A Divine Tale of Destinies Shanaki Chananthaki
Author:
Mahalaxami NaiduPublisher:
Author'S Ink PublicationsLanguage:
EnglishCategory:
Literary-fiction3 Ratings
Price: ₹ 241.4
₹
284
Available
One of the amazing things we have been given as humans is the unquenchable desire to have dreams and knack to make it happen. “A divine tale of destinies – shanaki chananthaki” a mythological tale unfolds against the back drop of Mahabharata war and throws light on the impact the war had on lives other than Pandavas and Kauravas. Growing up as a princess of a powerful kingdom, she did not have the rights to chase her dream. Chananthaki, an exceptionally beautiful princess of chanantakraj has to choose whether to chase her dream or to be an upright royal heir who has to follow the protocols of a royal princess. Will she be able to fight against all odds to accomplish her dream? Who is shanaki? Will chananthaki be able to turn shanaki’s dream into reality? Let’s find out together in this intriguing divine tale of destinies.
ISBN: 9788194128908
Pages: 210
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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‘कादम्बरी देवी का सुसाइड नोट’ विश्वकवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर की भाभी के त्रासद जीवन की मार्मिक कथा है।
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कादम्बरी की मृत्यु के सवा सौ साल से भी अधिक समय बाद प्रकाशित यह उपन्यास ऐसे तमाम प्रश्नों के उत्तर देता है। वस्तुत: यह ऐसी कृति है जो उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध की एक घटना के बहाने बांग्ला नवजागरण के अन्तर्विरोधों को जबरदस्त ढंग से उजागर करती है...
अत्यन्त विवादित और उतना ही लोकप्रिय उपन्यास!
Tamrapat
- Author Name:
Rangnath Pathare
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Description:
मौजूदा समय के जटिल यथार्थ, समाज की बहुमुखी विसंगतियों और आधुनिक मनुष्य के सम्मुख उपस्थित चुनौतियों का जैसा अंकन उपन्यास विधा में सम्भव है, ऐसा और किसी विधा में नहीं। भारतीय भाषाओं के उपन्यासकारों ने अपने समकाल को समझने और विश्लेषित रूप में पाठकों तक पहुँचाने में इस विधा का बखूबी प्रयोग किया है।
मराठी में कादम्बरी यानी उपन्यास लेखन का अपना एक इतिहास रहा है। प्रसिद्ध लेखक रंगनाथ पठारे का यह चर्चित उपन्यास ‘ताम्रपट’ उन सब सम्भावनाओं को समेटे हुए है जिनकी अपेक्षा उपन्यास से की जाती है। अपने बृहद् कलेवर में ‘ताम्रपट’ की कथा का फलक भारतीय इतिहास के लगभग चार दशकों में फैला हुआ है—1942 से लेकर 1979 तक। अलग से कहना ज़रूरी नहीं कि यही वह दौर है जब देश ने स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद के उत्साह और अवसाद दोनों को झेलते हुए विश्व-पटल पर अपनी पहचान कराई। इस काल में हमने सत्ता के संघर्षों का विभिन्न रूप देखा, संस्थाओं का बनना और उनका भ्रष्ट होना भी देखा, शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में अनेक निर्मितियों और विध्वंसों को भी देखा; नागरिकों के नैतिक उत्थान-पतन से भी हम रूबरू हुए। ‘ताम्रपट’ के माध्यम से हम इस पूरी यात्रा से गुज़रते हैं। लेखक की विराट विश्वदृष्टि और अपने आसपास के यथार्थ का विश्वसनीय अभिज्ञान इस उपन्यास में अपने सम्पूर्ण वैभव के साथ उपस्थित है।
Shadi Se Peshtar
- Author Name:
Sharmila Bohra
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Description:
शादी, ख़ासकर लड़कियों की एक कठिन, जटिल और अत्याधुनिक समस्या बनती जा रही है। वह जीवन का एक मुक़ाम है, परम और चरम लक्ष्य नहीं, ऐसी प्रतीति पढ़ी-लिखी और तथाकथित आधुनिक लड़की को भी नहीं हो पाती, क्योंकि बहुत कुछ बदलने के बावजूद समाज जस का तस रह गया है। जींस पहननेवाली बाल-कटी लड़की राहगीरों को भले ही आज़ाद, खिलंदड़ और कभी-कभी लड़का तक होने का आभास दे या भ्रम पैदा करे, लेकिन उसकी और उसके संकटग्रस्त माता-पिता की तलाश अच्छा-सा लड़का और ठीक-ठाक घर ढूँढ़ने से आगे नहीं जा पाती। यह तलाश एक अथक और जानलेवा प्रयत्न बन जाती है और बार-बार असफल होने पर एक ऐसी प्रतीक्षा का रूप ले लेती है, जो तरह-तरह के भय, नए-नए नुस्ख़े आज़माने, ज्योतिषियों के चक्कर लगाने और समय को भरने के दबाव पैदा करती रहती है। जब तक शादी न हो तब तक लड़की क्या करे?
‘शादी से पेशतर’ की कई लड़कियों में एक डेज़ी कहती है, ‘‘कुछ सोचो मत बस करती चली जाओ।’’ क्या करती चली जाओ? नए-नए कोर्स—ब्यूटीशियन बनने के, कम्प्यूटर विशेषज्ञ बनने के, इंटीरियर डेकोरेटर बनने के और न जाने क्या-क्या। इस करते जाने के पीछे एक धुँधला-सा संकेत अपने पैरों पर खड़े होने का भी ज़रूर रहता है, लेकिन वह शादी को ही ‘मोक्ष’ मानने के कारण ठोस रूप ग्रहण नहीं कर पाता। ‘शादी से पेशतर’ हमें एक ऐसे अन्तःपुर के एकदम भीतर ले जाता है, जिसकी विदीर्णता का हम अनुमान भी नहीं लगा पाते क्योंकि हमें जो दिखाई पड़ता है, उसी को देख रहे होते हैं। यह एक ऐसा कोलाज़नुमा लघु उपन्यास है जो सरसरी दृष्टि से पढ़ने पर सतह पर ही तैरता मालूम पड़ता है, पर ध्यान देने पर यह बताता है कि सतह सिर्फ़ सतही नहीं होती, उसमें नीचे गहराई और डूब भी रहती है।
लेखिका बिना किसी लेखकीय टिप्पणी और गुरुगम्भीरता के शादी का इन्तज़ार करती हुई लड़कियों से हमारी इस तरह मुलाक़ात करवाती है कि हम परेशानी महसूस करने लगते हैं। वह हमें लड़की देखने आए लोगों में बैठा देती है।
Nadi Ke Dweep
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Sachchidananda Hirananda Vatsyayan 'Ajneya'
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- Description: व्यक्ति अज्ञेय की चिंतन-धरा का महत्तपूर्ण अंग रहा है, और ‘नदी के द्वीप’ उपन्यास में उन्होंने व्यक्ति के विकसित आत्म को निरुपित करने की सफल कोशिश की है-वह व्यक्ति, जो विराट समाज का अंग होते हुए भी उसी समाज की तीव्रगामी धाराओं, भंवरों और तरंगो के बीच अपने भीतर एक द्वीप की तरह लगातार बनता, बिगड़ता और फिर बनता रहता है । वेदना जिसे मांजती है, पीड़ा जिसे व्यस्क बनाती है, और धीरे-धीरे द्रष्टा । अज्ञेय के प्रसिद्द उपन्यास ‘शेखर : एक जीवनी’ से संरचना में बिलकुल अलग इस उपन्यास की व्यवस्था विकसनशील व्यक्तियों की नहीं, आंतरिक रूप से विकसित व्यक्तियों के इर्द-गिर्द बुनी गई है । उपन्यास में सिर्फ उनके आत्म का उदघाटन होता है । समाज के जिस अल्पसंख्यक हिस्से से इस उपन्यास के पत्रों का सम्बन्ध है, वह अपनी संवेदना की गहराई के चलते आज भी समाज की मुख्यधारा में नहीं है । लेकिन वह है, और ‘नदी के द्वीप’ के चरों पत्र मानव-अनुभूति के सर्वकालिक-सार्वभौमिक आधारभूत तत्त्वों के प्रतिनिधि उस संवेदना-प्रवण वर्ग की इमानदार अभिव्यक्ति करते हैं । ‘नदी के द्वीप’ में एक सामाजिक आदर्श भी है, जिसे अज्ञेय ने अपने किसी वक्तव्य में रेखांकित भी किया था, और वह है-दर्द से मंजकर व्यक्तित्व का स्वतंत्र विकास, ऐसी स्वतंत्रता की उद्भावना जो दूसरे को भी स्वतंत्र करती हो । व्यक्ति और समूह के बीच फैली तमाम विकृतियों से पीड़ित हमारे समाज में ऐसी कृतियाँ सदैव प्रासंगिक रहेंगी ।
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4.33 out of 5
Book
March 6, 2023, 4:11 am
Archana A
"Her wilderness shows how innocent she is. She is still too young to understand the imperial ways of doing things. Give her some more time. She will understand everything soon." Whenever we talk about kurukshetra, we always throw light upon the Kauravas and Pandavas. Ofcourse, Draupadi as well. But do we even realize that there were millions of families affected by the war? Thousands of women became widows? The story is about Chananthaki, Princess of Chanantakraj, who was one such affected by the war. The tale will give you a different insight. I got this book from the app. Get your copy today!
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