The Sentient God
(2)
Author:
Santanu Kumar AcharyaPublisher:
Sahitya AkademiLanguage:
EnglishCategory:
Short-story-collections₹
150
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"The Sentient God" is a collection of award-winning Odia short stories written by Santanu Kumar Acharya. The book includes 11 stories that are rooted in folklore and myth and cover a range of genres, including fantasy, humor, horror, crime, and romance. The stories are set in villages, small towns, and cities, and will entertain and lighten the mood while also prompting readers to reflect on deep questions about life. In this book, Acharya experiments with the occult and theoretical postulations in stories like "The Sentient God," "The Witness Tree," "The Dream" and "A Moonlit Night on the College Campus." He was an idealist in his life and never compromised with the establishment, and this is reflected in other stories like "Glasnost," "A Telephone Call," and "August 15," which intend to expose the flaws of the political and bureaucratic system of the present time. Overall, "The Sentient God" cements Acharya's reputation as one of the decade's most inventive and successful Odia short story writers. As all great stories do, these stories have the power to make readers see the world differently.
Read moreAbout the Book
"The Sentient God" is a collection of award-winning Odia short stories written by Santanu Kumar Acharya. The book includes 11 stories that are rooted in folklore and myth and cover a range of genres, including fantasy, humor, horror, crime, and romance. The stories are set in villages, small towns, and cities, and will entertain and lighten the mood while also prompting readers to reflect on deep questions about life.
In this book, Acharya experiments with the occult and theoretical postulations in stories like "The Sentient God," "The Witness Tree," "The Dream" and "A Moonlit Night on the College Campus." He was an idealist in his life and never compromised with the establishment, and this is reflected in other stories like "Glasnost," "A Telephone Call," and "August 15," which intend to expose the flaws of the political and bureaucratic system of the present time.
Overall, "The Sentient God" cements Acharya's reputation as one of the decade's most inventive and successful Odia short story writers. As all great stories do, these stories have the power to make readers see the world differently.
Book Details
-
ISBN9789355483447
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Pages88
-
Avg Reading Time3 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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मिथिलेश्वर की ये लम्बी कहानियाँ शोषण, अन्याय, अत्याचार, अन्धविश्वास और सर्वग्रासी भ्रष्टाचार के प्रति संवेदनशील रचनाकार मन की तीखी प्रतिक्रियाएँ हैं, जिनके माध्यम से वह इन सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध एक प्रतिकूल वातावरण तैयार करने की चेतना जाग्रत करते हैं। इस तरह उनकी कहानियाँ कथा-सूत्रों एवं चरित्रों के माध्यम से सभ्यता की समीक्षा भी हैं।
मिथिलेश्वर अपनी इन लम्बी कहानियों में हमारे समय की ज्वलन्त समस्याओं को उनके अन्तर्विरोधों के साथ मारक रूप में प्रस्तुत करते हैं, जिससे ये कहानियाँ अनियंत्रित, अमर्यादित, अपसंस्कृति को बेनक़ाब करती हुई वर्गीय चेतना को प्रामाणिक रूप में व्यक्त करती हैं। लोगों की बद्धमूल धारणाएँ, मानसिक पिछड़ापन, बदलते सामाजिक-आर्थिक सम्बन्ध, पारिवारिक ढाँचे में बदलाव, धर्म, संस्कृति एवं अर्थसत्ता का अन्तर्सम्बन्ध, असहिष्णुता, संवेदनहीनता और संकीर्णता में अनपेक्षित वृद्धि, सत्ता की संस्कृति एवं लोकतंत्र की पतनशीलता के परिणाम-जैसे पक्ष इन लम्बी कहानियों की संरचनाओं में समाहित है।
इन कहानियों को पढ़ते हुए कुछ समाजशास्त्रीय अवधारणाएँ भी स्पष्ट होती हैं। असहाय एवं उपेक्षित लोगों के प्रति संवेदनशील दृष्टि और उनके अस्तित्व को स्थापित करने का प्रयास इन लम्बी कहानियों को सार्थक एवं सफल बनाते हैं। इन कहानियों में जीवन का राग है तथा तपती और खुरदरी ज़मीन पर नंगे पाँव चलने का एहसास है। इस रूप में ये कहानियाँ पाठकों के अन्दर आलोचनात्मक विवेक जागृत करने में सक्षम एवं सफल हैं।
कहने की आवश्यकता नहीं कि मिथिलेश्वर की ये लम्बी कहानियाँ असाधारण महत्त्व की कहानियाँ हैं, जो न सिर्फ़ पठनीय हैं, बल्कि संग्रहणीय एवं उल्लेखनीय भी हैं।
Life-Line
- Author Name:
Mukul Joshi
- Book Type:

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Description:
सैनिकों की बात करते ही हमारे मन में उनकी वह छवि उभरती है जिसमें वह वर्दी पहने और हथियार लिये हुए सीमा पर मुस्तैदी से खड़े हैं। ये छवि उनकी बहादुरी और देश के प्रति अथाह निष्ठा के बारे में तो बताती है पर यह नहीं बताती कि वे भी उतने ही साधारण या असाधारण मनुष्य हैं जितना कि कोई दूसरा हो सकता है।
सैनिकों के दुर्दम्य जीवन और उनके सुखों-दुखों पर केन्द्रित मुकुल जोशी के कहानी-संग्रह ‘लाइफ़-लाइन’ में कुल ग्यारह कहानियाँ हैं। ये कहानियाँ सैनिकों के जीवन की इस रूढ़ छवि को जितना पुष्ट करती हैं उतना ही ध्वस्त भी करती हैं। ऐसा करते हुए ये ऐसे सैनिकों को हमारे सामने ले आती हैं जिनके प्रति सिर्फ सम्मान ही नहीं जागता बल्कि उनसे हम कुछ उस तरह से भी प्रेम या लड़ाई कर सकते हैं जैसे अपने किसी भाई या दोस्त के साथ करते हैं। इन कहानियों में 'जैतूनी हरे रंग में डूबे हुए' सैनिकों का जीवन उनके सुख-दुख, स्वप्न-दुःस्वप्न इतने साफ और पारदर्शी रूप में सामने आए हैं कि इसे पढ़ते हुए हम उन्हें सैनिक के रूप में देखने के साथ-साथ मनुष्य के रूप में भी देख पाते हैं। इसे पढ़ते हुए हम बार-बार जानते हैं कि वे अपने पीछे एक गौरव के साथ-साथ बहुत सारा खालीपन छोड़ जाते हैं जिसे कभी भी नहीं भरा जा सकता।
—मनोज कुमार पांडेय
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