Kusma-Salhes aa Anya Chhao Got Natak
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KunalPublisher:
Antika Prakashan Pvt. Ltd.Language:
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Price: ₹ 565.8
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कुसुमा-सलहेस आ अन्य छह गोट नाटक लगभग पैंतालीस वर्ष सँ निर्देशक रूप मे आ तीस वर्ष सँ नाट्यकार रूप मे मैथिली रंगमंच सँ जुड़ल कुणाल एक टा प्रयोगधर्मी नाटककार रूप मे जानल-मानल नाम छथि। हिनक अनेक नाटकक अनेक सराहनीय प्रदर्शन भेल अछि। मुदा पुस्तकाकार मैथिली मे हिनक पहिल नाट्य-पुस्तक यैह छनि, जखन कि ओ सत्तरि वर्षक भेलाह अछि। एहि पुस्तक मे कुणालक सात गोट पूर्णकालिक मौलिक नाटक संग्रहित अछि। पहिल नाटक 'चालीस चोर आ गोनू झा उर्फ ज्ञान झाक खिस्सा' अछि जे 'भंगिमा' मे छपल छल, बाकी छओ गोट नाटक 'विदापत', 'कुसुमा-सलहेस', 'प्रेम-प्रतिज्ञा उर्फ श्रुवावतीक जय', 'विश्वासक शक्ति उर्फ सुकन्याक विवाह', 'प्रेमक विस्तार उर्फ श्वेताक आविष्कार' आ 'प्रेमक परीक्षा उर्फ सुप्रभा आ अष्टावक्र' नाटक 'अंतिका' मे 2003 सँ 2014क बीच छपल। '...उर्फ ज्ञान झाक खिस्सा' मे अपना ठाम प्रचलित गोनू झाक खिस्साक रचनात्मक उपयोग करैत नाट्यकार अतीतक कथा कहैतो वर्तमान मे छथि। 'विदापत' नाटक कुलीन समाज सँ अलग साधारण लोक-मानस मे कवि विद्यापतिक पहिचान आ महत्त्व केँ प्रभावी ढंग सँ रखैत अछि। 'कुसुमा-सलहेस' दलित समाजक एक टा सर्व-स्वीकृत योद्धा नायकक वीरताक संग-संग प्रेमक अद्भुत आख्यान अछि, जकर ई नाट्य-रचना हरदम मन रहैवला अछि। शेष चारि गोट सुखांत नाटक पौराणिक आख्यान पर आधारित अछि, मुदा ई चारो स्त्रीक छवि आ वैचारिक आदर्शक जे रूप प्रदर्शित करैत अछि ओ एकरा समकालीन बनबैत अछि। सं —गौरीनाथ
ISBN: 9789388799775
Pages: 288
Avg Reading Time: 10 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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गिरीश कारनाड के नाटक नैतिक धारणाओं को कई स्तरों पर विश्लेषित करते हैं। सीधे सन्देशों की स्थूल वाचालता उनके यहाँ नहीं होती। वे जो कथा-भूमि चुनते हैं वह मन-जीवन का एक जटिल वितान रचती है, जिसमें वे नैतिक रूढ़ियाँ जो हमारे लिए अभी तक तमाम सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक हिंसा का आधार बनी आती हैं, अचानक मामूली और बचकाने आग्रह-भर दिखने लगती हैं। वे हमें हमारी जड़ताओं से मुक्त करके अपने उच्चतर सत्यों की तलाश के लिए स्थान देते हैं। इस पुस्तक में संकलित दोनों नाटक भी इसका अपवाद नहीं हैं। मोनोलॉग की शैली में लिखे ये नाटक पुन: हमें कुछ नैतिक चौराहों पर लाते हैं। एक ही चरित्र के दो चेहरों के परस्पर मुखामुखम से बुना नाटक ‘बिखरे बिम्ब’ मंजुला नायक नामक स्त्री, उसकी विकलांग बहन और पति की कहानी कहता है और ‘पुष्प’ में एक शिव-भक्त पुजारी तथा एक गणिका के माध्यम से नैतिक असमंजस की सर्जना की गई है।
दोनों नाटक एक ही कलाकार द्वारा खेले जाने के ढंग से लिखे गए हैं, लेकिन उन्हें पुस्तक रूप में पढ़ना भी कम दिलचस्प नहीं।
Ujali Nagari Chatur Raja
- Author Name:
Mannu Bhandari
- Book Type:

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Description:
‘उजली नगरी चतुर राजा’ यशस्वी कथाकार मन्नू भंडारी की नई नाट्य-कृति है। सामाजिक विसंगतियों, विरूपताओं व अव्यवस्था का विरोध उनकी अनेक रचनाओं का केन्द्रीय स्वर रहा है। इस सन्दर्भ में उनके अत्यन्त चर्चित उपन्यास 'महाभोज' का स्मरण किया जा सकता है।
प्रस्तुत नाटक सत्ता और व्यवस्था में गहरे तक पैठ चुके भ्रष्टाचार के विरुद्ध जन-आक्रोश को अभिव्यक्ति देता है। समकालीन जीवन की अनेक स्थितियाँ और घटनाएँ इसमें अनुभव की जा सकती हैं।
इस नाटक का शीर्षक भारतेन्दु हरिश्चन्द्र कृत 'अंधेर नगरी चौपट राजा' पर एक रचनात्मक टिप्पणी है। उजास व चतुराई जैसे शब्दों का एक भिन्न अर्थ मन्नू भंडारी ने रेखांकित किया है। व्यंजना यह है कि आज अनेक सकारात्मक शब्दों, प्रतीकों और धारणाओं को निहित स्वार्थ ने भ्रष्ट कर दिया है।
आठ दृश्यों में विभक्त 'उजली नगरी चतुर राजा' के पात्रों राजा, बड़ा मंत्री, छोटा मंत्री, खजांची, नगर मंत्री, खोजी और हिम्मती आदि में परिचित चरित्रों की अनुगूँज है। लोकतंत्र, चुनाव, महँगाई, भ्रष्टाचार, असुरक्षा आदि मुद्दों पर यह नाटक व्यापक विमर्श का प्रस्ताव रखता है। जन-प्रतिरोध के स्वर इन शब्दों में मुखर हैं—
‘न करेगा अब कोई फ़रियाद,
न फैलाएगा राजा के आगे हाथ!
जो अधिकार हमारे हैं, उन्हें तो हम लेके रहेंगे।'
प्रासंगिक व प्रभावी कथ्य के साथ भाषा और शिल्प की दृष्टि से भी यह नाटक उल्लेखनीय है। मौलिक नाट्यालेखों की कमी को पूरा करती प्रस्तुत कृति पाठकों व रंगकर्मियों के लिए समान रूप से महत्त्वपूर्ण है।
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