Raqqasa
Author:
Anshu PradhanPublisher:
Shivna PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 200
₹
250
Available
novels
ISBN: 9788119018284
Pages: 144
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Sadabahar Kahaniya : Chatursen
- Author Name:
Acharya Chatursen
- Book Type:

- Description: आचार्य चतुरसेन शास्त्री ने हिंदी के ऐतिहासिक और सामाजिक उपन्यासों को नया प्रस्थान दिया। स्पष्ट विषय, युग विशेष का समर्थ चित्रण, संस्कृतनिष्ठ तथा आलंकारिक भाषा-शैली में के नाते अलग से पहचाने जाते हैं। वैशाली की नगरवधू, वयं रक्षामः, सोमनाथ जैसे उनके उपन्यासों ने उन्हें लोगों के ज़ेहन में अमर कर दिया। उन्होंने अनेक विधाओं में लेखन कार्य किया है लेकिन उपन्यास और कहानियाँ ही उनकी प्रतिष्ठा का आधार हैं। यहाँ उनकी हर टेस्ट की कुछ श्रेष्ठ कहानियाँ दी जा रही हैं। आशा है आपको पसंद आएँगी।
Patrangpur Puran
- Author Name:
Mrinal Pande
- Book Type:

-
Description:
रचनात्मक गद्य की गहराई और पत्रकारिता की सहज सम्प्रेषणीयता से समृद्ध मृणाल पाण्डे की कथाकृतियाँ हिन्दी जगत में अपने अलग तेवर के लिए जानी जाती हैं। उनकी रचनाओं में कथा का प्रवाह और शैली उनका कथ्य स्वयं बुनता है।
‘पटरंगपुर पुराण’ के केन्द्र में पटरंगपुर नाम का एक गाँव है जो बाद में एक क़स्बे में तब्दील हो जाता है। इसी गाँव के विकास-क्रम के साथ चलते हुए यह उपन्यास कुमाऊँ-गढ़वाल के पहाड़ी क्षेत्र के जीवन में पीढ़ी-दर-पीढ़ी आए बदलाव का अंकन करता है। कथा-रस का सफलतापूर्वक निर्वाह करते हुए इसमें काली कुमाऊँ के राजा से लेकर भारत की स्वतंत्रता-प्राप्ति तक के समय को लिया गया है।
परिनिष्ठित हिन्दी के साथ-साथ पहाड़ी शब्दों और कथन-शैलियों का उपयोग इस उपन्यास को विशेष रूप से आकर्षित बनाता है, इसे पढ़ते हुए हम न केवल सम्बन्धित क्षेत्र के लोक-प्रचलित इतिहास से अवगत होते हैं, बल्कि भाषा के माध्यम से वहाँ का जीवन भी अपनी तमाम सांस्कृतिक और सामाजिक भंगिमाओं के साथ हमारे सामने साकार हो उठता है। कहानियों-क़िस्सों की चलती-फिरती खान, विष्णुकुटी की आमा की बोली में उतरी यह कथा सचमुच एक पुराण जैसी ही है।
Suwarna Dweep
- Author Name:
Hrishikesh Panda
- Book Type:

-
Description:
सुवर्णद्वीप उपन्यास में शीशमहल की बाती की तरह प्रकाशित बहुआयामी और बहुस्तरीय यथार्थ को भेदने में सिर्फ़ अभिषेक जैसा नायक ही समर्थ है। उसका दृढ़ व्यक्तित्व उसके अहं, उसके समाज, पेशे, राजनीति, प्रशासन के आँधी-पानी का मुक़ाबला करता रहता है। समझौता नहीं कर पाता, तिल-तिल कर जल जाता है। मगर उसकी ऊर्जस्विता उसकी ज़िन्दगी की त्रासदी बन जाती है। यह, सुवर्णद्वीप या जम्बूद्वीप या तीसरे विश्व का कोई देश, रत्नगर्भा तथा सुफला होते हुए भी क़िस्मत का मारा है। उसका शक्तिमान नायक भी जैसे उद्भट नियति का शिकार बनकर अपनी पहचान नहीं बना पाता है।
अनेक कहानियाँ, अनगिनत फंतासियाँ, पग-पग पर थिरकती संवेदनाएँ, संक्षिप्त व्यंजना, सूत्रात्मक निष्कर्ष, बिम्ब-रूपक हास्य-व्यंग्य, भाषिक कौशल, अनुभूति की व्याप्ति, सृजनात्मक कल्पना सब मिलकर एक मानववादी लेकिन परास्त पुरुष का सम्पूर्ण चित्र उकेरती हैं। ‘सुवर्णद्वीप’ उपन्यास एक सम्भावनापूर्ण प्रयोग तथा सफल कृति है।
Gayasur Sandhan
- Author Name:
Vikas Kumar Jha
- Book Type:

-
Description:
विश्व आस्था के जुड़वाँ नगर गया-बोधगया पर केन्द्रित 'गयासुर संधान’ कथ्य और शैली में युगान्तरकारी ध्वनि का एक ऐसा उपन्यास है जिसमें कल्पना, इतिहास, लोककथा, दन्तकथा, मिथक और यथार्थ का अद्भुत रोमांचक मिश्रण है। रहस्यमय और संक्रामक!
'गयासुर संधान’ की कथा बताती है कि अनैतिक कामनाएँ-एषणाएँ अन्तत: कैसे भस्म होती हैं। गयासुर के शरीर पर बसे होने की मान्यतावाली इस प्राचीन नगरी में सदैव से यह अटल आस्था है कि कामनामुक्त व्यक्ति के लिए ही यहाँ आश्रय है। अनर्गल कामना का परिताप, बन्धन और व्यसन इस जुड़वाँ नगरी को सहन नहीं। गया के कण-कण में इहकाल-परकाल और जन्म-जन्मान्तर का महाशून्य अपने परम औघड़ भाव में विन्यस्त है।
भारत की पौराणिक आख्यायिका, परम्परा, संस्कार, दर्शन और चिन्तन के अर्क से निर्मित 'गयासुर संधान’ एक ऐसी गहन कृति है, जो स्वदेशानुराग की महागाथा के संग-संग मनुष्य के लिए रोमांचक सत्यार्थ प्रकाश है।
CONSTRUCTIONS OF MASCULINITY IN CONTEMPORARY KERALA A STUDY OF THREE POLITICAL SPHERES
- Author Name:
Rashmi Gopi
- Book Type:

- Description: This book explores how masculinity and femininity are constructed and performed in India with a special focus on political parties, Ayurveda tourism and the Act of ragging.
Jism Jism Ke Log
- Author Name:
Shazi Zaman
- Book Type:

-
Description:
“जब जिस्म सोचता, बोलता है तो जिस्म सुनता है।”
“आप तो बोलते भी हैं, सुनते भी हैं, लिखते भी हैं...”
“लिखता भी हूँ?” मैंने कहा।
एक कम्पन, एक हरकत-सी हुई तुम्हारे जिस्म में—जैसे मेरी बात का जवाब दिया हो।
“रूमानी शायर जिस्म पर भी जिस्म से लिखता है,’’ मैंने कहा।
“आप जिस्मानी शायर हैं!”‘जिस्म जिस्म के लोग’ बदलते हुए जिस्मों की आत्मकथा है। ‘जिस्म जिस्म के लोग’ में—और हर जिस्म में—बदलते वक़्त और बदलते ताल्लुक़ात का रिकॉर्ड दर्ज है।
“इतने वक़्त के बाद...,” तुमने मुझसे या शायद जिस्म ने जिस्म से कहा।
“कितने वक़्त के बाद?”
“जिस्म की लकीरों से वक़्त लिखा हुआ है।”
“दोनों जिस्मों पर वक़्त के दस्तख़त हैं,” मैंने कहा।
जिस्म पर वक़्त के दस्तख़त को मैंने उँगलियों से छुआ तो तुमने याद दिलाया—
“सूरज के उगने, न सूरज के ढलने से...
“वक़्त बदलता है जिस्मों के बदलने से।’”
दुनिया का हर इंसान अपना—या अपना-सा—जिस्म लिए घूम रहा है। उन्हीं जिस्मों को समझने, उन पर—या उनसे—लिखने और ‘जिस्म-वर्षों के गुज़रने की दास्तान है ‘जिस्म जिस्म के लोग’।
“बहुत जिस्म-वर्ष गुज़र गए...जिस्म जिस्म घूमते रहे!” मैंने कहा।
“तो दुनिया घूमकर इस जिस्म के पास क्यूँ आए?”
“जिस्मों जिस्मों होता आया”,
वक़्त के दस्तख़त पर मेरे हाथ रुक गए,
“अब ये जिस्म समझ में आया।”
I..The Loser
- Author Name:
Sumit Kumar Sambhav
- Book Type:

- Description: What are the ingredients of the recipe for a looser? What are the circumstances which make a person looser? Zandu Singh, who lives in Dharamshala city of Himalayan Pradesh, dips his life into hard work to make himself perfect in his penance. But a single lie he speaks to his love, jyotsna, one day becomes so big that he becomes a loser for her and throws him to the ultimate darkness of confusion. Will zandu Singh ever be able to come out of this dilemma? Will he ever succeed in making his banwari Lal master Ji's dream true? Come and know about the thousands of athletes burning themselves in the fire of hard work, devotion and sacrifice but still living unidentified lives. Come to peep into their life through India’s first sports fiction.
Sadabahar Kahaniyan : Oscar Wild
- Author Name:
Oscar Wilde
- Book Type:

- Description: ऑस्कर वाइल्ड अपनी विलक्षण रचनात्मक प्रतिभा, विराट कल्पनाशीलता और प्रखर विचारशीलता के लिए जाने जाते हैं। उन्हें अंग्रेजी साहित्य में शेक्सपियर के बाद दूसरा सबसे लोकप्रिय लेखक माना जाता है। उन्होंने नाटक, कहानी, उपन्यास के साथ कविताएँ भी लिखीं। जिन्हें अनुवादों के ज़रिए दुनिया भर में पढ़ा गया। द बैलेड ऑफ रीडिंग गोल और द प्रोफनडिस उनकी सुप्रसिद्ध कृतियाँ हैं। लेडी विंडरम' र्स फैन और द इम्पॉर्टन्स ऑफ अर्नेस्ट जैसे नाटकों ने भी खासी लोकप्रियता अर्जित की। द पिक्चर ऑफ़ डोरियन ग्रे उनका लोकप्रिय व एकमात्र उपन्यास है। लेकिन अंग्रेजी से बाहर सबसे ज्यादा लोकप्रिय हुईं उनकी कहानियाँ । उनकी परीकथाओं ने संसार भर के बच्चों व किशोरों की दुनिया को कल्पना के पंख लगा दिए। यहाँ उनकी कुछ श्रेष्ठ कहानियाँ और परीकथाएँ दी जा रही हैं। ताकि हर वय के पाठक इसका आनंद उठा सकें।
Khilega To Dekhenge
- Author Name:
Vinod Kumar Shukla
- Rating:
- Book Type:

- Description: ‘खिलेगा तो देखेंगे’ विनोद कुमार शुक्ल का बहुत चर्चित उपन्यास है। आदिवासी जीवन और परिवेश के दृश्यों में रचे-बसे इस उपन्यास में भी विनोद कुमार शुक्ल की वह कथा-शैली देखने को मिलती है जो उनका अपना आविष्कार है। बिना किसी ठोस कथा-सूत्र के ‘खिलेगा तो देखेंगे’ एक सामूहिक जीवन की कथा कहता है, जिसमें असाधारण शिल्प में बुनी दृश्यावली और कल्पनाशील बिम्बों के द्वारा साधनहीनों और अकसर मूक रहनेवाले लोगों के सुख और दु:ख ख़ुद-ब-ख़ुद सामने आकर अपने आपको दिखाते हैं। यह उपन्यास जो आप को बताता है, आप उससे ज़्यादा महसूस कर पाते हैं जिसका श्रेय विनोद कुमार शुक्ल के जादू जैसे गद्य, उनकी दृष्टि और भाषा को जाता है। प्रकृति इस कथा में जीवन की भी सहचरी है, पीड़ा और प्रसन्नताओं की भी, और उस उम्मीद की भी जिसे विनोद कुमार शुक्ल हर हाल में बचाए रखते हैं।
Safed Ghora Kala Sawar
- Author Name:
Hrideyesh
- Book Type:

-
Description:
हृदयेश ने अपने इस उपन्यास ‘सफेद घोड़ा काला सवार’ में भारतीय न्याय–व्यवस्था की शव–परीक्षा की है। यह उपन्यास इस व्यवस्था के सारे अन्तर्विरोधों तथा छद्मों को केवल उजागर ही नहीं करता, सामान्य जन के लिए प्रचलित न्याय–प्रणाली की निरर्थकता पर तीव्र टिप्पणी भी करता है। उपन्यास का फलक इतना व्यापक है कि इसमें संगुम्फित छोटी–छोटी कहानियाँ इसे न्याय के नाम पर रचे गए चक्रव्यूह का वृहद् मार्मिक दस्तावेज़ बनाती हैं।
उपन्यास में विषयगत नवीनता है, शिल्पगत ताज़गी है और है सार्थक दृष्टि का कलात्मक उपयोग। वस्तुत: यह उपन्यास हिन्दी के उन कुछ श्रेष्ठ उपन्यासों में से है जो स्वतंत्रता के बाद के वर्षों में यथार्थवादी दृष्टि से लिखे गए हैं और जो पाठकों को समसामयिक परुष यथार्थ से परिचित कराने के साथ–साथ उनको बहुत कुछ सोचने को भी मजबूर करते हैं।
Itivritt
- Author Name:
Jagdamba Prasad Dixit
- Book Type:

-
Description:
‘इतिवृत्त’ एक मार्मिक वृत्त है—सामान्य भारतीय ग्रामीण जीवन के उखड़ने, टूटने और बिखरने का। पूरा वृत्त एक व्यक्तिगत कथा के साथ-साथ एक व्यापक जनजीवन गाथा भी है। व्यक्तिगत त्रासदी को सामाजिक त्रासदी के एक अंग के रूप में देखा गया है। इस त्रासदी के मूल में एक ऐसी अर्थव्यवस्था है जो भारी उद्योगों के हित में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की लगातार बलि देती जा रही है। सारा विवरण समाजशास्त्रीय, अर्थशास्त्रीय होते हुए भी नितान्त अनुभूतिप्रवण और मानवीय
है।हिन्दी कथा-साहित्य में ग्रामीण जीवन तो काफ़ी चित्रित हुआ है, लेकिन ‘इतिवृत्त’ बिलकुल अलग इसलिए है कि ग्रामीण जीवन के बिखराव और अन्त की कहानी इससे पहले इतने मार्मिक रूप में और कहीं नहीं आई है। इसमें शक नहीं कि ‘इतिवृत्त’ हिन्दी उपन्यासों में मील का पत्थर है। इसकी शैली बहुत ही सरल, रोचक और आंचलिक है। लेखक जगदम्बा प्रसाद दीक्षित के लिए यह महान उपलब्धि इसलिए भी है कि ‘कटा हुआ आसमान’ और ‘मुरदा-घर’ की महानगरीय जीवन-प्रणाली का चित्रण जिस अधिकार और गहरी पैठ के साथ किया गया है, उसी सूझबूझ और गहराई के साथ ग्रामीण जीवन का चित्रण भी हुआ है।
‘इतिवृत्त’ पढ़ने का मतलब है एक बेहद करुण, यथार्थ और जीवन्त अनुभव संसार से होकर गुज़रना।
Madhur Swapna
- Author Name:
Rahul Sankrityayan
- Book Type:

- Description: ‘मधुर स्वप्न’ एक ऐतिहासिक उपन्यास है। इतिहास के अध्येता-अन्वेषक के रूप में राहुल सांकृत्यायन ने ऐसे पक्षों और प्रसंगों को उजागर करने में विशेष दिलचस्पी दिखाई जिनमें गणतांत्रिक, समाजवादी और साम्यवादी मूल्यों के चिह्न मिलते हैं। वस्तुतः पाठकों को वे यह दिखलाना चाहते थे कि भेद-भावमुक्त और बराबरी पर आधारित समाज के निर्माण के लिए जिन मूल्यों की वकालत की जा रही है उनका एक ठोस ऐतिहासिक आधार है; वे मानव समाज की विरासत का हिस्सा हैं। यह सोच ‘मधुर स्वप्न’ सहित उनकी सभी ऐतिहासिक कृतियों में स्पष्ट झलकती है। इस उपन्यास की कथाभूमि है मध्य एशिया में दजला नदी से यक्षु नदी तक की भूमि और काल है पाँचवीं सदी के अन्तिम दशक से लेकर छठी सदी के आरम्भिक तीन दशक। तब वहाँ सासानी वंश का पीरोजा पुत्र कवात् का शासन था। धर्माचार्यों का उन दिनों बड़ा जोर था। इस उपन्यास में उन्हीं दिनों के सामन्ती शासन के वैभव-विलास, धर्माचार्यों की अनीति और दुराचार तथा दीन-दुखियों के करुण चीत्कार का विश्वसनीय चित्रण हुआ है। इसमें इतिहास के दोनों प्रकार के पात्र जीवन्त रूप में उपस्थित हैं—वे जिन्होंने बल और धन के जोर पर जन सामान्य का शोषण करना अपना शाश्वत अधिकार समझा, और वे भी जो प्रतिकूल से प्रतिकूल परिस्थितियों में भी न्याय हासिल करने के स्वप्न को नहीं भूले और उसके लिए त्याग किया। धनिकों और गरीबों, शासकों और शासितों की विषम स्थिति के बीच न्याय और जनमुक्ति का यह मधुर स्वप्न ही इस उपन्यास का मूल सन्देश है। यह उपन्यास, वास्तव में, युग-युग के उस स्वप्न की सम्पूर्ण झलक है जो धीरे-धीरे, आंशिक रूप में ही सही, सत्य बनता जा रहा है।
Parvati Chachi
- Author Name:
Vijay Kumar
- Book Type:

- Description: Parvati Chachi
Twisted Tales
- Author Name:
Various Authors
- Book Type:

- Description: Authors ink brings to you an unputdownable heady cocktail of 13 short stories that will compel you think about life in a way you have never thought before. Ranging from tales of horror to the tales of the unexpected, from stories of love to stories of irony and self realisation, twisted tales promises to keep you enthralled as each story brings out the vagaries of life and the fickleness as well as the strengths of human emotions and character in a way that each story touches you in a special way and compels you to relate it to your own life and personal experiences. Pick up the book, put your feet up, and make yourself comfortable to embark on a journey full of excitement, thrills and experience the…unexpected.
Vaidehi Ke Ram
- Author Name:
Chitra Chaturvedi 'Kartika'
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Kaale Kos
- Author Name:
Balwant Singh
- Book Type:

-
Description:
बलवन्त सिंह का रचनाकार न तो अतिरिक्त सामाजिकता से आक्रान्त रहता है और न ही कला और शिल्प के दबावों से आतंकित। अपनी सतत जागरूक और सचेत निगाह से वे अपने कथा-चरित्रों और कथा-भूमि के सबसे विश्वसनीय यथार्थ तक पहुँचने का प्रयास करते हैं। शिल्प और संवेदना का द्वन्द्व उनकी रचनाओं में प्रशंसनीय सन्तुलन के साथ प्रकट होता है।
उनकी औपन्यासिक कृतियाँ अपने कलेवर में महा-काव्यात्मक गरिमा से परिपूर्ण होती हैं। दूसरी तरफ़ उनके पात्र भी अपने जीवन के चौखटे में अपनी भरपूर ऊर्जा के साथ प्रकट होते हैं। वे नुमाइशी और कृत्रिम नहीं होते, बल्कि जिन्दगी की अनिश्चितता और अननुमेयता से जूझते हुए, हाड़-मांस के साधारण, खुरदुरे लोग होते हैं जिनका वैशिष्ट्य एक ख़ास संलग्नता के साथ देखने पर ही दिखाई देता है। बलवन्त सिंह की रचनाएँ इस संलग्नता से बख़ूबी पगी हुई होती हैं।
‘काले कोस’ की पृष्ठभूमि में भी ऐसे ही लोगों की छवियाँ दिखाई देती हैं। पंजाब की धरती की ख़ूशबू में रसे-बसे और अपनी कमज़ोरियों-ख़ूबियों से जूझते ये लोग देर तक पाठक की स्मृति में अपनी जगह बनाए रखते हैं। यह कहानी पंजाब के बँटवारे से शुरू होकर फ़सादों में ख़त्म हो जाती है। लेकिन इस ख़त्म हो जाने के साथ ही पाठक के मन में जो कुछ छोड़ जाती है, वह एक ऐसी टीस है जो आज तक ख़त्म नहीं हो पाई है।
Sookha Bargad
- Author Name:
Manzoor Ehtesham
- Book Type:

-
Description:
सुपरिचित कथाकार मंज़ूर एहतेशाम का यह महत्त्वपूर्ण उपन्यास वर्तमान भारतीय मुस्लिम समाज के अन्तर्विरोधों की गम्भीर, प्रामाणिक और मूल्यवान पड़ताल का नतीजा है और यही कारण है कि इस उपन्यास को हिन्दी की कालजयी रचनाओं में गिना जाता है।
सामाजिक विकास के जिन अत्यन्त संवेदनशील गतिरोधों पर क़लम उठाने और उन्हें छूने-भर का साहस भी बहुत कम लोग कर पाते हैं, उन्हें इस उपन्यास में न सिर्फ़ छुआ गया है, बल्कि सबसे बड़े ख़ुदा—इंसान की ज़रूरतों, आशा-आकांक्षाओं और अस्तित्व के सन्दर्भ में उनकी गहरी छानबीन की गई है। धर्म, जातीयता, क्षेत्रीयता, भाषा और साम्प्रदायिकता के जो सवाल आज़ादी के बाद हमारे समाज में यथार्थ के विभिन्न चेहरों में उभरे हैं, उनकी असहनीय आँच इस समूची कथाकृति में मौजूद है।
यही सारे सवाल आज भी हमारे आसपास एक ऐसे बरगद की झूलती जड़ें बनकर फैले हुए हैं, जिसके नीचे किसी भी कौम की तरक़्क़ी और ख़ुशहाली असम्भव है। लेकिन सबसे महत्त्वपूर्ण है यह जानना कि इस त्रासदी के पीछे किसका हाथ है और इसका हल क्या है? कहना न होगा कि इस प्रश्न का उत्तर देते हैं वे तमाम लोग जो इस समाज में शोषित, पीड़ित, अपमानित और लांछित हैं, लेकिन आज भी टूटे नहीं हैं।
Lal Teen Ki Chhat
- Author Name:
Nirmal Verma
- Book Type:

-
Description:
निर्मल वर्मा हिन्दी के उन गिने-चुने साहित्यकारों में से हैं जिन्हें अपने जीवनकाल में ही अपनी कृतियों को क्लासिक बनते देखने का दुर्लभ सौभाग्य प्राप्त हुआ है। प्रायः सभी आलोचक इस बात पर सहमत हैं कि हिन्दी में कहानी कहने की कला को एक निर्णायक मोड़ देने का श्रेय उन्हें है। उन्होंने भाषा को भी बदला और उसके प्रयोग की विधि को भी। उनके गद्य को पढ़ते हुए अपनी ही भाषा की सम्प्रेषणीयता हमें चकित कर देती है।
‘लाल टीन की छत’ उनका बेहद चर्चित उपन्यास है। यह उपन्यास उन्होंने 1970 में लिखना आरम्भ किया और अप्रैल 1974 में पूर्ण किया। दिल्ली, लन्दन और शिमला में लिखे गये इस उपन्यास में निर्मल वर्मा की रचनात्मकता अपने पूर्ण उत्कर्ष पर दिखाई देती है।
‘लाल टीन की छत’ एक ऐसी अकेली लड़की की गाथा है जो अपने छोटे भाई के साथ एक पहाड़ी शहर में रहती है। सर्दी की लम्बी, सूनी छुट्टियों में वह इधर-उधर भटकती रहती है। उसने अपने इर्द-गिर्द एक मायावी जाल-सा बुन लिया है जिसमें वह अधिकांश समय खुद अपनी सच्ची-झूठी स्मृतियों से खेलती रहती है। वह एक ऐसी सीमा पर खड़ी है, जिसके पीछे बचपन छूट चुका है और आनेवाला समय अनेक संकेतों और सन्देशों से भरा है। एक छोर पर अजीब-सा आतंक है, दूसरे छोर पर एक असहनीय सम्मोहन, और इन दोनों के बीच जो अँधेरी भूलभुलैया फैली है, यह उपन्यास उसके कोनों को छूता, पकड़ता, छोड़ता हुआ चलता है।
Katra Bi Arzooo
- Author Name:
Rahi Masoom Raza
- Book Type:

-
Description:
‘कटरा बी आर्जू’ एक मामूली कटरे की कहानी होते हुए भी लगभग पूरे देश की कहनी है—अपने समय की कहानी है। यह उन 'गूँगी बस्तियों' के 'गूँगे लोगों' की कहानी है जहाँ 'उजाले' का कहीं नामो-निशान तक नहीं है। ऐसी बस्तियाँ शहर इलाहाबाद में ही नहीं, हर बड़े शहर में हैं—दिलों में छिपे अँधेरे कोनों की तरह। और हर अँधेरा जैसे अपने भीतर रोशनी का सपना पालता है, वैसे ही बिल्लो और देशराज भी एक सपना पालते हुए बड़े होते हैं—अपना एक घर होने का सपना। सपने को सच बनाने के लिए उन्हें जी-तोड़ संघर्ष करना पड़ता है और जब कामयाबी हासिल होने को होती है तो बुलडोजर उसे चकनाचूर कर जाता है—अँधेरा, अँधेरा ही रह जाता है।
इस उपन्यास की कथा इमरजेंसी से पहले की पृष्ठभूमि में शुरू होती है और ‘जनता’ के उदय पर आकर ख़त्म होती है। कथाकार का उद्देश्य सिर्फ़ कहानी कहना है, अपनी बातें आरोपित करना नहीं। वह तटस्थ भाव से उन यातनामय स्थितियों का चित्रण करता है, जिनमें दर्द का अहसास मिट जाता है—दर्द ही दवा बन जाता है। दर्द केवल बिल्लो और देशराज का नहीं; प्रेमा नारायण, शम्सू मियाँ, भोलू पहलवान, इतवारी बाबा, बाबूराम, आशाराम वग़ैरह के भी अपने-अपने दर्द हैं जो अपनी हद पर पहुँचकर अपनी अर्थवत्ता खो देते हैं। इमरजेंसी के दौरान ऊपरी तबके के स्वार्थी तत्त्वों ने कैसा अंधेर मचाया, स्थानीय नेताशाही और नौकरशाही कैसे खुलकर खेली तथा आम आदमी का यह विश्वास कैसे टूटा कि ‘इमरजेंसी से ग़रीब आदमी का भला भया है’—ये सारी वास्तविकताएँ पूरी प्रभावकता और सहजता के साथ इस उपन्यास में उभरकर आई हैं। वस्तुतः इस असरदार कृति के द्वारा राही मासूम रज़ा की तीखी और सधी हुई क़लम की श्रेष्ठता एक बार फिर प्रमाणित हुई है।
Matrichhabi
- Author Name:
Mahashweta Devi
- Book Type:

-
Description:
‘माँ’ सिर्फ़ एक सम्बन्धवाचक शब्द नहीं, बल्कि बरगद की वृक्ष की तरह इसकी विशालता है। जिसकी असंख्य जड़ें हैं, जो ज़मीन में मज़बूती से पैठकर अपने हर छोटे तने को पेड़ बनते देखती है। महाश्वेता देवी की ‘मातृछवि’ में माँ रूपी बरगद के अनेक तने हैं जिनमें उसके भिन्न-भिन्न रूप दिखाई देते हैं। इसमें कौशल्या है जो अपनी ज़मीन के लिए, अपने अधिकार के लिए हसुआ लेकर अकेले पूरे गाँव का नेतृत्व करती है और अपनी ज़िन्दगी न्योछावर कर देती है। वहीं जाह्नवी माँ हैं, जिन्हें जीते-जी देवी अवतार का रूप बताकर उनके पोते उनकी कमाई खाते रहते हैं और असल में उन्हें एक कोठी में बन्द कर खाने के लिए भी तरसाते हैं। ‘मातृछवि’ सिर्फ़ माँ के भिन्न रूपों को नहीं गढ़ती, बल्कि आज़ादी के बाद के बंगाल की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परतों को भी उधेड़ती है। परतों के खुलते ही जहाँ नक्सलबाड़ी आन्दोलन की रक्तरंजित भूमि दिखाई देती है तो वहीं समाजवाद के निर्माण के नाम पर यमुनावती की माँ और उसके जैसे तमाम लोग, जो अपने को फालतू और अनावश्यक समझने पर मजबूर किए जाते हैं। वहीं अपनी इज़्ज़त को बचाए रखने और अपने बच्चे को भरपेट चावल खिलाने के लिए जटी को सुबह-शाम की माँ बनना पड़ता है। और दिन देवी बनकर गुज़ारना पड़ता है।
महाश्वेता देवी की कहानियों में भले ही औरत का मातृ रूप आज से पचास साल पहले का ही क्यों न हो, लेकिन इसकी प्रासंगिकता आज भी उतनी ही है जितनी तब रही होगी।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book