Uf! Ye Student Life
Author:
Harminder SinghPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections0 Ratings
Price: ₹ 200
₹
250
Available
"जब दसवीं पास की, उस वक्त मेरे पास अनगिनत किस्से और कहानियों का खजाना था। करीब दो साल बाद उन्हें सहेजना शुरू किया। गरमी की एक दोपहर को पहली कहानी लिखी। फिर रोज लिखने का सिलसिला शुरू हो गया। एक महीने बाद करीब 17 कहानियाँ थीं। उसके बाद जिंदगी बहुत तेज भागी। मैंने उन पन्नों को भुला दिया, जो कभी लिखे गए थे। जब उनका ध्यान आया तो आज-कल चलता रहा।
फिर आया 2020, जिसमें कोरोना की एंट्री हुई। यह वक्त मुश्किल था, जब लॉकडाउन ने जिंदगी को थाम दिया। वक्त मानो ठहर गया।
मैंने दशकों पुराने पन्नों को निकाला। उन्हें पढ़ा, फिर पढ़ा, दोबारा लिखा, पढ़वाया, किस्सों को नया फ्लेवर दिया। इस तरह ‘उफ! ये स्टूडेंट लाइफ’ ने एक किताब की शक्ल ली।
छात्र जीवन की अनेक रोचक-रोमांचक किस्सों व घटनाओं का ऐसा संकलन, जो पाठकों को आकर्षित करेगा, प्रेरित करेगा और वे उनसे अपनी निकटता अनुभव करेंगे।
"
ISBN: 9789390900077
Pages: 120
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: स्वयं प्रकाश की कहानियाँ भारतीय, विशेष रूप से हिन्दी मध्यवर्ग के जीवन की एक तस्वीर पेश करती हैं—मनुष्यता से लबरेज़ पर दब्बू और डरपोक मध्यवर्ग, छोटी-छोटी आकांक्षाओं के लिए भी संघर्षरत, अन्ततः उन्हें स्थगित करता मध्यवर्ग, स्वार्थों की अन्धी दौड़ में भागता-गिरता-पड़ता मध्यवर्ग, निम्नवर्गीय जनों से विराग रखता मध्यवर्ग। यूँ तो स्वयं प्रकाश का कथाफ़लक गाँव से शहर तक फैला है, परन्तु उसका केन्द्र मध्यवर्ग ही है। यह मध्यवर्ग स्वतंत्रता आन्दोलन के दौर का मध्यवर्ग नहीं है जिसमें निम्नवर्ग के प्रति एक सदाशयता और सहभाव मौजूद था। इसमें निम्नवर्ग के प्रति वितृष्णा और घृणा निर्णायक हद तक मौजूद है। इस मध्यवर्ग में एक छोटी संख्या, उन लोगों की भी है, जिनमें समाज को बदलने की इच्छा मौजूद है। ऐसे चरित्र स्वयं प्रकाश के यहाँ प्रमुखता से मौजूद हैं। स्वयं प्रकाश की गहरी सहानुभूति इनके साथ है। इसीलिए इनके प्रति एक तरह का आलोचनात्मक भाव भी मौजूद है। परिवर्तनकामी चेतना जब मध्यवर्गीय स्वार्थपरता, पर्सनाल्टी कल्ट, या थोथे आदर्शवाद से घिर जाती है, स्वयं प्रकाश इन चरित्रों के प्रति तीखे हो जाते हैं। उनकी कहानियों में भारतीय स्त्री के जीवन की गहरी आलोचनात्मक पड़ताल भी मौजूद है। वे स्त्री-चरित्रों को प्रायः एक टाइप की तरह नहीं, एक व्यक्ति की तरह अंकित करते हैं। ये स्त्री-चरित्र पुरुष-चरित्रों की तरह ही निजी विशिष्टताओं के मालिक हैं। उन पर सामाजिक संरचना के दबाव हैं, परन्तु वे उनके विरुद्ध जीते हुए अपनी तरह का संसार रचने को आतुर हैं। स्वयं प्रकाश ने कहानीपन की रक्षा करते हुए, उसे रोचक बनाते हुए एक ज्ञानी की तरह नहीं एक क़िस्सागो की तरह अपनी कहानियाँ कही हैं।
Seeta Se Shuru
- Author Name:
Navnita Devsen
- Book Type:

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Description:
‘सीता से शुरू...’ महज़ कथा–प्रवाह ही नहीं है। इस विविध कथा–चित्र का एक छोर पौराणिक काल से बँधा है; दूसरा, मातृसत्तात्मक परिवार से और अन्त में, वर्तमान समय के आधुनिक मूल्यबोध से जुड़ा है। कुल मिलाकर, औरत की ज़िन्दगी के आदि–मध्य–अन्त के पर्वों की अन्तर्कथा!
नवनीता देव सेन की हर कृति का प्रसाद गुण सरस–गम्भीर स्थापन पाठकों को मुग्ध करता है। प्रस्तुत कथा–संग्रह औरत के अन्तर्मन और जीवन का बयान है। ये औरताना कहानियाँ नहीं हैं, औरत की कहानियाँ हैं। लेखिका ने अखंड काल–क्रम में साँस लेती हुई औरत के अनन्त दु:ख, शाश्वत व्यक्तित्व और समकालीन जटिलताओं की राह पर उसकी अभियान–कथा को क़लमबन्द किया है। लेखिका के शब्दों में—‘सीता से शुरू की गई यात्रा’, वर्तमान युग में, आधुनिक औरत को अपने ही कटघरे में ला खड़ा करती है। इस कथा का पहला पर्व है—पौराणिकी और तीसरा पर्व है आधुनिकी। लेकिन मध्यवर्ती पर्व मातृयार्की के इर्द–गिर्द बुना गया है—यानी, मातृयार्की माँ से याराना। अपनी माँ के बारे में हँसी–ख़ुशी से झलमल ऐसे उपाख्यान विरल हैं। कल्पना और वास्तविकता के मणिकांचन संयोग से ये कहानियाँ शाश्वत सत्य के अमृत–मंत्र की साक्षी बन गई हैं।
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