Khaki Mein Insan
(0)
Author:
Ashok Kumar, Lokesh OhriPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
199
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इस किताब में ग्रामीण परिवेश से उठकर आई.आई.टी. दिल्ली से शिक्षा प्राप्त कर भारतीय पुलिस सेवा में आए एक अधिकारी द्वारा कुछ वास्तविक घटनाओं पर आधारित कहानियों के ज़रिए यह दर्शाने का प्रयास किया गया है कि अच्छी पुलिस व्यवस्था से सचमुच ग़रीब व असहाय लोगों की ज़िन्दगी में फ़र्क़ लाया जा सकता है।</p> <p>पुस्तक में आज के समय के ज्वलन्त मुद्दों, जैसे—आतंकवाद, अमीर-ग़रीब के बीच बढ़ती खाई, महिलाओं के प्रति अपराध, समय के साथ बदलते व टूटते हुए मानवीय मूल्य, भू-माफ़ियाओं का बढ़ता हुआ जाल, अपराधियों के बढ़ते हुए हौसले आदि का सटीक एवं यथार्थ चित्रण किया गया है।</p> <p>पुस्तक में दर्शाया गया है कि यद्यपि वर्तमान व्यवस्था में कुछ ख़ामियाँ आ गई हैं, फिर भी यदि ऊँचे पदों पर बैठे लोगों में दृढ़ इच्छाशक्ति हो, इंसानियत के नज़रिए से सोचने की क्षमता हो और कुछ कर दिखाने का जज़्बा हो तो यही व्यवस्था, यही सिस्टम लोगों की मदद करने में बहुत ही कारगर सिद्ध हो सकता है।</p> <p>भारतीय पुलिस की जड़ें ब्रिटिश साम्राज्य की इम्पीरियल पुलिस से निकली हैं। पुस्तक में थानों की कार्यप्रणाली में बदलाव लाकर जन-समस्याओं की जड़ तक पहुँचने और पुलिस व्यवस्था को लोकतंत्र की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं के अनुरूप बनाने के तौर-तरीक़ों का भी जीवन्त उल्लेख किया गया है।
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इस किताब में ग्रामीण परिवेश से उठकर आई.आई.टी. दिल्ली से शिक्षा प्राप्त कर भारतीय पुलिस सेवा में आए एक अधिकारी द्वारा कुछ वास्तविक घटनाओं पर आधारित कहानियों के ज़रिए यह दर्शाने का प्रयास किया गया है कि अच्छी पुलिस व्यवस्था से सचमुच ग़रीब व असहाय लोगों की ज़िन्दगी में फ़र्क़ लाया जा सकता है।</p>
<p>पुस्तक में आज के समय के ज्वलन्त मुद्दों, जैसे—आतंकवाद, अमीर-ग़रीब के बीच बढ़ती खाई, महिलाओं के प्रति अपराध, समय के साथ बदलते व टूटते हुए मानवीय मूल्य, भू-माफ़ियाओं का बढ़ता हुआ जाल, अपराधियों के बढ़ते हुए हौसले आदि का सटीक एवं यथार्थ चित्रण किया गया है।</p>
<p>पुस्तक में दर्शाया गया है कि यद्यपि वर्तमान व्यवस्था में कुछ ख़ामियाँ आ गई हैं, फिर भी यदि ऊँचे पदों पर बैठे लोगों में दृढ़ इच्छाशक्ति हो, इंसानियत के नज़रिए से सोचने की क्षमता हो और कुछ कर दिखाने का जज़्बा हो तो यही व्यवस्था, यही सिस्टम लोगों की मदद करने में बहुत ही कारगर सिद्ध हो सकता है।</p>
<p>भारतीय पुलिस की जड़ें ब्रिटिश साम्राज्य की इम्पीरियल पुलिस से निकली हैं। पुस्तक में थानों की कार्यप्रणाली में बदलाव लाकर जन-समस्याओं की जड़ तक पहुँचने और पुलिस व्यवस्था को लोकतंत्र की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं के अनुरूप बनाने के तौर-तरीक़ों का भी जीवन्त उल्लेख किया गया है।
Book Details
-
ISBN9788126720248
-
Pages167
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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