Pratinidhi Kahaniyan: Madhu Kankaria
Author:
Madhu KankariyaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections0 Ratings
Price: ₹ 159.2
₹
199
Available
मधु कांकरिया का कथा-प्रदेश अपने रचाव और आस्वाद में एकदम अलग है। वे समाज और जीवन को जस-का-तस उठाकर रचती हैं जिसमें समय अपनी समूची जटिलता में दिखाई पड़ता है। वे रेशा-रेशा करके यथार्थ को पुनर्रचित नहीं करतीं, यथार्थ के उलझे-पुलझे किसी टुकड़े को उठाकर उसे रेशा-रेशा देखती हैं। इसीलिए उनकी भाषा भी हमें समकालीन कथाकारों से भिन्न मालूम पड़ती है। समूचापन उनके शिल्प की विशेषता है; शायद यही कारण है कि उनकी कहानियों में, जैसे कि उनके उपन्यासों में भी, विषयों का दोहराव नहीं होता। वे एक जीवन-स्थिति को एक समस्या की तरह लेती हैं, और उसे समझते हुए आगे बढ़ती हैं। वे फ्रेम-दर-फ्रेम खुलती हैं और उनके पात्र अपने सम्पूर्ण परिवेश के साथ हमें अपने जीवन का हिस्सा बना लेते हैं। इस संचयन में उनकी दस कहानियाँ शामिल हैं।
ISBN: 9789360866228
Pages: 160
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Description:
कथा-साहित्य में अक्सर ही नारी का चित्रण पुरुष की आकांक्षाओं (दमित आकांक्षाओं) से प्रेरित होकर किया गया है। लेखकों ने या तो नारी की मूर्ति को अपनी कुंठाओं के अनुसार तोड़-मरोड़ दिया है, या अपनी कल्पना में अंकित एक स्वप्नमयी नारी को चित्रित किया है।
लेकिन मन्नू भंडारी की कहानियाँ न सिर्फ़ इस लेखकीय चलन की काट करती हैं, बल्कि आधुनिक भारतीय नारी को एक नई छवि भी प्रदान करती हैं। मन्नू जी नारी के आँचल को दूध और आँखों को व्यर्थ के पानी से भरा दिखाने में विश्वास नहीं रखतीं। वे उसके जीवन-यथार्थ को उसी की दृष्टि से धरातल पर रचती हैं, लेकिन इस बात का भी ध्यान रखती हैं कि कहानियों का यथार्थ कहानी के कलात्मक सन्तुलन पर भारी न पड़े। इससे मन्नू जी का कथा-संसार बहुत अपना और आत्मीय हो उठता है।
यही सच है मन्नू भंडारी की अनेक महत्त्वपूर्ण कहानियों का बहुचर्चित संग्रह है। स्मरणीय है कि यही सच है शीर्षक-कहानी को रजनीगंधा नामक फ़िल्म के रूप में फ़िल्माया गया था।
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