Thoughts Gallery
(0)
Author:
Dr. Sunil GuptaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
EnglishCategory:
History-and-politics₹
900
₹ 720 (20% off)
Unavailable
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
This book is about fundamental issues that define our country's development course. In a diverse cross-section of topics, the author discusses in his inimitable style the fundamental flaws that have beset the nation's relentless march to progress and prosperity. He also elaborates how a shift in the positions of individual members of society on different issues could cause a qualitative difference in the course of events and thereby lead to a better tomorrow. The articles compiled in this book have already appeared in social media on the author�s writing platform (drsunilgupta.com) and won wide acclaim. Endowed with the right balance of insight and prowess owing to the extensive exposure and rich experience gained in his professional capacity in the corporate, economic and social sectors, the author has been able to do justice to the task at hand. Not written with any particular section or group of persons in mind, the book aims to pique the interest, curiosity and conscience of the individual reader and thereby motivate him to think and then inspire him to act for the inclusive and sustainable development of our nation. Being an inalienable and intricate part of society, the individual's thought pattern will make all the difference in the final shaping of our country's destiny. And that, dear reader, is the undercurrent of the brook of the author's thoughts that this book tries to encapsulate.
Read moreAbout the Book
This book is about fundamental issues that define our country's development course. In a diverse cross-section of topics, the author discusses in his inimitable style the fundamental flaws that have beset the nation's relentless march to progress and prosperity. He also elaborates how a shift in the positions of individual members of society on different issues could cause a qualitative difference in the course of events and thereby lead to a better tomorrow.
The articles compiled in this book have already appeared in social media on the author�s writing platform (drsunilgupta.com) and won wide acclaim. Endowed with the right balance of insight and prowess owing to the extensive exposure and rich experience gained in his professional capacity in the corporate, economic and social sectors, the author has been able to do justice to the task at hand.
Not written with any particular section or group of persons in mind, the book aims to pique the interest, curiosity and conscience of the individual reader and thereby motivate him to think and then inspire him to act for the inclusive and sustainable development of our nation. Being an inalienable and intricate part of society, the individual's thought pattern will make all the difference in the final shaping of our country's destiny. And that, dear reader, is the undercurrent of the brook of the author's thoughts that this book tries to encapsulate.
Book Details
-
ISBN9789351866695
-
Pages552
-
Avg Reading Time18 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
The Hero of Kargil & Other Stories
- Author Name:
Lt. Gen. Yashwant Mande
- Book Type:

- Description: The stories in this book pertain to the wars, which India has fought since its Independence in 1962, 65, 71 and 99. The war stories have always aroused the curiosity of the readers. Although many books have been written on conflicts between India and its neighbours, no author has attempted to write stories. This book is therefore unique, the only one of its kind, a book of fiction on events and characters, in the background of war. The wars have topical interest and as time passes, one forgets them and gets engrossed in current issues. This is natural. However, certain events such as missile attack on Karachi, shattering of enemy offensive by Hunter aircraft at Longewala, the role played by the aircraft carrier INS VIKRANT and the heroics of men in uniform have a lasting value, an element of permanence. These stories provide insight into ethos, culture and lifestyle of the armed forces, their values, hardships and character. The stories narrate the account of war and unfold its conduct in easy and interesting manner. The stories have been written in simple and endearing style. It is a book, which ought to be read by all, the old and young.
Uttar Taimoorkaleen Bharat : Vol. 1
- Author Name:
Saiyad Athar Abbas Rizvi
- Book Type:

-
Description:
इस पुस्तक में 1399 से 1526 ई. तक के देहली के सुल्तानों के इतिहास से सम्बन्धित समस्त प्रमुख समकालीन एवं बाद के फ़ारसी के ऐतिहासिक ग्रन्थों का हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत किया गया है। पहला भाग देहली के सुल्तानों के राज्य से सम्बन्धित है और दूसरा भाग उन प्रान्तीय राज्यों से जिनका प्रादुर्भाव फ़ीरोज़ तुग़लक़ की मृत्यु के उपरान्त ही धीरे-धीरे होने लगा था और जो तैमूर के आक्रमण के उपरान्त पूर्णतः स्वतंत्र हो गए।
सैयद वंश के इतिहास से सम्बन्धित यहया बिन अहमद बिन अब्दुल्लाह सिहरिन्दी की ‘तारीख़े मुबारकशाही’ एवं ख़्वाजा निज़ामुद्दीन अहमद की ‘तबक़ाते अक़बरी’ भाग-1 के उद्धरणों का अनुवाद किया गया है। दूसरे भाग में अफ़ग़ानों के सुल्तानों के इतिहास के अनुवाद सम्मिलित किए गए हैं। इनमें शेख़ रिज़्कुल्लाह मुश्ताक़ी की ‘वाक़ेआते मुश्ताक़ी’, ख़्वाजा निज़ामुद्दीन अहमद की ‘तबक़ाते अकबरी’, अब्दुल्लाह की ‘तारीख़े दाऊदी’, अहमद यादगार की ‘तारीख़े शाही’ एवं मुहम्मद कबीर बिन शेख़ इस्माइल की ‘अफ़सानए-शाहाने हिन्द’ के उद्धरण शामिल हैं।
भाग-2 के इतिहासकारों में ख़्वाजा निज़ामुद्दीन अहमद के अतिरिक्त सभी अफ़ग़ान इतिहासकार हैं। अहमद यादगार का इतिहास 1930 ई. में प्रकाशित हुआ था और ‘तारीख़े दाऊदी’ 1954 ई. में। इनके अतिरिक्त ‘वाक़ेआते मुश्ताक़ी’ और ‘अफ़सानए-शाहाने हिन्द’ अभी तक प्रकाशित नहीं हुए हैं और इनकी हस्तलिखित प्रतियाँ भी भारतवर्ष में उपलब्ध नहीं हैं, अतः आवश्यक अंशों का अनुवाद करते समय तत्सम्बन्धी पूरे-पूरे इतिहासों का अनुवाद कर दिया गया है। इस कारण एक ही घटना की कई बार पुनरावृत्ति अनुपेक्षणीय हो गई है। इतिहासकारों तथा उनकी कृतियों का परिचय अनुवाद के प्रारम्भ में प्रस्तुत किया गया है।
Janane ki Batein (Vol. 6)
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay
- Book Type:

- Description: राजा राममोहन राय से लेकर उत्पलेन्दु चक्रवर्ती तक बंगाल में निरन्तर नये विचारों के प्रसार के माध्यम से जिन महापुरुषों ने नवजागरण की धारा को मजबूत किया है, उनमें एक देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय भी हैं। भारतीय दर्शन की भौतिकवादी धारा को रेखांकित करने के लिए इन्हें पूरी दुनिया में आदर के साथ याद किया जाता है। देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय ने एक तरफ भौतिकवाद को मज़बूत करने के लिए लोकायत जैसी पुस्तक लिखी तो दूसरी तरफ अन्धविश्वासों और रूढ़ियों में फँसे भारतीय समाज के बच्चों में समय, समाज और प्रकृति को देखने-परखने की वैज्ञानिकी समझ तथा ज्ञान के विकास के लिए ग्यारह खंडों में इस महत्त्वपूर्ण पुस्तकमाला का सम्पादन किया, जो किसी बाल विश्वकोश से कम नहीं है। इस श्रृंखला की पुस्तकें केवल बच्चों के ज्ञान का ही विस्तार नहीं करती हैं, बल्कि उन्हें बिल्कुल नई समझ और संसार को देखने की वैज्ञानिक दृष्टि प्रदान करती हैं। पुस्तक श्रृंखला का यह छठा भाग प्राचीन सभ्यताओं के विकास पर आधारित है। इसमें सुमेर, मिस्र, सिन्धुघाटी आदि नदी केन्द्रित सभ्यताओं के साथ-साथ चीन, भारत, ग्रीस, रोम जैसे देशों के प्राचीन इतिहास की संक्षिप्त जानकारी भी दी गई है।
Hindi Sahitya Ka Samagra Itihas
- Author Name:
Ramkishor Sharma
- Book Type:

-
Description:
हिन्दी साहित्य का समग्र इतिहास’ पुस्तक नए अनुसन्धानों, विमर्शों के परिप्रेक्ष्य में समाज सापेक्षता तथा कला-मूल्यों के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत की गई है। इसमें हिन्दी भाषी प्रान्तों के अलावा अन्य प्रान्तों में रहनेवाले, हिन्दीतर भारतीय भाषाओं के प्रयोक्ता लेखकों एवं कवियों की रचनाओं को समाहित किया गया है।
नई विधाओं जैसे हिन्दी गज़ल, नवगीत, अनुगीत, हाइकू के रचना-शिल्प पर समुचित प्रकाश डाला गया है।
स्वतंत्रता के बाद के ऐसे रचनाकारों की रचनाओं पर विचार किया गया है जो आन्दोलनों से न जुड़कर स्वतंत्र लेखन कर रहे थे। रचनाकारों तथा रचनाओं का मूल्यांकन दुराग्रहमुक्त होकर निष्पक्ष भाव से किया गया है।
हिन्दी और उर्दू का गहरा रिश्ता है, अतः हिन्दी के अध्येताओं को उर्दू साहित्य से भी परिचित होना चाहिए, इसी दृष्टि से उर्दू साहित्य का अति संक्षिप्त इतिहास दर्शाया गया हैं। समकालीन अनेक रचनाओं को शामिल किया गया है जो साहित्यिक दृष्टि से उत्कृष्ट हैं किन्तु साहित्येतिहासों में जिनकी उपेक्षा की गई है। आधुनिक युग में ब्रज तथा अवधी साहित्य की प्रवृत्तियों पर प्रकाश डाला गया है। विवेचन की भाषा-शैली स्पष्ट, सुबोध तथा निष्पक्ष है। हिन्दी साहित्य के समग्र इतिहास में काव्य-प्रवृतियों का अभिनव दृष्टि से मूल्यांकन किया गया है। नए विमर्शों तथा पुनर्पाठ की दृष्टि से नई सामग्री का समावेश भी किया गया है। हिन्दी ग़ज़ल, हाइकू, बोलियों के साहित्य को भी यथास्थान अंकित किया गया है।
Dastan Mughal Mahilaon Ki
- Author Name:
Heramb Chaturvedi
- Book Type:

- Description: मध्यकालीन इतिहास के अध्ययन, अध्यापन, शोध से 33 वर्षों के अधिक के जुड़ाव के कारण, इस काल के इतिहास से भली-भाँति वाक़िफ़ हैं अतः, ऐतिहासिक शोध के साथ लिखी गई कुछ कहानियों के माध्यम से चयनित महिला पात्रों की भूमिका के साथ उन्होंने न्याय करने के प्रयास में, इस संकलन की आवश्यकता महसूस की। इसमें प्रसिद्ध मंगोल शासक चंगेज़ ख़ाँ की पुत्र-वधू से प्रारम्भ करके, बाबर की नानी से होते हुए, हमीदा बानो बेगम की दास्ताँ बयाँ करते हुए, हर्रम बेगम की भूमिका को रेखांकित किया गया है जिसके फलस्वरूप हुमायूँ अन्ततोगत्वा भारत में प्रवेश कर पाता है। अन्त में अनारकली की गुत्थी को भी सुलझाने का प्रयास किया गया है।
Purv Madhyakaleen Bharat
- Author Name:
Prashant Gaurav
- Book Type:

-
Description:
पूर्वमध्यकाल का इतिहास सम्पूर्ण भारतीय इतिहास का सर्वाधिक विवादास्पद, रुचिपूर्ण और अत्यधिक महत्त्वपूर्ण चरण है। अध्ययन की सुविधा के लिए 600 ई. और 1200 ई. के बीच के काल को परिपक्व पूर्वमध्यकाल कहते हैं। गहराई से देखने पर पता चलता है कि पूर्वमध्यकाल की प्रमुख विशेषताओं का जन्म गुप्तकाल में ही हो चुका था। इस काल को सामन्तवाद, नगरों का पतन और उत्थान, नवीन सामाजिक-व्यवस्था का काल, क्षेत्रीय भाषा और क्षेत्रीय धर्म का काल अथवा मन्दिरों का युग के नाम से भी जाना जा सकता है।
दक्षिण भारत में विशाल मन्दिरों का निर्माण इस काल में हुआ। देवदासियों की नवीन परम्परा विकसित हुई। भारतीय दर्शन में नवीन तत्त्व देखे जाने लगे। भक्ति, तंत्र-मंत्र (और जादू-टोना का महत्त्व बढ़ा। शंकराचार्य के दर्शन को नवीन शैली में लोकप्रियता प्राप्त हुई। क्षेत्रीय शासकों, क्षेत्रीय धर्म एवं क्षेत्रीय भाषा की संख्या बढ़ी। प्रशासनिक एवं धार्मिक केन्द्रों की संख्या बढ़ी और व्यापारिक नगरों की संख्या नगण्य रही। जातियों एवं उपजातियों की संख्या सौ से अधिक हो गई। छोटे-बड़े और काले-गोरे देवी-देवता पाए जाने लगे। जनसमुदाय की आर्थिक दशा संकटपूर्ण रही। क्षत्रिय के बदले राजपूत पाए जाने लगे। राजाओं के बीच हमेशा युद्ध का माहौल बना रहता था। इनकी आपसी अनेकता से विदेशी शक्तियों ने लाभ उठाया। सबसे पहले अरबों के आक्रमण हुए और उसके बाद गोरी और गज़नी के आक्रमणों ने भारत में मुस्लिम शासन की नींव डाल दी।
इन सभी तथ्यों पर इस पुस्तक में प्रकाश डाला गया है। गुप्तकाल के पतन के बाद से लेकर गोरी-गज़नी के आक्रमण और उनके प्रभाव तक की इसमें विवेचना की गई है।
केन्द्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं, प्रान्तीय प्रतियोगी परीक्षाओं और दिल्ली तथा पटना विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम को ध्यान में रखते हुए प्रस्तुत पुस्तक को तैयार किया गया है। विश्वास है, छात्रों के लिए यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी।
Chunav Rajneeti Aur Reporting
- Author Name:
Brajesh Rajput
- Book Type:

- Description: This book has no description
Tughluq Kaleen Bharat : Vol. 1
- Author Name:
Saiyad Athar Abbas Rizvi
- Book Type:

-
Description:
यह ग्रन्थ तुग़लक़ बादशाहों के महत्त्वपूर्ण कालखंड सन् 1320 से 1351 ई. पर केन्द्रित है। इस दौर में शासन की बागडोर सुल्तान ग़यासुद्दीन और मुहम्मद बिन तुग़लक़ जैसे बादशाहों के हाथों में थी। यह ग्रन्थ उस युग की अत्यन्त महत्त्वपूर्ण और प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध कराता है।
फ़ारसी, अरबी, अंग्रेज़ी और हिन्दी के विद्वान और इतिहासकार डॉ. सैयद अतहर अब्बास रिज़वी ने इस ग्रन्थ का सम्पादन-अनुवाद किया है। उन्होंने इस ग्रन्थ में तत्सम्बन्धी अरबी और फ़ारसी में उपलब्ध तमाम ऐतिहासिक दस्तावेज़ों और सामग्रियों का उपयोग किया है जिनमें ज़ियाउद्दीन बरनी, एसामी, बद्रे चाच, अमीर ख़ुर्द, इब्ने बतूता, शिहाबुद्दीन अल उमरी, यहया, मुहम्मद बिहामद ख़ानी, निज़ामुद्दीन अहमद, अब्दुल क़ादिर बदायूँनी, अली बिन अज़ीज़ुल्लाह तबातबा, मीर मुहम्मद मासूम और फ़िरिश्ता जैसे विद्वान लेखकों, इतिहासकारों के ग्रन्थ शामिल हैं।
अनुवाद में फ़ारसी, अरबी के प्रचलित नियमों को, जिनका पालन इतिहासकार करते रहे हैं, ध्यान में रखा गया है। साथ ही आवश्यक टिप्पणियाँ भी जगह-जगह दर्ज कर दी गई हैं ताकि पाठकों को विषय को समझने में सुविधा हो।
इतिहास के छात्रों, शिक्षकों, शोधार्थियों और इतिहासकारों के साथ-साथ इतिहास में रुचि रखनेवाले आम पाठकों के लिए भी ग्रन्थ संग्रहणीय है।
Dorahe Par Vam
- Author Name:
Praful Bidwai
- Book Type:

-
Description:
एक बड़ा प्रासंगिक सवाल उठता है कि भारत में राजनीतिक दलों के लिए वैधता के एक महत्त्वपूर्ण स्रोत के रूप में वामपंथी राजनीति उस सीमा तक क्यों नहीं विकसित हो पाई जैसा कि बेहिसाब अन्याय और बढ़ती जाती असमानता वाले समाज में अपेक्षित था।
दलीय वाम अब प्राथमिक रूप से दो धाराओं में सीमित रह गया है : मुख्यधारा वाले संसदीय साम्यवादी दल और उनके सहयोगी तथा ग़ैर-संसदीय माओवादी अथवा मार्क्सवादी-लेनिनवादी समूह।
इस पुस्तक के सरोकार का विषय सीमित है : यह प्राथमिक रूप से संसदीय साम्यवादी दलों पर केन्द्रित है। इस सीमा के पीछे तीन कारक हैं। पहला, मुख्यधारा वाले गुट को भारत की बुर्जुआ उदारवादी लोकतांत्रिक व्यवस्था–अपनी सीमाओं के बावजूद जिसे जनता से पर्याप्त वैधता प्राप्त है–से जुड़ने का प्रयास करने का सबसे लम्बा और सबसे समृद्ध अनुभव है और यह प्रगतिशील परिवर्तन और रूपान्तरण की संभावनाओं वाली राजनीति के अवसर प्रदान करता है।
दूसरे, वामपंथ की सभी धाराओं में मुख्यधारा वाला खेमा सबसे बड़ा है और विविध विभाजनों, असहमतियों और पारस्परिक प्रतिद्वान्दिताओं के बावजूद इसका लगातार सबसे लम्बा संगठित अस्तित्व रहा है।
तीसरे, और यह बात बहुत चकरानेवाली लग सकती है कि मुख्यधारा के वाम पर राज्य केन्द्रित अध्ययनों, लेखों से अलग राष्ट्रीय स्तर पर ताज़ा विश्लेषणात्मक साहित्य बहुत कम है। आशा है कि यह पुस्तक राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर वामपंथी दलों के कामकाज के विश्लेषण को उनके विचारधारात्मक आग्रहों, रणनीतिक परिप्रेक्ष्यों, राजनीतिक गोलबंदियों के दृष्टिकोणों और संगठनात्मक प्रणालियों तथा व्यवहारों के साथ जोड़कर इस शून्य को भरने में मदद करेगी।
Nagvansh Ki Purakathayein
- Author Name:
Shivkumar Tiwari
- Book Type:

-
Description:
‘नागवंश की पुराकथाएँ’ ऐतिहासिक भारत के उस आदि समाज की कथाएँ हैं जिनके सूत्र संस्कृत, पालि एवं प्राकृत भाषाओँ में लिखे प्राचीन ग्रन्थों में मिलते हैं। वस्तुतः नाग संस्कृति मानव समाज की उन गिनी-चुनी विश्व-संस्कृतियों में से एक है, जिसका अविच्छिन्न प्रवाह विगत चार या पाँच सहस्राब्दियों से अब तक गतिमान है। भारत में नागों के नाम पर नदियाँ हैं, क्षेत्र हैं, नगर हैं तथा व्यक्तियों के उपनाम हैं, ये नाग संस्कृति की जीवन्तता के प्रमाण हैं।
‘नागवंश की पुराकथाएँ’ भारत की एक अति प्राचीन किन्तु दीर्घजीवी विस्मृत-से पुरातन नाग संस्कृति के कुछ तिनकों को साथ रखकर रूपायित करने का प्रयास है। ग्रन्थ में संकलित कथाओं को सर्गों में विभाजित किया गया है। स्थापित कथाओं की चर्चा न करते हुए यह ग्रन्थ अल्पज्ञात पौराणिक संकेतों और लोककथाओं में प्रचलित आख्यानों के आधार पर नाग समाज की संस्कृति और सामाजिक विशेषताओं को कथाओं के माध्यम से प्रस्तुत करने का यत्न करता है। यह प्रयास अपने आप ही इस ग्रन्थ को दूसरे ग्रन्थों के मुक़ाबले अग्रिम भूमिका में लाकर खड़ा कर देता है। नागों की संस्कृति के अध्ययन में निश्चय ही यह एक उल्लेखनीय ग्रन्थ है।
Sanasdeeya Pranali
- Author Name:
Arun Shourie
- Book Type:

- Description: हमारे 99 फीसदी विधायक अल्पमत निर्वाचकों द्वारा चुने जाते हैं, उनमें से कई डाले गए वोटों का महज 15-20 फीसदी वोट पाकर निर्वाचित हो जाते हैं—यह आबादी का बमुश्किल 4-6 फीसदी बैठता है। तो हमारी संसदीय प्रणाली कितनी प्रतिनिधि प्रणाली है? लोकसभा में 39 पार्टियों के साथ, 14 पार्टियों से मिलकर बनी सरकार के साथ, क्या यह प्रणाली मजबूत, संशक्त और प्रभावी सरकारें प्रदान कर रही हैं, जिसकी हमारे देश को जरूरत है? क्या यह प्रणाली ऐसे व्यक्तियों के हाथों में सत्ता सौंप रही है, जिनके पास मंत्रालयों को चलाने की, विधायी प्रस्तावों का आकलन करने की, वैकल्पिक नीतियों का मूल्यांकन करने की क्षमता, समर्पण और निष्ठा है? या यह खराब-से-खराब लोगों को विधायिका और सरकार में ला रही है? जब वे सत्ता में होते हैं तो क्या यह उन्हें लोगों का भला करने के लिए प्रेरित करती है, या यह उन्हें कहती है कि कार्य-प्रदर्शन मायने नहीं रखता है, कि ‘गठबंधनों’ को बनाए रखना कार्य-प्रदर्शन का स्थानापन्न है? क्या यह प्रतिरोधी और बाधा खड़ी करनेवाली राजनीति को अपरिहार्य नहीं बनाती है? इससे पहले कि हम यह निष्कर्ष निकालें कि इस प्रणाली का समय पूरा हो गया है, शासन का कितना पूजन हो, ताकि हमें लगे कि हमें अवश्य ही विकल्प तैयार करना चाहिए? वह विकल्प क्या हो सकता है? तब क्या होता है, जब ये विधायक ‘संप्रभुता’ का दावा करते हैं और उसे अपना बना लेते हैं? न्यायपालिका ने जो बाँध खड़ा किया है—कि संविधान के आधारभूत ढाँचे को बदला नहीं जा सकता— राजनीतिक वर्ग के खिलाफ एक आवश्यक सुरक्षा नहीं है? लेकिन क्या कोई वैकल्पिक प्रणाली तैयार की जा सकती है, जो इस आवश्यक बाँध को तोड़ेगी नहीं, उसका उल्लंघन नहीं करेगी? उस विकल्प का मार्ग कौन प्रशस्त करेगा? उसकी अगुवाई कौन करेगा? इस झुलसानेवाली समालोचना में अरुण शौरी इन सवालों और अन्य मुद्दों को उठाते हैं। हमारे वक्त के लिए अनिवार्य। हमारे देश की दृढता के लिए आवश्यक।
Uttar Pradesh Ka Swatantrata Sangram : Gonda
- Author Name:
Nisha Gahlot
- Book Type:

-
Description:
भारत की स्वतंत्रता के लिए जनपद गोण्डा के रियासतदारों ने जिस वीरता और समर्पण के साथ अंग्रेजों का मुकाबला किया वह जितना श्लाघनीय है, उतना ही प्रणम्य भी। राष्ट्रीय आंदोलन के हर चरण में इस क्षेत्र की सक्रियता अबाधित रही है। इनमें भी गोंडा नरेश देवी बख्श सिंह की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इस पुस्तक में जिले का वह इतिहास समेटा गया है जिसके केंद्र में देश का स्वतंत्रता संघर्ष है।
ज्ञात हो कि जिला गोंडा की स्वातंत्र्य-चेतना का इतिहास प्राचीन काल तक जाता है। यही नहीं संस्कृति के संदर्भ में भी इसका स्थान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। अयोध्या के इक्ष्वाकुवंशीय चक्रवर्ती राजाओं की छत्रच्छाया में यह पावन भूमि आश्रम-संस्कृति का केंद्र बनी और कितनी ही घटनाओं की साक्षी भी। राजा दशरथ का पुत्रेष्टि यज्ञ, दशरथ द्वारा मात-पितृभक्त श्रवण कुमार का वध, च्यवन, पाराशर, शौनक और जमदग्नि ऋषि की आश्रम-स्थली से लेकर यह भूमि बुद्ध के संचरण और विश्राम तथा अमर रचनाकार तुलसी के जन्म की साक्षी भी रही।
यह पुस्तक जिला गोंडा की इसी ऐतिहासिकता को समर्पित है।
Aaj Ka Hind Swaraj
- Author Name:
Sandeep Joshi
- Book Type:

-
Description:
महात्मा गाँधी को सिरे से ख़ारिज करने या उनका अवमूल्यन करने की मुहिम, इन दिनों, सुनियोजित ढंग से चलायी जा रही है। हमारा समय, कम से कम इस समय सत्तारूढ़ शक्तियों के किये-लेखे, गाँधी के अस्वीकार का, गाँधी-विरोध का समय है। यह विरोध या अस्वीकार गाँधी को एक नयी और तीक्ष्ण प्रासंगिकता देता है। उस प्रासंगिकता का ही हिस्सा है प्रश्नवाचकता जबकि प्रश्न पूछना लगभग गुनाह क़रार दिया जा रहा है। गाँधी ने अपने समय में निर्भयता से प्रश्न उठाये और उनके समुचित उत्तर देने की कोशिश की। युवा चिन्तक और कर्मशील संदीप जोशी हमारे समय के कुछ ज़रूरी प्रश्न और उसके बेचैन उत्तर खोजने की 'गुस्ताख़ी' कर रहे हैं। यह गाँधी की दृष्टि का हमारे कठिन समय के लिए पुनराविष्कार है।
—अशोक वाजपेयी
China Aur Japan Ka Itihas
- Author Name:
Prashant Gaurav
- Book Type:

- Description: चीन और जापान की गिनती आज एशिया ही नहीं, विश्व-स्तर के शक्तिशाली देशों में होती है। आधुनिक समय में अपनी तकनीकी और आर्थिक क्षमता के चलते इन दोनों ही देशों ने दुनिया-भर का ध्यान अपनी ओर खींचा है। चीन को जहाँ विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक माना जाता है, वहीं जापान का इतिहास भी समय में बहुत पीछे तक जाता है, हालाँकि यूरोपवासियों को उसकी जानकारी तेरहवीं सदी में मिली। दोनों ही देशों ने अनेक राजनीतिक, धार्मिक और आर्थिक पड़ावों को पार करते हुए अपनी यात्रा जारी रखी है जिसकी उपलब्धि आज सामने है। ‘चीन और जापान का इतिहास’ पुस्तक में, चीन और जापान के लम्बे इतिहास और उसके उतार-चढ़ाव को अत्यन्त सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है जिससे इतिहास के अध्येताओं के साथ-साथ सामान्य पाठक भी अपना ज्ञान-वर्धन कर सकते हैं। विषय की ग्राह्यता को बढ़ाने के लिए यह पुस्तक उन घटनाओं का परिचय देते हुए आगे बढ़ती है जो इन देशों के राजनीतिक-आर्थिक, सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन में निर्णायक रही हैं। चीन का अफ़ीम युद्ध, ताइपिंग विद्रोह, 1911 की चीनी क्रान्ति और साम्यवादी आन्दोलन जिस तरह चीन की ऐतिहासिक यात्रा पर प्रकाश डालते हैं, उसी तरह मेईजी पुनर्स्थापन, चीन-जापान युद्ध, रूस-जापान युद्ध के साथ जापानी साम्राज्यवाद का उत्थान एवं पतन आदि अध्याय जापान के इतिहास को बोधगम्य ढंग से प्रस्तुत करते हैं। इतिहास के छात्रों के लिए विशेष रूप से उपयोगी।
Swadheenta Sangharsh Aur Police
- Author Name:
Ajay Shankar Pandey
- Book Type:

-
Description:
इस पुस्तक में अत्यन्त विरोधाभासपूर्ण मनःस्थिति से गुज़र रहे समाज में क़ानून-व्यवस्था स्थापित करनेवाले तंत्र की सफलता या असफलता का मूल्यांकन करने का प्रयास किया गया है। एक ऐसे समाज में शान्ति-व्यवस्था बनाए रखना, अपराध स्थिति पर नियंत्रण रखना उतना दुष्कर कार्य नहीं है, जो प्रशासनिक एवं पुलिस ढाँचे को अपना ही सृजन एवं अंग स्वीकृत करता हो; परन्तु जिस समाज की मनोदशा यह रही हो कि प्रशासनिक तंत्र उसके लक्ष्यों के मार्ग में बाधक है, उनका दुश्मन है, उसमें शान्ति-व्यवस्था स्थापित करना, अपराध स्थिति पर नियंत्रण रखना अत्यन्त कठिन एवं दुष्कर कार्य अवश्य होता है।
जिस समाज में शान्ति छोड़कर या प्रशासनिक तंत्र को चुनौती देकर अपना लक्ष्य हासिल होने की उम्मीद हो, ऐसे मनोभावों वाले समाज में क़ानून-व्यवस्था स्थापित करना, अपराध स्थिति पर नियंत्रण रखना किस प्रकार, कितनी सफलता के साथ सम्भव हो सका?—निष्कर्षात्मक रूप में ऐसे मूल प्रत्ययों को विश्लेषणात्मक रूप से स्थापित करने का प्रयास इस पुस्तक में किया गया है।
पुस्तक में राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे स्वतंत्रता आन्दोलन एवं विचारधारा को चरणबद्ध तरीक़े से विवेचित किया गया है। राष्ट्रीय आन्दोलन के प्रत्येक चरण की विवेचना के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में अपराध स्थिति एवं पुलिस तंत्र के गठन एवं उनमें होनेवाले परिवर्तनों को भी विवेचना का विषय बनाया गया है। यह देखने एवं मूल्यांकित करने का प्रयास किया गया है कि राष्ट्रीय आन्दोलन की विचारधारा एवं राष्ट्रीय आन्दोलन की घटनाओं ने अपराध स्थिति को कहाँ तक प्रभावित किया है। पुलिस तंत्र के ढाँचे में होनेवाले परिवर्तनों को भी राष्ट्रीय आन्दोलन की घटनाओं, अपराध स्थिति पर उसके अनुवर्ती प्रभाव के दृष्टिकोण से विवेचित करने का प्रयास किया गया है।
Delhi Dange : Sazish ka Khulasa
- Author Name:
Aditya Bhardwaj +1
- Book Type:

- Description: सामने आ रहा है, दिल्ली दंगों का सच : धीरे-धीरे ‘अपनी योजना के तहत 24 फरवरी को हमने कई लोगों को बुलाया और उन्हें बताया कि कैसे पत्थर, पेट्रोल बम और एसिड बोतल फेंकने हैं। मैंने अपने परिवार को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया। 24 फरवरी, 2020 को दोपहर करीब 1.30 बजे हमने पत्थर फेंकना शुरू कर दिया।’ आम आदमी पार्टी से निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन के इस बयान को सुनकर वे लोग चौंक सकते हैं जो आम आदमी पार्टी के चरित्र से परीचित नहीं हो। आम आदमी पार्टी ने मसजिदों और मदरसों के अपने अच्छे नेटवर्क और ताहिर हुसैन अमानतुल्ला खान जैसे नेताओं के दम पर ही पूरी दिल्ली के एकएक मुसलमान का वोट हासिल कर लिया था। जिसके बदले में मानों उत्तरपूर्वी दिल्ली को आग में झोंक देने का लाइसेंस समुदाय विशेष को दे दिया था। अब जब उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों पर चार्जशीट दिल्ली पुलिस तैयार कर चुकी है। उसके बाद 23 फरवरी को मौजपुर से भड़के हिंदू विरोधी दंगों को याद करते हुए, जाफराबाद, मौजपुर, बाबरपुर, गोकुलपुरी, करावल नगर, भजनपुरा, यमुना विहार में आग की तरह फैली उस हिंसा को सी.ए.ए. के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा से अलग करके देखना भूल होगी। शाहीन बाग, जामिया नगर, सीलमपुर में सी.ए.ए. के विरोध में फैलाई गई हिंसा, वास्तव में बड़े दंगे का पूर्वाभ्यास ही थी। जिस बड़े दंगे को उत्तरपूर्वी दिल्ली में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आगमन पर 23-26 फरवरी, 2020 तक अंजाम दिया गया। इस हिंसा के लिए 4 फरवरी से ही कई घरों में कबाड़ी से शराब और कोल्ड ड्रिंक की खाली बोतलें, पत्थर लेकर छत पर इकट्ठा करना शुरू कर दिया गया था। मुस्लिम समुदाय ने अपनी गाडि़यों में फुल पेट्रोल, डीजल भरकर रख लिया था ताकि बोतलों में पेट्रोल डीजल भरकर बम की तरह उसे वक्त आने पर इस्तेमाल किया जा सके। मुस्लिम परिवारों में ऐसे परचे दंगों से पहले बाँट दिए गए जिसमें दंगों की स्थिति में हिंदूओं से निपटने की तरकीब लिखी गई थी। इन सारी बातों को देखने के बाद यह समझना कोई रॉकेट साइंस नहीं है कि उत्तर पूर्वी दिल्ली में होनेवाले दंगों के लिए यमुना पार का मुस्लिम समुदाय पहले से तैयार था। जबकि हिंदूओं को इससे सँभलने का बिलकुल मौका नहीं मिला। अब धीरे-धीरे दिल्ली दंगों की साजिश का सच सामने आ रहा है, जिसकी वजह से वामपंथी इको सिस्टम का झूठ चल नहीं पा रहा।
Badhti Duriyan Gaharati Darar
- Author Name:
Rafiq Zakaria
- Book Type:

-
Description:
भारत–विभाजन के बाद, इन क़रीब पचास सालों में, हिन्दू–मुस्लिम रिश्तों में सबसे ज़्यादा गिरावट आई है। प्रस्तुत गवेषणापूर्ण अध्ययन में डॉ. रफ़ीक़ ज़करिया ने दोनों समुदायों के बीच आई टूटन के कारणों पर गहन विचार किया है।
अपने विश्लेषण की शुरुआत उन्होंने भारत पर मुहम्मद बिन कासिम (सन् 711) और महमूद गज़नवी (सन् 1020) के हमलों के परिणामों से की है। उसके बाद उन्होंने दिल्ली के सुल्तानों और बाद में मुग़लों के अधीन भारत की स्थितियों पर और दोनों समुदायों के समन्वित हितों के लिए की गई पहलक़दमियों पर नज़र डाली है। फिर वे, हिन्दुस्तान पर अंग्रेज़ी हुकूमत, उसकी ‘फूट डालो, राज करो’ की नीति और मुहम्मद अली जिन्ना द्वारा प्रस्तावित ‘दो–राष्ट्र सिद्धान्त’ का परीक्षण करते हैं। विभाजन की वजहों पर उन्होंने बड़ी गहराई से चिन्तन किया है और उसके दूरगामी परिणामों पर बड़े विस्तार से चर्चा की है। वे, अपने अध्ययन का समापन, एक चुनावी–शक्ति के रूप में हिन्दुत्व के उभार, 1992 में बाबरी मस्जिद की शहादत के परिणाम और भारत के वित्तीय नाड़ी–तंत्र मुम्बई में भाजपा–शिवसेना गठबन्धन की जीत से करते हैं। अपने प्रमेय का विकसन करते–करते डॉ. ज़करिया, दोनों समुदायों के बारे में प्रचलित अनेक ऐतिहासिक, धार्मिक और राजनीतिक भ्रमों–मिथकों को ध्वस्त करते चलते हैं।
डॉ. ज़करिया बड़े गम्भीर विद्वान और वरिष्ठ राजनेता हैं। ज़मीन से जुड़े होने की वजह से उन्हें यथार्थ की प्रत्यक्ष जानकारी है। अपने व्यापक ज्ञान और अनुभव का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने ऐसी पुस्तक की रचना की है जो नए मार्ग प्रशस्त करती है, सत्याग्रही अन्तर्दृष्टि प्रदान करती है और हिन्दुस्तान के हिन्दुओं और मुसलमानों को अलग–अलग बाँटनेवाली समस्याओं के सही स्वरूप से जुड़े अहम सवालों का जवाब देती है। सबसे महत्त्वपूर्ण बात तो यह है कि यह पुस्तक बड़े व्यावहारिक सुझाव देकर यह बताती है कि दोनों समुदायों के बीच की गहरी दरारों को कैसे पाटा जा सकता है।
Chandrashekhar Ke Vichar
- Author Name:
Harivansh
- Book Type:

-
Description:
हमारे पारंपरिक समाज में ‘विचारवान’ एक आस्थासूचक विशेषण है। अगर कोई अच्छी बात कहता है और उससे लोगों का भला होता है, तो समाज की स्वाभाविक प्रतिक्रिया होती है–‘बड़ा विचारवान आदमी है।’ चन्द्रशेखर भारतीय राजनीति के ‘विचारवान शख्स’ थे!
चन्द्रशेखर समाज के लिए समाज की सतह पर खड़े होकर सोचते थे। प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के जमाने से ही चन्द्रशेखर समाजोन्मुख चिंतन और सामाजिक गैर-बराबरी को दूर करनेवाले विचार के साथ जनता से मुखातिब होते रहे। इसमें कोई शक नहीं कि चन्द्रशेखर समाजवादी विचारधारा की देन थे और इस विचारधारा के प्रति उनकी निष्ठा असंदिग्ध रही। जब वह छोटी अवधि के लिए प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने अपने अधिकांश भाषणों में अपने कामकाज का बखान करने की जगह भारत की गरीबी और विपन्न बच्चों की शिक्षा को लेकर गहरी चिंता जाहिर की। इस पुस्तक में संकलित भाषणों में भी यह चिंता बखूबी झलकती है।
आर्थिक सवाल पर उनके विचार वैज्ञानिक चेतना से संपन्न देशज स्वाभिमान की तरह हमारे सामने हैं–देशज विकल्प के साथ। यह विकल्प गांधी के रास्ते चन्द्रशेखर तक आया है, इसलिए इसमें प्रति नागरिक आत्मोन्नति को पहली प्राथमिकता प्राप्त है। कहते हैं–अगर उदारीकरण आत्मोन्नति के प्रयासों को धक्का नहीं पहुँचाता है, लालफीताशाही और भ्रष्टाचार की जकड़न से समाज को मुक्त कराता है, तो यह ठीक है–नहीं तो यह महज एक लफ्फाजी है और ऊँचे वर्गों का सोसा है–और यही हमारे समय में चल रहे उदारीकरण की नियति है।
इस पुस्तक में प्रधानमंत्रित्व काल के उनके भाषणों और ‘यंग इंडियन’ व अन्यत्र छपे उनके कुछ महत्त्वपूर्ण लेखों का संकलन किया गया है। इस संकलन की महत्ता यह है कि पाठक देख सकते हैं कि विभिन्न मुद्दों पर चन्द्रशेखर के विचार आज भी कितने प्रासंगिक हैं।
Kattarta Ke Daur Mein
- Author Name:
Arun Kumar Tripathi
- Book Type:

- Description: बीसवीं सदी के भारी उथल-पुथल भरे आख़िरी दशक पर केन्द्रित यह पुस्तक अपने युग की प्रमुख प्रवृत्तियों पर बेबाक टिप्पणियाँ करती है। यह उदारीकरण, साम्प्रदायिकता और जातिवाद सभी का एक्स-रे करने और उसे सरल भाषा में सभी को समझाने का प्रयास है। पुस्तक इससे आगे बढ़कर उन सबसे संवाद करती है जो अपनी-अपनी प्रयोगशालाओं में विकल्पों के लिए रसायन बनाने में लगे हैं। इसमें दलित, आदिवासी, स्त्री और पर्यावरण की रक्षा के लिए चल रहे संघर्षों की जटिलताओं और सम्भावनाओं को समझने की एक तड़प है; यानी यह समाज को कट्टरता से निकालने का एक उपक्रम है।
Modi-Yogi Ka Vision : Vikas Ki Ore Uttar Pradesh
- Author Name:
K.K. Upadhyaya
- Book Type:

- Description: उत्तर प्रदेश वह प्रदेश है जिसे हम देश की धड़कन कह सकते हैं। सन् 2014 में जब भाजपा ने प्रचंड विजय हासिल की तब किसी ने नहीं सोचा था कि परिणाम ऐसे आएँगे। पुराने फॉर्मूले फेल हो गए। नई इबारत लिखी जाने लगी। इस बीच सन् 2017 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज उठा। राजनीतिक पंडित कह रहे थे कि अब भाजपा की डगर आसान नहीं है। वे गलत भी नहीं थे। यहाँ चुनाव का मतलब वोटों का गठजोड़ और जातियों का समूह था। कोई नहीं जानता था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाएँ गरीबों तक पहुँचने लगी थीं। उसका असर भी होने लगा था। भाजपा यहाँ संगठन में लगी थी। मेहनत रंग लाई। भाजपा ने उ.प्र. में ऐसा परचम फहराया कि सब अवाक रह गए। अब बारी थी काम की। मोदीजी का विजन और योगीजी की मेहनत ने उत्तर प्रदेश की तसवीर बदल दी। गरीबों के लिए कल्याणकारी योजनओं पर काम होने लगा। श्रीराम मंदिर का निर्माण-कार्य प्रारंभ हो गया। सपने साकार होने लगे। इस पुस्तक में इन्हीं सब कामों को सँजोने का प्रयास किया है। भाजपा की जीत की रणनीति का खुलासा भी इस पुस्तक में हैं। वरिष्ठ पत्रकार श्री के.के. उपाध्याय के दीर्घ अनुभव और सूक्ष्म अंतर्दृष्टि से आकल्पित उत्तर प्रदेश के चहुँमुखी विकास का व्यावहारिक दिग्दर्शन कराती प्रामाणिक पुस्तक।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book