Vishwas Bhara Ehasas
Author:
Priti JainPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 200
₹
250
Unavailable
निराकार वीणा पर भावों के परदे रखकर, कल्पना की तार कस ख्यालों को भरकर उँगली से दबाकर जिस कंपन को उजागर करती हूँ वहाँ जी उठता है सजीव रूप साकार, धवल, उज्ज्वल, अपने रूप और जुण में सिमटा कोमल रागनुमा सरल, सत्य साहित्य इसे अपनाकर, अपना बनाकर जी उठती है कल्पना की साकार प्रतिमा जो अलंकृत है विभिन्न रुपों में अपनाए जाने योग्य इस तेज को जो अपनाए, हो जाए वो भी भाव-विभोर मन गद्णद, निलांजना-सी अद्भ्रुत, मुखरित हो उठें हृदय पटल पर और पुकार उठें- धमनियों की गलियों से ये ही झंकार, झंकृत हो, झंकृत हो, झंकृत हो.
ISBN: 9789390825066
Pages: 160
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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आधुनिक भारतीय मनीषा के अग्रणी उन्नायकों में से एक स्वामी विवेकानन्द विषयक इस पुस्तक का आधार उनके जीवन का वह समय है जो उन्होंने छत्तीसगढ़ की भूमि पर रायपुर में बिताया। उनकी ओजस्वी चेतना के जो स्फुलिंग 11 सितम्बर, 1893 को शिकागो में विस्फोटक ढंग से दुनिया के सामने आए, उनके कुछ बीज निश्चय ही किशोरावस्था के उन ढाई वर्षों में भी पड़े होंगे जब उन्नीसवीं सदी के छत्तीसगढ़ के अभावों का साक्षात्कार उनके आकार लेते मानस से हुआ होगा।
यह आश्चर्यजनक है और दुर्भाग्यपूर्ण भी कि विवेकानन्द के अधिकतर जीवनीकारों ने उनके इस छत्तीसगढ़ प्रवास को अनदेखा किया है। इसलिए ऐसे तथ्य भी सामने नहीं आ सके जिनसे उनके जीवन में 1875 से 1877 के इस कालखंड के महत्त्व को रेखांकित किया जा सके। लेकिन क्या ये सच नहीं है कि व्यक्ति के जीवन में किशोरावस्था के अनुभवों की भूमिका निर्णायक होती है। ज्ञात हो कि विवेकानन्द उस समय 12 वर्ष के थे, जब उनके पिता उन्हें रायपुर लेकर आए और दो वर्ष से ज़्यादा वे यहाँ पर रहे। लोक विश्वास है कि जबलपुर से रायपुर बैलगाड़ी से आते हुए ही उन्हें माँ की गोद में लेटे हुए दिव्य ज्योति के दर्शन हुए थे। यह भी माना जा सकता है कि इसी दौरान उनका परिचय हिन्दी और छत्तीसगढ़ी से हुआ और यहाँ पर उन्हें भारत की ग़ुरबत की वह झलक भी मिली जो उनके व्याकुल चिन्तन का आधार बनी।
यह पुस्तक विवेकानन्द के छत्तीसगढ़ से सम्बन्ध के साथ-साथ उनके सम्पूर्ण व्यक्तित्व और वैचारिक सम्पदा को एक जिल्द में समेटने का प्रयास है। विशेषज्ञ विद्वानों द्वारा लिखे आलेखों के अलावा पुस्तक में विवेकानन्द का चर्चित शिकागो व्याख्यान भी प्रस्तुत किया गया है और कुछ अन्य सामग्री भी जो उन्हें समग्रता में समझने में सहायक होगी।
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