Gayab Hota Desh
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जादुई यथार्थवाद...यह उपन्यास हिन्दी को समृद्ध करता है। संजीव आधुनिक विकास की तमीज़ के हिसाब से रातोंरात गुम हो जाती बस्तियों के बाशिन्दों की दर्दनाक दास्तान...जिन पर काग़ज़ी ख़ज़ाना तो बरसाया गया लेकिन पाँव तले की धरती छीन ली...यह उपन्यास साहित्य में अपनी मुकम्मल जगह बनाएगा, ऐसी मुझे उम्मीद है। —मैत्रेयी पुष्पा यह एक प्रेम-कथा भी है और थ्रिलर भी... लगभग कोई पात्र एकआयामी नहीं है, सभी पात्रों के अपने-अपने ग्रे-शेड्स हैं। —प्रसन्न कुमार चौधरी
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About the Book
जादुई यथार्थवाद...यह उपन्यास हिन्दी को समृद्ध करता है।
संजीव
आधुनिक विकास की तमीज़ के हिसाब से रातोंरात गुम हो जाती बस्तियों के बाशिन्दों की दर्दनाक दास्तान...जिन पर काग़ज़ी ख़ज़ाना तो बरसाया गया लेकिन पाँव तले की धरती छीन ली...यह उपन्यास साहित्य में अपनी मुकम्मल जगह बनाएगा, ऐसी मुझे उम्मीद है।
—मैत्रेयी पुष्पा
यह एक प्रेम-कथा भी है और थ्रिलर भी... लगभग कोई पात्र एकआयामी नहीं है, सभी पात्रों के अपने-अपने ग्रे-शेड्स हैं।
—प्रसन्न कुमार चौधरी
Book Details
-
ISBN9789360862671
-
Pages288
-
Avg Reading Time10 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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सूरज मेरे साथ में’ चार उपन्यासों का संकलन है। बाल एवं किशोर मन की दैनंदिन समस्याओं से जुड़े ये चारों उपन्यास सचमुच सूरज की ऐसी उजली किरण हैं, जो बच्चों के पथ को प्रकाशित करने में समर्थ हैं। ‘परीक्षा के बाद’ गौरव का स्कूली परीक्षा के साथ-साथ जीवन के इम्तिहान में भी ऊँचे अंक लेकर सफलता पाने का किस्सा है। बच्चों के लिए पल-पल जिन रोचक-रोमांचक घटनाओं की पिटारी खुलती है, वे उन्हें चमत्कृत किए बिना नहीं रहतीं। ‘खट्टी-मीठी गोलियाँ’ में बाल-मजदूरी उन्मूलन की बात कही गई है। ‘मुझे तो पढ़ना है’ में शिक्षा के बाल अधिकार को एक निर्धन तदपि पढ़ने की ललक रखनेवाले बालक के माध्यम से दरशाया गया है। ‘सूरज मेरे साथ में’ भी कथानायक रोशन के हौसलों की उड़ान है, जो उसे सफलता दिलाती है। कुल मिलाकर चारों उपन्यास बच्चों को सद्गुणों से तो जोड़ते ही हैं, जीवन के प्रति समझ भी जगाते हैं। कदाचित् यही आज के समय की माँग भी है।
Jo Ghar Phoonke Aapna…
- Author Name:
Arunendra Nath Verma
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पुलिसवाले ने अपनी दकनी उर्दू में कहा, ‘‘आप लोकां बड़े ऊँचे हाकिमान हैं तो इस प्राइवेट कार में क्या करता मियाँ? पायलट लोग तो सरकारी गाड़ी में तकरीबन घंटा भर पहले गए। अब जरा तकलीफ करके नीचे उतर आओ। तुम्हारी पूरी दास्तान फुरसत से थाने में सुनेंगे।’’ मैंने बहुत समझाया, पर बात इस मुद्दे पर खत्म हुई कि मैं जो अपने को प्रेसिडेंट साहेब का पायलट बता रहा था, अपना आई.डी. कार्ड भी नहीं दिखा पा रहा था। फिर उसने भाई साहेब से पूछा, ‘‘और हजरत, आप तो जरूर प्राइम मिनिस्टर साहेब के खासुलखास ड्राइवर होंगे?’’ मैंने आवाज ऊँची करके कहा, ‘‘अपने सीनियर ऑफिसर से तुरंत वॉकी-टॉकी पर बात कराइए, वरना मेरी नौकरी तो जाएगी, पर आपकी भी बचेगी नहीं।’’ नतीजा उलटा निकला। त्योरियाँ चढ़ाकर वह बोला, ‘‘अरे, मेरे को धमकी देते? जाने दो प्रेसिडेंट साहेब को, फिर मैं देखता मियाँ कि तुम फाख्ता उड़ाते कि हवाई जहाज।’’ जीवन और मृत्यु के खेल से गुजर जाने के बाद इस उड़ान का अंत भी सदा की तरह सकुशल रूप से हो गया। राष्ट्रपति महोदय के जाने के बाद हमारे कप्तान ने पीठ ठोंकी। मैंने पूछा, ‘‘सर, क्या ईनाम दे रहे हैं आप मुझको?’’ अपनी घनी मूँछों के नीचे से मुसकराते हुए उन्होंने कहा, ‘‘बस किसी को बताऊँगा नहीं कि महामहिम राष्ट्रपतिजी हैदराबाद एयरपोर्ट पर खड़े होकर आज महामहिम फ्लाइट लेफ्टिनेंट वर्मा की प्रतीक्षा करने के दंड से बच गए।’’ —इसी उपन्यास से
Sevasadan
- Author Name:
Premchand
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प्रेमचंद आधुनिक हिंदी साहित्य के कालजयी कथाकार हैं। कथा-कुल की सभी विधाओं—कहानी, उपन्यास, लघुकथा आदि सभी में उन्होंने लिखा और अपनी लगभग पैंतीस वर्ष की साहित्य-साधना तथा लगभग चौदह उपन्यासों एवं तीन सौ कहानियों की रचना करके ‘प्रेमचंद युग’ के रूप में स्वीकृत होकर सदैव के लिए अमर हो गए। प्रेमचंद का ‘सेवासदन’ उपन्यास इतना लोकप्रिय हुआ कि वह हिंदी का बेहतरीन उपन्यास माना गया। ‘सेवासदन’ में वेश्या-समस्या और उसके समाधान का चित्रण है, जो हिंदी मानस के लिए नई विषयवस्तु थी। ‘प्रेमाश्रम’ में जमींदार-किसान के संबंधों तथा पश्चिमी सभ्यता के पड़ते प्रभाव का उद्घाटन है। ‘रंगभूमि’ में सूरदास के माध्यम से गांधी के स्वाधीनता संग्राम का बड़ा व्यापक चित्रण है। ‘कायाकल्प’ में शारीरिक एवं मानसिक कायाकल्प की कथा है। ‘निर्मला’ में दहेज-प्रथा तथा बेमेल-विवाह के दुष्परिणामों की कथा है। ‘प्रतिज्ञा’ उपन्यास में ‘प्रेमा’ की कथा को कुछ परिवर्तनों के साथ पुनः प्रस्तुत किया गया है। ‘गबन’ में युवा पीढ़ी की पतन-गाथा है और ‘कर्मभूमि’ में देश की राजनीतिक संघर्ष को रेखांकित किया गया है। ‘गोदान’ में कृषक और कृषि-जीवन के विध्वंस की त्रासद कहानी है। उपन्यासकार के रूप में प्रेमचंद का महान् योगदान है। उन्होंने हिंदी उपन्यास को भारतीय मुहावरा दिया और उसे समाज और संस्कृति से जोड़ा तथा साधारण व्यक्ति को नायक बनाकर नया आदर्श प्रस्तुत किया। उन्होंने हिंदी भाषा को मानक रूप दिया और देश-विदेश में हिंदी उपन्यास को भारतीय रूप देकर सदैव के लिए अमर बना दिया। —डॉ. कमल किशोर गोयनका
Beticket Muzrim Se Arabpati Banne Ki Kahani
- Author Name:
Rajiv Singh
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एक वास्तविक समयकाल के समांतर राजनीतिक और आर्थिक-सामाजिक परिदृश्य में स्थित यह उपन्यास, सपने की शक्ति, विश्वास की शक्ति और प्यार की शक्ति की असाधारण कहानी है। यह कहानी है गाँव के एक वंचित लड़के की, जिससे उसके सपने पूरे करने का प्रत्येक अवसर छीन लिया जाता है, लेकिन जीवन में अनेक मुश्किलों का सामना करते हुए भी वह अपने सपने का पीछा करना नहीं छोड़ता। वर्ष 1978 में उत्तर प्रदेश के एक पिछड़े गाँव में जिला कलेक्टर का दौरा गरीब, श्रमिक परिवार के ग्यारह वर्षीय गोदना को आई.ए.एस. अफसर बनने के लिए प्रेरित करता है। क्या वह अपना सपना पूरा कर पाता है या परिस्थितियों के आगे हार मान लेता है? या फिर वह और अधिक ऊँचाइयाँ प्राप्त कर लेता है? क्या जाति आधारित आरक्षण नीतियों से उसे मदद मिलती है? क्या जाति आधारित राजनीति उसे आकर्षित कर पाती है? क्या वह अपने खिलाफ चली गईं चतुर कॉरपोरेट चालों और साजिशों का सामना कर पाता है?
Musafir Hoon Yaro
- Author Name:
Partha Sarthi Sen Sharma
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इस पुस्तक के लेखक सरकार के लिए कार्य करनेवाले एक सैंतीस वर्षीय भारतीय हैं। भारत सरकार ने अपने मध्य क्रम के अधिकारियों के शिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत एम.बी.ए कोर्स हेतु उन्हें चुना और प्रायोजित किया था। इस कोर्स के लिए उन्हें एक अल्पज्ञात यूरोपीय देश स्लोवेनिया की राजधानी ल्युब्ल्याना भेजा गया। बीते हजारों वर्षों से यूरोपीय यात्री भारत की यात्रा करते और अपनी इन यात्राओं के बारे में लिखते रहे हैं। मेगस्थनीज से लेकर मार्को पोलो और निकोलो कॉण्टी से मार्क टली तक बहुत से श्वेत यूरोपियनों ने भारत की यात्रा कर अपने देशवासियों व भावी पीढ़ी के लाभ हेतु अपने अनुभवों को दर्ज किया है। इस अनुपात में, यूरोप की यात्रा करनेवाले भारतीयों की संख्या बहुत कम है और उनमें से भी अपने अनुभवों, दृष्टिकोणों व प्रतिक्रियाओं को दर्ज करनेवालों की संख्या तो और भी कम रही है। लेकिन पिछली शताब्दी में भारत इतना बदल गया है, जितना इतिहास में किसी भी शताब्दी में नहीं बदला था। आज इतिहास में पहली बार यूरोप से आनेवालों के मुकाबले यूरोप जानेवाले भारतीयों की संख्या अधिक हो गई है। इसके बावजूद कुछ अज्ञात कारणों से अपनी यूरोप यात्रा के अनुभवों को दर्ज करनेवाले भारतीयों की संख्या नगण्य ही है। यह पुस्तक इसी असंतुलन को साधने का एक विनीत प्रयास है, जो वहाँ की कला-संस्कृति-समाज का सांगोपांग दर्शन कराती है।
Qyamat
- Author Name:
Rahi Masoom Raza +2
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‘क़यामत’ राही मासूम रज़ा का बेहद दिलचस्प उपन्यास है। राही मासूम रज़ा के कथा साहित्य का विश्लेषण करते समय प्रायः उनकी एक-आध कृति को छोड़कर बाक़ी की चर्चा न के बराबर की जाती है। एक कारण तो यह कि वे उपन्यास हिन्दी में उपलब्ध नहीं हैं अर्थात् वे मूल रूप से उर्दू में लिखे गए हैं। दूसरा यह कि कई बार विभिन्न वजहों से कुछ रचनाओं को ‘पॉपुलर’ के खाते में डाल दिया जाता है। गोया पॉपुलर होने और स्तरीय होने में कोई अनिवार्य अन्तर्विरोध हो! और तो और, कई बार पठनीयता को भी श्रेष्ठता के विपक्ष में खड़ा कर दिया जाता है। कहना चाहिए कि ‘क़यामत’ राही मासूम रज़ा का पठनीय और लोकप्रिय होने के साथ स्तरीय उपन्यास है। भाषा में वही शक्ति है जो राही की पहचान है। उदाहरण के लिए\ “जो हिन्दुस्तान से पाकिस्तान चले गए हैं या पाकिस्तान से हिन्दुस्तान आ गए हैं, घर की याद तो उन्हें भी आती होगी। और रात को घर के ख़्वाब आते होंगे। और वो ख़्वाब ही में उदास हो जाते होंगे। और शायद रो भी देते हों।...” डॉ. एम. फ़ीरोज़ ख़ान और डॉ. शगुफ़्ता नियाज़ ने हिन्दी में ‘क़यामत’ का प्रवाहपूर्ण अनुवाद किया है।
Sidhi-Sachchi Baaten
- Author Name:
Bhagwaticharan Verma
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हिन्दी के श्रेष्ठ उपन्यासों में शामिल उपन्यास ‘भूले-बिसरे चित्र’ के विषय में आलोचकों ने कहा था–‘‘एक महान कृति–भारतीय समाज और परिवार के विकास की विविध दिशाओं और रूपों का एक विराट एवं प्रभावोत्पादक चित्र...’’ ‘टेढ़े-मेढ़े रास्ते’ और ‘भूले-बिसरे चित्र’ की परम्परा में‘सीधी-सच्ची बातें’ भगवतीचरण वर्मा की तीसरी महत्त्वपूर्ण कृति है जिसमें 1939 से 1948 तक के काल की एक सशक्त कहानी है, और जिसमें मानसिक संघर्ष और राजनीतिक संघर्ष का अभूतपूर्व सम्मिश्रण हुआ है। मध्यवर्गीय परिवार का एक युवक, कुशाग्र बुद्धि और तेजस्वी, अपनी नैतिकता, आस्था और विश्वास के साथ अनायास ही उस नवीन हलचल में आ पड़ता है, द्वितीय महायुद्ध, देश की स्वतंत्रता, देश का बँटवारा जिसके भाग थे। और अन्त में उसके सामने थी अन्दर की घुटन, आदर्शों के पीछे वैयक्तिक स्वार्थों और कमज़ोरियों का विकृत चित्र और निराशा। ‘सीधी-सच्ची बातें’ एक सशक्त कहानी है, और साथ ही सीधी-सच्ची बातें भी।
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