Smritipath
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Author:
Dr. Dhirendra Verma, Dhirendra VermaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
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स्मृतिपथ स्मृतिपथ धीरेन्द्र वर्मा का सातवाँ उपन्यास है। स्मृतिपथ इस अर्थ में एक उपन्यास है कि इसमें एक कहानी है, जो कल्पना पर आधारित है परन्तु यह एक कथा इस अर्थ में नहीं है कि यह कथाक्रम के पारम्परिक परिभाषा से पृथक् और भिन्न है। इसमें जीवन के आधारभूत मूल्यों का विश्लेषण किया गया है। स्मृतिपथ की कथा का किसी देश, काल या परिस्थिति से सीधा सम्बन्ध नहीं है और इसका परिदृश्य सार्वभौमिक है। स्मृतिपथ एक कहानी न होकर एक धारणा है जो मनुष्य के जीवन से अपरिहार्य रूप से जुड़ी हुई है। इस सम्पूर्ण सृष्टि में जहाँ भी जीवन है, सभ्यता है, वहाँ के प्राणियों को एक सशक्त ‘स्मृति’ मिली है और एक ‘पथ’ मिला है जिस पर उन्हें चलना है, और बढ़ना है। अपनी जीवनयात्रा में हमें अपने स्वविवेक से अपना मार्ग चुनकर अपने गन्तव्य की ओर बढ़ना होता है और इस जीवन यात्रा को हम अपनी स्मृति के कोश में संचित करते हुए अपने स्मृतिपथ पर अपने कर्मों को छायांकित करते जाते हैं जिससे हम अपने इस जीवन के भाग्य का और अपने पुनर्जन्म का निर्धारण करते हैं।
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स्मृतिपथ
स्मृतिपथ धीरेन्द्र वर्मा का सातवाँ उपन्यास है। स्मृतिपथ इस अर्थ में एक उपन्यास है कि इसमें एक कहानी है, जो कल्पना पर आधारित है परन्तु यह एक कथा इस अर्थ में नहीं है कि यह कथाक्रम के पारम्परिक परिभाषा से पृथक् और भिन्न है। इसमें जीवन के आधारभूत मूल्यों का विश्लेषण किया गया है। स्मृतिपथ की कथा का किसी देश, काल या परिस्थिति से सीधा सम्बन्ध नहीं है और इसका परिदृश्य सार्वभौमिक है।
स्मृतिपथ एक कहानी न होकर एक धारणा है जो मनुष्य के जीवन से अपरिहार्य रूप से जुड़ी हुई है। इस सम्पूर्ण सृष्टि में जहाँ भी जीवन है, सभ्यता है, वहाँ के प्राणियों को एक सशक्त ‘स्मृति’ मिली है और एक ‘पथ’ मिला है जिस पर उन्हें चलना है, और बढ़ना है। अपनी जीवनयात्रा में हमें अपने स्वविवेक से अपना मार्ग चुनकर अपने गन्तव्य की ओर बढ़ना होता है और इस जीवन यात्रा को हम अपनी स्मृति के कोश में संचित करते हुए अपने स्मृतिपथ पर अपने कर्मों को छायांकित करते जाते हैं जिससे हम अपने इस जीवन के भाग्य का और अपने पुनर्जन्म का निर्धारण करते हैं।
Book Details
-
ISBN9789390971114
-
Pages72
-
Avg Reading Time2 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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ईसा की प्रथम शताब्दी में महाकवि इलंगोवन रचित तमिल महाकाव्य ‘शिलप्पदिकारम्’ भारतीय साहित्य की एक अनमोल रचना है। प्रस्तुत उपन्यास उक्त महाकाव्य की कथावस्तु पर आधारित पहली हिन्दी कृति है, जिसमें दक्षिण भारत के ऐतिहासिक जीवन का विस्तृत और विश्वसनीय चित्रण हुआ है। तत्कालीन पृष्ठभूमि को सँजोने में लेखक ने इतिहास-ग्रन्थों का अवगाहन करके अपने चित्रणों को यथासम्भव प्रामाणिक बनाने की चेष्टा की है और इस प्रकार उक्त महाकाव्य पर आधारित होते हुए भी यह प्रायः एक स्वतंत्र रचना बन गई है। स्वयं लेखक के शब्दों में : ‘‘घिसी-पिटी थीम होने पर भी पापुलर उपन्यास के लिए मुझे वह अच्छी लगी; मैं अपने दृष्टिकोण से उसमें नवीनता देख रहा था।’’ मिली-जुली सरल भाषा में लिखे गए इस उपन्यास का यह छठा संस्करण पाठकों के सामने है, जो इसकी लोकप्रियता का अकाट्य प्रमाण है।
Dhoday Charitmanas
- Author Name:
Satinath Bhaduri
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आधुनिक भारतीय कथा - साहित्य में कहानी कहना बंगाल की कला है । प्रस्तुत रचना इस मान्यता का एक अच्छा उदाहरण है । धीरोदात्त नायक यहाँ नहीं है । है तो ढोड़ाय , जैसा मामूली नाम तैसा चरित , ततमा लोगों के पूरे सामाजिक संदर्भ में , जहाँ ' पक्की ' ( यानी पक्की सड़क ) आधुनिक जीवन और बाहरी तत्त्व को प्रतिकित करती है । यह ' पक्की ' ही पूरे उपन्यास को आदि से अंत तक जोड़े हुए है । जिस समाज में महज पक्की सड़क नयी रोशनी का प्रतीक हो , उसे आधुनिक संदर्भों में जोड़ना रचनात्मक और वैचारिक दोनों स्तरों पर ' कितना कठिन है , यह आसानी से समझा जा सकता है । पर प्रख्यात बंगला कथा - शिल्पी सतीनाथ भादुड़ी ने कलात्मक धीरज के साथ इस जोड़ को साधा है । यों एक बड़े कालगत अंतराल को कथाकार ने अपनी संवेदना से पूरा किया है । प्रसिद्ध बंगला उपन्यास ' ढोड़ाय चरितमानस ' हिंन्दी में प्रकाशित होने के पूर्व ही यहाँ विस्तृत चर्चा का विषय बना रहा है । तब हिंदी पाठक के मन में उसको लेकर अतिरिक्त उत्सुकता का होना स्वाभाविक है । ' मैला आँचल ' हिंदी के समकालीन क्लैसिकों में है । उसका मूल नक्शा यहाँ देखा जा सकता है , जिसे हिंदी के उपन्यासकार ने अपने ढंग से समृद्धतर किया है । यों हिंदी की आंचलिक कथा - धारा का एक स्रोत है । ' ढोड़ाय चरितमानस ' । इस दृष्टि से सामान्य से सामान्य पाठक और विशिष्ट से विशिष्ट शोधकर्ता के लिए यह कथा - कृति रोचक और उपयोगी सिद्ध होगी ।
Ateet Ke Chalchitra
- Author Name:
Mahadevi Verma
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‘अतीत के चलचित्र’ हिन्दी गद्य की एक अप्रतिम रचना है। इतने दिनों बाद आज भी संवेदना के वे धरातल अछूते और अपूर्व हैं जिनकी सृष्टि इन रेखाचित्रों द्वारा हुई थी। मानवीय सहानुभूति और संवेगों की गहनता के लिए इन्हें चिरकाल तक हिन्दी साहित्य का शीर्षस्थ पद प्राप्त रहेगा।
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