Matrichhabi
Author:
Mahashweta DeviPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 100
₹
125
Unavailable
‘माँ’ सिर्फ़ एक सम्बन्धवाचक शब्द नहीं, बल्कि बरगद की वृक्ष की तरह इसकी विशालता है। जिसकी असंख्य जड़ें हैं, जो ज़मीन में मज़बूती से पैठकर अपने हर छोटे तने को पेड़ बनते देखती है। महाश्वेता देवी की ‘मातृछवि’ में माँ रूपी बरगद के अनेक तने हैं जिनमें उसके भिन्न-भिन्न रूप दिखाई देते हैं। इसमें कौशल्या है जो अपनी ज़मीन के लिए, अपने अधिकार के लिए हसुआ लेकर अकेले पूरे गाँव का नेतृत्व करती है और अपनी ज़िन्दगी न्योछावर कर देती है। वहीं जाह्नवी माँ हैं, जिन्हें जीते-जी देवी अवतार का रूप बताकर उनके पोते उनकी कमाई खाते रहते हैं और असल में उन्हें एक कोठी में बन्द कर खाने के लिए भी तरसाते हैं। ‘मातृछवि’ सिर्फ़ माँ के भिन्न रूपों को नहीं गढ़ती, बल्कि आज़ादी के बाद के बंगाल की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परतों को भी उधेड़ती है। परतों के खुलते ही जहाँ नक्सलबाड़ी आन्दोलन की रक्तरंजित भूमि दिखाई देती है तो वहीं समाजवाद के निर्माण के नाम पर यमुनावती की माँ और उसके जैसे तमाम लोग, जो अपने को फालतू और अनावश्यक समझने पर मजबूर किए जाते हैं। वहीं अपनी इज़्ज़त को बचाए रखने और अपने बच्चे को भरपेट चावल खिलाने के लिए जटी को सुबह-शाम की माँ बनना पड़ता है। और दिन देवी बनकर गुज़ारना पड़ता है।</p>
<p>महाश्वेता देवी की कहानियों में भले ही औरत का मातृ रूप आज से पचास साल पहले का ही क्यों न हो, लेकिन इसकी प्रासंगिकता आज भी उतनी ही है जितनी तब रही होगी।
ISBN: 9788180319655
Pages: 182
Avg Reading Time: 6 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: महान बाल-साहित्य ‘सोफीज़ वर्ल्ड’ के रचनाकार यॉस्टेन गेर्डर की यह कृति किशोर वय के पाठकों को ध्यान में रखकर संवेदनशील भाषा में एक परिकथा की तरह रची गई है। ग्योर्ग रोएड को सन्तरोंवाली लड़की की कहानी उसकी लाल रंग की बच्चागाड़ी में मिलती है जिसे उसके पिता ने अपनी मृत्यु से कुछ ही दिन पूर्व उसी के लिए लिखा था। दरअसल यह प्रेम से लिखी गई एक गहन प्रेमकथा है जो संवेदना, धैर्य, उत्कंठा के साथ-साथ नैतिक और प्राकृतिक सौन्दर्य के वैभव से बुनी पहेली जैसी लगती है। यह सहज भाषा में लिखी गई एक असाधारण कथा है जो पाठकों को एक रचनात्मक आस्वाद प्रदान करती है। हिन्दीभाषी पाठकों को यह पुस्तक न केवल पठनीय लगेगी, बल्कि वे इसे वर्षों भुला नहीं पाएँगे।
Alice Ajubon Ki Dunia Mei
- Author Name:
Lui Cairol
- Book Type:

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Description:
‘एलिस अजूबों की दुनिया में’ किशोर पाठकों के लिए लुइस कैरोल की क़लम से लिखा गया विश्वप्रसिद्ध उपन्यास है। दुनिया की विभिन्न भाषाओं में अनूदित इस कथाकृति का यह हिन्दी अनुवाद प्रसिद्ध कथाशिल्पी कृष्ण बलदेव वैद ने किया है।
उपन्यास के केन्द्र में है एलिस नाम की एक बालिका जिसके स्वप्न-जगत का इसमें दिलचस्प उद्घाटन हुआ है। अपने सपने में प्रवेश करके एलिस एक ऐसी दुनिया में जा पहुँचती है, जहाँ सबकुछ अजूबा है—सारी प्रकृति, पशु-पक्षी और तमाम तरह के कीट-पतंग। यहाँ तक कि वह स्वयं भी अपने रूप-सरूप में अजूबा हो उठती है। हैरान होती है अपने-आप पर और अपने आसपास पर। विचित्र, मूर्खतापूर्ण और निर्मम लगता है उसे उस दुनिया के ताश के पत्तों जैसे राजा-रानी का न्याय। वह न सिर्फ़ उनका विरोध करती है, बल्कि अपनी साहसपूर्ण बुद्धिमत्ता से उन्हें छकाती भी है।
वास्तव में इस पुस्तक के सहारे लेखक ने मनोवैज्ञानिक तरीक़े से किशोर मानस की उस दुनिया की टोह ली है, जिसमें उसकी वास्तविक दुनिया ही एक नए रंग-रूप में मौजूद होती है।
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