Bharatiya Itihas Prashnottari
Author:
Yogendra PrasadPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics0 Ratings
Price: ₹ 400
₹
500
Available
भारतीय इतिहास की यह प्रश्नोत्तरी बिहार राज्य के माध्यमिक विद्यालयों के निर्धारित पाठ्यक्रम के आधार पर वर्ग दशम एवं एकादश के छात्रों के लिए लिखी गई है। इस विषय पर अब तक जितनी पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं, उन सभी से इस पुस्तक को अधिक आकर्षक और छात्रोपयोगी बनाने की चेष्टा की गई है। छात्रों की कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक विषय को सरल बनाकर प्रस्तुत किया गया है।
ISBN: 9789392012129
Pages: 288
Avg Reading Time: 10 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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भारतवर्ष का बृहत् इतिहास बड़ा ही लोकप्रिय ग्रन्थ बन गया है। इसकी रचना दशकों पूर्व की गई थी किन्तु इसकी मान्यता तथा लोकप्रियता आज भी पूर्ववत् बनी है। इस नवीन संस्करण का संशोधन तथा परिवर्द्धन उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद् के नवीनतम पाठ्यक्रमानुसार कर दिया गया है जिसके फलस्वरूप कुछ नए प्रकरणों का समावेश हो गया है।
पुस्तक के अन्त में कुछ परिशिष्टियाँ भी जोड़ दी गई हैं। जिससे पुस्तक की अनुकूलता तथा उपयोगिता में वृद्धि हो गई है। आशा है, यह नवीन संस्करण विद्यार्थियों तथा अध्यापकों की आवश्यकताओं को पूर्ण करने में सक्षम होगा।
Vivekanand Ke Sapano Ka Bharat
- Author Name:
Bajrang Lal Gupta +1
- Book Type:

- Description: "स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत गुरुभाइयों में सम्मानपूर्वक ‘स्वामीजी’ संबोधन प्राप्त करनेवाले नरेंद्रनाथ दत्त ने ऊहापोह की स्थिति में मठ छोड़कर भारत-भ्रमण करने का मन बनाया। अपने गुरुभाइयों को भी स्पष्ट निर्देश दिया कि अपना झोला उठाकर भारत का मानचित्र अपने साथ लो और भारत-भ्रमण के लिए निकल पड़ो। भारत को जानना एवं भारतवासियों को भारत की पहचान करा देना, यही हमारा प्रथम कार्य है। स्वामीजी ने धीर-गंभीर होकर कहा कि योगी बनना चाहते हो तो पहले उपयोगी बनो, भारतमाता के दुःख व कष्ट को समझो। उसे दूर करने के लिए अपने आपको उपयोगी बनाओ, तभी तो योगी बन पाओगे। आज की वर्तमान पीढ़ी भी वर्ष 2020 तक विश्व को नेतृत्व प्रदान करनेवाले भारत को अपने हाथों सँवारना चाहती है। भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन, गोरक्षा, गंगा की पवित्रता, कालेधन की वापसी, राममंदिर-रामसेतु आदि मानबिंदुओं के सम्मान की रक्षा के आंदोलन, आसन्न जल संकट, पर्यावरण, कानून, सीमा-सुरक्षा, सांप्रदायिक सौहार्द, संस्कार-युक्त शिक्षा, संस्कृति रक्षा, राष्ट्रवादी साहित्य, महिला गौरवीकरण आदि के लिए हो रही गतिविधियाँ भारत निर्माण की छटपटाहट का ही प्रकटीकरण हैं। इन सभी क्रियाकलापों को नेतृत्व प्रदान करनेवाले लोग कम या अधिक मात्रा में स्वामी विवेकानन्द से प्रेरणा पाकर उनके सपनों का भारत बनाने में लगे हैं। स्वामी विवेकानन्द के सपनों के स्वावलंबी, स्वाभिमानी, शक्तिशाली, सांस्कृतिक, संगठित भारत के निर्माण को कृत संकल्प कृति।
Pracheen Ayodhya Ka Rajnaitik Evam Sanskritik Adhyayan
- Author Name:
Ram Bihari Upadhyay
- Book Type:

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Description:
‘प्राचीन अयोध्या का राजनैतिक एवं सांस्कृतिक अध्ययन’, शोध-प्रबन्ध के दस अध्यायों में अयोध्या की उन राजनैतिक और सांस्कृतिक उपलब्धियों की पौर प्रभा उकेरी गई है, जो उसे इतिहास में शतियों से अमर बनाई हुई है।
अयोध्या से प्राप्त सिक्के, शिलालेख, मृद्भांड, पाषाण शिल्प, ताम्रफलकाभिलेख और स्मारक हमें जहाँ अतीत के गलियारे में हज़ारों साल पीछे की ओर निहारने के लिए आकर्षित करते हैं, वहीं वैदिक साहित्य, पुराणों, रामायण, महाभारत, बौद्ध, जैन, संस्कृत, पाली/प्राकृत साहित्य, अरबी/तुर्की/फ़ारसी साहित्य के तुलनात्मक अनुशीलन से उत्तर मध्ययुग तक अयोध्या के इतिहास और संस्कृति के विविध आयाम प्रस्फुटित हुए हैं; कहीं तरंगायित सरयू, कहीं ऊँचे महलोंवाली अयोध्या, कहीं रघु की उदारता, कहीं राम की प्रजावत्सलता, वाल्मीकि की पहली कविता, कहीं-कहीं बौद्धयुगीन कृषि, धार्मिक, नगरीय क्रान्ति और गणतंत्रीय राज्यादर्श, सैन्य और दौत्य संगठन का अभिचित्रण इस पुस्तक में किया गया है। भारतीय राजतंत्र की प्रथम राजधानी अयोध्या को, इतिहास के विभिन्न युगों में भी, सूबाई राजधानी होने के गौरव प्राप्त होने के कारण ही उत्तरोत्तर राजनैतिक प्रतिष्ठा मिली; वहीं सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी अयोध्या की महिमा पहली शती से ही दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों; स्याम, हिंदेशिया, जावा और सुमात्रा में फैल चुकी थी। वस्तुतः प्राचीन भारत की अयोध्या राजनैतिक एवं सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण नगरी रही है। प्राचीन अयोध्या ने हमें उत्तम नागर निदर्श, प्रशासन, वसुधैव कुटुम्बकम्, साझा संस्कृति, कला, काव्य लिपि, भाषा, सामाजिक-सांस्कृतिक सहिष्णुता और राष्ट्रीय एकता की अनुपम विरासत सौंपा है।
Indira Files
- Author Name:
Vishnu Sharma
- Rating:
- Book Type:

- Description: लेकिन इंदिरा गांधी ही क्यों? आजाद भारत में इंदिरा गांधी वंशवाद का सबसे बड़ा और पहला उदाहरण हैं। वंशवाद का एक ऐसा उत्पाद, जिसको लौह महिला भी कहा जाता है और दूसरी तरफ आपातकाल थोपने के लिए हर साल उनकी तानाशाही को श्रद्धांजलि भी दी जाती है। एक तरफ पाकिस्तान के दो टुकड़े करके इंदिरा गांधी ने भारतीय इतिहास में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखवा लिया, तो दूसरी तरफ गांधारी की तरह बेटे को अंधा प्रेम कर ‘संजय की मम्मी, बड़ी निकम्मी’ जैसा नारा भी झेला। एक तरफ सिक्किम विलय में अहम भूमिका निभाई तो दूसरी तरफ ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ का दाग उनकी मौत भी नहीं मिटा पाई। एक तरफ परमाणु परीक्षण कर भारत की ताकत और हिम्मत को पर लगा दिए तो दूसरी तरफ पहली ऐसी प्रधानमंत्री बनीं, जिनको हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री पद से ही हटने का आदेश जारी कर दिया। यह पुस्तक किसी भी जागरूक पाठक, शोधार्थी, पत्रकार, नेता, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए काफी तथ्यात्मक हो सकती है। कुछ मुद्दे जो इस पुस्तक में लिखे गए हैं, वे और ज्यादा जगह माँगते थे, लेकिन ज्यादा विषयों को लेने की रणनीति के चलते उन्हें सीमित जगह ही दी गई। शोधार्थी इसको आधार बनाकर और गहन अध्ययन कर सकते हैं।
Aahuti
- Author Name:
Ed.Sanju Sadanandan +1
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
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