Moolya Aadharit Shiksha
About the book
"वर्तमान में विद्यालयों में अनुशासनहीनता एवं हिंसक व्यवहार की घटनाएँ निरंतर बढ़ रही हैं। अतः अगर हम अपनी शिक्षा को मूल्य-आधारित और संस्कार-आधारित बना पाएँ तो हम इस प्रकार की सभी समस्याओं पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। शिक्षण के मानवतावादी पहलुओं पर जोर देते हुए भारत ने अपनी नई शिक्षा नीति में यह स्पष्ट किया है कि शिक्षा का तात्पर्य अध्यापकों, किताबों से प्राप्त जानकारी और सूचनाओं का संप्रेषण मात्र नहीं है। उन मूल्यों, योग्यताओं और प्रवृत्तियों को विकसित करना भी है, जो शांतिपूर्ण, न्यायोचित, समावेशी और टिकाऊ समाज के निर्माण के लिए विश्व समुदाय को एकत्र एवं प्रेरित कर विश्व-कल्याण में योगदान देने के लिए संकल्पबद्ध कर सकें। भारतीय ज्ञान-परंपरा में मूल्यपरक शिक्षा का बड़ा महत्त्व है। मूल्य-आधारित शिक्षा का अर्थ छात्रों को नैतिक मूल्यों, धैर्य, ईमानदारी, प्रेम, सद्भावना, दया, करुणा, मानवता, इत्यादि सार्वभौमिक मूल्यों को सिखाना है। मूल्य शिक्षा का संपूर्ण उद्देश्य विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में निहित है। मूल्य-आधारित शिक्षा से न केवल मानवीय गुणों का विकास होगा, बल्कि हम अपनी नागरिकता के प्रति जिम्मेदारी को बेहतर ढंग से समझ पाएँगे। नैतिकता पर आधारित शिक्षा हो तो उसमें मूल्य अपने आप आ जाएँगे। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी हम मानवतावादी मूल्यों का समावेश करने हेतु कटिबद्ध हैं, जिससे कि भविष्य का भारत एक सुखी, संपन्न व मानव मात्र के लिए कल्याणकारी जीवन की अवधारणा के लक्ष्यों को पूरा करने हेतु अग्रसर हो तथा संपूर्ण विश्व में शांति, प्रेम व भाईचारे की स्थापना हेतु हम ध्वजवाहक बन सकें। "
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About the Book
"वर्तमान में विद्यालयों में अनुशासनहीनता एवं हिंसक व्यवहार की घटनाएँ निरंतर बढ़ रही हैं। अतः अगर हम अपनी शिक्षा को मूल्य-आधारित और संस्कार-आधारित बना पाएँ तो हम इस प्रकार की सभी समस्याओं पर विजय प्राप्त कर सकते हैं।
शिक्षण के मानवतावादी पहलुओं पर जोर देते हुए भारत ने अपनी नई शिक्षा नीति में यह स्पष्ट किया है कि शिक्षा का तात्पर्य अध्यापकों, किताबों से प्राप्त जानकारी और सूचनाओं का संप्रेषण मात्र नहीं है। उन मूल्यों, योग्यताओं और प्रवृत्तियों को विकसित करना भी है, जो शांतिपूर्ण, न्यायोचित, समावेशी और टिकाऊ समाज के निर्माण के लिए विश्व समुदाय को एकत्र एवं प्रेरित कर विश्व-कल्याण में योगदान देने के लिए संकल्पबद्ध कर सकें।
भारतीय ज्ञान-परंपरा में मूल्यपरक शिक्षा का बड़ा महत्त्व है। मूल्य-आधारित शिक्षा का अर्थ छात्रों को नैतिक मूल्यों, धैर्य, ईमानदारी, प्रेम, सद्भावना, दया, करुणा, मानवता, इत्यादि सार्वभौमिक मूल्यों को सिखाना है। मूल्य शिक्षा का संपूर्ण उद्देश्य विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में निहित है। मूल्य-आधारित शिक्षा से न केवल मानवीय गुणों का विकास होगा, बल्कि हम अपनी नागरिकता के प्रति जिम्मेदारी को बेहतर ढंग से समझ पाएँगे।
नैतिकता पर आधारित शिक्षा हो तो उसमें मूल्य अपने आप आ जाएँगे।
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी हम मानवतावादी मूल्यों का समावेश करने हेतु कटिबद्ध हैं, जिससे कि भविष्य का भारत एक सुखी, संपन्न व मानव मात्र के लिए कल्याणकारी जीवन की अवधारणा के लक्ष्यों को पूरा करने हेतु अग्रसर हो तथा संपूर्ण विश्व में शांति, प्रेम व भाईचारे की स्थापना हेतु हम ध्वजवाहक बन सकें।
"
Book details
- Format
- Hardbound
- Publisher
- Prabhat Prakashan
- Weight
- 400 grams
- ISBN-13
- 9789390366576
- Pages
- 216
- Reading time
- ~7 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14 × 21.5 cm
- Language
- Hindi
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Moolya Aadharit Shiksha addresses a crisis visible in every Indian classroom: the breakdown of discipline, the rise of violent behavior, and the erosion of ethical grounding. Published by Prabhat Prakashan, this Hindi-language work is not a theoretical manifesto but a practical response grounded in India's National Education Policy 2020. It argues that education cannot be reduced to the transmission of information from teachers and textbooks; it must cultivate values, competencies, and dispositions that foster peace, justice, and inclusion. The book positions sanskar (cultural conditioning) and moolya (values) as the foundation of a pedagogy capable of countering the behavioral crises that plague contemporary schools. Written for educators, policymakers, and parents, it insists that humanistic education is not an optional add-on but the core mission of Indian schooling in the twenty-first century.
Moolya Aadharit Shiksha पुस्तक पढ़कर मुझे किस तरह का अनुभव मिलेगा?
यह पुस्तक आपको आत्मचिंतन और जागरूकता की ओर ले जाएगी। इसमें शिक्षा को मात्र सूचना-संप्रेषण से आगे ले जाकर मूल्यों, संस्कारों और मानवीय गुणों के विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया है। आप महसूस करेंगे कि शिक्षा केवल डिग्री नहीं, बल्कि समाज में शांति, न्याय और समावेश स्थापित करने का माध्यम है।
Moolya Aadharit Shiksha पुस्तक किनके लिए सर्वाधिक उपयुक्त है और पाठक से क्या अपेक्षा रखती है?
- शिक्षकों और शिक्षाविदों के लिए जो कक्षा में अनुशासनहीनता और हिंसक व्यवहार से जूझ रहे हैं।
- अभिभावकों के लिए जो अपने बच्चों में संस्कार और नैतिक मूल्य विकसित करना चाहते हैं।
- नीति-निर्माताओं के लिए जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को व्यावहारिक रूप देना चाहते हैं।
भारतीय पाठकों के लिए इस पुस्तक की विषयवस्तु की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक प्रासंगिकता क्या है?
यह पुस्तक उस समय आई है जब भारतीय विद्यालयों में बढ़ती हिंसा, अनुशासनहीनता और नैतिक पतन चिंता का विषय बन गए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मानवतावादी दृष्टिकोण को आधार बनाकर यह भारतीय संस्कृति में निहित मूल्यों और संस्कारों को आधुनिक शिक्षा प्रणाली में पुनर्स्थापित करने का आह्वान करती है।
Moolya Aadharit Shiksha विषय पर लेखक का दृष्टिकोण अन्य रचनाओं से किस प्रकार भिन्न है?
यह पुस्तक केवल सैद्धांतिक चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करती है। लेखक ने शिक्षा को सूचना-हस्तांतरण से आगे बढ़ाकर मूल्य-आधारित और संस्कार-आधारित बनाने पर बल दिया है, जो वर्तमान विद्यालयीन संकटों का वास्तविक उत्तर है।
Moolya Aadharit Shiksha पुस्तक पाठक को भावनात्मक, बौद्धिक या सांस्कृतिक रूप से क्या प्रदान करती है?
- भावनात्मक स्तर पर — शिक्षा के प्रति एक नई जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का बोध।
- बौद्धिक स्तर पर — राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मानवतावादी पहलुओं की गहरी समझ।
- सांस्कृतिक स्तर पर — भारतीय मूल्यों और संस्कारों की समकालीन प्रासंगिकता का पुनर्मूल्यांकन।
