The Invisible Power
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This autobiography chronicles the illustrious career of Shri Debdas Chakraborty, a true legend of the Assam Police force. From his humble beginnings as a sports-loving youngster to his rise through the ranks over decades of service, Shri Chakraborty recounts his diverse experiences working across departments and locations. Whether facing challenges in difficult postings or spearheading operations with distinction, he earned a strong reputation as a capable officer wholly dedicated to his duties. This memoir offers fascinating insights into police work during times of rapid change in Assam. It also provides a rare glimpse into the character of a man who served the people of Assam with utmost integrity throughout his career spanning almost four decades. An inspiration for those interested in public service, law enforcement, and the rich history of Northeast India.
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This autobiography chronicles the illustrious career of Shri Debdas Chakraborty, a true legend of the Assam Police force. From his humble beginnings as a sports-loving youngster to his rise through the ranks over decades of service, Shri Chakraborty recounts his diverse experiences working across departments and locations. Whether facing challenges in difficult postings or spearheading operations with distinction, he earned a strong reputation as a capable officer wholly dedicated to his duties. This memoir offers fascinating insights into police work during times of rapid change in Assam. It also provides a rare glimpse into the character of a man who served the people of Assam with utmost integrity throughout his career spanning almost four decades. An inspiration for those interested in public service, law enforcement, and the rich history of Northeast India.
Book Details
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ISBN9788119745166
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Pages336
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Avg Reading Time11 hrs
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Age0-11 yrs
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Country of OriginIndia
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“লেখকএই উপন্যাসে একটা স্পিরিচুয়াল জার্নি সম্পন্ন করেছেন। মোজাফ্ফর তার আগের সব কাজকেইছাড়িয়ে গেছেন এই জার্নির ভেতর দিয়ে। এই উপন্যাস সময়কে অতিক্রম করবে। সব উপন্যাসসেটা করে না, ভালো উপন্যাস হলেও সব সময় করে না। এটা করবে কারণ এখানে বর্ণনার যে ধরনসেটা গল্পের তো নয়ই, এমনকি সাধারণ ফিকশন যে লেখা হয়, তেমনও না। এই উপন্যাসে যে চরিত্রগুলোআছে, প্রতিটি চরিত্রই, সে যত ছোটো ভূমিকাতেই থাকুক না কেন, প্রটাগনিস্ট হয়ে ওঠে। প্রত্যেকেরজন্য মমতা জাগে, মন খারাপ হয়। কী একটা অভিশপ্ত জীবন তাদের! শুধু মানুষ না, প্রকৃতিরসকল প্রাণই যেন একটা অভিশাপের পরম্পরা। তারপরও এই উপন্যাস ভালোবাসার কথা বলে, মমতাজাগায়। বর্ণনার মধ্যে যে মুনসিয়ানা এবং ভাষার যে আভিজাত্য সেটা একটা মহাকাব্যিক অনুভূতিদেয়। এই উপন্যাসে স্পেসডগ লাইকার প্রসঙ্গটা এনে ভালো হয়েছে। সমষ্টি বাজাতিগত স্মৃতির কথা এসেছে। জীবনকে যে কতরকমভাবে দেখা যায়, কতরকমভাবে ব্যাখ্যা করাযায়, তার এক উজ্জ্বল উদাহরণ তৈরি করলো এই উপন্যাস। আখ্যান এখানে প্রধান নয়, চিন্তাএবং দর্শনই প্রধান। সেটা এমন এক গতিশীল-প্রাঞ্জল-ঋজু-স্মার্ট-অনিন্দ্যসুন্দর গদ্যেসেসব বর্ণনা করেছেন লেখক, যে মুগ্ধ না হয়ে পারা যায় না। মোটের উপর এই উপন্যাস শুধু একজন মানুষের সেক্সুয়াল আইডেন্টিটির বিষয়না, আইডেন্টিটি এজ এ হোল। এই কারণে বইটা শেষ করে শেষ পাতায় আমি লিখে রেখেছি: The writer has completed a wonderful spiritual journey through this novel and discovered that every life is acontinuation of an unavoidable curse.” আহমাদ মোস্তফা কামাল কথাসাহিত্যিক ও সাহিত্য-সমালোচক
Khali Jagah
- Author Name:
Geetanjali Shree
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संवेदना और गहरी दृष्टि से भाषा के अनोखे खेल की रचना करता है गीतांजलि श्री का उपन्यास—‘ख़ाली जगह’। इस उपन्यास में लेखिका ने नैरेटिव की चिन्दियों को विस्फोट की तरह फैलने दिया है—बार-बार सत्यता के दावों में छेद करते हुए। ‘ख़ाली जगह’ में मूल तत्त्व वह हिंसा है जो हमारे, रोज़मर्रे की ज़िन्दगी में समा गई है। ‘बम’ इसका केन्द्रीय रूपक है जो ज़िन्दगियों के परखचे उड़ा देता है।
एक अनाम शह के अनाम विश्वविद्यालय के सुरक्षित समझे जानेवाले कैफ़े में एक बम फटता है—और उन्नीस लोगों की शिनाख़्त से शुरू होती है—‘ख़ाली जगह’ की कहानी। उन्नीसवीं शिनाख़्त करती है एक माँ—अपने राख हुए अठारह साल के बेटे की और यही माँ ले आती है बेटे की चिन्दियों के साथ एक तीन साल के बच्चे को, जो सलामत बच गया है, न जाने कैसे, ज़रा-सी ख़ाली जगह में...!
गीतांजलि श्री ऑब्जेक्टिव और सब्जेक्टिव यथार्थ के बीच जो तालमेल बिठाती हैं वह स्पष्ट, तार्किक क्रम को तोड़ता है। वह उसमें लेखकीय वक्तव्य देकर कोई हस्तक्षेप नहीं करतीं। पात्रों की भावनाएँ, उनके विचार और कर्म, अस्त-व्यस्त उद्घाटित होते हैं, घुटे हुए, कभी ठोस, कभी ज़बरदस्त आस और गड़बड़ाई तरतीब में हैरानी से भिंचे हुए। पूछते से कि क्या यही है जीवन, यही होता है उसका रंग-रूप, ऐसा ही होना होता है? ‘ख़ाली जगह’ गीतांजलि श्री के लेखन की कुशलता का सबूत है, वह कल्पना और यथार्थ के अभेद से बनी ज़िन्दगी बटोर लाती हैं और ‘ख़ाली जगह’ पाठकों के मन पर अपना अमिट प्रभाव छोड़ जाता है।
Nitshay Ki Kutai
- Author Name:
Mayank Jain
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यह ऐसी किताब है जिसे एक बार शुरू कर लेने के बाद आप पूरी कहानी पढ़े बिना छोड़ नहीं पाएँगे । व्यंग्य और कटाक्ष से सजी ये कहानियाँ छोटे शहरों और कस्बों की झलक देती हैं -- ऐसे पात्रों के बीच जिनसे हम अक्सर अपने आसपास मिलते हैं। यथार्थ, तर्क, कल्पना और संयोग मिलकर ये कहानियाँ जीवन को देखने का एक नया नज़रिया पेश करती हैं। माया शर्मा, क्वीर लेखिका और विचारक मयंक की कहानियों के मज़ाक में उनका गाम्भीर्य है। एक नयी आवाज़ जो हिन्दी के पूर्वजों से जितना लेती है, उतना ही अपना नया रास्ता भी बनाती है । तनुज सोलंकी, अंग्रेज़ी उपन्यासकार और संपादक
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