Mahabhoj 'Natak'
Author:
Mannu BhandariPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Plays0 Ratings
Price: ₹ 159.2
₹
199
Available
मन्नू भंडारी को इसका श्रेय जाना चाहिए कि उन्होंने अतिपरिचित परिस्थितियों के, इतने व्यापक फलक को, बिना किसी प्रचलित मुहावरे का शिकार हुए, समेट लिया है। इसी नाम से उनके चर्चित उपन्यास का यह नौ दृश्यीय नट्यान्तरण अत्यन्त यथार्थपरक और तर्कसंगत है। इस नाटक में हम समाज में सक्रिय अनेक ताक़तों और ग़रीबों के जीवन पर उनके प्रभाव की परिणतियों को दृश्य-दर-दृश्य खुलते देखते हैं।</p>
<p>...(मोहन) राकेश के बाद पहली बार हम इस नाटक में सुगठित संवादों का श्रवण-सुख भी पाते हैं।</p>
<p>—राजेंद्र पॉल; ‘फ़ाइनेंशियल एक्सप्रेस’।</p>
<p>‘महाभोज’ सामाजिक यथार्थ का रूखा अंकन मात्र नहीं है, यह बहुत सोचे-समझे, रचनात्मक डिज़ाइन की उत्पत्ति है, साथ ही बहुत सघन भी। इस नाटक को उन राजनीतिक नाट्य-रचनाओं में गिना जाएगा जो सिर्फ़ दर्शकों की भावनाओं और आक्रोश का दोहन मात्र नहीं करतीं, बल्कि यथार्थ की क्रूर और विचलित करनेवाली छवि के शक्तिशाली प्रक्षेपण के द्वारा दर्शक की नैतिक संवेदना को चुनौती देती हैं और उन्हें अपने विवेक की खोज में प्रवृत्त करती हैं।</p>
<p>—अग्नेश्का सोनी; ‘पेट्रियट’।</p>
<p>और सबसे ज़्यादा यह उपन्यास/नाटक मन्नू भंडारी की संवेदनशील जागरूकता की एक देन है और नाटककारों की श्रेणी में उनके चिर-अभीप्सित आगमन का प्रमाण भी।</p>
<p>—कविता नागपाल; ‘द हिन्दुस्तान टाइम्स’।
ISBN: 9788183619769
Pages: 111
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: से दूर पिछड़े क्षेत्र में नियुक्त एक सेल्समैन, उसका एक बेहद चतुर-दुनियादार सहायक, घोडके, एक प्रौढ़वय स्त्री और उसके कुत्ते। इस नाटक की कथा इन्हीं के इर्द-गिर्द घूमती है। अपने घर-परिवार से दूर अकेलेपन और अनिद्रा से त्रस्त नायक घोडके की मार्फ़त उस रहस्यमयी स्त्री की कोठी में जा पहुँचता है जहाँ वह अपने सात पालतू कुत्तों के साथ रहती है। उसका विश्वास है कि इनमें से किसी एक कुत्ते के रूप में उसके दिवंगत पति ने पुनर्जन्म लिया है। स्त्री का दिव्य रूप, अभिजात संयम और आध्यात्मिक वलय नायक को पूरी तरह अपनी गिरफ़्त में ले लेता है। और, एक अभागी रात वह कुछ ऐसा कर गुज़रता है जो उसके भीतरी-बाहरी संसार को पूरी तरह बदल डालता है। विजय तेन्दुलकर के अन्य नाटकों की तरह यह नाटक भी मानव-जीवन की विडम्बनाओं और विद्रूपताओं को बड़े कौशल से खोलता है और दर्शक को सोच के एक नए धरातल पर ले जाता है। रंगशिल्प और मंचीय भाषा के लिहाज़ से भी यह नाटक विशिष्ट है। अपनी नाट्य-विधियों और गतिमयता के कारण यह पाठक और दर्शक, दोनों के लिए एक चिरस्मरणीय अनुभव होने की क्षमता रखता है।
Paansa
- Author Name:
Gulzar
- Book Type:

- Description: ‘पाँसा’ जो इस किताब का पहला नाटक है, युधिष्ठिर और द्रौपदी के पेचीदा रिश्ते को लेकर लिखा गया है। एक भाई ने जीती, और पाँच भाइयों में बँटी द्रौपदी स्वयंवर जीतने वाले अर्जुन को नहीं, बड़ा होने के नाते युधिष्ठिर को पहले मिली; युधिष्ठिर जिसने उसे फिर जुए में दाँव पर भी लगाया, और हारा भी। आज भी, जब हम वक़्त में इतना आगे आ चुके हैं, इस रिश्ते को छूना आग को छूना है; इसके लिए गहरी ज़िम्मेदारी और समझदारी की दरकार है। यह नाटक जिसे पहले मशहूर समाज-चिन्तक और राजनयिक पवन कुमार वर्मा ने एक लम्बी कविता के तौर पर लिखा था, कविता के रूप में और ड्रामे के रूप में भी इस ज़िम्मेदारी को बख़ूबी निभाता है; बिना उस तनाव को खोए जो इस कथा का अहम और ज़रूरी हिस्सा है। पवन कुमार वर्मा जैसे अपनी कविता में, वैसे ही गुलज़ार इस नाटक में वह करने में सफल रहे हैं जो सम्बन्धों के इस दुर्लभ समीकरण को लेकर किया जा सकता है। यानी वे द्रौपदी के यक्ष-प्रश्न को हमारे सामने खड़ा कर देते हैं और हम उसकी विडम्बना को लेकर नए सिरे से सोचना शुरू करते हैं। इसके साथ इस किताब में चार छोटे नाटक और हैं जिनमें टैगोर की कहानी ‘स्त्रीर पत्र’ पर आधारित ‘सुनते हो’ और अहमद नदीम क़ासमी की तीन कहानियों के आधार पर बुने हुए तीन ड्रामे ‘बाबा नूर’, ‘मुख़बिर’ और ‘आलाँ’ शामिल हैं। इन तीनों ही नाटकों में विभाजन से पहले का पंजाब नज़र आता है, जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है।
Muktiparv
- Author Name:
Avinashchandra Mishra
- Book Type:

- Description: Drama based on Sama-Chakewa
Imroz
- Author Name:
Kunal Hriday
- Book Type:

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Description:
इमरोज़ साहित्यिक जगत के एक अत्यन्त चर्चित और लगभग मिथकीय गरिमा हासिल कर चुके प्रेम-सम्बन्ध को नए और प्रासंगिक ढंग से प्रस्तुत करता नाटक है। अमृता प्रीतम और इमरोज़ के सम्बन्धों की कहानी न तो अनजानी है, न ही अस्पष्ट। इस कहानी के सिरे साहिर लुधियानवी और प्रीतम सिंह से भी जुड़ते हैं। लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि इस कहानी के नायक इमरोज़ हैं और नायिका अमृता। मुश्किल यह है कि साहित्य-जगत में अमृता का मुक़ाम इतना ऊँचा और उनका असर इतना व्यापक है कि उसकी विशाल छाया में समर्पित-हृदय इमरोज़ का व्यक्तित्व प्राय: ओझल-अदेखा रह गया है। युवा नाटककार कुनाल हृदय ने इसी अदेखे पक्ष को अपने इस नाटक में अत्यन्त प्रभावी ढंग से पेश किया है जिसमें इमरोज़ एक उदात्त प्रेमी के रूप में सामने आते हैं।
इमरोज़ में रिश्तों की एक बारीक गुत्थी खुलती है जो इनसानी स्वभाव के बेहद नाज़ुक लेकिन ज़रूरी पक्ष पर रोशनी डालती है इसमें उम्मीद और असलियत का टकराव तो है, पर प्रेम के लिए हाथ बढ़ा चुका इमरोज़ अहंकार को बीच में एकदम नहीं आने देता। इस नाटक में हम एक ‘नए’ प्रेमी का दर्शन करते हैं जिसे प्रेमी, प्रेमिका और रक़ीब के पारम्परिक त्रिकोण से व्याख्यायित नहीं किया जा सकता।
Maile Hath
- Author Name:
Jean Paul Sartre
- Book Type:

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Description:
पार्टी की विचारधारा से ‘भटके’ पार्टी प्रमुख के सचिव के तौर पर काम करने और उसे गोली से उड़ाने की ज़िम्मेदारी युवा पार्टी कार्यकर्ता ह्यूगो के कन्धों पर डाली जाती है। वो इस काम को अंजाम भी दे देता है...लेकिन क्या उसने उस राजनीतिक क़त्ल को एक आवेगी अपराध के जामे में छुपाया है? इस सवाल का जवाब तब साफ़ होता है जब दो साल की सज़ा काटकर, जेल से छूटने के बाद, वो अपने पुराने साथियों और ख़ुद अपने-आप से, इस कत्ल को करने के अपने वास्तविक उद्देश्यों का खुलासा करने की कोशिश करता है।
The Listner के शब्दों में ‘ज्याँ पॉल सार्त्र आज दुनिया के सबसे चर्चित लेखक हैं’ और ये उनका सबसे चर्चित नाटक। सर्वप्रथम पेरिस में सन् 1948 में मंचित यह नाटक साम्यवाद की मानसिकता और तौर-तरीक़ों की एक बेहतरीन (क्लासिक) विवेचना करता है।
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