Kutte
Author:
Vijay TendulkarPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Plays0 Ratings
Price: ₹ 159.2
₹
199
Available
से दूर पिछड़े क्षेत्र में नियुक्त एक सेल्समैन, उसका एक बेहद चतुर-दुनियादार सहायक, घोडके, एक प्रौढ़वय स्त्री और उसके कुत्ते। इस नाटक की कथा इन्हीं के इर्द-गिर्द घूमती है। अपने घर-परिवार से दूर अकेलेपन और अनिद्रा से त्रस्त नायक घोडके की मार्फ़त उस रहस्यमयी स्त्री की कोठी में जा पहुँचता है जहाँ वह अपने सात पालतू कुत्तों के साथ रहती है। उसका विश्वास है कि इनमें से किसी एक कुत्ते के रूप में उसके दिवंगत पति ने पुनर्जन्म लिया है।
स्त्री का दिव्य रूप, अभिजात संयम और आध्यात्मिक वलय नायक को पूरी तरह अपनी गिरफ़्त में ले लेता है। और, एक अभागी रात वह कुछ ऐसा कर गुज़रता है जो उसके भीतरी-बाहरी संसार को पूरी तरह बदल डालता है।
विजय तेन्दुलकर के अन्य नाटकों की तरह यह नाटक भी मानव-जीवन की विडम्बनाओं और विद्रूपताओं को बड़े कौशल से खोलता है और दर्शक को सोच के एक नए धरातल पर ले जाता है।
रंगशिल्प और मंचीय भाषा के लिहाज़ से भी यह नाटक विशिष्ट है। अपनी नाट्य-विधियों और गतिमयता के कारण यह पाठक और दर्शक, दोनों के लिए एक चिरस्मरणीय अनुभव होने की क्षमता रखता है।
ISBN: 9788126730209
Pages: 91
Avg Reading Time: 3 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Description:
‘तूफ़ान’ (टेम्पेस्ट) शेक्सपियर का महान सुखान्त नाटक है। 1611-12 में रचित यह उनकी अन्तिम प्रौढ़ रचना मानी गई है। शेक्सपियर की मृत्यु सन् 1616 में हुई थी। इस नाटक की रूमानी भाव-भूमि इसके रचयिता की असाधारण कल्पना-शक्ति और चमत्कारी सृजन-सामर्थ्य के अनेक स्मृति-चिह्न लिए हैं। हैज़लिट के शब्दों में ‘यह शेक्सपियर की सर्वाधिक मौलिक व पूर्ण कृतियों में से एक है और इसमें उन्होंने अपनी सभी प्रकार की शक्तियों का प्रदर्शन कर दिया है।’
इसमें शेक्सपियर के कवि और नाटककार—दोनों ही रूप एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते दिखाई पड़ते हैं। प्रास्पेरो, एरियल और मिरैन्डा की गणना उनके अमर चरित्रों में की जाती है और केलिबान तो साहित्य-समीक्षा के पृष्ठों में सम्भवत: हैमलेट के बाद दूसरा सर्वाधिक चर्चित पात्र है।
नाटक की लीला-भूमि के रूप में शेक्सपियर ने एक कल्पित द्वीप का जो सजीव, विवरणपूर्ण और कमनीय चित्र शब्दों में अंकित किया है, वह बड़े से बड़े कलाकार के लिए एक चुनौती है। इसके अतिरिक्त, प्रास्पेरो के व्यक्तित्व और परिस्थितियों, विशेष रूप से अपनी जादुई कला से सदा के लिए विदा लेकर चिर विश्राम करने की इच्छा में कवि का अपना जो मानस-चित्र उपस्थित हो गया है, उसने भी इस नाटक के महत्त्व को कई गुना बढ़ा दिया है।
कर्त्तव्य एवं सेवा-भावना के आदर्श की प्रतिष्ठा, क्रोध और प्रतिहिंसा पर क्षमा व करुणा की विजय, एरियल और केलिबान के चरित्रों में क्रमश: आकाश व पृथ्वी तत्त्वों का प्रतीकार्थ, सौन्दर्य और प्रेम की मधुर कोमल अनुभूतियाँ, प्रेतों-परियों के अद्भुत कार्य-कलाप और उन्हें वश में करनेवाली प्रचंड मानव-शक्ति, समुद्र में पोत-ध्वंस का लोमहर्षक दृश्य, व्यंग्य और विनोद के चटखारे, ‘रोमांटिक’ और ‘क्लासिक’ का विलक्षण संगम इत्यादि कितने ही अन्य आकर्षण भी आपको इस कालजयी कृति में देखने को मिलेंगे।
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