Kaal Chakra
(0)
Author:
Madhu BhaduriPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
199
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कालचक्र हमें इतिहास के एक ऐसे मोड़ पर ले जाता है, जहाँ आज़ादी के बाद का सबसे तीव्र घटना प्रवाह विद्यमान है, जहाँ खड़ा है एक आदमकद मोहभंग। एक ज्वार जहाँ उफन रहा है, जिसकी उत्तुंग लहरों में फूट रहा है एक अत्यन्त ठोस प्रश्न–यह आज़ादी क्या वास्तविक आजादी है ? या उसे अभी हासिल करना है ? यह माँग और इसी के साथ तमाम मेहनतकशों के राज की माँग जहाँ एक आँधी की तरह उठ रही है। जहाँ पूरे देश को हिला रहा है एक शब्द–अपने समय का सबसे आग्नेय शब्द–नक्सलबाड़ी। लेखिका ने इस महत्त्वपूर्ण उभार को अत्यन्त सघन रूप में व्यक्त किया है। राजनीतिक मूल्यों की सुस्पष्ट पहचान के साथ ही उभरती है निम्नमध्यवर्गीय पात्रों की एक</p> <p>भरी-पूरी दुनिया, उनकी आशा-आकांक्षाएँ, रुचि-वैचित्र्य और आत्म-संघर्ष, जिन्हें लेखिका ने बड़ी ईमानदारी और आत्मा की पूरी गहराई से एक पहचान देने की कोशिश की है। नक्सलबाड़ी क्रान्ति के असफल हो जाने के कारणों की गम्भीर पड़ताल यहाँ दिखाई देती है। इस प्रयास में सबसे पहले जो चीज़ स्पष्ट होती है, वह यही कि क्रांति केवल कोरे आदर्शों और दुस्साहस के मेल का नाम नहीं है। वह मेहनतकश वर्ग के नेतृत्व के बिना सम्भव नहीं है। अभिजात और मध्यवर्ग के लोगों ने किस तरह इसका वरण किया, फिर किस तरह वे एकदम बिखर गए, टूट गए और उन्होंने राहें बदल लीं, इसका अत्यन्त कलात्मक चित्रण कर लेखिका ने अपनी दृष्टि-सम्पन्नता का ही परिचय दिया है। क्रांति की अनुगूँज इस समूची कृति में निरन्तर सुनाई देती है। और साथ ही यह आशय भी उभरकर आता है कि नारी मुक्ति से लेकर रोज़गार तक की प्रत्येक समस्या का हल इतिहास की इसी प्रक्रिया में–क्रांति की सफलता में–अन्तर्निहित है।
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कालचक्र हमें इतिहास के एक ऐसे मोड़ पर ले जाता है, जहाँ आज़ादी के बाद का सबसे तीव्र घटना प्रवाह विद्यमान है, जहाँ खड़ा है एक आदमकद मोहभंग। एक ज्वार जहाँ उफन रहा है, जिसकी उत्तुंग लहरों में फूट रहा है एक अत्यन्त ठोस प्रश्न–यह आज़ादी क्या वास्तविक आजादी है ? या उसे अभी हासिल करना है ? यह माँग और इसी के साथ तमाम मेहनतकशों के राज की माँग जहाँ एक आँधी की तरह उठ रही है। जहाँ पूरे देश को हिला रहा है एक शब्द–अपने समय का सबसे आग्नेय शब्द–नक्सलबाड़ी। लेखिका ने इस महत्त्वपूर्ण उभार को अत्यन्त सघन रूप में व्यक्त किया है। राजनीतिक मूल्यों की सुस्पष्ट पहचान के साथ ही उभरती है निम्नमध्यवर्गीय पात्रों की एक</p>
<p>भरी-पूरी दुनिया, उनकी आशा-आकांक्षाएँ, रुचि-वैचित्र्य और आत्म-संघर्ष, जिन्हें लेखिका ने बड़ी ईमानदारी और आत्मा की पूरी गहराई से एक पहचान देने की कोशिश की है। नक्सलबाड़ी क्रान्ति के असफल हो जाने के कारणों की गम्भीर पड़ताल यहाँ दिखाई देती है। इस प्रयास में सबसे पहले जो चीज़ स्पष्ट होती है, वह यही कि क्रांति केवल कोरे आदर्शों और दुस्साहस के मेल का नाम नहीं है। वह मेहनतकश वर्ग के नेतृत्व के बिना सम्भव नहीं है। अभिजात और मध्यवर्ग के लोगों ने किस तरह इसका वरण किया, फिर किस तरह वे एकदम बिखर गए, टूट गए और उन्होंने राहें बदल लीं, इसका अत्यन्त कलात्मक चित्रण कर लेखिका ने अपनी दृष्टि-सम्पन्नता का ही परिचय दिया है। क्रांति की अनुगूँज इस समूची कृति में निरन्तर सुनाई देती है। और साथ ही यह आशय भी उभरकर आता है कि नारी मुक्ति से लेकर रोज़गार तक की प्रत्येक समस्या का हल इतिहास की इसी प्रक्रिया में–क्रांति की सफलता में–अन्तर्निहित है।
Book Details
-
ISBN9788171784882
-
Pages164
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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‘कंकाल’ भारतीय समाज के विभिन्न संस्थानों के भीतरी यथार्थ का उद्घाटन करता है। समाज की सतह पर दिखाई पड़नेवाले धर्माचार्यों, समाज-सेवकों, सेवा-संगठनों के द्वारा विधवा और बेबस स्त्रियों के शोषण का एक प्रकार से यह सांकेतिक दस्तावेज़ है। आकस्मिकता और कौतूहल के साथ-साथ मानव-मन के भीतरी परतों पर होनेवाली हलचल इस उपन्यास को गहराई प्रदान करती है। हदय-परिवर्तन और सेवा-भावना स्वतंत्रताकालीन मूल्यों से जुड़कर इस उपन्यास में संघर्ष और अनुकूलन को भी सामाजिक कल्याण की दृष्टि का माध्यम बना देते हैं।
उपन्यास अपने समय के नेताओं और स्वयंसेवकों के चरित्रांकन के माध्यम से एक दोहरे चरित्रवाली जिस संस्कृति का संकेत करता और बनते हुए जिन मानव-सम्बन्धों पर घंटी और मंगल के माध्यम से जो रोशनी फेंकता है वह आधुनिक यथार्थ की पृष्ठभूमि बन जाता है। सर्जनात्मकता की इस सांकेतिक क्षमता के कारण यह उपन्यास यथार्थ के भीतर विद्यमान उन शक्तियों को भी अभिव्यक्त कर सका है जो मनुष्य की जय-यात्रा पर विश्वास दिलाती है।
Ek Violin Samandar Ke Kinare
- Author Name:
Krishna Chander
- Book Type:

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Description:
इस उपन्यास का नायक—केशव—हज़ारों साल पीछे छूट गई दुनिया से हमारी दुनिया में आया है। आया है एक लड़की से प्रेम करने की अटूट इच्छा लिये। वह लड़की उसे मिलती भी है, लेकिन त्रासदी यह कि वह उसकी हत्या कर डालता है!...
...तो जो व्यक्ति अपनी दुनिया से हमारी दुनिया में प्यार करने आया था, उसने हत्या क्यों की? यही है इस उपन्यास का मुख्य सवाल, जिसका जवाब प्रक्रिया में उनका यह बहुचर्चित उपन्यास वर्तमान सभ्यता के पूँजीवादी जीवन-मूल्यों पर तो प्रहार करता ही है, उन मूल्यों को उजागर करता है, जो मानव सभ्यता को निरन्तर गतिशील बनाए हुए हैं। उनकी मान्यता है कि पुरानी दुनिया के सिद्धान्तों से नई दुनिया को नहीं परखा जा सकता। नई दुनिया की स्त्री भी नई है—प्रेम के कबीलाई और सामन्ती मूल्य उसे स्वीकार नहीं। अब वह स्वतंत्र है। वास्तव में सतत परिवर्तनशील मूल्य-मान्यताओं का अन्त:संघर्ष इस कथाकृति को जो ऊँचाई सौंपता है, वह अपने प्रभाव में आकर्षक भी है और मूल्यवान भी।
Nauka Doobi
- Author Name:
Rabindranath Thakur
- Book Type:

- Description: भारत को आधुनिक समाज बनने के मार्ग पर आगे बढऩे की शक्ति प्रदान करनेवाले रवीन्द्रनाथ ने 'नौका डूबी' उपन्यास में व्यक्ति की मनोव्याकुलता के रहस्य उद्घाटित किए हैं। इसमें व्यक्ति के अन्तर्लोक और समाज की इच्छाओं-आस्थाओं के मध्य होनेवाली टकराहट से उत्पन्न त्रासद जीवन-दशाओं की अभिव्यक्ति हुई है। कमला, रमेश, हेमनलिनी और नलिनाक्ष तेज़ी से तथा अकस्मात् आकार लेती घटनाओं के जाल में निरन्तर उलझते रहते हैं। 'गोरा' की रचना के पूर्व रवीन्द्रनाथ भारत के समाज का जो रूप देख रहे थे और व्यक्तियों की चिन्तन-प्रणाली में जिस परिवर्तन की आहट सुन रहे थे, वही इस कृति में है। 'नौका डूबी' को उसमें निहित विशिष्ट सांस्कृतिक और सामाजिक प्रयोगों को जाने बिना अच्छी तरह नहीं समझा जा सकता। ध्यान यह भी रखना होगा कि रवीन्द्रनाथ ठाकुर भारतीय साहित्य की अवधारणा के पहले-पहले पक्षधरों में से थे; अत: उन्होंने अपनी रचनाओं में समग्र समाज के भीतरी व्यवहारों को भरपूर जगह दी है। जो पाठक यथास्थान प्रस्तुत टिप्पणियों पर ध्यान देंगे, उन्हें पता चल जाएगा कि 'नौका डूबी' के अनुवाद में इस सत्य को सामने लाने का प्रयास किया गया है। प्रामाणिकता और मूल की यथासाध्य रक्षा इस अनुवाद-कार्य का लक्ष्य रहा है।
The Melody of Life
- Author Name:
Uttam Kumar +1
- Book Type:

- Description: From the Editor�s Desk There is beauty in Life; right from beginning to the end there are messages scattered around. Some of us pick up those messages and rewrite it using words that add more meaning to otherwise lifeless letters and then present it to the world as stories and poems. �Melody of Life� is one such collection of poems by amateur and established writers from India. It�s an attempt to provide a platform to young poets and bridge the gap that exists between readers and writers. Varied topics and different styles; each poem is sure to leave you mesmerized and filled with desire to read more� Rachna Gupta Bansal Life is the best creation of God. There is life all around us; in the Air that breezes past us; in the Sea waves; in tree leaves and so on. There are different shades of life and a person spends whole life understanding these shades. This collection of poems by different poets from across India gives us a glimpse into these shades. Each and every poem gives us a different in-depth understanding of Life. Uttam Kumar
90ml Samundar
- Author Name:
Sunil Sahil
- Book Type:

- Description: सुनील साहिल टीवी कॉमेडी शो लेखक एवं कवि-सम्मेलन मंचों पर हास्य-व्यंग्य कवि के रूप में सक्रिय हैं, इंग्लैंड के कई शहरों में काव्य-पाठ का आमंत्रण, रेडियो सनराइज, लन्दन और रेडियो एक्सेल, बिर्मिंघम पर इंटरव्यू प्रसारित, ऍम ए टीवी, लन्दन पर कविताएँ प्रसारित, सब टीवी के शो ‘वाह-वाह’ में आमंत्रण. ‘ये कविताएँ मैंने नहीं लिखी हैं, ये कविताएँ मुझसे अभिव्यक्त हुई हैं, अस्तित्व ने मुझे चुना इन शब्दों, इन भावों का जरिया बनने को, माध्यम बनने को, साधन बनने को, जब मैं मिट गया तो लगा कि अस्तित्व और मुझमें संवाद हो रहा है, एक सम्बन्ध घट रहा है जिसमें ये कुछ सहज अभिव्यक्तियाँ प्रकट हुई, आप हमेशा ‘कवि’ बने नहीं रह सकते हैं, शायद कुछ पल आप कवि हो जाते हैं जब कविता आपकी रूह की जमीन पर उतरती है, तब आपको अनुभूति होती है कि आपकी देह, आपका मन, आपका जेहन भीतर की यात्रा पर निकला है- बस एक झलक मिलती है सम्बुद्ध होने की और फिर खो जाती है, बस उन्हीं चंद लम्हों का जमावड़ा है – 90 ml समंदर’
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