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Suwarna Dweep

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सुवर्णद्वीप उपन्यास में शीशमहल की बाती की तरह प्रकाशित बहुआयामी और बहुस्तरीय यथार्थ को भेदने में सिर्फ़ अभिषेक जैसा नायक ही समर्थ है। उसका दृढ़ व्यक्तित्व उसके अहं, उसके समाज, पेशे, राजनीति, प्रशासन के आँधी-पानी का मुक़ाबला करता रहता है। समझौता नहीं कर पाता, तिल-तिल कर जल जाता है। मगर उसकी ऊर्जस्विता उसकी ज़िन्दगी की त्रासदी बन जाती है। यह, सुवर्णद्वीप या जम्‍बूद्वीप या तीसरे विश्व का कोई देश, रत्नगर्भा तथा सुफला होते हुए भी क़िस्मत का मारा है। उसका शक्तिमान नायक भी जैसे उद्‌भट नियति का शिकार बनकर अपनी पहचान नहीं बना पाता है। अनेक कहानियाँ, अनगिनत फंतासियाँ, पग-पग पर थिरकती संवेदनाएँ, संक्षिप्त व्यंजना, सूत्रात्मक निष्कर्ष, बिम्ब-रूपक हास्य-व्यंग्य, भाषिक कौशल, अनुभूति की व्याप्ति, सृजनात्मक कल्पना सब मिलकर एक मानववादी लेकिन परास्त पुरुष का सम्पूर्ण चित्र उकेरती हैं। ‘सुवर्णद्वीप’ उपन्यास एक सम्भावनापूर्ण प्रयोग तथा सफल कृति है।

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सुवर्णद्वीप उपन्यास में शीशमहल की बाती की तरह प्रकाशित बहुआयामी और बहुस्तरीय यथार्थ को भेदने में सिर्फ़ अभिषेक जैसा नायक ही समर्थ है। उसका दृढ़ व्यक्तित्व उसके अहं, उसके समाज, पेशे, राजनीति, प्रशासन के आँधी-पानी का मुक़ाबला करता रहता है। समझौता नहीं कर पाता, तिल-तिल कर जल जाता है। मगर उसकी ऊर्जस्विता उसकी ज़िन्दगी की त्रासदी बन जाती है। यह, सुवर्णद्वीप या जम्‍बूद्वीप या तीसरे विश्व का कोई देश, रत्नगर्भा तथा सुफला होते हुए भी क़िस्मत का मारा है। उसका शक्तिमान नायक भी जैसे उद्‌भट नियति का शिकार बनकर अपनी पहचान नहीं बना पाता है।

अनेक कहानियाँ, अनगिनत फंतासियाँ, पग-पग पर थिरकती संवेदनाएँ, संक्षिप्त व्यंजना, सूत्रात्मक निष्कर्ष, बिम्ब-रूपक हास्य-व्यंग्य, भाषिक कौशल, अनुभूति की व्याप्ति, सृजनात्मक कल्पना सब मिलकर एक मानववादी लेकिन परास्त पुरुष का सम्पूर्ण चित्र उकेरती हैं। ‘सुवर्णद्वीप’ उपन्यास एक सम्भावनापूर्ण प्रयोग तथा सफल कृति है।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Hardbound
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2004
Weight
304 grams
ISBN-13
9788171198733
Pages
132
Reading time
~4 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14.5 × 22 cm
Language
Hindi

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