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Maati

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शैलेन्द्र सागर का यह कहानी-संग्रह समय के अलक्षित किंतु असहनीय आतंक को अद्भुत रचनात्मक दक्षता के साथ अभिव्यक्त करता है। लेखक ने मानो यथार्थ की केंचुल उतार कर उसे और चमकदार बना दिया है। परिचित जीवन में अप्रत्याशित का अन्वेषण करते हुए शैलेन्द्र सागर ने संबंधों, आस्थाओं और मूल्यों के आत्मसंघर्ष को शब्दबद्ध किया है। समकालीन समाज का कलह एवं कोलाहल इन कहानियों में पार्श्व-संगीत की भाँति अनुभव किया जा सकता है। ये कहानियाँ जाने-अनजाने जीवन के शाश्वत प्रश्नों से टकराती हैं। कई बार चरित्रों के अंतर्द्वंद्व से छनती दार्शनिकता पाठक को मन के अगाध में उतरने का अवसर देती है।  इसे कहानीकार का कौशल कहा जाएगा कि कथा-रस का पूर्ण परिपाक तथा प्रतिबद्ध रचनाकर्म का अनुशासन यहाँ संभव हुआ है। मध्यवर्ग की विसंगतियाँ, राजनीति के दारुण सच, जीवन की अतृप्त कामनाएँ और रागरंजित संसार में रक्तरंजित संवेदनाएँ इन कहानियों की अंतर्वस्तु का हिस्सा हैं। शैलेन्द्र सागर  ने शिल्प की प्रयोगधर्मिता के स्थान पर ‘निरायास विन्यास’ को अंगीकार किया है। यही ‘सहज शिल्प’ इन समस्त कहानियों का सौंदर्य है। ये कहानियाँ एक अर्थवान प्रतिवाद का पक्ष निर्मित करती हैं।

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शैलेन्द्र सागर का यह कहानी-संग्रह समय के अलक्षित किंतु असहनीय आतंक को अद्भुत रचनात्मक दक्षता के साथ अभिव्यक्त करता है। लेखक ने मानो यथार्थ की केंचुल उतार कर उसे और चमकदार बना दिया है। परिचित जीवन में अप्रत्याशित का अन्वेषण करते हुए शैलेन्द्र सागर ने संबंधों, आस्थाओं और मूल्यों के आत्मसंघर्ष को शब्दबद्ध किया है। समकालीन समाज का कलह एवं कोलाहल इन कहानियों में पार्श्व-संगीत की भाँति अनुभव किया जा सकता है। ये कहानियाँ जाने-अनजाने जीवन के शाश्वत प्रश्नों से टकराती हैं। कई बार चरित्रों के अंतर्द्वंद्व से छनती दार्शनिकता पाठक को मन के अगाध में उतरने का अवसर देती है। 
इसे कहानीकार का कौशल कहा जाएगा कि कथा-रस का पूर्ण परिपाक तथा प्रतिबद्ध रचनाकर्म का अनुशासन यहाँ संभव हुआ है। मध्यवर्ग की विसंगतियाँ, राजनीति के दारुण सच, जीवन की अतृप्त कामनाएँ और रागरंजित संसार में रक्तरंजित संवेदनाएँ इन कहानियों की अंतर्वस्तु का हिस्सा हैं। शैलेन्द्र सागर 
ने शिल्प की प्रयोगधर्मिता के स्थान पर ‘निरायास विन्यास’ को अंगीकार किया है।
यही ‘सहज शिल्प’ इन समस्त कहानियों का सौंदर्य है। ये कहानियाँ एक अर्थवान प्रतिवाद का पक्ष निर्मित करती हैं।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Hardbound
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
2nd
Publication year
2000
Weight
182 grams
ISBN-13
9788171195602
Pages
156
Reading time
~5 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
12.5 × 19 cm
Language
Hindi

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