Girgit
About the book
‘गिरगिट’ कथा-संग्रह की सभी कहानियाँ जिज्ञासा, रोचकता, भाव-सबलता एवं युगबोध से सम्पन्न हैं। आधुनिक भावबोध से युग के सन्दर्भों के यथार्थ को सूक्ष्म विवेचन और विषय वैविध्य के साथ व्यापक बनाया गया है। सभी कहानियाँ वैचारिक एवं अनुमूल्यात्मक संयोग से युक्त एवं अत्यन्त लोकप्रिय हैं। जीवन के सन्दर्भों का यथार्थ चित्रण विषयगत विविधता परिवेशगत विस्तार, वैचारिक संयोग एवं शिल्पगत वैशिष्ट्य इस संग्रह की कहानियों की विशेषताएँ हैं। इसमें समाज में बदलते हुए सम्बन्धों का सूक्ष्म अध्ययन भी है, जिसकी अभिव्यक्ति चारुता से इन कहानियों में हुई है। गिरगिट रंग बदलने के लिए प्रसिद्धि पा चुका है, किन्तु मानवाकृति को स्वयं से अधिक रंगों में देखकर स्वयं गिरगिट लज्जित बन पराजित है, यही अखिलेश निगम द्वारा विरचित कहानियों में दर्शनीय है। इन सभी कहानियों का विषय राष्ट्रीय दृष्टिकोण के परिप्रेक्ष्य में मानव जीवन की समस्याओं से जुड़ा है। कहानीकार का उद्देश्य सर्वत्र सुधारवादी और आशावादी है। इन कहानियों में कहीं-कहीं एक ही पात्र एक समय में मन के विभिन्न स्तरों पर जीता है, जहाँ चारित्रिक विसंगतियाँ ही कहानी की विशेषता बन गई हैं।
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About the Book
‘गिरगिट’ कथा-संग्रह की सभी कहानियाँ जिज्ञासा, रोचकता, भाव-सबलता एवं युगबोध से सम्पन्न हैं। आधुनिक भावबोध से युग के सन्दर्भों के यथार्थ को सूक्ष्म विवेचन और विषय वैविध्य के साथ व्यापक बनाया गया है। सभी कहानियाँ वैचारिक एवं अनुमूल्यात्मक संयोग से युक्त एवं अत्यन्त लोकप्रिय हैं। जीवन के सन्दर्भों का यथार्थ चित्रण विषयगत विविधता परिवेशगत विस्तार, वैचारिक संयोग एवं शिल्पगत वैशिष्ट्य इस संग्रह की कहानियों की विशेषताएँ हैं। इसमें समाज में बदलते हुए सम्बन्धों का सूक्ष्म अध्ययन भी है, जिसकी अभिव्यक्ति चारुता से इन कहानियों में हुई है।
गिरगिट रंग बदलने के लिए प्रसिद्धि पा चुका है, किन्तु मानवाकृति को स्वयं से अधिक रंगों में देखकर स्वयं गिरगिट लज्जित बन पराजित है, यही अखिलेश निगम द्वारा विरचित कहानियों में दर्शनीय है।
इन सभी कहानियों का विषय राष्ट्रीय दृष्टिकोण के परिप्रेक्ष्य में मानव जीवन की समस्याओं से जुड़ा है। कहानीकार का उद्देश्य सर्वत्र सुधारवादी और आशावादी है। इन कहानियों में कहीं-कहीं एक ही पात्र एक समय में मन के विभिन्न स्तरों पर जीता है, जहाँ चारित्रिक विसंगतियाँ ही कहानी की विशेषता बन गई हैं।
Book details
- Format
- Paperback
- Publisher
- Rajkamal Prakashan Samuh
- Edition
- 1st
- Publication year
- 2015
- Weight
- 160 grams
- ISBN-13
- 9788119996384
- Pages
- 144
- Reading time
- ~5 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14 × 21.5 cm
- Language
- Hindi
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