Jaya Ganga : Prem Ki Khoj Mein Ek Yatra
(0)
₹
295
₹ 236 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
फ्रांस में जब यह औपन्यासिक यात्रा-वृत्तांत प्रकाशित हुआ तो इसकी बहुत सराहना हुई। यह कृति लेखक की आन्तरिक और बाहरी दुनिया के विलय का अभूतपूर्व चित्र प्रस्तुत करती है।</p> <p>बाद में लेखक ने स्वयं ही इस पुस्तक को एक फ़िल्म में रूपान्तरित किया जो कि 40 देशों में दिखाई गई तथा फ्रांस और इंग्लैंड के सिनेमाघरों में 49 सप्ताह तक चली।</p> <p>पेरिस में रहनेवाले एक युवा लेखक निशान्त की हिमालय में गंगा के उत्स से शुरू की गई इस गंगा-यात्रा में जया की स्मृतिकथा साथ-साथ चलती है। यात्रा के दौरान गंगा के किनारे उसकी भेंट ज़ेहरा से होती है जो एक तवायफ़ है।</p> <p>मन के भीतर जया और ज़ेहरा की छवियाँ लिये लेखक अपने मार्ग में साधुओं, नाविकों, इंजीनियरों, स्थानीय पत्रकारों, तवायफ़ों और दलालों से रू-ब-रू होता चलता है। काव्यात्मक गद्य और श्रेष्ठ पत्रकारिता के सहज संयोग का प्रतिफल यह पाठ उपन्यास भी है, आत्मकथात्मक यात्रावृत्त भी और रिपोर्ताज भी।
Read moreAbout the Book
फ्रांस में जब यह औपन्यासिक यात्रा-वृत्तांत प्रकाशित हुआ तो इसकी बहुत सराहना हुई। यह कृति लेखक की आन्तरिक और बाहरी दुनिया के विलय का अभूतपूर्व चित्र प्रस्तुत करती है।</p>
<p>बाद में लेखक ने स्वयं ही इस पुस्तक को एक फ़िल्म में रूपान्तरित किया जो कि 40 देशों में दिखाई गई तथा फ्रांस और इंग्लैंड के सिनेमाघरों में 49 सप्ताह तक चली।</p>
<p>पेरिस में रहनेवाले एक युवा लेखक निशान्त की हिमालय में गंगा के उत्स से शुरू की गई इस गंगा-यात्रा में जया की स्मृतिकथा साथ-साथ चलती है। यात्रा के दौरान गंगा के किनारे उसकी भेंट ज़ेहरा से होती है जो एक तवायफ़ है।</p>
<p>मन के भीतर जया और ज़ेहरा की छवियाँ लिये लेखक अपने मार्ग में साधुओं, नाविकों, इंजीनियरों, स्थानीय पत्रकारों, तवायफ़ों और दलालों से रू-ब-रू होता चलता है। काव्यात्मक गद्य और श्रेष्ठ पत्रकारिता के सहज संयोग का प्रतिफल यह पाठ उपन्यास भी है, आत्मकथात्मक यात्रावृत्त भी और रिपोर्ताज भी।
Book Details
-
ISBN9788195099559
-
Pages231
-
Avg Reading Time8 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Jai Baba Felunath
- Author Name:
Satyajit Ray
- Book Type:

-
Description:
शरलक होम्स और जेम्स बॉण्ड की तरह ही सत्यजित राय के एक दुर्धर्ष पात्र हैं फेलूदा। जटिल से जटिल परिस्थितियों को परत-दर-परत खोलकर सच को सामने लाना उनका काम है। बांग्लाभाषी समाज की एक पूरी पीढ़ी फेलूदा के जासूसी कारनामों को पढ़-पढ़कर सयानी हुई है। आकर्षण कुछ ऐसा कि किशोरावस्था को पीछे छोड़ चुके प्रौढ़ पाठकों के बीच भी इसकी लोकप्रियता कम नहीं है।
‘जय बाबा फेलूनाथ’ सत्यजित राय के फेलूदा सीरीज़ का एक प्रतिनिधि उपन्यास है। आधुनिक हिन्दी साहित्य में रहस्य-रोमांच और जासूसी पर आधारित लेखन का श्रीगणेश भले ही हुआ हो, परवर्ती रचनाकारों की लिखी ऐसी मनमोहक कृतियाँ नहीं मिलतीं। सत्यजित राय की प्रस्तुत कृति का अनुवाद इस कमी को पूरा करने की दिशा में एक विनम्र प्रयास है जिस पर उनके द्वारा निर्मित फिल्म भी अत्यन्त लोकप्रियता हासिल कर चुकी है।
Banbhatt Ki Aatmakatha
- Author Name:
Hazariprasad Dwivedi
- Rating:
- Book Type:

- Description: आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी की विपुल रचना-सामर्थ्य का रहस्य उनके विशद शास्त्रीय ज्ञान में नहीं, बल्कि उस पारदर्शी जीवन-दृष्टि में निहित है, जो युग का नहीं युग-युग का सत्य देखती है। उनकी प्रतिभा ने इतिहास का उपयोग ‘तीसरी आँख’ के रूप में किया है और अतीत-कालीन चेतना-प्रवाह को वर्तमान जीवनधारा से जोड़ पाने में वह आश्चर्यजनक रूप से सफल हुई है। बाणभट्ट की आत्मकथा अपनी समस्त औपन्यासिक संरचना और भंगिमा में कथा-कृति होते हुए भी महाकाव्यत्व की गरिमा से पूर्ण है। इसमें द्विवेदी जी ने प्राचीन कवि बाण के बिखरे जीवन-सूत्रों को बड़ी कलात्मकता से गूँथकर एक ऐसी कथाभूमि निर्मित की है जो जीवन-सत्यों से रसमय साक्षात्कार कराती है। इसमें वह वाणी मुखरित है जो सामगान के समान पवित्रा और अर्थपूर्ण है-‘सत्य के लिए किसी से न डरना, गुरु से भी नहीं, मंत्रा से भी नहीं; लोक से भी नहीं, वेद से भी नहीं।’ बाणभट्ट की आत्मकथा का कथानायक कोरा भावुक कवि नहीं वरन कर्मनिरत और संघर्षशील जीवन-योद्धा है। उसके लिए ‘शरीर केवल भार नहीं, मिट्टी का ढेला नहीं’, बल्कि ‘उससे बड़ा’ है और उसके मन में आर्यावर्त्त के उद्धार का निमित्त बनने की तीव्र बेचैनी है। ‘अपने को निःशेष भाव से दे देने’ में जीवन की सार्थकता देखने वाली निउनिया और ‘सबकुछ भूल जाने की साधना’ में लीन महादेवी भट्टिनी के प्रति उसका प्रेम जब उच्चता का वरण कर लेता है तो यही गूँज अंत में रह जाती हैद-‘‘वैराग्य क्या इतनी बड़ी चीज है कि प्रेम देवता को उसकी नयनाग्नि में भस्म कराके ही कवि गौरव का अनुभव करे?’’
Sant Na Bandhe Ganthari
- Author Name:
Mithileshwar
- Book Type:

-
Description:
‘संत न बाँधे गाँठड़ी’ उपन्यास जीवन और समाज से अभिन्न धार्मिक आस्था-विश्वास, श्रद्धा-भक्ति तथा आध्यात्मिक चेतना के विकास के नाम पर हमारे समक्ष निरन्तर गहराते संकट से न सिर्फ़ अवगत कराता है बल्कि अन्धश्रद्धा के ख़िलाफ़ हमें जागरूक और सतर्क बने रहने की प्रबल प्रेरणा भी देता है।
यह उपन्यास वैसे बाबाओं, स्वामियों एवं गुरुओं को ही कटघरे में नहीं लाता बल्कि इसके लिए जनसमाज की अन्धश्रद्धा को भी ज़िम्मेवार मानता है। अपने ही जैसे किसी इंसान को गुरु और संत के तहत ईश्वर का प्रतिरूप समझ उनके प्रति अपना तन-मन और धन सर्मिपत कर देना अन्धश्रद्धा नहीं तो और क्या है।
उपन्यास की व्यापकता और महत्त्व का परिचायक इसका ऐसा कथ्य और तथ्य है जिसके तहत धार्मिक, आध्यात्मिक क्षेत्र के किसी भी पक्ष को ऩजरअन्दाज नहीं किया गया है, बल्कि गहराई, बेबाकी और सूक्ष्मता के साथ पूरे परिदृश्य का ऐसा सम्यक् और सटीक विश्लेषण हुआ है जिसके तहत दूध का दूध और पानी का पानी की तरह धार्मिक, आध्यत्मिक जगत का सत्य और तथ्य, कपट और पाखंड तथा योग और भोग सबकुछ स्पष्ट होता चला गया है।
Antim Aakanksha
- Author Name:
Siyaramsharan Gupt
- Book Type:

- Description: किसी के स्वस्थ व्यवहार और उपकार के प्रति समर्पण की सीमा तक पहुँची हुई ऐसी कृतज्ञता कि बचपन से चाकरी में रहनेवाला नौकर अपने हमउम्र स्वामि-पुत्र के परिवार में अगले जन्म में भी जन्म लेने और उस परिवार की चाकरी करने की अन्तिम आकांक्षा अन्तिम साँस लेते समय प्रकट कर रहा हो—यही है वह अन्तरधारा जो इस उपन्यास में अनादि से अन्त तक प्रवाहित हो रही है। नौकर रमला को सेवा के पहले ही दिन पूरा नाम रामलाल से पुकारने का जो भाव उसका ख़ास पुत्र प्रकट करता है, वह भाव धीरे-धीरे अपने उत्कर्ष की ओर बढ़ता जाता है और रामलाल की अन्तिम आकांक्षा का कारण बन जाता है। उपन्यासकार सियारामशरण गुप्त अपने उपन्यासों में किसी न किसी ऐसी ही उत्कृष्ट भावना अथवा मान्यता को आधार बनाकर अपने उपन्यास की रचना करने के क़ायल थे, जिसे उन्होंने इस उपन्यास की भी अन्तरधारा के रूप में अपने कथानक में प्रवाहित किया है, जिससे उपन्यास रोचक और मनोरंजक बनने के साथ ही पाठक के अन्तर्मन को भी प्रभावित करनेवाला बन गया है
Pahala Kadam
- Author Name:
Yogendra Pratap Singh
- Book Type:

- Description: भारतीय शिक्षण संस्थाओं से हम भारतीयों की त्यागनिष्ठा तथा स्वात्म समर्पण के भावों का सम्बन्ध हज़ारों-हज़ारों वर्षों से चला आ रहा है। शिक्षक, गुरु, गुरुकुल में ऋषिजीवन और छात्र तपस्वी का जीवन व्यतीत करते रहे हैं। भारत के सामन्त, सम्राट, नरेश, सम्पन्न सेठ तथा वणिक दान का सर्वांश इन संस्थाओं को अर्पित करके समाज रचना की सत्त्वमयी परम्परा के निर्माण के प्रति संकल्पबद्ध थे। समाज तथा गुरुकुल ऋण से आजीवन मुक्त नहीं होता था। किन्तु आज, अंग्रेज़ों द्वारा स्थापित शिक्षानीति पर विदेशी तंत्रों के प्रभावों का गहरा असर भारतीय स्वतंत्रता के छह दशकों बाद और भी गहरा होता जा रहा है। शिक्षा ज्ञानार्जन, ज्ञानवृद्धि, अन्वेषण के लिए है; शिक्षा आत्मबोध, विवेकबोध, समझ तथा संकल्पशक्ति की प्रेरणा के लिए है। सुदामा जैसा शिक्षक लोक संकटों को झेलता हुआ, उनसे मुक्ति के लिए अपने सहपाठी त्रैलोक्यस्वामी श्रीकृष्ण के पास जाने को तैयार नहीं था—यदि उसकी पत्नी उसे प्रतिदिन सुबह-शाम दुत्कारती नहीं—किन्तु आज शिक्षक संस्थाएँ कैसी हैं? शिक्षक क्यों हैं? शिक्षा कैसी है? शिक्षण का प्रबन्ध-तंत्र क्या है? सब कुछ यह उपन्यास ही बताएगा।
Laute Huye Musafir
- Author Name:
Kamleshwar
- Book Type:

-
Description:
कहानी-लेखन में अपनी विशिष्ट पहचान के साथ कमलेश्वर ने अपने छोटे कलेवर के उपन्यासों में मध्यवर्गीय जीवन के चित्रण को लेकर छठे-सातवें दशक के हिन्दी परिदृश्य में अपना अलग स्थान बनाया। देश-दुनिया, समाज-संस्कृति और राजनीति से जुड़े विषय भी अक्सर उनकी कथा-रचनाओं के विषय बने हैं। ‘काली आँधी’ और ‘कितने पाकिस्तान’ जैसी रचनाओं के लिए विशेष रूप से ख्यात कमलेश्वर की लेखनी मध्यवर्गीय जीवन की विडम्बनाओं पर ही ठहरती है।
वर्ष 1961 में प्रकाशित इस उपन्यास ‘लौटे हुए मुसाफिर’ में स्वतंत्रता के आगमन के साथ गम्भीर रूप धारण करती साम्प्रदायिकता की समस्या और भारत विभाजन के नाम पर बेघर-बार हुए मुस्लिम समाज के मोहभंग और उनकी वापसी की विवशता को दर्शाया गया है। यह इस उपन्यास की प्रभावशाली रचनात्मकता और इतिहास-बोध के कारण ही सम्भव हुआ कि इस छोटे से उपन्यास का उल्लेख भारत-विभाजन पर केन्द्रित गिने-चुने हिन्दी उपन्यासों में प्रमुखता के साथ किया जाता है।
अपनी आवेशयुक्त शैली में कमलेश्वर ने इस कृति में आज़ादी और विभाजन के ऊहापोह में फँसे हिन्दुओं और मुसलमानों की मनःस्थिति के साथ भारत के सामाजिक ताने-बाने में आए निर्णायक बदलाव को भी रेखांकित किया है।
Aaina Saaz
- Author Name:
Anamika
- Book Type:

-
Description:
हमारे दौर की राजनीति, समाज, आदमी–सब अपने भीतर से लेकर बाहर तक जाने कैसे तो जंजाल में उलझे हुए हैं, और जब उसे सुलझाने चलते हैं, उस जाल से निकलकर खुली, साफ़ जगह में आने के लिए हाथ-पाँव पटकते हैं तो सुलझते-निकलते नहीं, और उलझ जाते हैं।
क्या नहीं है हमारे पास? जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी, अब वह भी है, और भरोसा है कि अब जिसकी कल्पना करेंगे, वह भी कल हो उठेगा।
लेकिन ताला अगर कहीं लग गया है तो वह कल्पना ही पर है; और उसके संगी-साथी दूसरे कई मनोभाव-मनोशक्तियाँ और इनका सरदार एक सूफ़ी मन, उजली कामनाओं, और धरती-आकाश को एक करते धवल सपनों की छतरी; यह सब उस ताले के भीतर कहीं छटपटा-सिसक रहे हैं।
खुसरो एक पैदा हुआ, मध्यकालीन कहे जानेवाले उस साँवले हिन्दुस्तान में जिसकी छतें इतनी ऊँची होती थीं, कि हम बौनों की तिमंज़िला बाँबियाँ उनमें खड़ी हो जाएँ। यह उस ख़ुसरो की आत्मकथा से रचा हुआ उपन्यास है जिसमें ख़ुसरो की चेतना को जीनेवाले आज के कुछ सूफ़ी मनवालों की कहानी भी साथ में पिरो दी गई है।
ख़ुसरो इस कथा में अपना वह सब बताते हैं जिस तक हम उनकी नातों, क़व्वालियों और पहेलियों की ओट में नहीं पहुँच पाते–कि उनका एक परिवार था, एक बेटी थी, बेटे थे, पत्नी थी, और थे निज़ाम पिया जिनकी निगाहों के साए तले उन्होंने वह सब सहा जो एक साफ़, हस्सास दिल अपने ख़ून-सने वक़्तों और बेलगाम सनकों से हासिल कर सकता था।
और इसमें कहानी है सपना की, नफ़ीस की, ललिता दी और सरोज की भी, जो आज के हत्यारे समय के सामने अपने दिल के आईने लिए खड़े हैं, लहूलुहान हो रहे हैं, पर हट नहीं रहे, जा नहीं रहे, क्योंकि वे उकताकर या हारकर अगर चले गए तो न पद्मिनियों के जौहर पर मौन रुदन करनेवाला कोई होगा, न इंसानियत को उसके क्षुद्रतर होते वजूद के लिए एक वृहत्तर विकल्प देनेवाला।
Udhar Ke Log
- Author Name:
Ajay Navriya
- Book Type:

-
Description:
अजय नावरिया का यह उपन्यास ‘उधर के लोग’ भारतीय संस्कृति की विशिष्टता और वैयक्तिक सत्ता के साथ-साथ अन्तरराष्ट्रीय मुद्दों को रेखांकित करता है। बेशक, यह उनका पहला उपन्यास है, लेकिन अपनी शिल्प संरचना और वैचारिक परिपक्वता में, यह अहसास नहीं होने देता।
उपन्यास में हिन्दू कहे जानेवाले समाज के अन्तर्विरोधों, विडम्बनाओं और पारस्परिक द्वेष के अलावा, उसके रीति-रिवाज़ो का भी सूक्ष्म और यथार्थपरक अंकन किया गया है। यह द्वन्द्व भी उभरकर आता है कि क्या वर्णाश्रम धर्म ही हिन्दू धर्म है या कुछ और भी है?
उपन्यास, पाठकों में प्रश्नाकुलता पैदा करता है कि क्या ‘जाति’ की उपस्थिति के बावजूद ‘जातिवाद’ से बचा जा सकता है? क्यों विभिन्न समुदाय, एक-दूसरे के साथ, सह-अस्तित्व के सिद्धान्त के तहत नहीं रह सकते? क्यों भारतीय साहित्य का संघर्ष, डी-क्लास होने के पहले या साथ-साथ डी-कास्ट होने का संघर्ष नहीं बना? इसके अलावा उपन्यास में बाज़ार की भयावहता, वेश्यावृत्ति, यौन-विकार, विचारधाराओं की प्रासंगिकता, प्रेम, विवाह और तलाक़ पर भी खुलकर बात की गई है।
उपन्यासकार की सबसे बड़ी विशेषता यथार्थ को रोचक, प्रभावोत्पादक और समृद्ध भाषा में रूपान्तरित करने में है। यह सब उन्होंने नायक की जीवन-कथा के माध्यम से बड़े कुशल ढंग से किया है।
Song of A Flying Sparrow
- Author Name:
Rajeev Pundir
- Book Type:

- Description: Chiya was born and brought up in a wealthy business-class family. When her mom Rini, a highly ambitious woman, tries to fix her marriage with a millionaire divorcee, relatively senior to her age, she refuses categorically. As a result, an ugly argument ensues between them. Chiya’s life turns upside down when Rini reveals an unpleasant secret about her life during the heat of the conflict. Then she embarks on a mission—the sole aim of her life. What was that secret and the mission thereupon? To find, explore the novel—Song of A Flying Sparrow—a tale of emotions, love, betrayal, ambitions, greed, cynicism and twisted relations.
Sej Per Sanskrit
- Author Name:
Madhu Kankariya
- Book Type:

-
Description:
समाज और व्यवस्था के कटु-तिक्त अनुभवों से सम्पन्न उपन्यासकार हैं मधु कांकरिया। उनका यह उपन्यास बेधक, जुझारू, धैर्यवान और अन्ततः विद्रोही स्त्री की आन्तरिक पीड़ा का बड़ा ही मार्मिक विश्लेषण-अंकन करता है। धार्मिक चिन्तन और व्यवहार से आप्लावित संसार में स्त्री-जीवन कितना कठोर, क्रूर और भयावह हो सकता है, ‘सेज पर संस्कृत’ के बहाने इस यातना-गाथा का हमें पोर-पोर परिचय मिलता है।
उपन्यास में आर्थिक विपन्नता में जकड़ी ऐसी माँ का चित्रण है जो अध्यात्म को मुक्तिमार्ग मान, यह चाहती है कि उसकी जवान बेटियाँ भी उसी मार्ग को अपना लें, ताकि उनके जीवन को नया आयाम मिले, क्योंकि उसकी धारणा है कि किसी स्त्री के साध्वी बन जाने पर परिवार का मान-सम्मान अनायास बढ़ जाता है, आर्थिक विपन्नता दूर हो जाती है। छोटी बेटी तो माँ के पद-चिह्नों पर चल पड़ती है लेकिन बड़ी बेटी शुरू से अन्त तक धर्माडम्बरों का घोर विरोध करती है।
साध्वियों की जीवन-स्थिति एवं उनके अन्तर्बाह्य संघर्ष को मार्मिक शब्द देनेवाले इस उपन्यास में जहाँ सामाजिक-आर्थिक विषमता को विस्तार दिया गया है, वहीं अन्याय और शोषण की अभिव्यक्ति को नई भाव-भूमि।
Kaya Sparsh
- Author Name:
Dronveer Kohli
- Book Type:

- Description: प्रतिष्ठित कथाकार द्रोणवीर कोहली का यह उपन्यास एक अछूती समस्या को उठाता है–कतिपय आधुनिक एवं धनाढ्य परिवारों में लड़के-लड़कियों की समस्या जो भौतिक सुख-सुविधाओं के बावजूद स्नेह-सौहार्द्र के अभाव में मनोरोगी हो जाते हैं। उनकी चिकित्सा और देख-भाल के लिए उनके पास ढेरों धन तो हैं, लेकिन ‘समय’ नामक अमूल्य धन जो उनके पास मौजूद है, उसे वह अपने बच्चों पर व्यय करना जानते ही नहीं, जिसके परिणामस्वरूप उन बच्चों का सही उपचार नहीं हो पाता और अन्त में त्रासदी शेष रह जाती है। लेखक ने इस स्थिति का बारीकी से अध्ययन किया है और बड़ी कुशलता से ‘हृदय सुगति’, ‘इक्ष्वाकु’ अर्थात ‘इच्छू बाबा’, ‘काया’ जैसे चरित्रों को परत-दर-परत खोल कर रख दिया है–किसी मनोचिकित्सक के बौद्धिक व्यायाम की तरह नहीं, किसी संवेदनशील कथाकार की भाँति। द्रोणवीर कोहली के इस उपन्यास की बड़ी विशेषता यह भी है कि प्रकाशन से पूर्व उन्होंने अपनी सम्पूर्ण पांडुलिपि प्रसिद्ध क्लिनिकल मनोचिकित्सक डॉ. नीरजा कुमार को दिखाई थी। उन्होंने उपन्यास के अन्तिम अंश के बारे में जो विचार दिए, लेखक ने उन्हें सहर्ष स्वीकार किया है। उन्हें पुस्तक के अन्त में ‘अनुबोध’ शीर्षक से सम्मिलित कर लिया गया है।
90ml Samundar
- Author Name:
Sunil Sahil
- Book Type:

- Description: सुनील साहिल टीवी कॉमेडी शो लेखक एवं कवि-सम्मेलन मंचों पर हास्य-व्यंग्य कवि के रूप में सक्रिय हैं, इंग्लैंड के कई शहरों में काव्य-पाठ का आमंत्रण, रेडियो सनराइज, लन्दन और रेडियो एक्सेल, बिर्मिंघम पर इंटरव्यू प्रसारित, ऍम ए टीवी, लन्दन पर कविताएँ प्रसारित, सब टीवी के शो ‘वाह-वाह’ में आमंत्रण. ‘ये कविताएँ मैंने नहीं लिखी हैं, ये कविताएँ मुझसे अभिव्यक्त हुई हैं, अस्तित्व ने मुझे चुना इन शब्दों, इन भावों का जरिया बनने को, माध्यम बनने को, साधन बनने को, जब मैं मिट गया तो लगा कि अस्तित्व और मुझमें संवाद हो रहा है, एक सम्बन्ध घट रहा है जिसमें ये कुछ सहज अभिव्यक्तियाँ प्रकट हुई, आप हमेशा ‘कवि’ बने नहीं रह सकते हैं, शायद कुछ पल आप कवि हो जाते हैं जब कविता आपकी रूह की जमीन पर उतरती है, तब आपको अनुभूति होती है कि आपकी देह, आपका मन, आपका जेहन भीतर की यात्रा पर निकला है- बस एक झलक मिलती है सम्बुद्ध होने की और फिर खो जाती है, बस उन्हीं चंद लम्हों का जमावड़ा है – 90 ml समंदर’
Nayee Disha
- Author Name:
Dhirendra Verma
- Book Type:

-
Description:
बीसवीं सदी के आठवें दशक में प्रकाशित एक महत्त्वपूर्ण उपन्यास है ‘नई दिशा’। इसमें बदलते युग की वह गाथा है, जो सामाजिक परिस्थितियों के बीच युवा-मानस की बेचैनियों से निर्मित हुई थी। जीवन की उथल-पुथल को इस उपन्यास में बड़े ही कलात्मक ढंग से चित्रित किया गया है।
‘नई दिशा’ में एक ऐसे आदर्शवादी युवक प्रशान्त की कहानी है जो निश्छल ग्रामीण वातावरण में पलता है, लेकिन ऊँची शिक्षा पाने के लिए जब वह शहर जाता है तो वहाँ के जीवन में व्याप्त विकृतियाँ-विसंगतियाँ उसे स्तम्भित कर देती हैं। वह देखता है कि पाश्चात्य प्रभाव के चलते यहाँ पर व्यवहार ही नहीं, चिन्ता और चिन्तन के स्तर पर भी सर्वत्र अराजकता और भ्रष्टाचार का बोलबाला है। यथार्थ के जिस रूप से प्रशान्त का साक्षात्कार होता है, उससे उसे लगता है कि राजनीतिक प्रवंचना के इस युग में पूरी की पूरी पीढ़ी ही जैसे भटक गई है तथा जिस दिशा की ओर बढ़ी जा रही है, वह सही नहीं है। यह उपन्यास उसी सही दिशा की तलाश की गाथा है जिसमें बदलाव की आकांक्षा और भटकाव को दूर करने की जद्दोजहद प्रबलता से मुखर हुई है।
इसमें मूल और मूल्यों का संवेदनात्मक पक्ष अपने प्रभाव में अद्भुत और अविस्मरणीय है। अपने समय की एक दस्तावेज़ है ‘नई दिशा’।
Khalnayak
- Author Name:
Yi Mun Yol
- Book Type:

-
Description:
इस उपन्यास की कथा साफ़ तौर से एक रूपक है जो कोरियाई राजनीति से जुड़ी है। यह कोरिया में एक अधिनायकवादी राज्य शैली से अनिश्चित क़िस्म के प्रजातंत्र में बदलने की गाथा है। इसमें ताक़त के भयंकर दुरुपयोग, आम जन के द्वारा उसे स्वीकार कर चुपचाप सहते रहने की मनोदशा, प्रजातंत्र की ओर उन्मुख करनेवाली जागृति को तो साक्षात् किया ही गया है लेकिन बड़ी बात यह है कि अधिनायक की हार के बावजूद अधिनायकवादी प्रवृत्ति के प्रति सदा सावधान बने रहने की ओर सशक्त संकेत भी किया गया है।
इस उपन्यास के दो स्तर हैं : एक सीधा-सादा और दूसरा सांकेतिक। सीधे-सीधे अर्थ के अनुसार यह कक्षा के एक ऐसे बिगड़ैल मॉनीटर की कहानी है जो अपनी ताक़त और अपने साम्राज्य का झंडा बनाए रखने के लिए कितने ही तरह के हथकंडे अपनाता है। सांकेतिक अर्थ के अनुसार यह मनुष्य के भीतर की एक ऐसी प्रवृत्ति को सामने लाता है जो ताक़तवर बनने की भरपूर कोशिश करती है। उपन्यास आत्मकथात्मक शैली में है जिसका ‘विकृत नायक’ अर्थात् ‘खलनायक’ ‘ओम सोकदे’ है।
माना जाता है कि यह उपन्यास 1980 के ग्वांगजू सामूहिक हत्याकांड से प्रेरित होकर लिखा गया था जिसमें प्रजातंत्र के लिए आन्दोलन कर रहे निहत्थे लोगों को दक्षिण कोरियाई सैनिकों (जिन्हें उत्तर कोरिया से लोहा लेने के लिए प्रशिक्षण दिया गया था और जो शायद युद्ध न होने की स्थिति में ऊब चुके थे) ने मौत के घाट उतारा था।
Koi Veerani Si Veerani Hai
- Author Name:
Vijay Mohan Singh
- Book Type:

-
Description:
यह ‘वीरानी’ किसकी है? दिल का, दिमाग़ और पूरे परिवेश का?
...उपन्यास लेकिन
‘वीरानी’ की तलाश नहीं है। तलाश है इस वीराने में अर्थ की। प्रतिभा और परिवेश सब बंजर हो रहे हैं। प्रतिभाएँ या तो कुंठित हो रही हैं या अपनी वहशत में क्रमिक हत्याओं तथा आत्महत्याओं की ओर अग्रसर। एक तीसरा रास्ता है : अपनी चतुर, कुटिल बुद्धि का लिप्सा में लिथड़ा भोगलिप्त उपयोग।यह कथा इन तीनों पथों के पथिकों की एक स्थाली ‘पुलाक् न्याय’ की जानकारी देती है। एक सामूहिक अक्षमता है जो हर कहीं जाकर अवरुद्ध हो जाती है : चाहे वह सफलता का रास्ता हो, सुविधाओं के संसार का या सम्बन्ध, साहचर्य और प्रेम के निर्वाह का।
...आज का आदमी या तो सिनिकल है या ऐसा समझदार जो हर शिकार के बाद एक ताज़ा मछली की तलाश में है लेकिन हर मछली एक मरी हुई मछली है।
...यह एक संस्कृति की कहानी भी है जो कला और प्रचलन में फ़र्क़ करना भूल गई है। यह वीरानी उस विविधता की भी है क्योंकि जितनी विविधता होगी, उतनी ही वीरानी बढ़ेगी। संकेतों, प्रतीकों तथा प्रयोजनार्थ निर्मित नाटकीय कथास्थितियों में मित कथन
को माध्यम बनाकर लिखा गया यह उपन्यास अपने व्यंजनार्थ में ही सब कुछ व्यक्त करने की चेष्टा है। सहज तथा सरल-सी प्रतीत होनेवाली इस कथा में एक काल है जो अपनी बंजरता में विस्तृत होता जा रहा है : एक सामन्ती युग के अवशेष का अन्त तो दूसरी ओर तथाकथित आधुनिक का अनुभव, अनुभूति का स्पर्शहीन अनवरत स्थानान्तरण : क़स्बा, नगर, महानगर तथा परदेश-गमन की दिशाहीन यात्राओं की ओर!इन्हीं सबके इस सर्वव्यापी ‘आइसबर्ग’ के महज़ एक नाखून का रेखांकन है यह। कम से कम दिखने और अधिक से अधिक दिखाने का प्रयास। इसीलिए इसमें सायास कुछ नहीं है : जो है वह दृश्य में। व्याख्याओं, विश्लेषणों तथा स्थापनाओं के रूप में कुछ नहीं! एक व्यक्तिगत, सामूहिक, सामाजिक अथवा सांकृतिक वीरानी अपने बयान में ही व्यक्त हो सकती हैं—व्याख्या या बड़बोलेपन में नहीं।
The Pocket Love Story
- Author Name:
Ajitabha Bose
- Rating:
- Book Type:

- Description: Love is one of the most beautiful expressions and emotions that humans are blessed with. Everyone has a love story. Some love stories have a happy ending and some doesn�t. Some love stories are known to the entire world and some are left unknown. Come, read some untold love stories.
Aadmi Swarg Mein
- Author Name:
Vishnu Nagar
- Book Type:

-
Description:
यह धर्म-कर्म के बल पर अन्तत: स्वर्ग पहुँच गए आदमी की कथा है। वही धर्म-कर्म जिससे हम सब परिचित हैं, यानी अपने स्वार्थों की अमानवीय होने की हद तक हिफ़ाज़त करते हुए पूजा-पाठ का अटूट पालन; आदमी भी वही जिसे हमने अपनी 'सबसे प्राचीन सभ्यता' के काई-शैवाल को छानकर निकाला है, यानी अन्तर्तम से निहायत धर्मविरोधी एक 'धार्मिक' और ईश्वर-आस्था को भौतिक प्राप्तियों के लिए इस्तेमाल करनेवाला एक चालाक प्राणी। और स्वर्ग भी वही जिसकी कामना हिन्दू धर्म के चार पुरुषार्थों में गिनी जाती है।
इस उपन्यास के बहाने विष्णु नागर ने स्वर्ग, मनुष्य और धर्म—इन तीनों की व्याख्या की है। साथ में उस समाज की भी जिसे हमने नरक के सतत भय, ईश्वर की सर्वव्यापी मौजूदगी और तैंतीस करोड़ देवताओं की निरन्तर निगहबानी के बावजूद सफलतापूर्वक रचा। एक स्वभक्षी समाज। उपन्यास के नायक गेंदमल जी स्वर्ग में भी उसी समाज को ढूँढ़ने और बनाने की कोशिश करते हैं और भारतवर्ष की महान परम्पराओं की लाज रखते हुए बनाने में सफल भी होते हैं। यही नहीं, वहाँ के अधिपति का पद प्राप्त करते हैं।
विष्णु नागर ने कवि के रूप में सामाजिक और मानवीय सरोकारों की जो सहज व्याप्ति सम्भव की है, वही उनकी व्यंग्य कथाओं भी अन्यतम विषेषता है। इस उपन्यास में उन्होंने उसे एक बड़े कैनवस पर साधा है। धर्म और ईश्वर, और इनकी सामाजिक राजनीति हमेशा विष्णु जी का प्रिय विषय रही है। इस उपन्यास में उन्होंने इसका पूरा पाठ पेश किया है।
Anawaran
- Author Name:
Ranjana Prakash
- Book Type:

- Description: रिश्तों को समझ पाने में अक्सर हम चूक जाते हैं। जब तक समझ में आता है, देर हो जाती है और वक़्त मुट्ठी में से रेत सा फिसल जाता है। उपन्यास की नायिका शुभी के जीवन में ऐसे ही अनेक उतार चढ़ाव आए, कभी थकी, कभी लड़खड़ाई, कभी गिरी भी, फिर भी कुछ तो था जिसने उसकी जिजीविषा को समाप्त होने से बचाए रखा, क्या कारण था जो उसने आत्म हत्या का विचार किया? क्या हुआ शुभी के जटिल जीवन का अंत? क्या शुभी की तलाश को पूर्णता प्राप्त हुई? क्या अंज़ाम हुआ शुभी के जीवन का, जानने के लिये पढ़ें ये उपन्यास - "अनावरण".
Jagdish Chandra Mathur Rachanawali : Vol. 1-4
- Author Name:
Jagdish Chandra Mathur
- Book Type:

- Description: जगदीशचन्द्र माथुर सृजनात्मक प्रतिभा के धनी थे। वे 14–15 वर्ष की आयु से ही लिखने लगे थे। नाटककार के रूप में विख्यात माथुर जी ने अपनी विशिष्ट शैली में चरित लेख, ललित निबन्ध और नाट्य–निबन्ध भी लिखे हैं। लेखन में उनकी इतनी रुचि थी कि जिन विभागों में उन्होंने काम किया उनकी समस्याओं के सम्बन्ध में भी बराबर लिखा। उनकी आरम्भिक रचनाएँ उस समय की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं—‘चाँद’, ‘भारत’, ‘माधुरी’, ‘सरस्वती’ और ‘रूपाभ’ में छपती थीं। बिहार में शिक्षा सचिव के पद पर काम करते हुए उन्होंने कई सांस्कृतिक और साहित्यिक संस्थाओं की स्थापना की और उनमें गहरी रुचि ली। अपने विचारों और मूल्यों में श्री माथुर ग्रामीण और नागर, लोक और शास्त्रीय संस्कारों व परम्पराओं के समन्वय के पक्षधर थे। इस पक्षधरता का स्वर उनके साहित्य में पूर्णत: मुखर है। उन्होंने अपनी रचनाओं की प्रकृति, रचना–प्रक्रिया और अपने विचारों एवं विश्वासों के बारे में पुस्तकों की भूमिकाओं में बहुत–कुछ लिखा है, जो उनके साहित्य को समझने में सहायक है। प्रस्तुत रचनावली उनके सम्पूर्ण रचनाकर्म को एक स्थान पर समेटने का प्रयास है। जगदीशचन्द्र माथुर रचनावली के इस खंड को चार भागों में बाँटा गया है। इसमें उनके एकांकी तथा दो कठपुतली नाटक संकलित हैं। पहले भाग में ‘मेरे सर्वश्रेष्ठ रंग एकांकी’, दूसरे में उनके दो एकांकी ‘भोर का तारा’ और ‘ओ मेरे सपने’, तथा तीसरे भाग में पत्र–पत्रिकाओं में प्रकाशित स्फुट एकांकी हैं, इनमें ‘मेरी बाँसुरी’ और ‘लव–कुश’ जैसी आरम्भिक रचनाएँ हैं। चौथे व अन्तिम भाग में ‘कुँवर सिंह की टेक’ और ‘गगन सवारी’ दो कठपुतली नाटकों को रखा गया है।
Vaidhanik Galp
- Author Name:
Chandan Pandey
- Book Type:

-
Description:
गहरी राजनैतिक, सामाजिक पक्षधरता का गद्य होते हुए भी चन्दन का ‘वैधानिक गल्प’ तीव्र आन्तरिक भावनाओं और संवेदनाओं का साथ नहीं छोड़ता। इस मुश्किल जगह से रचे जाने के बावजूद कमाल यह भी है कि यह गल्प के पारम्परिक तत्त्वों जैसे–रहस्य, रोचकता और अन्तत: पठनीयता को बचाए रखता है। प्यार, क्रूरता और प्रतिरोध चन्दन के यहाँ अपने सूक्ष्म और समकालीन रूपों में प्रकट होते हैं जो न सिर्फ़ चकित करता है बल्कि पाठक की चेतना में कुछ सकारात्मक जोड़ जाता है।
—महेश वर्मा
चन्दन पाण्डेय की लेखकी को समकाल के पूर्ण साहित्यिक विनियोग के रूप में देखा-रखा जा सकता है। चन्दन का कथाकार क़िस्से में ग़ाफ़िल नहीं, बल्कि सतर्क व अचूक है, जिससे समकाल के अद्यतन संस्करण का भी प्रवेश उनके कथादेश में सहज ही सम्भव है। कहन की साहिबी उन्हें ईर्ष्या का पात्र बनाती है।
—कुणाल सिंह
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book