Shesh Kavita
(0)
Author:
Ravindranath Thakur, DevrajPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Contemporary-fiction₹
199
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प्रेम एक विलक्षण सृष्टि-रहस्य! व्यक्ति के आभ्यन्तर में सूक्ष्मातिसूक्ष्म—पोथियों की घ्राण-शक्ति की पकड़ के बाहर। और पोथियों में, स्वयं को अभिव्यक्त करने को आकुल हृदय को सर्वदा आश्रय देता हुआ—त्रासद से सुखद, सुखद से त्रासद के मध्य दोलायमान। रचनाकार की चुनौतियों का अन्त नहीं—जीवन के प्रश्नों में संगति भी कहाँ है, भला! उत्तरों में अन्तर्विरोधों का अन्त भी कहाँ!</p> <p>रवीन्द्रनाथ ठाकुर को उनके अपने ही वर्तमान में कठिन चुनौतियाँ मिलने लगी थीं। वे, जिस प्रकार परम्परा को आत्मसात करते हुए—विशेष रूप से अपनी काव्य-सृष्टि में—आधुनिक भारत की विचार-सरणी निर्मित कर रहे थे, उसे अति-उत्साही आधुनिक अपने लिए संकट के रूप में देखने लगे थे। सम्भवत: इसीलिए, विश्वकवि ने अपनी इस कथा-कृति में कविताओं के माध्यम से अपना ही मूल्यांकन भी किया है।
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प्रेम एक विलक्षण सृष्टि-रहस्य! व्यक्ति के आभ्यन्तर में सूक्ष्मातिसूक्ष्म—पोथियों की घ्राण-शक्ति की पकड़ के बाहर। और पोथियों में, स्वयं को अभिव्यक्त करने को आकुल हृदय को सर्वदा आश्रय देता हुआ—त्रासद से सुखद, सुखद से त्रासद के मध्य दोलायमान। रचनाकार की चुनौतियों का अन्त नहीं—जीवन के प्रश्नों में संगति भी कहाँ है, भला! उत्तरों में अन्तर्विरोधों का अन्त भी कहाँ!</p>
<p>रवीन्द्रनाथ ठाकुर को उनके अपने ही वर्तमान में कठिन चुनौतियाँ मिलने लगी थीं। वे, जिस प्रकार परम्परा को आत्मसात करते हुए—विशेष रूप से अपनी काव्य-सृष्टि में—आधुनिक भारत की विचार-सरणी निर्मित कर रहे थे, उसे अति-उत्साही आधुनिक अपने लिए संकट के रूप में देखने लगे थे। सम्भवत: इसीलिए, विश्वकवि ने अपनी इस कथा-कृति में कविताओं के माध्यम से अपना ही मूल्यांकन भी किया है।
Book Details
-
ISBN9789360866921
-
Pages168
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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‘मुझे पहचानो’ परम्परा और संस्कृति को एक नई रोशनी में देखने वाला उपन्यास है। इसकी कथा एक ऐसी रियासत से शुरू होती है जिसके लिए सती जैसी नृशंस प्रथा सांस्कृतिक गौरव की हैसियत रखती है। इसके पात्र एक ऐसे समाज में साँस ले रहे हैं जिसमें समानता, स्वतंत्रता और बन्धुत्व जैसे मानवीय मूल्य आकाशकुसुम बने हुए हैं, लेकिन जिसका प्रभुवर्ग अपने कथित सांस्कृतिक गौरव को यथावत रखने के लिए शुचिता को एक अपरिहार्य आवश्यकता बनाकर थोपे हुए है। यह शुचिता है वर्ण की, वर्ग की और रक्त की। लैंगिक और यौन शुचिताएँ भी इसमें शामिल हैं। आश्चर्य नहीं कि पुरुष-वर्चस्व पर टिके इस समाज में सती-प्रथा को व्याधि नहीं, अपनी विशेषता समझा जाता है और उसका धार्मिक-सांस्कृतिक महिमामंडन किया जाता है। इस जड़ता की जड़ें इतने गहरे धँसी हैं कि अधिकतर स्त्रियाँ भी सती को श्रद्धा की निगाह से देखती हैं। यह उपन्यास इसी छद्म गौरवबोध को अनावृत करता है। पुरुष-सत्ता की चालाकियों और उससे उत्पन्न सामाजिक ठहराव को तोड़ते हुए इस उपन्यास की कथा धर्म और धन के घातक गठजोड़ को भी बहुत ठोस रूप में पाठकों के सामने रखती है। संजीव का कथा-लेखन समूचे हिन्दी कथा-संसार में विशिष्ट इसलिए है कि उनकी लेखनी अविचलित भाव से न सिर्फ समाज की कथा कहती है, बल्कि हमें एक वैज्ञानिक दृष्टि देते हुए तर्कों और तथ्यों से भी समृद्ध करती है।
The Hidden Hindu
- Author Name:
Akshat Gupta
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इक्कीस साल का पृथ्वी एक अधेड़ और रहस्यमयी अघोरी ओम् शास्त्री की तलाश कर रहा है, जिसे पकड़कर भारत के एक सुनसान द्वीप पर अत्याधुनिक सुविधाओं के बीच भेज दिया गया | विशेषज्ञों की एक टीम ने जब उस अघोरी को नशे की दवा दी और पूछताछ के लिए सम्मोहित किया, तो उसने दावा किया कि वह सभी चार युगों-सतयुग, त्रेता, द्वापर व कलियुग–(हिंदू धर्म के अनुसार चार युग) को देख चुका है और रामायण तथा महाभारत की घटनाओं में हिस्सा ले चुका है | जीवन के बाद मृत्यु के नियम को भी बेअसर साबित करनेवाले ओम् के अविश्वसनीय अतीत से जुड़े खुलासे सभी को हैरान कर देते हैं। उस टीम को यह भी पता चला कि ओम् हर युग के दूसरे अमर लोगों की भी तलाश कर रहा है। ऐसे विचित्र रहस्य अगर सामने आ गए तो प्राचीन धारणाएँ हिल जाएँगी और भविष्य की दिशा ही बदल जाएगी। तो यह ओम् शास्त्री कौन है? उसे पकड़ा क्यों गया? पृथ्वी उसे क्यों ढूँढ़ रहा है? सवार हो जाइए ओम् शास्त्री के रहस्यों, पृथ्वी की तलाश और हिंदू पौराणिक कथाओं के रहस्यों से भरे अन्य अमर लोगों के कारनामों की इस नाव पर, और चलिए एक रोचक और रोमांचक यात्रा पर|
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