Pratinidhi kavitayen : Rajesh Joshi
Author:
Rajesh JoshiPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Poetry0 Ratings
Price: ₹ 159.2
₹
199
Available
राजेश जोशी की कविताओं को पढ़ना एक पीढ़ी और उसके समय से दस-पन्द्रह साल पीछे की कविता और उससे जुड़ी बहसों के बारे में सोचना, और इतने ही साल आगे की कविता और उसकी मुश्किलों की ओर ताकना है।</p>
<p>कविता की एक संश्लेषी परम्परा रही है, जिसके भीतर राजेश जोशी की सक्रियता देखी जा सकती है। इसी बात ने उन्हें ख़ास पहचान दी और समकालीन कविता को भी। केदारनाथ सिंह का यह कथन बिलकुल दुरुस्त है कि ‘राजेश जोशी आज की कविता के उन थोड़े से महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षरों में हैं, जिनसे समकालीन कविता की पहचान बनी है।’</p>
<p>राजेश जोशी की ‘समझ’ से समकालीन कविता और उसकी नई पीढ़ी अभिन्न है।</p>
<p>कविता की एक संश्लेषी परम्परा, जो पीछे ही नहीं आगे भी जाती है। इसमें प्रतिरोध और प्रतिबद्धता है तो पर्याप्त लोच भी है।
ISBN: 9788126724123
Pages: 144
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: हिन्दी की युवा पीढ़ी के सक्रिय हस्ताक्षर संजीव मज़दूर झा का यह पहला कविता संग्रह कवि की संभावनाओं को प्रकाशित करते हुए हमें आश्वस्त करता है कि संजीव सरीखे कवियों के माध्यम से कविता का प्रतिरोधी और आलोचनात्मक स्वर निरंतर शक्तिशाली बना रहेगा। संजीव ने अपने आसपास की दुनिया को सीधी-सपाट, परंतु जीवंत और तेज भाषा में व्यक्त किया है। इस संदर्भ में सिर और लाठी शीर्षक कविता विशेष रूप से रेखांकित करने योग्य है जो वर्तमान व्यवस्था के सभी पक्षों को बेनकाब करती हुई मनुष्य के सोचने की ताकत और साहस का यशोगान करती है। कवि ने सुचिंतित निर्णय के साथ अधिकतर कविताओं में भाषा को अभिधात्मक रखा है जिससे कविता सहज और सम्प्रेष्य तो बनती ही है साथ ही बेहद प्रभावकारी भी बन जाती है। संजीव मज़दूर गरीबों, दलितों और स्त्रियों के पक्षकार हैं। वह निर्ममता के साथ वर्ण व्यवस्था और पुरुष वर्चस्व पर चोट करते हैं। उनकी कविता स्वतंत्र, न्यायपूर्ण समाज के स्वप्नों से प्रेरित है। साथ ही, जीवन और प्रकृति के कुछ मनोरम चित्र भी यहाँ मिलते हैं जो कवि के आयतन को विस्तार देते हैं। संजीव झा मज़दूर की ये कविताएँ इसलिए भी विचारणीय हैं कि यहाँ नयी पीढ़ी के एक कवि की दृृष्टि से समकालीन जीवन को देखने-समझने का अवसर हमें मिलता है। भाषा और संवेदना के नये आचरण तथा कोण यहाँ मिलते हैं— जब विकास नहीं था दुनिया थी जब तंत्र नहीं था लोक था एक दिन फिर तुम न होगे पर हम होंगे यही विश्वास और साहसिक आशा आज हमें चाहिए। संजीव मज़दूर झा की सर्वोत्तम कविताएँ इन्हीं मूल्यों का प्रकाश स्तम्भ हैं। —अरुण कमल
Jagannath Ka Ghoda
- Author Name:
Ravindra Bharti
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Description:
विशाल, विराट और महान दिखनेवाली चीज़ें जीवन का स्रोत नहीं होतीं, उन्हें विशेष अवसरों पर, कुछ आयोजित-प्रायोजित मन:स्थितियों में देखने और वापस आकर भूलने के लिए देखा जाता है। वे हमारे उन दिनों और रातों की साथी नहीं बनतीं जिनसे हम बनते हैं, हमारा जीवन बनता है, हमारा दैनन्दिन, हमारे अतीत और वर्तमान बनते हैं।
रवीन्द्र भारती की ये कविताएँ ऐसी ही छोटी चीज़ों की अभ्यर्थना करती हैं। 'गृहस्थ की गृहस्थी' एक कविता है जिसमें घर में आई एक नई कटोरी का स्वागत किया जा रहा है 'यह हमारी पात्र है/इसके पात्र हैं हम/ पात्र-परिचय होगा, धीरे-धीरे बढ़ेगा हेल-मेल।'
'आपा-धापी' एक कविता है जिसमें लोकन ट्रेनों और बसों की लगातार गतिमान भीड़ में एक नामालूम से रिश्ते की पहचान की गई है। रोज़-रोज़ दिखनेवाले चेहरों के बीच बननेवाला एक अबोला रिश्ता—'निर्दोष आँखों की मौन कथा/चली जाती है किसी की, किसी के साथ अकारण/अकारण ही होती है चिन्ता/जब कोई दिखता नहीं दो-चार दिन।' यह 'अकारण' जगत-गति के बड़े कहे जानेवाले सुपरिभाषित कारणों का अचीन्हा-सा स्थानापन्न है, और जीवन की डोर को थामे रखने में इसकी भी बहुत बड़ी भूमिका है।
इन कविताओं में ऐसी अनेक चीज़ें, दृश्य, पंक्तियाँ, और चित्र हैं जो हमें हमारे अनजाने ही हमारी साधारणता में आश्वस्ति भर देते हैं, जो कहते हैं कि बड़ी-बड़ी ताक़तों की दूर से दिखाई देनेवाली आकर्षक और महान आकृतियों से पहले हमारे पास भी ऐसा बहुत कुछ है जो उनके सब कुछ का विकल्प हो सकता है। मसलन 'कुलिया-चुनिया' की नन्ही बच्ची की कल्पित दुनिया जिसमें कवि अनायास सच-झूठ के स्याह-सफ़ेद में विभाजित अपनी वास्तविक दुनिया से मुक्त होकर सहर्ष चला जाता है।
देशज शब्दों, देशज सौन्दर्यबोध और देशज आत्माभिमान से रची इन कविताओं से गुज़रते हुए आप धीरे-धीरे अपनी दुनिया के सूक्ष्म से परिचित होते हैं जो वास्तव में बहुत बड़ा है।
Herstory
- Author Name:
Neha Bansal
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- Description: Herstory is a new collection of poems by Neha Bansal, a civil servant, providing a fresh perspective on the lives of others.
Piramid Mein Ham
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Surendra Raghuvanshi
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- Description: Collection of Hindi Poems by Surendra Raghuvanshi
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