Aginkhor
Author:
Phanishwarnath RenuPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections0 Ratings
Price: ₹ 476
₹
595
Available
हिन्दी भाषा फणीश्वरनाथ रेणु की ऋणी है उस शब्द-सम्पदा के लिए जो उन्होंने स्थानीय बोली-परम्परा से लेकर हिन्दी को दी। नितान्त ज़मीन की ख़ुशबू से रचे शब्दों को खड़ी बोली के फ़्रेम में रखकर उन्होंने ऐसे प्रस्तुत किया कि वे उनके पाठकों की स्मृति में हमेशा-हमेशा के लिए जड़े रह गए। उनके लेखन का अधिकांश इस अर्थ में बार-बार पठनीय है। दूसरे जिस कारण से रेणु को लौट-लौटकर पढ़ना ज़रूरी हो जाता है, वह है उनकी संवेदना और उसे शब्दों में चित्रित करने की उनकी कला। वे भारतीय लोकजीवन और जनसाधारण के अस्तित्व के लिए निर्णायक अहमियत रखनेवाली भावधाराओं को तक़रीबन जादुई ढंग से पकड़ते हैं, और उतनी ही कुशलता से उसे पाठक के सामने प्रस्तुत कर देते हैं।
इस संग्रह में ‘अगिनखोर’ के अलावा ‘मिथुन राशि’, ‘अक्ल और भैंस’, ‘रेखाएँ : वृत्तचक्र’, ‘तब शुभ नामे’, ‘एक अकहानी का सुपात्र’, ‘जैव’, ‘मन का रंग’, ‘लफड़ा’, ‘अग्निसंचारक’ और ‘भित्तिचित्र मयूरी’ कहानियाँ शामिल हैं। इन ग्यारह कहानियों में से हर एक कहानी और उसका हर पात्र इस बात का प्रमाण है कि उत्तर भारत, विशेषकर गंगा के तटीय इलाक़ों की ग्राम्य-संवेदना और जीवन को समझने के लिए रेणु का ‘होना’ कितना महत्त्वपूर्ण और ज़रूरी है।
ISBN: 9788126714667
Pages: 127
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Gyarahvin-A ke Ladke
- Author Name:
Gaurav Solanki
- Book Type:

-
Description:
गौरव सोलंकी नैतिकता के रूढ़ खाँचों में अपनी गाड़ी खींचते-धकेलते लहूलुहान समाज को बहुत अलग ढंग से विचलित करते हैं। और, यह करते हुए उसी समाज में अपने और अपने हमउम्र युवाओं के होने के अर्थ को पकड़ने के लिए भाषा में कुछ नई गलियाँ निकालते हैं जो रास्तों की तरह नहीं, पड़ावों की तरह काम करती हैं। इन्हीं गलियों में निम्न-मध्यवर्गीय शहरी भारत की उदासियों की खिड़कियाँ खुलती हैं जिनसे झाँकते हुए गौरव थोड़ा गुदगुदाते हुए हमें अपने साथ घुमाते रहते हैं। वे कल्पना की कुछ नई ऊँचाइयों तक क़िस्सागोई को ले जाते हैं, और अक्सर सामाजिक अनुभव की उन कंदराओं में भी झाँकते हैं, जहाँ मुद्रित हिन्दी की नैतिक गुत्थियाँ अपने लेखकों को कम ही जाने देती हैं।
इस संग्रह में गौरव की छह कहानियाँ सम्मिलित हैं, लगभग हर कहानी ने सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर एक ख़ास क़िस्म की हलचल पैदा की। किसी ने उन्हें अश्लील कहा, किसी ने अनैतिक, किसी ने नक़ली। लेकिन ये सभी आरोप शायद उस अपूर्व बेचैनी की प्रतिक्रिया थे, जो इन कहानियों को पढक़र होती है।
कहने का अन्दाज़ गौरव को सबसे अलग बनाता है, और देखने का ढंग अपने समकालीनों में सबसे विशेष। उदारीकृत भारत के छोटे शहरों और क़स्बों की नागरिक उदासी को यह युवा क़लम जितने कौशल से तस्वीरों में बदलती है, वह चमत्कृत करनेवाला है।
Katha Saptak - Akansha Pare Kashiv
- Author Name:
Akansha Pare Kashiv
- Book Type:

- Description: Description Awaited
Jalpari
- Author Name:
Ogawa Mimei +3
- Book Type:

- Description: जापान के सुप्रसिद्ध कथाकार ओगावा मिमेई, शिमाज़ाकी तोसोन तथा चित्रकार कोज़िमा मासाजिरो की प्रस्तुत बाल-रचनाएँ विविध प्रसंगों की दिलचस्प गाथाएँ हैं। ‘जलपरी’ फंतासी की दुनिया की सैर कराती है तो ‘कटोरी’ कला और उपयोगिता के बीच सामंजस्य स्थापित करती है ‘दो भाई’ धैर्य का पाठ पढ़ाती है तो ‘बाँसुरी’ संगीत के प्रभाव से मानव-हृदय के परिवर्तन की गाथा है।
Kisse Avadh Ke
- Author Name:
Jagdish Piyush
- Book Type:

-
Description:
— अवध के क़िस्सों की लम्बी यात्राएँ हैं। ये भगवान राम के साथ वन-वन घूमे
हैं, तो प्रवासी भारतीयों के साथ मारीशस, फ़िजी, गयाना आदि सुदूर देशों तक जाकर आज भी वहाँ सुने-कहे जा रहे हैं। श्रमिकों ने इन्हें खुले आसमान व वृक्षों के नीचे सुनाया, तो ग़रीबों ने झोंपड़ियों में और धनवानों ने महलों में, ऋषियों-मुनियों ने इन्हें वेदों, पुराणों, आरण्यक ग्रन्थों उपनिषदों, ‘रामायण’, ‘महाभारत’ आदि में अपनी शैली में समावेशित किया।
लोक साहित्य में विश्वासों में कोई सुदृढ़ तर्क योजना भले न दिखे, लेकिन, इनमें प्रतीक या अन्योक्ति की कई छवियाँ दिख जाती हैं। क़िस्सों में भूत-प्रेत, जादू-टोना, चमत्कार आदि का उल्लेख होता रहता है। इनका आनन्द लेकर इनमें उलझे बिना पाठक अपना अर्थ प्राप्त कर लेता है।
क़िस्से अवध के में सामाजिक सम्बन्धों का पूरा भूगोल दिखता है। इसे स्त्री-विमर्श और अस्मिता-विमर्श के दृष्टिकोण से भी पढ़ा जा सकता है। यह भी जाना जा सकता है कि भारतीय समाज की आन्तरिक संरचना में जाति और वर्ण आदि की सकारात्मक या नकारात्मक धारणाएँ क्या हैं?
इन क़िस्सों में शाश्वत मान्यताओं की पुष्टि रोचक ढंग से हुई है। इनमें सन्देश और मनोरंजन का मिला-जुला आस्वाद है।
Galicia Ki Kathayein
- Author Name:
Andrzej Stasiuk
- Book Type:

-
Description:
गालिसिया की कथाएँ स्ताशुक की प्रसिद्ध किताब है जिसका फ़िल्मीकरण भी हो चुका है। इस रचना की कहानी सरहदी, पिछड़े, देहाती इलाक़े में स्थित है, जहाँ लौकिक और अलौकिक दुनियाएँ एक-दूसरे में समाती प्रतीत होती हैं।
अंजेय स्ताशुक की कथा-शैली अत्यन्त चित्रात्मक और भावप्रवण है। विचित्र तथा आश्चर्यजनक हवालों से वे अपने पात्रों तथा कथा-संरचना को इतनी आकर्षक बना देते हैं कि पाठक एक अलग ही संसार में चला जाता है।
इस पुस्तक में मानव-जीवन की ज़मीनी हक़ीक़तों और असहायता की धुर सीमा पर स्थित ऐसे लोगों का चित्र-प्रवाह है जिन्हें दुनिया के हर कोने में देखा जा सकता है और जिनका जीवन हमें बार-बार सोचने पर मजबूर करता है।
Qissa-Qissa Lucknowaa
- Author Name:
Zilani Bano
- Book Type:

- Description: ्सागोई उर्दू ज़बान का कदीमी फ़न है, जिसे वक़्त के साथ भुला दिया गया था, लेकिन इधर कुछ लोगों की कोशिशों के चलते यह कला वापस मुख्यधारा में आ रही है। हिमांशु बाजपेयी इन्हीं जियालों में एक हैं। इस किताब में उनके लखनऊ से मुतल्लिक क़िस्से हैं जिन्हें उन्होंने लोगों से, बड़े-बूढ़ों से, किताबों से, और कुछ ख़ुद के अपने तजुर्बों से हासिल करके क़लमबंद किया है। कुछ क़िस्से हो सकता है, पहले आपने सुने हों, लेकिन यहाँ हिमांशु ने उन्हें जिस तरह पेश किया है, वह उन्हें उनके क़िस्से बना देता है। एक बात और, लखनऊ के बारे में क़िस्सों की बात आती है तो ध्यान सीधे नवाबों के क़िस्सों की तरफ़ चला जाता है, लेकिन ये क़िस्से आमजन के हैं। लखनऊ की गलियों-मुहल्लों में रहने-सहनेवाले आम लोगों के क़िस्से। इनमें उनके दु:ख-दर्द भी हैं, उनकी शरारतें भी हैं, उनकी हिकमतें और हिमाकतें भी हैं, गरज़ कि वह सब है जो हर आम शख़्स इतिहास द्वारा गढ़े किसी भी नवाब या बादशाह से बड़ी और ज़्यादा काबिले-यक़ीन शय बनता है। बकौल हिमांशु वाजपेयी ‘‘ये क़िस्से लखनऊ की मशहूर तहज़ीब के ‘जनपक्ष’ को उभारते हैं...ज़्यादातर क़िस्से सच्चे हैं। कुछ एक सच्चे नहीं भी हैं...।’’ लेकिन इंसान के रुतबे को बतौर इंसान देखने की उनकी मंशा एकदम सच्ची है। लखनऊ के नवाबों के क़िस्से तमाम प्रचलित हैं, लेकिन अवाम के क़िस्से किताबों में बहुत कम मिलते हैं, जो उपलब्ध हैं, वह भी बिखरे हुए। यह किताब पहली बार उन तमाम बिखरे क़िस्सों को एक जगह बेहद ख़ूबसूरत भाषा में सामने ला रही है, जैसे एक सधा हुआ दास्तानगो सामने बैठा दास्तान सुना रहा हो
Zoya Desai Cottege
- Author Name:
Pankaj Subeer
- Rating:
- Book Type:


- Description: ११ कहानियों का बेहतरीन संग्रह। ‘जोया देसाई कॉटेज’ कथाकार, ग़ज़लकार, व्यंग्यकार और संपादक पंकज सुबीर का सद्य: प्रकाशित कहानी संग्रह है। ‘जोया देसाई कॉटेज’ में उनकी ग्यारह लंबी कहानियाँ संकलित हैं– ‘स्थगित समय गुफा के फलाने आदमी’, ‘ढोंड़ चले जै हैं काहू के संगे’, ‘डायरी में नीलकुसुम’, खजुराहो’, ‘जाल फेंक रे मछेरे’, ‘जोया देसाई कॉटेज’, ‘जुली और कालू की प्रेमकथा में गोबर’, ‘रामसरूप अकेला नहीं जाएगा’, ‘उजियारी काकी हंस रही है’, ‘नोटा जान’, ‘हराम का अंडा’। इन कहानियों में अपनों का परायापन और परायों की संवेदनशीलता/ मानवीयता है। मशीनीकरण, मित्रों और आभासी दुनिया से पगलाया, विसंगति का शिकार आम आदमी है। दलित विमर्श और प्रथम किशोर प्रेम है, किन्नर की वेदना है। देहात्मबोधों की, प्रेम की प्यासी आत्माओं की, निरंकुश यौनाकांक्षाओं की चर्चा हैं। अफसरशाही की दरिंदगी है। निरंकुश और वस्तुवादी पितृसताक है।
Farishtey
- Author Name:
Rajendra Prasad Pandey
- Book Type:

-
Description:
राजेन्द्र प्रसाद पांडेय उन विरले कहानीकारों में से हैं, जो अपने समय, समाज और व्यक्ति के चेहरे पर ओढ़ी हुई कृत्रिम परतों को प्याज के छिलके की तरह उकेरकर तह में छिपे उसके वास्तविक चेहरे को पाठकों के सामने पेश कर देते हैं। ‘बड़प्पन-छुटपन’ ऐसी ही कहानी है। उनकी कहानियाँ व्यक्ति मनोविज्ञान के साथ सामाजिक और समूह मनोविज्ञान का अनुभवजन्य आख्यान भी हैं। वे शहरी और ग्रामीण, दोनों तरह की संवेदना के चितेरे कथाकार हैं। वे वहाँ के सामाजिक परिवेश, स्थिति-परिस्थति और संघर्ष के स्याह-सफेद पक्षों को आमने-सामने रखकर निर्णय के लिए पाठक को स्वतंत्र छोड़ देते हैं। वे समाज के तलहट में जीवनयापन करने वाले लोगों के जीवन के उस क्रूर और विकृत यथार्थ का दस्तावेजीकरण करते हैं, जो इससे पहले हिन्दी कथा संसार में लगभग अनुपस्थित था। उनकी कहानियाँ हर तरह के भ्रष्टाचार के विरुद्ध मुहिम छेड़ती हैं। उनकी कहानी ‘ठठरी’ इसका बेहतरीन उदाहरण है। कहानियाँ उनका अनुभवजन्य यथार्थ बनकर लोगों को संवेदित-उद्वेलित करती हैं, जिनमें देशज भाषा की छौंक सुगन्ध की तरह व्याप्त है। कहानियों का शिल्प बेहद चुस्त है। ‘फरिश्ते’ की कहानियाँ किसी वाद या आन्दोलन से न जुड़कर स्वतंत्रचेता लेखन की राह चलती हैं। इसलिए पाठक से तादात्म्य स्थापित कर उसे अलग तरह का पाठकीय आस्वाद प्रदान करती हैं।
—विनय दास
Pratinidhi Kahaniyan: Madhu Kankaria
- Author Name:
Madhu Kankariya
- Book Type:

- Description: मधु कांकरिया का कथा-प्रदेश अपने रचाव और आस्वाद में एकदम अलग है। वे समाज और जीवन को जस-का-तस उठाकर रचती हैं जिसमें समय अपनी समूची जटिलता में दिखाई पड़ता है। वे रेशा-रेशा करके यथार्थ को पुनर्रचित नहीं करतीं, यथार्थ के उलझे-पुलझे किसी टुकड़े को उठाकर उसे रेशा-रेशा देखती हैं। इसीलिए उनकी भाषा भी हमें समकालीन कथाकारों से भिन्न मालूम पड़ती है। समूचापन उनके शिल्प की विशेषता है; शायद यही कारण है कि उनकी कहानियों में, जैसे कि उनके उपन्यासों में भी, विषयों का दोहराव नहीं होता। वे एक जीवन-स्थिति को एक समस्या की तरह लेती हैं, और उसे समझते हुए आगे बढ़ती हैं। वे फ्रेम-दर-फ्रेम खुलती हैं और उनके पात्र अपने सम्पूर्ण परिवेश के साथ हमें अपने जीवन का हिस्सा बना लेते हैं। इस संचयन में उनकी दस कहानियाँ शामिल हैं।
Kentki Chiken Ka Swad
- Author Name:
Priyadarshan Malviya
- Book Type:

- Description: ियदर्शन मालवीय का यह तीसरा कहानी-संग्रह उनके पिछले लेखन में एक अगला क़दम है, क्योंकि इन कहानियों में प्रियदर्शन ने जीवन और अनुभव के नए संसार से भिड़न्त की है। इन कहानियों में हमारे बदलते हुए समय की क़लमकारी है। समय, समाज, गाँव और शहर की चुनौतियाँ संकट के नित नए चोर-दरवाज़े दिखा रही हैं। इसमें क्या किसान और क्या जवान, सब पिस रहे हैं। 'जाके पाँव न फटै बिवाई', 'जबरा की मार', 'रोम जब जल रहा था, नीरो बाँसुरी बजा रहा था' कहानियों में इनका संत्रास चित्रित हुआ है। 'जाके पाँव न फटै बिवाई' में मामा का चरित्र विकासोन्मुख भारत की विषमता उजागर करता है जब पाठक को यह पता चलता है कि उनके खेत बिक रहे हैं, बेटा बेरोज़गार है और बेटियाँ अनब्याही हैं। मामा देसी ठर्रा पीने लगे हैं क्योंकि यही उन्हें ख़ुदकुशी से बचाए रखने में समर्थ है। मामा कहते हैं, "जब विद्यार्थी था तो पढ़ा था, 'दुनिया के मज़दूरो एक हो...'—मगर मज़दूर तो एक नहीं हुए, हाँ व्यापारी और पूँजीपति ज़रूर एक हो गए और सब मिलकर किसानों को भी मज़दूर बनाकर बेड़ियाँ डालना चाहते हैं।" किसान दुर्दशा पर एक अन्य कहानी 'जबरा की मार' भी बताती है कि कैसे किसान आत्महत्या के लिए विवश होते हैं। पुलिस और प्रशासन के मुक्के और धक्के झेलने पर सबसे पहले मनोबल टूटता है। शीर्षक कहानी 'केंटकी चिकन का स्वाद' में भी लेखक ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा व्यवस्था के अन्दर जनता के सुधार या कल्याण की कामना शून्य है। तीखा व्यंग्य, मानवीय सरोकार, पात्रों के प्रति संवेदना संग्रह की कहानियों को अपूर्व आभा प्रदान करते हैं। —ममता कालि
Pitri Rin
- Author Name:
Prabhu Joshi
- Book Type:

-
Description:
प्रभु जोशी, कदाचित् हिन्दी के ऐसे कथाकार-चित्रकार हैं, जिन्होंने अपनी रचनात्मक मौलिकता के बलबूते पर, कला बिरादरी में भी राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर, कई सम्मान अर्जित कर, एक निश्चित पहचान बनाई है।
प्रस्तुत संग्रह में प्रभु जोशी की वे कहानियाँ हैं, जो सन् 1973 से 77 के बीच लिखीं-छपीं और जिन्होंने आज से कोई पैंतीस वर्ष पूर्व अपने गहरे आत्म-सजग, चित्रात्मक और लगभग एक सिस्मोग्राफ़ की तरह 'संवेदनशील भाषिक मुहावरे’ के चलते, 'धर्मयुग’, 'सारिका’, 'साप्ताहिक हिन्दुस्तान’ के विशाल पाठक-समुदाय के बीच, एक विशिष्ट सम्मानजनक जगह बनाई थी। और कहने की ज़रूरत नहीं कि ये कहानियाँ, समय के इतने लम्बे अन्तराल के बाद, आज भी, अपने पढ़े जाने के दौरान, बार-बार यह बताती हैं कि 'विचार’ और 'संवेदना’ को, कैसी अपूर्व दक्षता के साथ, एक अविभाज्य कलात्मक-यौगिक की तरह रखा जा सकता है।
हालाँकि, ये कहानियाँ मूल रूप से सम्बन्धों की ही कहानियाँ हैं, लेकिन इनमें सर्वत्र व्याप्त, वे तमाम दारुण दु:ख, हमारे ‘समय’ और ‘समाज’ के भीतर घटते उस यथार्थ को उसकी समूची ‘क्रूरता और करुणा’ के साथ प्रकट करते हैं, जो इस दोगली अर्थव्यवस्था का गिरेबान पकड़कर पूछते हैं कि 'कल के विरुद्ध बिना किसी कल के’ खड़े आदमी को, कौन इस अन्ध-नियति की तरफ़ लगातार ढकेलता चला आ रहा है?
बेशक, इन कहानियों में पात्र किसी ख़ास ‘विचारधारा’ के शौर्य से तमतमाए हुए नहीं हैं, लेकिन वे लड़ रहे हैं। और उनकी लड़ाई का प्राथमिक कारण, वह ‘सामाजिक कोप’ है, जो उनके वर्ग की नियति को बदलने के इरादे से, उनके स्वभाव की अनिवार्यता बन गया है। इसलिए निपट ‘देशज शब्द और मुहावरे’ कथा के भीतर की ‘हलातोल’ में, जीवन की कचड़घांद के त्रास को, पूरी पारदर्शिता के साथ रखते हैं।
इन कहानियों की भाषा, निश्चय ही, यों तो किसी दु:साध्य कलात्मक अभियान की ओर ले जाने की ज़िद प्रकट नहीं करती है, लेकिन उस 'अर्ध-विस्मृत गद्य के वैभव’ का अत्यन्त प्रीतिकर ढंग से पुन:स्मरण कराती है, जो पाठकीय विश्वसनीयता का अक्षुण्ण आधार रचने के काम में बहुधा एक कारगर भूमिका अदा करता है।
हो सकता है, कि कहानियों में व्याप्त ‘आत्मकथात्मक तत्त्व’, कहानी के परम्परागत ढाँचे की इरादतन की गई अवहेलना में, शिल्प की रूढ़-रेखाओं को लाँघकर, वहाँ ऐसे वर्ज्य इलाक़ों में लिए जाते हों, जहाँ कला नहीं, जीवन ही जीवन अपने हलाहल के साथ हो, लेकिन जब अभिव्यक्ति की सच्चाई ही रचना का अन्तिम प्रतिपाद्य बन जाए तो ऐसी अराजकताएँ, निस्सन्देह सर्वथा सहज, नैसर्गिक और एक अनिवार्य से 'विचलन’ का स्वरूप अर्जित कर लेती हैं। और कहना न होगा कि यह 'विचलन’ यहाँ प्रभु जोशी की इन कहानियों में, 'हतप्रभ’ करने की सीमा तक उपस्थित है और पूरी तरह स्वीकार्य भी। हाँ, हमें हतप्रभ तो यह भी करता है कि ऐसे कथा-समर्थ रचनाकार ने कथा-लेखन से स्वयं को इतने लम्बे समय तक क्यों दूर किए रखा?
Holi
- Author Name:
Pankaj Subeer
- Book Type:

- Description: Book
Chithhi Jo Padhee Nahin Gai
- Author Name:
Krishna Ambashth
- Book Type:

-
Description:
कहानीकार, कवि, व्यंग्यकार और निबन्धों पर भी सफलतापूर्वक हाथ आज़माने वाले कृष्ण अम्बष्ठ का यह कहानी-संग्रह पारिवारिक रिश्तों से लेकर प्रशासनिक दुनिया में फैले लोभ-लालच के बीहड़ तक को खँगालता है।
संग्रह में शामिल इक्कीस कहानियाँ अपने विषय-वैविध्य के अलावा पठनीयता के लिए भी उल्लेखनीय हैं। मध्यवर्गीय और निम्न-मध्यवर्गीय जीवन से लिए गए पात्रों के मन और परिवेश की लेखक को गहरी समझ है जो इन कहानियों की बुनावट में जाहिर होती है। आर्थिक अभाव के चलते अपने मानवीय आग्रहों से बरबस च्युत होते हुए लोग, ऊँचे पदों पर बैठे हुए लोगों की स्वाभाविक हो चली क्रूरता और दूसरी तरफ़ पूजा-पाठ आदि का आडम्बर—यह सब एक पूरी दुनिया की तरह यहाँ प्रकट होता है।
अपने आसपास की वस्तुओं और लोगों का ‘ऑब्जर्वेशन’ कृष्ण अम्बष्ठ की इन कहानियों की पठनीयता को रोचक और सहज बना देता है। ‘माइल स्टोन’ शीर्षक कहानी की ये पंक्तियाँ देखें : “कई घरों में एक से अधिक घडि़यों के रहने पर भी उनकी मिनटवाली सुइयों में आपसी तालमेल का अभाव-सा रहता है।” निजी जीवन में लेखक के बहुरंगी अनुभवों की छटा इन कहानियों के कलेवर को विस्तृत करती है, और विश्वसनीय भी बनाती है।
23 Hindi Kahaniyan
- Author Name:
Jainedra Kumar
- Book Type:

-
Description:
प्रस्तुत पुस्तक '23 हिन्दी कहानियाँ' में हिन्दी जगत के श्रेष्ठतम साहित्यकारों की तेईस श्रेष्ठ कहानियाँ संग्रहीत हैं। कहानीकारों ने अपनी कहानियों के माध्यम से समाज को जगाने की कोशिश की है। कथ्य में कथानक से अधिक मर्मस्थितियों के चित्रण और मानसिक उद्घाटन पर बल दिया गया है। जीवन के आरम्भ से आज तक कहानी का एक ही उद्देश्य रहा है, जीवन के उपकरणों द्वारा अपने को व्यक्त करना। और जहाँ तक रूपों का प्रश्न है, वह कहानी कहनेवाले या लिखनेवाले पर निर्भर है। हर व्यक्ति अपने आपमें अपवाद है। उसके व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति के रूप में उसकी कहानी की विशिष्टताएँ भी होती हैं। न हों, तो कहानी क्या? जो सर्वसामान्य को प्राप्त है; उसे देने का प्रयोजन नहीं रहता। इसीलिए हर कहानीकार का निजी वैशिष्ट्य ही उसकी कहानी के आकर्षण की रचना करता है।
आशा है सामाजिक परिवेश के वातावरण की कहानियाँ पाठकों के लिए संग्रहणीय होंगी।
Chot
- Author Name:
Chandan Pandey
- Book Type:

-
Description:
चर्चित और सर्वप्रिय कथाकार चन्दन पाण्डेय की ये कहानियाँ बहुत तेज़ी से बदल रही इस दुनिया और उसके साथ ही बदल रहे मानवीय, पारिवारिक और सामाजिक सम्बन्धों के समीकरणों को बेहद निर्मम तटस्थता से उघाड़ती हैं। संग्रह की शीर्षक कथा ‘चोट’ में जो चोट है, वह अलग-अलग रूपों में संग्रह में शामिल सातों कहानियों में महसूस होती है। एक चोट है जो हममें से हर कोई या तो खा रहा है या किसी को दे रहा है।
‘चोट’ का अनिरुद्ध जिसने दफ़्तरी ऊब से ऊपर उठने और अपने तानाशाह-मिजाज़ अधिकारियों को चोट पहुँचाने का अपना एक खिलंदड़ा-सा तरीक़ा निकाला है, आख़िरकार अपने मक़सद में सफल तो होता है लेकिन नौकरी की क़ीमत पर। ‘दूब की वर्णमाला’ का नायक अपनी चोट के पीछे छिपकर ही गली के दबंगों से बचता है और अपने देनदारों से भी जो उसकी टाँग कटाकर ब्याज वसूलने की फ़िराक़ में थे।
‘गाँठ’ कहानी भी एक चोट पर ही ख़त्म होती है, जिसका लक्ष्य शहरी मध्यवर्ग की भीतरी जड़ता को तोड़ना है। ‘पितृपक्ष’ के जंगी पाण्डे की चोट तो शायद सबसे गहरी है। भारतीय समाज के जाति-समीकरणों में आए निर्णायक बदलाव को यह कहानी अत्यन्त कुशलता से चिन्हित करती है।
भाषा को नया करने और उसकी सम्प्रेषणीयता को वाक्य-दर-वाक्य विस्तृत करने की क्षमता चन्दन पाण्डेय की इन सभी कहानियों में बराबर दिखाई देती है। ‘शुभकामना का शव’ इस लिहाज से बेहद प्रभावशाली कहानी है; और अपनी विषय-वस्तु में इतनी भीषण कि आप सिहर उठते हैं।
‘वैधानिक गल्प’ और ‘कीर्तिगान’ जैसे उपन्यासों और कई असाधारण कहानियों से अपने कौशल का लोहा मनवा चुके चन्दन पाण्डेय का यह संग्रह निश्चय ही उनके पाठकों की उम्मीदों पर पूरा उतरेगा।
Pratinidhi Kahaniyan : Amarkant
- Author Name:
Amarkant
- Book Type:

- Description: अमरकान्त की कहानियों में मध्यवर्ग, विशेषकर निम्न-मध्यवर्ग के जीवनानुभवों और जिजीविषाओं का बेहद प्रभावशाली और अन्तरंग चित्रण मिलता है। अक्सर सपाट-से नज़र आनेवाले कथ्यों में भी वे अपने जीवन्त मानवीय संस्पर्श के कारण अनोखी आभा पैदा कर देते हैं। सहज-सरल रूपबन्धवाली ये कहानियाँ ज़िन्दगी की जटिलताओं को जिस तरह समेटे रहती हैं, कभी-कभी उससे चकित रह जाना पड़ता है। लेकिन यह अमरकान्त की ख़ास शैली है। अमरकान्त के व्यक्तित्व की तरह उनकी भाषा में भी एक ख़ास क़िस्म की फक्कड़ता है। लोक-जीवन के मुहावरों और देशज शब्दों के प्रयोग से उनकी भाषा में माटी का सहज स्पर्श तथा ऐसी सोंधी गन्ध रच-बस जाती है जो पाठकों को किसी छद्म उदात्तता से परे, बहुत ही निजी लोक में ले जाती है। उनमें छिपे हुए व्यंग्य से सामान्य स्थितियाँ भी बेहद अर्थव्यंजक हो उठती हैं। अमरकान्त के विभिन्न कहानी-संग्रहों में चरित्रों का विशाल फलक ‘ज़िन्दगी और जोंक’ से लेकर ‘मित्र मिलन’ तक फैला हुआ है। उन्ही संग्रहों की लगभग सब चर्चित कहानियाँ एक जगह एकत्र होने के कारण इस संकलन की उपादेयता निश्चित रूप से काफ़ी बढ़ गई है।
Shahar Ki Aakhiri Chidiya
- Author Name:
Prakash Kant
- Book Type:

- Description: Short Stories
Jhooth Ka Ped
- Author Name:
Gaur Hari Das
- Book Type:

-
Description:
प्रख्यात ओड़िया कथाकार ‘गौरहरि दास’ की कहानियाँ पहली नज़र में ही गाँवों के यथार्थपरक चित्रों और यादगार चरित्रों से पाठक को परिचित करा देती हैं। उनकी कहानियों में एक तरफ़ आम बोलचाल की सहज-सरल भाषा है तो दूसरी तरफ़ ओडिशा के भद्रक अंचल का सुवास, लेकिन वे अंचल विशेष के कथाकार नहीं हैं। संग्रह की नामधर्मा रचना 'झूठ का पेड़' हो या अन्य कहानी ‘घर’, वे गाँव को शहर से और शहर को गाँव से जोड़ देती हैं।
ओडिशा के जनजीवन को समग्रता में पेश करते हुए बिना किसी भाषायी या शिल्पगत चमत्कार के गौरहरि ने सृजन के शिखर छुए हैं, लेकिन इसके लिए उन्होंने न तो किसी देशी-विदेशी दर्शन का सहारा लिया, न ही किसी तरह के बौद्धिक तामझाम खड़े किए। जन-संचार माध्यमों से अपनी सम्पृक्ति के चलते वे जानते हैं कि जनधर्मी सृजन के लिए किसी दर्शन या वाद से जुड़ने के बजाय सामान्यजन से सीधे जुड़ना ज़्यादा उचित है; और हम जानते हैं कि गौरहरि देश के बड़े कथाकार-पत्रकार ही नहीं, आमजन के शुभेच्छु भी हैं।
ओडिशा के गाँवों और शहरों की प्राकृतिक सुषमा के साथ वहाँ की जीती-जागती ज़िन्दगी और अमीरी-ग़रीबी का संघर्ष देखना हो तो किसी समाजशास्त्री की पोथी पढ़ने के बजाय गौरहरि की कहानियाँ पढ़ना ज़्यादा उपयोगी होगा, क्योंकि समाज में व्याप्त ऊँच-नीच को चित्रित करते हुए नए-पुराने सामन्तवाद को भी गौरहरि ने प्रश्नाकुल दृष्टि से देखा है। वे अपने समाज की राई-रत्ती जानने के साथ उसे अभिव्यक्त करने की कला में भी पारंगत हैं। उनकी कहानियों में हम भारतीय चेतना के अन्तरंग चित्रों को साक्षात् देखते ही नहीं, महसूस भी करते हैं।
Baghin Ki Sawari
- Author Name:
Chandrakishore Jaiswal
- Book Type:

- Description: ‘बाघिन की सवारी’ संग्रह की कहानियाँ जीवन और समाज का एक वृहद ‘स्पेक्ट्रम’ पाठक के सामने रखती हैं। एक के बाद एक कहानी से गुजरते हुए हम कहीं गहन करुणा से आप्लावित होते हैं तो कहीं अपनी दुनिया की विसंगतियों से क्षुब्ध। कहीं किसी पात्र की असहायता हमें भिगो देती है तो कहीं किसी का संकल्प हमें आजादी की एक दिशा दे जाता है। ‘सहेलियाँ’ शीर्षक कहानी में दो सखियों की तरह प्रेम और विवाह जैसे विषयों पर खुलकर बतियातीं माँ वत्सला और बेटी गुंजन ऐसे ही पात्र हैं जो धीरे-धीरे बदलते हमारे समय को परम्परा की धारा से एकदम नहीं तोड़ना चाहते और नई सम्भावनाओं—परिवर्तनों से मुँह भी नहीं फेरते। वहीं ‘बेटा का घर’ कहानी के हताश माँ-पिता अपने परिवार में मगन बेटे के व्यवहार और अपनी विवशताओं को सोच आँख गीली कर लेते हैं, और पाठक को मौजूदा समय के प्रति सचेत कर जाते हैं। वृद्धावस्था और उससे जुड़े दुखों पर ये कहानियाँ बार-बार दृष्टिपात करती हैं। यह ऐसा विषय है जिस पर चन्द्रकिशोर जायसवाल अकसर लौटे हैं। इस संग्रह में ‘रोवनहार’ शीर्षक कहानी पूरी तरह इसी विषय पर केन्द्रित है जहाँ चार बेटों और बहुओं-पोतों से भरे घर में रामजनम चौधरी को वास्तविक लगाव अपने किराएदार की बच्ची से मिलता है, उन्हें लगता है कि उनके मरने पर और भले कोई न रोए वह जरूर रोएगी। संग्रह की शीर्षक कथा ‘बाघिन की सवारी’ सत्ता और सुख से मोहभंग और लगाव की लम्बी कहानी है जिसमें हमारी मुलाकात जवानी में साधु बने एक ऐसे व्यक्ति से होती है जो बीस साल बाद वापस, कदम-दर-कदम चलते हुए समाज और उसके सत्ता-व्यूह में दाखिल होता है।
Katha Saptak - Dheerendra Asthana
- Author Name:
Dhirendra Asthana
- Book Type:

- Description: collection of seven brilliant stories - बहादुर को नींद नहीं आती - पराधीन - मेरी फ़र्नांडीस क्या तुम तक मेरी आवाज़ पहुँचती है? - उस रात की गंध - मुहिम - और आदमी रोया - चीख
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book