Sonalun - Brave Warrior
Author:
Dr. Chintan MadhuPublisher:
Author'S Ink PublicationsLanguage:
GujaratiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 201.45
₹
237
Available
ઇજીપ્ત, ઇસાપૂર્વ ૨૬૮૬ ઇજીપ્તના ગીઝા શહેરમાં ક્રૂર ફેરો એક્ષોટેપનું શાસન છે. એક્ષોટેપે ભાઇ વિનેન સાથે દગો કર્યો હોય છે. એક્ષોટેપ ધીરે ધીરે વધુ ને વધુ શક્તિશાળી બનતો જાય છે. એક્ષોટેપ સામે યુદ્ધ કરી ગીઝાને મુક્ત કરાવવા માટે મૃદારીતીના કુખે એક વીરાંગનાનો જન્મ થાય છે. તેનું બાળપણ અને યુવાની નાઇલના કિનારે પસાર થાય છે. યુવાનીમાં પ્રવેશતાં તેનું અસ્તિત્વ સામે આવે છે. ગીઝા રાજ્ય પાછું મેળવવા યુદ્ધ જરૂરી બને છે. આ યુદ્ધમાં વીરાંગનાને મેડઝાઇ યોદ્ધા અને ગુપ્ત પ્રજા મદદ કરે છે. વિનેન રાજ્ય પાછું મેળવવા પ્રભુ અનુબીશની તલવારનો સહારો લેવા માંગે છે. પિતા અને વીરાંગનાના સંઘર્ષમાં વિજય વીરાંગનાનો થાય છે. વીરાંગનાની સૌમ્યતાથી શૂરવીરતા સુધીની સફરમાં મિત્રતા, પ્રેમ, સમુદ્રની મુસાફરી, હિંદુકુશની મુલાકાત, સાહસ, સિનાઇ દ્વીપકલ્પનું યુદ્ધ અને એક્ષોટેપના વધનો સમાવેશ થાય છે.
ISBN: 9788193913468
Pages: 200
Avg Reading Time: 7 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Description:
अस्सी की होने चली दादी ने विधवा होकर परिवार से पीठ कर खटिया पकड़ ली। परिवार उसे वापस अपने बीच खींचने में लगा। प्रेम, वैर, आपसी नोकझोंक में खदबदाता संयुक्त परिवार। दादी बज़िद कि अब नहीं उठूँगी।
फिर इन्हीं शब्दों की ध्वनि बदलकर हो जाती है अब तो नई ही उठूँगी। दादी उठती है। बिलकुल नई। नया बचपन, नई जवानी, सामाजिक वर्जनाओं-निषेधों से मुक्त, नए रिश्तों और नए तेवरों में पूर्ण स्वच्छन्द।
कथा लेखन की एक नई छटा है इस उपन्यास में। इसकी कथा, इसका कालक्रम, इसकी संवेदना, इसका कहन, सब अपने निराले अन्दाज़ में चलते हैं। हमारी चिर-परिचित हदों-सरहदों को नकारते लाँघते। जाना-पहचाना भी बिलकुल अनोखा और नया है यहाँ। इसका संसार परिचित भी है और जादुई भी, दोनों के अन्तर को मिटाता। काल भी यहाँ अपनी निरन्तरता में आता है। हर होना विगत के होनों को समेटे रहता है, और हर क्षण सुषुप्त सदियाँ। मसलन, वाघा बार्डर पर हर शाम होनेवाले आक्रामक हिन्दुस्तानी और पाकिस्तानी राष्ट्रवादी प्रदर्शन में ध्वनित होते हैं ‘क़त्लेआम के माज़ी से लौटे स्वर’, और संयुक्त परिवार के रोज़मर्रा में सिमटे रहते हैं काल के लम्बे साए।
और सरहदें भी हैं जिन्हें लाँघकर यह कृति अनूठी बन जाती है, जैसे स्त्री और पुरुष, युवक और बूढ़ा, तन व मन, प्यार और द्वेष, सोना और जागना, संयुक्त और एकल परिवार, हिन्दुस्तान और पाकिस्तान, मानव और अन्य जीव-जन्तु (अकारण नहीं कि यह कहानी कई बार तितली या कौवे या तीतर या सड़क या पुश्तैनी दरवाज़े की आवाज़ में बयान होती है) या गद्य और काव्य : ‘धम्म से आँसू गिरते हैं जैसे पत्थर। बरसात की बूँद।’
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