Sadabahar Kahaniyan : Saadat Hasan Manto
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सआदत हसन मंटो 1912 - 1955 मंटो उन लेखकों में हैं, जिन्होंने आदर्श और मर्यादा के नाम पर चलने वाले पाखण्ड को तार-तार कर दिया और | सामाजिक यथार्थ को नंगी आँखों से देखना सिखाया। इसके चलते उनपर कई बार अश्लीलता के आरोप गले। इस बाबत छः मुक़दमें चले। तीन अविभाजित भारत में और तीन पाकिस्तान में। लेकिन ये आरोप साबित नहीं हुए। टोबाटेक सिंह, बू, काली शलवार, खोल दो जैसी कहानियों ने न सिर्फ़ उर्दू बल्कि हिंदी कथा साहित्य को भी प्रभावित किया। उन्हें कहानियों के अतिरिक्त रेडियो और फिल्म पटकथा लेखन के लिए भी याद किया जाता है।
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सआदत हसन मंटो 1912 - 1955 मंटो उन लेखकों में हैं, जिन्होंने आदर्श और मर्यादा के नाम पर चलने वाले पाखण्ड को तार-तार कर दिया और | सामाजिक यथार्थ को नंगी आँखों से देखना सिखाया। इसके चलते उनपर कई बार अश्लीलता के आरोप गले। इस बाबत छः मुक़दमें चले। तीन अविभाजित भारत में और तीन पाकिस्तान में। लेकिन ये आरोप साबित नहीं हुए। टोबाटेक सिंह, बू, काली शलवार, खोल दो जैसी कहानियों ने न सिर्फ़ उर्दू बल्कि हिंदी कथा साहित्य को भी प्रभावित किया। उन्हें कहानियों के अतिरिक्त रेडियो और फिल्म पटकथा लेखन के लिए भी याद किया जाता है।
Book Details
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ISBN9789392088452
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Pages112
-
Avg Reading Time4 hrs
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Age0-11 yrs
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Country of OriginIndia
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Mohsin Khan
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रेख़्ता पब्लिकेशंस और राजकमल प्रकाशन के सह-प्रकाशन में प्रकाशित यह किताब एक बच्चे के दृष्टिकोण से इस दुनिया को देखने-दिखाने की कोशिश करती है। पाठकों को उपन्यास के मुख्य पात्र 9 साल के जिब्रान के माध्यम से बाल-मन में उठने वाली कई सहज-सुलभ जिज्ञासाओं के बारे में जानने को मिलता है। कई बार उसके मन में उठने वाले सवाल और उसके जीवन में होने वाली घटनाएँ पाठक की भावनाओं को उद्वेलित करती हैं और पढ़ने वाले उस छोटे से लड़के से जुड़-से जाते हैं।
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