Somtirth
Author:
Raghuveer ChaudharyPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 319.2
₹
399
Available
महमूद ग़ज़नवी ने सोमनाथ लूटा, उसके बाद भारत के हिन्दुओं में मुस्लिमों के प्रति अरुचि जागी, जो और दृढ़ होती गई। ऐसा होना नहीं चाहिए था। महमूद के दो मुख्य सेनापति हिन्दू थे और महमूद धर्म के अगुआ के रूप में नहीं आया था। उसकी भूख सत्ता और सम्पत्ति की थी। उसके धर्माध्यक्ष भी उससे सावधान रहते थे। अन्त में वह भाग निकला। उस समय भारत में बचे हुए उसके साथी शादी कर यहाँ के समाज में मिल गए—जिनसे बाढेल और शेखावत हुए। यहाँ तत्कालीन राजनीतिक–सामाजिक स्थितियों का वर्णन करते हुए उपन्यासकार ने लोगों के निजी सुख–दु:ख तथा दाँव–पेच को भी संजीदगी से उजागर किया है।</p>
<p>लेखक ने यहाँ दो महत्त्वपूर्ण कार्य किए हैं—(1) सत्ता और सम्पत्ति के लोभी राजपुरुषों द्वारा धार्मिक प्रजाजनों के बीच खड़ी की गई ग़लतफ़हमी दूर करना, और (2) सृष्टि में व्याप्त कल्याणकारी सौन्दर्य को शिवतत्त्व के रूप में निरूपित करना।</p>
<p>ऐतिहासिक तथ्यों के प्रति वफ़ादार रहते हुए लेखक ने कहीं–कहीं छूट भी ली है लेकिन इस तरह कि कथासृष्टि के वातावरण में उपकारक सिद्ध हो।</p>
<p>सरस भाषा एवं रोचक शैली में यह उपन्यास पढ़ते हुए महसूस ही नहीं होता कि हम गुजराती उपन्यास का रूपान्तर पढ़ रहे हैं।
ISBN: 9788183616867
Pages: 256
Avg Reading Time: 9 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Dr. Bharat Kelkar
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- Description: युद्ध! कोणतंच युद्ध माणसाला शहाणं करत नाही की कोणत्याही प्रश्नांची उत्तरं देत नाही. उलट ते नवे प्रश्न निर्माण करतं. बदल्याच्या भावनेनं माणसाला वेडं बनवतं. तरीही माणसं युद्ध करत राहतात, नवनवी शस्त्रं हाती घेऊन परस्परांना मारत राहतात. पण त्यात भरडले जातात ते निरपराध सामान्य नागरिक. विशेषतः युद्धाशी संबंध नसणाऱ्या महिला, मुलं आणि वयोवृद्ध माणसं हकनाक बळी ठरतात युद्धाचे... हीच बाब अनेकांना खेचून नेते युद्धभूमीकडे माणुसकीवरचा विश्वास दृढ करण्यासाठी... अशी माणसं मग युद्धाच्या जखमांवर उपाय करण्यासाठी धडपडत राहतात... त्यातूनच जन्माला येते ‘डॉक्टर विदाऊट बॉर्डर्स'सारखी संस्था, जी निसर्गनिर्मित अथवा मानवनिर्मित आपत्तींमध्ये अडकलेल्यांना जीवदान देण्याचं काम अव्याहतपणे करते. हीच संस्था काही सेवाव्रत्तींना संधी देते अडचणीत सापडलेल्या माणसांना वाचवण्याची. स्वतःचा जीव धोक्यात घालून ही सेवाव्रत्ती माणसं सहभागी होतात अशा मिशनमध्ये आणि अनुभवाचं एक वेगळंच विश्व घेऊन परततात. कसा असतो हा जगावेगळा अनुभव? कोणत्या परिस्थितीत ते युद्धग्रस्तांवर उपचार करतात? युद्धाकडे ते कसे बघतात? उपचारासाठी येणारे युद्धग्रस्त त्यांच्याकडे कसे बघतात? डोळ्यांसमोर अनेकांचा मृत्यू दिसत असताना जखमींना वाचवण्याची कसरत कशी चालते? अशा एक ना अनेक प्रसंगांचं, युद्धभूमीवरच्या नाट्याचं थरारक तितकंच अस्वस्थ करणारं अनुभवकथन... सीरिया, येमेन आणि इराक या तीन युद्धग्रस्त भागात रुग्णसेवा देण्यासाठी गेलेल्या एका भारतीय ऑर्थोपेडिक सर्जनने घेतलेले विलक्षण अनुभव मांडणारे मराठीतले पहिलेच पुस्तक... ‘डॉक्टर ऑन अ वॉरफ्रंट'! डॉक्टर ऑन अ वॉरफ्रंट | डॉ. भरत केळकर Doctor On A Warfront | Dr. Bharat Kelkar
Ret-Samadhi : Uphaar Sanskaran
- Author Name:
Geetanjali Shree
- Book Type:

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Description:
अस्सी की होने चली दादी ने विधवा होकर परिवार से पीठ कर खटिया पकड़ ली। परिवार उसे वापस अपने बीच खींचने में लगा। प्रेम, वैर, आपसी नोकझोंक में खदबदाता संयुक्त परिवार। दादी बज़िद कि अब नहीं उठूँगी।
फिर इन्हीं शब्दों की ध्वनि बदलकर हो जाती है अब तो नई ही उठूँगी। दादी उठती है। बिलकुल नई। नया बचपन, नई जवानी, सामाजिक वर्जनाओं-निषेधों से मुक्त, नए रिश्तों और नए तेवरों में पूर्ण स्वच्छन्द।
कथा लेखन की एक नई छटा है इस उपन्यास में। इसकी कथा, इसका कालक्रम, इसकी संवेदना, इसका कहन, सब अपने निराले अन्दाज़ में चलते हैं। हमारी चिर-परिचित हदों-सरहदों को नकारते लाँघते। जाना-पहचाना भी बिलकुल अनोखा और नया है यहाँ। इसका संसार परिचित भी है और जादुई भी, दोनों के अन्तर को मिटाता। काल भी यहाँ अपनी निरन्तरता में आता है। हर होना विगत के होनों को समेटे रहता है, और हर क्षण सुषुप्त सदियाँ। मसलन, वाघा बार्डर पर हर शाम होनेवाले आक्रामक हिन्दुस्तानी और पाकिस्तानी राष्ट्रवादी प्रदर्शन में ध्वनित होते हैं ‘क़त्लेआम के माज़ी से लौटे स्वर’, और संयुक्त परिवार के रोज़मर्रा में सिमटे रहते हैं काल के लम्बे साए।
और सरहदें भी हैं जिन्हें लाँघकर यह कृति अनूठी बन जाती है, जैसे स्त्री और पुरुष, युवक और बूढ़ा, तन व मन, प्यार और द्वेष, सोना और जागना, संयुक्त और एकल परिवार, हिन्दुस्तान और पाकिस्तान, मानव और अन्य जीव-जन्तु (अकारण नहीं कि यह कहानी कई बार तितली या कौवे या तीतर या सड़क या पुश्तैनी दरवाज़े की आवाज़ में बयान होती है) या गद्य और काव्य : ‘धम्म से आँसू गिरते हैं जैसे पत्थर। बरसात की बूँद।’
50 Mahan Swatantrata Senani
- Author Name:
Rishi Raj
- Book Type:

- Description: "जिन लोगों ने देश को स्वाधीन कराने का स्वप्न देखा, इसकी कल्पना की और दृढ निश्चय कर अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया, उनका पुण्य स्मरण करना हमारा पुनीत कर्तव्य है। उनके बलिदान को आज की युवा पीढ़ी तक पहुँचाना हमारा परम धर्म है। जिस आजादी की हवा में हम साँस ले पा रहे हैं, अपने लिए, अपने घर-परिवार के लिए कुछ कर पा रहे हैं, इसमें कहीं-न-कहीं उन सभी के बलिदान की सुगंध है। इसलिए इन हुतात्माओं को कोटि-कोटि वंदन-अभिनंदन! शहीदों से जुडे़ स्थानों पर जाना, उनको समय-समय पर याद करना व उनको श्रद्धांजलि देना, यह हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा होना चाहिए। आनेवाली पीढि़यों को अपने गौरवमयी अतीत व हमारे शूरवीरों के महान् जीवन से परिचय करवाना हम सबका धर्म बनता है। राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व अर्पित करनेवाले हुतात्माओं की एक लंबी शृंखला है। उनमें से 50 अमर सपूतों के प्रेरणाप्रद जीवन से पाठकों को परिचित कराने का यह उपक्रम है, जो निश्चित रूप से हर भारतीय को पढ़ना ही चाहिए।"
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