Chhanh
(0)
Author:
Maitreyi PushpaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
299
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अपने समय और समाज, विशेषकर स्त्री समाज से जुड़े रचनाकारों की यों तो कहने के लिए बहुत बड़ी जमात है लेकिन स्त्री तथा स्त्री के तमाम धूप-छाँह को समझने का उनका अनुभव परिपक्व नहीं होता। पुरुष, स्त्री को हमेशा भोग या करुणा की नजर से देखता आया है। और यह सिर्फ स्त्रियों के बारे में ही नहीं पूरे काल और समाज के विश्लेषण के बारे में भी सच है। सतही मूल्यांकन करनेवाले लेखकों में जैसे एक होड़ लगी हुई है। ऐसी ही अराजक भीड़ के कारण वास्तविक साहित्य-सृजन का मार्ग अवरुद्ध-सा नजर आता है। मगर ऐसे काल-खंड में मैत्रेयी पुष्पा जैसी लेखिकाओं की उपस्थिति इस बात की आश्वस्ति है कि उन जैसे साहित्यकारों के कारण पाठकों को समाज की सच्चाइयों से परिचित होने का मौका मिलता है और समस्याओं से जूझने का दिशा-निर्देश भी। मैत्रेयी पुष्पा की कहानियों में बनावट नहीं मिलती और उनकी बुनावट में घटनाओं का ऐसा तीव्र प्रवाह मिलता है जो अन्त तक पाठकों को तल्लीन किये रहता है। उनका बुन्देलखंडी समाज कब सम्पूर्ण हिन्दीभाषी समाज में बदल जाता है, इसका पता ही नहीं चलता।</p> <p>मैत्रेयी जी की कहानियाँ एक खास लीक पर चलने के बजाय जीवन की सभी ऋतुओं से युक्त होती हैं। उनकी कहानियों की विशेषता है कि उनमें निराशा में भी आशा का संयोजन होता है। स्त्रियाँ मैत्रेयी पुष्पा की कहानियों की बड़ी शक्ति हैं। वे उनके साहित्य में जहाँ भी हैं पूरी दबंगता और जीवन्तता से हैं। वे अपनी छाप छोड़ती हैं। उनकी कुछ ऐसी ही उल्लेखनीय कहानियों का यह संकलन ‘छाँह’ प्रस्तुत है ।
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अपने समय और समाज, विशेषकर स्त्री समाज से जुड़े रचनाकारों की यों तो कहने के लिए बहुत बड़ी जमात है लेकिन स्त्री तथा स्त्री के तमाम धूप-छाँह को समझने का उनका अनुभव परिपक्व नहीं होता। पुरुष, स्त्री को हमेशा भोग या करुणा की नजर से देखता आया है। और यह सिर्फ स्त्रियों के बारे में ही नहीं पूरे काल और समाज के विश्लेषण के बारे में भी सच है। सतही मूल्यांकन करनेवाले लेखकों में जैसे एक होड़ लगी हुई है। ऐसी ही अराजक भीड़ के कारण वास्तविक साहित्य-सृजन का मार्ग अवरुद्ध-सा नजर आता है। मगर ऐसे काल-खंड में मैत्रेयी पुष्पा जैसी लेखिकाओं की उपस्थिति इस बात की आश्वस्ति है कि उन जैसे साहित्यकारों के कारण पाठकों को समाज की सच्चाइयों से परिचित होने का मौका मिलता है और समस्याओं से जूझने का दिशा-निर्देश भी। मैत्रेयी पुष्पा की कहानियों में बनावट नहीं मिलती और उनकी बुनावट में घटनाओं का ऐसा तीव्र प्रवाह मिलता है जो अन्त तक पाठकों को तल्लीन किये रहता है। उनका बुन्देलखंडी समाज कब सम्पूर्ण हिन्दीभाषी समाज में बदल जाता है, इसका पता ही नहीं चलता।</p>
<p>मैत्रेयी जी की कहानियाँ एक खास लीक पर चलने के बजाय जीवन की सभी ऋतुओं से युक्त होती हैं। उनकी कहानियों की विशेषता है कि उनमें निराशा में भी आशा का संयोजन होता है। स्त्रियाँ मैत्रेयी पुष्पा की कहानियों की बड़ी शक्ति हैं। वे उनके साहित्य में जहाँ भी हैं पूरी दबंगता और जीवन्तता से हैं। वे अपनी छाप छोड़ती हैं। उनकी कुछ ऐसी ही उल्लेखनीय कहानियों का यह संकलन ‘छाँह’ प्रस्तुत है ।
Book Details
-
ISBN9788189962579
-
Pages256
-
Avg Reading Time9 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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