Betiyaan Mannu Ki
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‘बेटियाँ मन्नू की’—नाटक में वे पात्र और उनका वह जीवन है जिसे पहले मन्नू भंडारी अपनी कहानियों में और अपने उपन्यास में लाईं, वहाँ उन्हें नया जीवन दिया, नई सोच दी और अब उनमें से कुछ इस नाटक में हमारे आज के रू-ब-रू हो रहे हैं। यहाँ ये पात्र अपनी रचयिता से भी बात करते हैं, एक-दूसरे से भी और हमसे भी। ‘आपका बंटी’ उपन्यास के बंटी और शकुन के अलावा इसमें नौ और कहानियों के किरदार हैं और सब मिलकर उस समय को समझने की कोशिश कर रहे हैं, जब उन्हें रचा गया; जानने की कोशिश करते हैं कि उन्हें वही रूप क्यों दिया; उनकी नियति वही क्यों थी, कुछ और क्यों नहीं! और इस तरह कई नये सवाल और कई सवालों के जबाव हमारे सामने खुलते हैं।</p> <p>अलग-अलग कहानियों के पात्रों का यह बोलता कोलाज न सिर्फ उन चरित्रों को एक नई रोशनी में हमारे सामने लाता है, बल्कि कथाकार मन्नू भंडारी को समझने में भी हमारी मदद करता है।</p> <p>नाटक विधा में यह एक दुर्लभ किस्म का प्रयोग है; दिलचस्प प्रयोग!
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‘बेटियाँ मन्नू की’—नाटक में वे पात्र और उनका वह जीवन है जिसे पहले मन्नू भंडारी अपनी कहानियों में और अपने उपन्यास में लाईं, वहाँ उन्हें नया जीवन दिया, नई सोच दी और अब उनमें से कुछ इस नाटक में हमारे आज के रू-ब-रू हो रहे हैं। यहाँ ये पात्र अपनी रचयिता से भी बात करते हैं, एक-दूसरे से भी और हमसे भी। ‘आपका बंटी’ उपन्यास के बंटी और शकुन के अलावा इसमें नौ और कहानियों के किरदार हैं और सब मिलकर उस समय को समझने की कोशिश कर रहे हैं, जब उन्हें रचा गया; जानने की कोशिश करते हैं कि उन्हें वही रूप क्यों दिया; उनकी नियति वही क्यों थी, कुछ और क्यों नहीं! और इस तरह कई नये सवाल और कई सवालों के जबाव हमारे सामने खुलते हैं।</p>
<p>अलग-अलग कहानियों के पात्रों का यह बोलता कोलाज न सिर्फ उन चरित्रों को एक नई रोशनी में हमारे सामने लाता है, बल्कि कथाकार मन्नू भंडारी को समझने में भी हमारी मदद करता है।</p>
<p>नाटक विधा में यह एक दुर्लभ किस्म का प्रयोग है; दिलचस्प प्रयोग!
Book Details
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ISBN9789348157591
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Pages88
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Avg Reading Time3 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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‘मुआवज़े’ भीष्म साहनी के पहले तीन नाटकों से इस अर्थ में अलग है कि इसकी पृष्ठभूमि वर्तमान में स्थित है और इसका मिज़ाज व्यंग्य तथा हास्यप्रधान है। हालाँकि इसकी विषयवस्तु में भी समाज और व्यवस्था के वे सब स्याह पक्ष शामिल हैं जिनको अक्सर भीष्म साहनी ने अपने उपन्यासों, कहानियों और नाटकों में उघाड़ा है। साम्प्रदायिक दंगों और उसमें शिकार लोगों को मिलनेवाले मुआवज़े को लेकर बुना गया इस नाटक का कथानक पुलिस, प्रशासन, राजनेताओं और व्यावसायिक तबके के स्वार्थी और संवेदनहीन रवैये को दर्शाता है। साथ ही मुआवज़े के लिए ग़रीब श्रमिक वर्ग के लोगों की हताश कोशिशों की विडम्बना को भी इसमें पकड़ा गया है। नाटक की विशेषता यह है कि व्यंग्य के लिहाज़ से इतने संवेदनशील विषय और लगभग पैंतीस पात्रों और अनेक समूह-दृश्यों के बावजूद नाटक की गति कहीं शिथिल होती नहीं दिखती, और न ही कहीं नाटककार के सरोकार हँसी के तूफ़ान में ग़ायब होते हैं। शायद यही कारण है कि देश के कितने ही रंग-समूह, निर्देशक और रंगकर्मी इस नाटक को खेलते रहे हैं और दर्शक आज भी इसके मंचन की प्रतीक्षा करते रहते हैं।
Barff
- Author Name:
Saurabh Shukla
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सही और ग़लत के बीच किसी राह की तलाश की तरह है–सौरभ शुक्ला का ‘बर्फ़’।
–‘द हिन्दू’
‘बर्फ़’ नाटक जैसा देखने में है, जितना दिखता है, उससे कहीं ज़्यादा अनुभव के स्तर पर नाटक है।
–‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’
सच की बेहतरीन नाट्य-प्रस्तुति।
–‘सन्डे गार्डियन’
‘बर्फ़’ जितना भयानक है उतना ही मानवीय भी है। सौरभ ने एक पतली रस्सी पर चलने जैसा ख़तरनाक काम किया है, जिसमे वे पूरी तरह सफल हुए हैं। रंगमंच की दुनिया का यह चकित करनेवाला काम है।
–सुधीर मिश्रा
Chaturbhani
- Author Name:
Motichandra +1
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'चतुर्भाणी’ एक विलक्षण क्लैसिक है : मूल में बोलचाल की संस्कृत और लोक-जीवन की छटाओं का रोचक और नाटकीय इज़हार है और अनुवाद में बनारसी बोली का चटपटा रस-भाव। बरसों पहले ब.व. कारन्त ने उज्जैन के कालिदास समारोह के लिए 'चतुर्भाणी’ की रंग-प्रस्तुति की थी। डॉ. मोतीचन्द्र द्वारा अनूदित और डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल द्वारा विस्तार से समझाई गई इस कृति को नए संस्करण में प्रस्तुत करते हुए हमें गहरा सन्तोष है। भारतीय परम्परा की दुर्व्याख्या के इस अभागे समय में यह कृति याद दिलाती है कि हमारी परम्परा में कैसी रसिकता और लोक-जीवन का उन्मुक्त रचाव रहा है जो कहीं से भी किसी संकीर्णता में बाँधा नहीं जा सकता।
—अशोक वाजपेयी
Agni Aur Barkha
- Author Name:
Girish Karnad
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इतिहास, पुराण, जातक और लोकथाएँ गिरीश कारनाड के लिए सर्वाधिक समृद्ध उत्प्रेरक और आकर्षक कथा-बीज स्रोत रहे हैं। नई दृष्टि एवं संवेदना के वहन के लिए वे अपनी रचना का शरीर अतीत से चुनते हैं। उनकी विशिष्टता यह है कि वे मिथकीय कथानकों से आधुनिक और सामयिक समस्याओं के सम्प्रेषण का काम लेते हैं। अग्नि और बरखा के लिए कारनाड पुनः अतीत की ओर लौटे हैं, इसके केन्द्र में है–महाभारत का वन पर्व। अपने वनवास काल में देशाटन में पांडव इधर-उधर भटक रहे हैं। सन्त लोमष इन्हें यवक्री अर्थात् यवक्रत की गाथा सुनाते हैं। महाभारत जैसी महागाथा का पटल इतना जटिल है कि ऐसे छोटे वृत्तान्त पर ध्यान न जाना स्वाभाविक था, लेकिन कारनाड को इस कथा ने सर्वाधिक प्रभावित किया। इस कथा के भीतर कई गम्भीर अर्थ विद्यमान हैं, नाटककार इस नाट्य-रूपान्तर में इसके निहित अर्थों व अभिप्रायों को स्पष्ट करता है। अतीत के प्रकाश में वर्तमान धुँधलके को साफ़ और उजला करने की यह रचनात्मक कोशिश निःसन्देह पठनीय और दर्शनीय है, इसका एक प्रमाण यह भी है कि अब तक इस नाटक के दर्जनों सफल मंचन हो चुके हैं।
Jab Shahar Hamara Sota Hai
- Author Name:
Piyush Mishra
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राबर्ट वाइज़ द्वारा निर्देशित, आर्थर लॉरेंट्ज द्वारा लिखित, जेरोम डी. रॉबिंस द्वारा नृत्य-संयोजित, नियोनिद बार्नस्टीन द्वारा संगीत और स्टीवन सोंघीम द्वारा लिखे गए गीतों से सुसज्जित फ़िल्म ‘वेस्ट साइड स्टोरी’ सिर्फ़ अपने दस ऑस्कर अवाडर्स की भीड़ की वजह से ही प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि विलियम शेक्सपियर के ‘रोमियो एंड जूलियट’ से प्रेरित यह ब्राडवे म्यूजिकल क्लासिक कई मायनों में दुनिया के आधुनिक थिएटर इतिहास में मील का पत्थर मानी जाती है। ‘एक्ट-वन’ ने अपना अगला नाटक चुन लिया था जिसे नाटक से अधिक दुस्साहस कहना उचित होगा। ‘वेस्ट साइड स्टोरी’ का नया नामकरण हुआ...‘जब शहर हमारा सोता है’।
नाटक पढ़ा गया। फ़िल्म देखी गई। और गद्गद होने की प्रक्रिया से उबरने के बाद सर्वसम्मति से फ़ैसला हुआ कि अब इस स्क्रिप्ट को एक तरफ़ रख दिया जाए। हमारी स्क्रिप्ट हमारी होगी जिसमें हमारे चरित्र होंगे, हमारी सिचुएशंस होंगी, हमारे दृश्य होंगे, हमारे गीत और संगीत के साथ हमारा अपना हिन्दुस्तान होगा।
आज से चार सौ साल पहले ईस्ट इंडिया कम्पनी के आगमन के परिणामों को भोगता हुआ हमारा ख़ूबसूरत मुल्क 1947 और 1984 को छूता हुआ आज जब गोधरा से एक क़दम आगे जाने की छटपटाहट से गुज़र रहा है, तो ‘शहर...’ के ज़िन्दा होने का अहसास पहले से भी ज़्यादा मुखर और प्रखर हो जाता है।
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