Bhartiya Rajniti Par Ek Drishti
About the book
इस पुस्तक में आज़ादी के बाद की भारतीय राजनीति के परिदृश्य का उसके समस्त आयामों में गम्भीर विश्लेषण मिलता है। सम्यक् विश्लेषण के साथ-साथ लेखक ने आधुनिक राजनीति की सभी अवधारणाओं, मूल्यों, मान्यताओं, विधायिका-कार्यपालिका-न्यायपालिका आदि संस्थाओं, विविध प्रक्रियाओं-घटनाओं, नेताओं आदि पर अपना मत रखा है। आधुनिक राजनीति के बीजपदों—संविधान, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, समता, स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय, समाजवाद, गांधीवाद, साम्यवाद, राष्ट्र, राज्य, राष्ट्र-राज्य, राष्ट्रीय सम्प्रभुता, राष्ट्रीय अस्मिता, क्षेत्रीय अस्मिता, अन्तरराष्ट्रीयता, अर्थनीति, विदेशनीति, कूटनीति, उपनिवेशवाद, साम्राज्यवाद, तानाशाही, फासीवाद, साम्प्रदायिकता, जगतीकरण आदि का अर्थभेदन समता के विचार की ज़मीन पर खड़े होकर किया है। भारतीय के अलावा दुनिया की राजनीति पर भी पैनी और गहरी निगाह डाली है। भारत और दुनिया के प्राचीन राजनैतिक अनुभव और ज्ञान का हवाला भी कई जगह आया है। किशन पटनायक इस दौर के ज़्यादातर बुद्धिजीवियों की तरह महज विश्लेषण के लिए विश्लेषण नहीं करते। वे देश के अकेले ऐसे चिन्तक हैं जिन्होंने उदारीकरण-ग्लोबीकरण के हमले की आहट सबसे पहले सुनी। भारत के राजनेताओं और बुद्धिजीवियों को चेतावनी देने के साथ उन्होंने देशव्यापी जनान्दोलनों की एकजुटता और राजनीतिकरण का निरन्तर प्रयास किया। इसी क्रम में उन्होंने भारत सहित दुनिया में तेज़ी से फैलते पूँजीवादी साम्राज्यवाद के मुक़ाबले एक वैकल्पिक विचारधारा (समाजवादी) गढ़ने का भी निरन्तर प्रयास किया। उनके बाक़ी लेखन के समान इस पुस्तक में भी वैकल्पिक विचारधारा के सूत्र और कार्यप्रणाली दर्ज हुए हैं। पिछले पाँच वर्षों से चर्चा में चली आ रही ‘विकल्पहीन नहीं है दुनिया’ के बाद किशन पटनायक की यह दूसरी पुस्तक है। यूँ तो जीवन के सभी क्षेत्रों में कार्यरत लोगों के लिए यह पुस्तक पठनीय है, लेकिन परिवर्तनकारी सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए यह एक अपरिहार्य पुस्तक है। इसके साथ एक छोटी पुस्तक ‘किसान आन्दोलन : दशा और दिशा’ भी प्रकाशित हुई है।
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About the Book
इस पुस्तक में आज़ादी के बाद की भारतीय राजनीति के परिदृश्य का उसके समस्त आयामों में गम्भीर विश्लेषण मिलता है। सम्यक् विश्लेषण के साथ-साथ लेखक ने आधुनिक राजनीति की सभी अवधारणाओं, मूल्यों, मान्यताओं, विधायिका-कार्यपालिका-न्यायपालिका आदि संस्थाओं, विविध प्रक्रियाओं-घटनाओं, नेताओं आदि पर अपना मत रखा है। आधुनिक राजनीति के बीजपदों—संविधान, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, समता, स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय, समाजवाद, गांधीवाद, साम्यवाद, राष्ट्र, राज्य, राष्ट्र-राज्य, राष्ट्रीय सम्प्रभुता, राष्ट्रीय अस्मिता, क्षेत्रीय अस्मिता, अन्तरराष्ट्रीयता, अर्थनीति, विदेशनीति, कूटनीति, उपनिवेशवाद, साम्राज्यवाद, तानाशाही, फासीवाद, साम्प्रदायिकता, जगतीकरण आदि का अर्थभेदन समता के विचार की ज़मीन पर खड़े होकर किया है। भारतीय के अलावा दुनिया की राजनीति पर भी पैनी और गहरी निगाह डाली है। भारत और दुनिया के प्राचीन राजनैतिक अनुभव और ज्ञान का हवाला भी कई जगह आया है।
किशन पटनायक इस दौर के ज़्यादातर बुद्धिजीवियों की तरह महज विश्लेषण के लिए विश्लेषण नहीं करते। वे देश के अकेले ऐसे चिन्तक हैं जिन्होंने उदारीकरण-ग्लोबीकरण के हमले की आहट सबसे पहले सुनी। भारत के राजनेताओं और बुद्धिजीवियों को चेतावनी देने के साथ उन्होंने देशव्यापी जनान्दोलनों की एकजुटता और राजनीतिकरण का निरन्तर प्रयास किया। इसी क्रम में उन्होंने भारत सहित दुनिया में तेज़ी से फैलते पूँजीवादी साम्राज्यवाद के मुक़ाबले एक वैकल्पिक विचारधारा (समाजवादी) गढ़ने का भी निरन्तर प्रयास किया। उनके बाक़ी लेखन के समान इस पुस्तक में भी वैकल्पिक विचारधारा के सूत्र और कार्यप्रणाली दर्ज हुए हैं।
पिछले पाँच वर्षों से चर्चा में चली आ रही ‘विकल्पहीन नहीं है दुनिया’ के बाद किशन पटनायक की यह दूसरी पुस्तक है। यूँ तो जीवन के सभी क्षेत्रों में कार्यरत लोगों के लिए यह पुस्तक पठनीय है, लेकिन परिवर्तनकारी सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए यह एक अपरिहार्य पुस्तक है। इसके साथ एक छोटी पुस्तक ‘किसान आन्दोलन : दशा और दिशा’ भी प्रकाशित हुई है।
Book details
- Format
- Paperback
- Publisher
- Rajkamal Prakashan Samuh
- Edition
- 3rd
- Publication year
- 2006
- Weight
- 350 grams
- ISBN-13
- 9788126719372
- Pages
- 275
- Reading time
- ~9 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14 × 21.5 cm
- Language
- Hindi
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