Jeevan Ki Bhent
About the book
नौ वीं कक्षा के एक विद्यार्थी ने गृहकार्य नहीं किया था। शिक्षिका ने उसे बुलाकर कारण पूछा। विद्यार्थी ने गंभीरता से कहा, ‘‘कल मेरा जन्मदिन था और शाम को हमारे घर में बहुत झगड़ा हो गया। सुबह मेरे पिताजी ने मुझे उपहार में एक पुस्तक दी थी। उसे मैं पढ़ रहा था। तभी मम्मी ने कहा कि वह बहुत थक गई है, इसलिए हलका होने के लिए वह पुस्तक उन्हें पढ़नी है। मेरी दादीजी कहती थीं कि मुझे छोटी को प्रतिदिन नई-नई कहानियाँ सुनानी होती हैं, इसलिए सबसे पहले यह पुस्तक उन्हें मिलनी चाहिए, तो मेरे दादाजी ने जिद की कि उनके पास अच्छी वाचन-सामग्री नहीं बची है, अतः वह पुस्तक उनको ही मिले। इतने में मेरे पापा ऑफिस से आए और मुझे धमकाने लगे कि गिफ्ट तो मुझे उन्होंने दी है, तो पुस्तक पहले उनको ही दूँ। इस पुस्तक के लिए घर में इतना बखेड़ा मचा कि मैं होमवर्क ही नहीं कर सका।’’ शिक्षिका ने आश्चर्य से पूछा, ‘‘भला, वह कौन-सी पुस्तक है, मुझे दिखाना।’’ विद्यार्थी ने स्कूल बैग में से निकालकर पुस्तक शिक्षिका को दिखाई। शिक्षिका ने पुस्तक खोलकर कुछ पन्ने पलटे और विचार में डूब गई। उन्होंने विद्यार्थी से कहा, ‘‘तू पहले होमवर्क पूरा कर, तभी यह पुस्तक तुझे लौटाऊँगी।’’ वह सोचता रहा कि यदि आज फिर से घर में झगड़ा होगा, तो वह क्या करेगा? आप ही बताइए, वह बेचारा अब क्या करेगा?
Read more₹
350
₹ 280 20% off
Available
Format
About the Book
नौ वीं कक्षा के एक विद्यार्थी ने गृहकार्य नहीं किया था। शिक्षिका ने उसे बुलाकर कारण पूछा। विद्यार्थी ने गंभीरता से कहा, ‘‘कल मेरा जन्मदिन था और शाम को हमारे घर में बहुत झगड़ा हो गया। सुबह मेरे पिताजी ने मुझे उपहार में एक पुस्तक दी थी। उसे मैं पढ़ रहा था। तभी मम्मी ने कहा कि वह बहुत थक गई है, इसलिए हलका होने के लिए वह पुस्तक उन्हें पढ़नी है। मेरी दादीजी कहती थीं कि मुझे छोटी को प्रतिदिन नई-नई कहानियाँ सुनानी होती हैं, इसलिए सबसे पहले यह पुस्तक उन्हें मिलनी चाहिए, तो मेरे दादाजी ने जिद की कि उनके पास अच्छी वाचन-सामग्री नहीं बची है, अतः वह पुस्तक उनको ही मिले। इतने में मेरे पापा ऑफिस से आए और मुझे धमकाने लगे कि गिफ्ट तो मुझे उन्होंने दी है, तो पुस्तक पहले उनको ही दूँ। इस पुस्तक के लिए घर में इतना बखेड़ा मचा कि मैं होमवर्क ही नहीं कर सका।’’ शिक्षिका ने आश्चर्य से पूछा, ‘‘भला, वह कौन-सी पुस्तक है, मुझे दिखाना।’’ विद्यार्थी ने स्कूल बैग में से निकालकर पुस्तक शिक्षिका को दिखाई। शिक्षिका ने पुस्तक खोलकर कुछ पन्ने पलटे और विचार में डूब गई। उन्होंने विद्यार्थी से कहा, ‘‘तू पहले होमवर्क पूरा कर, तभी यह पुस्तक तुझे लौटाऊँगी।’’ वह सोचता रहा कि यदि आज फिर से घर में झगड़ा होगा, तो वह क्या करेगा? आप ही बताइए, वह बेचारा अब क्या करेगा?
Book details
- Format
- Paperback
- Publisher
- Prabhat Prakashan
- Weight
- 200 grams
- ISBN-13
- 9789355211514
- Pages
- 312
- Reading time
- ~10 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14 × 21.5 cm
- Language
- Hindi
Customer reviews
Be the first to write a review
Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.

