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Author:
Madan Lal ‘Madhu’, Leo TolstoyPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
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लेव तोल्स्तोय (1828-1910) रूसी भाषा के ऐसे लेखक-विचारक थे जिनकी ख्याति उनके जीते-जी पूरी दुनिया में फैल चुकी थी। महात्मा गांधी भी उनसे प्रभावित थे। उनकी कृतियों में बचपन, किशोरावस्था, युवावस्था, कज्ज़ाक, युद्ध और शान्ति, आन्ना कारेनिना और पुनरुत्थान जैसे उपन्यास और इवान इल्यीच की मृत्यु, फ़ादर सेर्गेई, नाच के बाद जैसी कहानियाँ शामिल हैं। आन्ना कारेनिना लेव तोल्स्तोय का बहुप्रशंसित उपन्यास है। जीवन की सार्थकता और नैतिक प्रश्नों को लेकर हमेशा बेचैन रहे तोल्स्तोय ने इसमें मानवीय स्वभाव और सम्बन्धों का बेजोड़ विश्लेषण किया है। 19वीं सदी के रूस की पृष्ठभूमि में उन्होंने न केवल सामाजिक जीवन की समस्याओं को रेखांकित किया बल्कि प्रेम, विवाह, विश्वासघात और त्याग का सूक्ष्म चित्रण करते हुए स्त्री-प्रश्न को भी गहरी दार्शनिक चिन्ता के साथ प्रस्तुत किया है। यह सब इतना मार्मिक और संक्रामक है कि आन्ना की यह कथा एक महाकाव्यात्मक त्रासदी के रूप में कभी न भूलने वाली कृति बन गई है।
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लेव तोल्स्तोय (1828-1910) रूसी भाषा के ऐसे लेखक-विचारक थे जिनकी ख्याति उनके जीते-जी पूरी दुनिया में फैल चुकी थी। महात्मा गांधी भी उनसे प्रभावित थे। उनकी कृतियों में बचपन, किशोरावस्था, युवावस्था, कज्ज़ाक, युद्ध और शान्ति, आन्ना कारेनिना और पुनरुत्थान जैसे उपन्यास और इवान इल्यीच की मृत्यु, फ़ादर सेर्गेई, नाच के बाद जैसी कहानियाँ शामिल हैं।
आन्ना कारेनिना लेव तोल्स्तोय का बहुप्रशंसित उपन्यास है। जीवन की सार्थकता और नैतिक प्रश्नों को लेकर हमेशा बेचैन रहे तोल्स्तोय ने इसमें मानवीय स्वभाव और सम्बन्धों का बेजोड़ विश्लेषण किया है। 19वीं सदी के रूस की पृष्ठभूमि में उन्होंने न केवल सामाजिक जीवन की समस्याओं को रेखांकित किया बल्कि प्रेम, विवाह, विश्वासघात और त्याग का सूक्ष्म चित्रण करते हुए स्त्री-प्रश्न को भी गहरी दार्शनिक चिन्ता के साथ प्रस्तुत किया है। यह सब इतना मार्मिक और संक्रामक है कि आन्ना की यह कथा एक महाकाव्यात्मक त्रासदी के रूप में कभी न भूलने वाली कृति बन गई है।
Book Details
-
ISBN9789360867218
-
Pages416
-
Avg Reading Time14 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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