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Jahaz Paanch Paal Wala

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‘जहाज़ पाँच पाल वाला’ के केन्द्र में तीन ख़ुद-मुख़्तार स्त्रियाँ—वर्तिका, चारुचित्रा और एमिली— हैं जिन्होंने लीक तोड़ते हुए, अपने घर-परिवार, परम्परा और आसपास की पितृसत्तात्मक दुनिया के द्वारा आरोपित तमाम अवरोधों से जूझते हुए अपने लिए अलग राह चुनी और रंगमंच और जीवन दोनों ही इलाकों में एक क़ाबिले-रश्क जगह बनाई। यहाँ परदे के पीछे से समय और घटनाओं के दबाव के बीच रंगमंच की राजनीति है तो मंच पर इन नायिकाओं का हलचल पैदा करनेवाला बिन्दास जीवन, जहाँ जीवन और रंगमंच एक दूसरे का आईना बनते जा रहे हैं और बरसों पहले खेले गए नाटकों के अनेक प्रसंगों की त्रासद छायाएँ उनके वास्तविक जीवन में एक उदास निरन्तरता में गिर रही हैं। अपने निजी सम्बन्धों में ये कई बार ऐसे विरोधाभासों से युक्त दिखाई पड़ती हैं जो बताते हैं कि मुक्ति और बराबरी की यह लड़ाई कितनी मुश्किल होनेवाली है। असल में खोजे जा रहे रास्ते और दुनिया उनके लिए इतनी नई है कि यह नितान्त स्वाभाविक है कि इस खोज में कई बार भटकाव भी दिखें। चारुचित्रा और उसकी बेटी का पहाड़ी बाबा के सम्मोहन में फँसकर जान गँवाना त्रासद है लेकिन यही बात इन्हें एक वास्तविक दुनिया की रहवासी भी बनाती है। यह उपन्यास सांस्कृतिक रूप से उर्वर शहर भोपाल में घटित होता है। भोपाली हिन्दी का प्रयोग इसे एक गाढ़ा स्थानीय रंग और विश्वसनीयता देता है जहाँ से यह उन सारी स्त्रियों की गाथा बन जाता है जो अपने-अपने शहरों में अपने मन का जीवन जीने की लड़ाई लड़ रही हैं।

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‘जहाज़ पाँच पाल वाला’ के केन्द्र में तीन ख़ुद-मुख़्तार स्त्रियाँ—वर्तिका, चारुचित्रा और एमिली— हैं जिन्होंने लीक तोड़ते हुए, अपने घर-परिवार, परम्परा और आसपास की पितृसत्तात्मक दुनिया के द्वारा आरोपित तमाम अवरोधों से जूझते हुए अपने लिए अलग राह चुनी और रंगमंच और जीवन दोनों ही इलाकों में एक क़ाबिले-रश्क जगह बनाई।

यहाँ परदे के पीछे से समय और घटनाओं के दबाव के बीच रंगमंच की राजनीति है तो मंच पर इन नायिकाओं का हलचल पैदा करनेवाला बिन्दास जीवन, जहाँ जीवन और रंगमंच एक दूसरे का आईना बनते जा रहे हैं और बरसों पहले खेले गए नाटकों के अनेक प्रसंगों की त्रासद छायाएँ उनके वास्तविक जीवन में एक उदास निरन्तरता में गिर रही हैं।

अपने निजी सम्बन्धों में ये कई बार ऐसे विरोधाभासों से युक्त दिखाई पड़ती हैं जो बताते हैं कि मुक्ति और बराबरी की यह लड़ाई कितनी मुश्किल होनेवाली है। असल में खोजे जा रहे रास्ते और दुनिया उनके लिए इतनी नई है कि यह नितान्त स्वाभाविक है कि इस खोज में कई बार भटकाव भी दिखें। चारुचित्रा और उसकी बेटी का पहाड़ी बाबा के सम्मोहन में फँसकर जान गँवाना त्रासद है लेकिन यही बात इन्हें एक वास्तविक दुनिया की रहवासी भी बनाती है।

यह उपन्यास सांस्कृतिक रूप से उर्वर शहर भोपाल में घटित होता है। भोपाली हिन्दी का प्रयोग इसे एक गाढ़ा स्थानीय रंग और विश्वसनीयता देता है जहाँ से यह उन सारी स्त्रियों की गाथा बन जाता है जो अपने-अपने शहरों में अपने मन का जीवन जीने की लड़ाई लड़ रही हैं।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2026
Weight
390 grams
ISBN-13
9789360865900
Pages
376
Reading time
~13 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
12.5 × 20.5 cm
Language
Hindi

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