Akeli
(0)
Author:
Mannu BhandariPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
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नई कहानी को समृद्ध बनाने में जिन कथा-लेखिकाओं का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है, मन्नू भंडारी का नाम उनमें सर्वोपरि है। उन्होंने आधुनिक नारी की अस्मिता, उसकी अपनी स्वतंत्र पहचान और सामाजिक जड़ताओं से लड़ने के उसके साहस को बिना किसी आरोपित क्रान्तिकारिता के बड़े सहज भाव से चित्रित किया है। पर उनकी दृष्टि केवल नारी तक ही सीमित होकर नहीं रह गई बल्कि अपने गहरे सामाजिक सरोकारों के चलते ही उन्होंने आज के अर्धसामन्ती, अर्धपूँजीवादी समाज में मूल्यों के विघटन, सम्बन्धों के बदलते स्वरूप, सामाजिक-राजनैतिक चेतना के नित नए आयामों को भी अपनी रचनाओं में उद्घाटित किया है।</p> <p>मन्नू भंडारी की कहानियों के पात्र ओढ़ी हुई बौद्धिकता के अहंकार में अपने परिवेश से कट नहीं जाते बल्कि उनकी सहज मानवीयता पाठकों के साथ एक ऐसी आत्मीयता स्थापित कर लेती है कि पाठकों को वे बिलकुल अपने लगने लगते हैं। जटिल से जटिल मनोवैज्ञानिक स्थितियों के चित्रण-विश्लेषण में भी मन्नू जी की पारदर्शी भाषा की यह सहजता बनी रहती है, साथ ही वे एक स्वतःस्फूर्त कलात्मक संयम को भी हाथ से नहीं जाने देतीं।</p> <p>गहन विचार, सूक्ष्म निरीक्षण और सहज मानवीय संवेदना में लिपटे अपने अनुभवों के तटस्थ बेबाक चित्रण के कारण ही मन्नू भंडारी की ये कहानियाँ पाठक के साथ एक आत्मीयता स्थापित कर लेती हैं।
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नई कहानी को समृद्ध बनाने में जिन कथा-लेखिकाओं का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है, मन्नू भंडारी का नाम उनमें सर्वोपरि है। उन्होंने आधुनिक नारी की अस्मिता, उसकी अपनी स्वतंत्र पहचान और सामाजिक जड़ताओं से लड़ने के उसके साहस को बिना किसी आरोपित क्रान्तिकारिता के बड़े सहज भाव से चित्रित किया है। पर उनकी दृष्टि केवल नारी तक ही सीमित होकर नहीं रह गई बल्कि अपने गहरे सामाजिक सरोकारों के चलते ही उन्होंने आज के अर्धसामन्ती, अर्धपूँजीवादी समाज में मूल्यों के विघटन, सम्बन्धों के बदलते स्वरूप, सामाजिक-राजनैतिक चेतना के नित नए आयामों को भी अपनी रचनाओं में उद्घाटित किया है।</p>
<p>मन्नू भंडारी की कहानियों के पात्र ओढ़ी हुई बौद्धिकता के अहंकार में अपने परिवेश से कट नहीं जाते बल्कि उनकी सहज मानवीयता पाठकों के साथ एक ऐसी आत्मीयता स्थापित कर लेती है कि पाठकों को वे बिलकुल अपने लगने लगते हैं। जटिल से जटिल मनोवैज्ञानिक स्थितियों के चित्रण-विश्लेषण में भी मन्नू जी की पारदर्शी भाषा की यह सहजता बनी रहती है, साथ ही वे एक स्वतःस्फूर्त कलात्मक संयम को भी हाथ से नहीं जाने देतीं।</p>
<p>गहन विचार, सूक्ष्म निरीक्षण और सहज मानवीय संवेदना में लिपटे अपने अनुभवों के तटस्थ बेबाक चित्रण के कारण ही मन्नू भंडारी की ये कहानियाँ पाठक के साथ एक आत्मीयता स्थापित कर लेती हैं।
Book Details
-
ISBN9788189914523
-
Pages240
-
Avg Reading Time8 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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‘कृष्णद्वादशी’ तथा ‘केवल किंवदन्ती’ कहानियों के कथानक ‘बंगाली जाति का इतिहास’ तथा ‘बृहत् बंग’ ग्रन्थ से लिए गए हैं। नीहार रंजन, दिनेशचन्द्र और सुकुमार सेन जैसे इतिहासविदों ने वणिक-वधू माधवी का उल्लेख किया है। प्राचीन बंगाल में राजा बल्लाल के समय सुवर्ण-वणिकों के साथ क्रूर बर्ताव किया गया था। राजा वर्ग और वर्ण के आधार पर अपनी नीतियों का पालन करता था। महिलाओं की स्थिति सर्वाधिक त्रासद थी। ‘कृष्णद्वादशी’ की माधवी में द्रौपदी की झलक देखने को मिलती है। ‘केवल किंवदन्ती’ की वल्लभा अनन्या है ही। ‘यौवन’ कहानी के केन्द्र में ईस्ट इंडिया कम्पनी का विद्रूप चेहरा है। तब बंगाल से भारत लाए जानेवाले सैनिक बीच में विद्रोह कर देते तो उन्हें जेल में ठूँस दिया जाता था। कई सैनिक इस अमानुषिक माहौल से तंग आकर भाग जाया करते, ऐसे सैनिकों को ‘भागी गोरा’ कहा जाता था। महाश्वेता जी ने इस ऐतिहासिक समय को लगभग 30-32 वर्ष पूर्व ‘नृसिंहदुरावतार’ शीर्षक कहानी में विश्लेषित करने की कोशिश की थी। ‘यौवन’ उसी कथा की सार्थक पुनर्विवेचना है। इस कहानी में लुप्त हो रही ‘मनुष्यता’ का अन्वेषण है।
Wah Awaj
- Author Name:
Asha Prabhat
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समय के बदलते मिजाज और जीवन तथा मन की शाश्वत जरूरतों को रेखांकित करती ‘वह आवाज’ कहानी-संग्रह की कहानियाँ अपनी दृष्टि के फैलाव के चलते भी हमें आकर्षित करती हैं और कहन के अपने तरीके से भी।
गाँव-जवार की पुरखिन धरती से उखड़े, किसान से मजदूर बनकर शहरों के किनारे शरणार्थी जीवन जीते लोग हों, या जीवन के पल-पल बदलते रूपों के साथ सामंजस्य बिठाने को जूझता मध्यवर्ग हो, आशा प्रभात हर बार अपनी भाषा को ऐसा प्रवाह देती हैं कि पाठक हर कहानी के साथ दूर तक बहता चला जाता है।
‘वह आवाज’ उनका नया कहानी-संग्रह है। इसमें संकलित ग्यारह कहानियों में उन्होंने ग्रामीण एवं शहरी समाज के समकालीन संसार से कुछ ऐसे विषय पकड़े हैं जिन पर दृष्टिपात किया जाना अत्यन्त जरूरी है। प्राकृतिक आपदाओं के सम्मुख असहाय और सरकारी मशीनरी के सामने निरुपाय साधारण जनगण की विवशताएँ भी इसमें हैं, और पीढ़ियों के बीच खुलते भावनात्मक गवाक्षों से फूटती उम्मीदें भी। संकलन की शीर्षक कथा ‘वह आवाज’ एक ऐसी दुनिया की तरफ इशारा करती है जिसका होना आधुनिक मनुष्य के मन को अकसर चौंका जाता है।
Katha Saptak - Mamta Kalia
- Author Name:
Mamta Kalia
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7 Short Stories
Kahaniyan Rishton Ki : Bade-Bujurg
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Akhilesh
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बड़े-बुज़़ुर्ग कहते ही कुछ ऐसा लगता है जैसे जीवन की मुख्यधारा से चुपचाप किनारे होता कोई व्यक्ति। लेकिन उम्र का चढ़ते जाना जीवन के अन्त की कातर प्रतीक्षा में बदलना नहीं है। व्यक्ति की लालसाएँ और प्रतीक्षाएँ तो नित नई हमेशा रहती हैं। बुज़ुर्गों को अक्सर अपने पुराने दिनों से भी एक लड़ाई लड़नी पड़ती है। अपनी आदतों से, दूसरों की अपेक्षाओं से और सबसे ज़्यादा अपनी कमज़ोर पड़ती सामर्थ्य और हैसियत से। लेकिन यह जीवन का सत्य है। इसका साक्षात्कार इस दस्तावेज़ी संकलन की कहानियों में संवेदनात्मक स्तर पर होगा जिससे पाठक बड़े-बुज़ुर्गों के प्रति अपने भीतर एक अलग तरह की कोमलता का अनुभव करेगा।
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