए कर्तव्य के अग्निपयध पर सतत चलकर न्यायपथ की विस्तीर्ण यात्रा है यह पुस्तक
Bisaveen Sadi Ke Tanashah
- Author Name:
Ashok Kumar Pandey
- Rating:
- Book Type:

- Description: तानाशाही एक व्यक्ति की महत्वाकांक्षा का नतीजा होती है या कुछ सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक परिस्थितियाँ होती हैं जो किसी एक व्यक्ति के रूप में खुद को प्रकट करती हैं? क्या समाजों और राष्ट्रों के जीवन में कोई ऐसा क्षण आता है जब जन-गण स्वयं आत्मघाती हो उठता है और आँख मूँदकर किसी अधिनायक के पीछे चल पड़ता है? आज इक्कीसवीं सदी के इतने पारदर्शी समय में तानाशाही क्या किसी नए रूप की तलाश करेगी; और इन सवालों की रोशनी में हम, जो दुनिया के लोकतान्त्रिक देशों में अग्रणी रहे हैं, खुद को कहाँ देखते हैं! ‘बीसवीं सदी के तानाशाह’ मोटे तौर पर इन्हीं सवालों के जवाब तलाश करती है; कहने की जरूरत नहीं कि आज हमारे सामने मौजूद सबसे अहम सवाल भी यही है। हिटलर, स्तालिन, मुसोलिनी, उत्तरी कोरिया के किम इल-सुंग, चिली के ऑगस्तो पिनोशे और युगांडा के ईदी अमीन पर केन्द्रित इस पुस्तक का हर अध्याय इन नेताओं के समय की आन्तरिक और विश्व-राजनीति के निर्णायक आयामों पर रोशनी डालते हुए बताता है कि ये लोग कैसे उठे, कैसे गिरे और दुनिया ने, दुनिया के विचारकों ने उन्हें कैसे देखा-समझा। इतिहास अध्येता के रूप में अशोक कुमार पाडेय इतिहास के उन अध्यायों को हिन्दी पाठक के समक्ष लाते रहे हैं जिनका सीधा सम्बन्ध हमारी मौजूदा और आवश्यक प्रश्नाकुलताओं से है। इस प्रक्रिया में विचार उनका सहगामी रहा है। यह किताब इस यात्रा का एक और पड़ाव है और पाठकों को निश्चय ही अपने समय को लेकर सोचने और अपना पक्ष चुनने में मदद करेगी।
IAF Strikes @ 0328 Hours
- Author Name:
Mukesh Kaushik +1
- Book Type:

- Description: ‘IAF Strikes @ 0328 hours’ is a comprehensive account of the events that unfolded that night. I want to express that whatever surfaced following the attacks in the Indian media is largely true. On the other hand, whatever surfaced in Pakistan is imaginative, at best. I want to congratulate Mr. Mukesh Kaushik and Mr. Sanjay Singh, for this book. Their efforts and attention to detail is highly commendable. —Air Marshal C. Hari Kumar Former Chief of Western Air Command
Bhrashtachar Bharat Chhodho
- Author Name:
Kiran Bedi
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Singhbhum Ka Itihas: Pracheen Se Purv-Aupniveshik Kaal Tak
- Author Name:
Lalita Sundi
- Book Type:

- Description: औपनिवेशक पराधीनता झेल चुके समाजों का इतिहास जाने-अनजाने औपनिवेशक दृष्टिकोण के बोझ से दबा नजर आता है। भारत के आदिवासियों के सन्दर्भ में यह समस्या दोहरी रही है क्योंकि उनके सामने ब्रिटिश पराधीनता के साथ-साथ वर्चस्वशाली गैर-आदिवासी तबके का शोषण भी रहा है। दरअसल आदिवासियों का इतिहास भी अब तक ज्यादातर गैर-आदिवासी ही लिखते रहे हैं जिसमें उन्हें देखने के दो प्रमुख दृष्टिकोण रहे हैं। पहला, सब-आल्टर्न परिप्रेक्ष्य जिसमें इतिहास को नीचे से देखने अर्थात उपेक्षित-वंचित तबकों का इतिहास में समुचित उल्लेख करने और उन्हें वाजिब श्रेय देने पर जोर रहा है। और दूसरा, राष्ट्रवादी परिप्रेक्ष्य जिसमें मुख्य रूप से राष्ट्रीय स्वतंत्रता आन्दोलन में आदिवासियों की भूमिका को रेखांकित किया जाता रहा है। ये दोनों दृष्टिकोण भी आदिवासी समुदायों को अन्य और विशिष्ट सांस्कृतिक समूह मानने की औपनिवेशिक भ्रान्ति से मुक्त नहीं रह पाए। इसलिए इन दोनों तरह के इतिहासकारों के लेखन में प्राचीन और मध्यकालीन आदिवासी राजवंशों और गणराज्यों की प्रभावी उपस्थिति का जिक्र या आकलन न के बराबर मिलता है। ललिता सुंडी की यह पुस्तक उपरोक्त सीमाओं को लाँघकर आदिवासी इतिहास को बहुआयामी स्वरूप प्रदान करती है। इसमें सिंहभूम की भौगोलिक स्थिति, प्राचीन इतिहास, राजवंशों का उदय, राजनीतिक परिदृश्य, सामाजिक-सांस्कृतिक परम्पराएँ, पारम्परिक शासनप्रणाली, क्षेत्र के प्रमुख आदिवासी समुदायों का महत्व और उनका परस्पर सम्बन्ध आदि तमाम विषयों को समाहित किया गया है। इस ऐतिहासिक विवेचना में सिंहभूम के अर्थशास्त्रीय पक्ष को भी शामिल किया गया है। वस्तुतः यह पुस्तक सिंहभूम के हवाले से आदिवासियों के प्रति रूढ़ दृष्टिकोण को नकारने की एक शोधपरक पहल है जिसमें उन्हें सिर्फ जंगल और पिछड़ेपन से जोड़कर देखे जाने के विपरीत उनके समृद्ध इतिहास को प्रस्तुत किया गया है। इसका दस्तावेजी महत्त्व असंदिग्ध है।
Khandhar Bolte Hai
- Author Name:
Gunakar Muley
- Book Type:

-
Description:
किसी देश के इतिहास और सांस्कृतिक विकास-क्रम को जानने-समझने में अन्य स्रोतों के साथ ऐतिहासिक इमारतों और क़िलों का भी ख़ासा योगदान होता है। वे हमारे लिए अतीत का साक्षात् आईना होते हैं।
इतिहास, पुरातत्त्व, पुरालिपि और मुद्राशास्त्र के उद्भट विद्वान और विज्ञान को सरल भाषा में सामान्य पाठक के लिए सुगम बनानेवाले जनप्रिय लेखक गुणाकर मुळे की यह पुस्तक हमें उन खँडहरों की यात्रा पर ले जाती है, जिनमें हमारे इतिहास की लोमहर्षक गाथाएँ छिपी हैं।
कौन-सा क़िला कब अस्तित्व में आया, उसका निर्माण किसने कराया, वह किन युद्धों का साक्षी रहा, इन सब तथ्यों की प्रामाणिक जानकारी के साथ यह पुस्तक तत्कालीन राजवंशों के चित्रों, उस समय प्रयोग में आनेवाले अस्त्रों, क़िलों की बनावट, निर्माण कला और हवेलियों आदि का भी सम्यक् ब्यौरा उपलब्ध कराती है। बीच-बीच में नक़्शों के द्वारा भी विषय को स्पष्ट किया गया है।
कहना न होगा कि इतिहास के रोमांचक गलियारों का रहस्य खोलती यह पुस्तक न सिर्फ़ इतिहास के विद्यार्थियों के लिए, बल्कि सामान्य पाठकों के लिए भी अत्यन्त उपयोगी है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book