The Angels on Earth
Author:
Indira Dhar MukkherjeePublisher:
Author'S Ink PublicationsLanguage:
EnglishCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 160.65
₹
189
Available
The Angels On Earth
ISBN: 9789390006014
Pages: 120
Avg Reading Time: 2 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Book Type:

- Description: Fate- is the most fluctuating element of life. At times, it dissembles to be your best friend, your helping hand, your guardian. But the moment you trust it, It shatters you and your trust. It breaks you and builds you up so it can hurt you again. Fate binds the two budding teenagers- ashik and Sakshi. This pair of strangers belonging to two different corners of India seems to share numerous surprising similarities. They went from having the same letters in their names to having similar hobbies. The similarities never ceased to amaze them both. Back at the time, when Facebook and Orkut weren’t the ‘basic needs of the teens, there were those ridiculous chat rooms on channel [V]. Those that appear at the bottom of your TV screen. That’s where they talked for the first time. Who knew a real relationship would take birth there? Who knew they’d even fall in love? That’s fate! But the age was wrong- and the distance was long. Mistakes were inevitable, and trust was easy to lose. Ashik makes a mistake. An error is so bad that Sakshi finds it hard to trust him again. She leaves. They say you realise you love someone when you let them go- that’s what happened to ashik, too. Determined he would bring her back to his life, he heads off to Hyderabad from Assam, resisting all sorts of parental oppositions to study BBA- a course he was never interested in. Sakshi’s decisions were primarily governed by her emotions and not by logic. As a result, she’s either very right or wrong. Their relationship blooms yet again. But too much dependency and an uncertain career isn't a beautiful condition for a relationship.
Vaishali Ki Nagarvadhu
- Author Name:
Acharya Chatursen
- Book Type:

-
Description:
‘वैशाली की नगरवधू’ की गणना हिन्दी के श्रेष्ठतम ऐतिहासिक उपन्यासों में की जाती है। आचार्य चतुरसेन शास्त्री ने स्वयं भी इसे अपनी उत्कृष्टतम रचना मानते हुए इसकी भूमिका में लिखा था कि निरन्तर चालीस वर्षों की अर्जित अपनी सम्पूर्ण साहित्य-सम्पदा को मैं आज प्रसन्नता से रद्द करता हूँ; और यह घोषणा करता हूँ कि आज मैं अपनी यह पहली कृति विनयांजलि सहित आपको भेंट कर रहा हूँ।
कथा उस अम्बपाली की है जो शैशवावस्था में आम के एक वृक्ष के नीचे पड़ी मिली और बाद में चलकर वैशाली की सर्वाधिक सुन्दर एवं साहसी युवती के रूप में विख्यात हुई। नगरवधू बनने के अनिवार्य प्रस्ताव को उसने धिक्कृत कानून कहा और उसके लिए वैशाली को कभी क्षमा नहीं कर पाई। लेकिन वह अपने देश को प्रेम भी करती है जिसके लिए उसने अपने निजी सुखों का बलिदान भी किया। और अन्त में अपना सर्वस्व त्यागकर बौद्ध दीक्षा ले ली।
कई वर्षों तक आर्य, बौद्ध और जैन साहित्य का अध्ययन करने के उपरान्त और लेखक के तौर पर लम्बे समय में अर्जित अपने भाषा-कौशल के साथ लिखित यह उपन्यास न सिर्फ पाठकों के लिए एक नया आस्वाद लेकर आया बल्कि हिन्दी उपन्यास-जगत में भी इसने अपना एक अलग स्थान बनाया जो आज तक कायम है।
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