Kala Ragister
Author:
Ravindra KaliyaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections0 Ratings
Price: ₹ 32
₹
40
Unavailable
एक टुटही सायकल है, उसके टैक्स का टोकन मैंने सायकल में ही कसवा दिया है। अब सरकार मुझसे क्या चाहती है? हुज़ूर आप ही बताइए, जो शख़्स बिना हुज्जत के सरकार का पूरा टैक्स अदा कर देता है, जिसकी किसी से कोई अदावत नहीं, जो सिर्फ़ अपने काम से काम रखता है और गर्दन नीची किए हुए उसी अल्लाह मियाँ को याद करके चुपचाप चलता रहता है, वह क्यों इतना परेशाँ है? जिधर निकलता हूँ, यही आवाज़ें आने लगती हैं—मारो! मारो! क्यों मरोगे भाई? मैंने क्या गुनाह किया है, किस जुर्म की सज़ा देना चाहते हो। इस घर से आवाज़ आ रही है, उस घर से भी यही आवाज़ आ रही है। बाज वक़्त कान लगाकर सुनता हूँ तो यक़ीन हो जाता है कि किसी इनसान की ही आवाज़ है। आप तो पढ़े-लिखे आदमी हैं हुज़ूर, क्या मुझे बता सकते हैं कि हुकूमत क्यों ख़ामोश है? लगता है, आप हुकूमत की बात से ऊब रहे हैं।
ISBN: 9788180311314
Pages: 103
Avg Reading Time: 3 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Premchand
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- Description: भारतीय ग्रामीण जीवन और जनमानस की विभिन्न स्थितियों के अप्रतिम चितेरे मुंशी प्रेमचन्द विश्वविख्यात साहित्यकारों की पंक्ति में आते हैं। उनकी ये प्रतिनिधि कहानियाँ प्रायः पूरी दुनिया की पाठकीय चेतना का हिस्सा बन चुकी हैं। सुप्रसिद्ध प्रगतिशील कथाकार भीष्म साहनी द्वारा चयनित ये कहानियाँ भारतीय समाज और उसके स्वभाव के जिन विभिन्न मसलों को उठाती हैं, ‘आज़ादी’ के बावजूद वे आज और भी विकराल हो उठे हैं, और जैसा कि भीष्म जी ने संकलन की भूमिका में कहा है कि प्रेमचन्द की मृत्यु के पचास साल बाद आज उनका साहित्य हमारे लिए एक चेतावनी के रूप में उपस्थित है। जिन विषमताओं से प्रेमचन्द अपने साहित्य में जूझते रहे, उनमें से केवल ब्रिटिश शासन हमारे बीच मौजूद नहीं है, शेष सब तो किसी-न-किसी रूप में वैसी-की-वैसी मौजूद हैं! वस्तुतः प्रेमचन्द ने हमारे साहित्य में जिस नए युग का सूत्रपात किया था, साहित्य को वे जिस तरह जीवन के निकट अथवा जीवन को साहित्य के केन्द्र में ले आए थे, वह हमारे लिए आज भी प्रासंगिक है।
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