Gurukul : Ek Adhoori Kahani : Vol. 2
Author:
Anita RakeshPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 60
₹
75
Unavailable
गुरुकुल’ का यह दूसरा भाग उसी चिन्ता का गम्भीर और गहन विस्तार है जो उपन्यास के पहले भाग में अंकुरित होती दिखाई दी थी।</p>
<p>पहले उपन्यास का भोला-भाला पार्थ यहाँ पर्याप्त वयस्क हो चुका है। वह न सिर्फ़ समाज की थोथी नैतिकता की अँधेरी गलियों में दुबके गे समुदाय की दुनिया को खुली आँखों से देख रहा है, बल्कि उनके हित में एक निर्णायक संघर्ष की तैयारी भी कर रहा है।</p>
<p>कहने की ज़रूरत नहीं कि हिन्दी में वैकल्पिक यौन-व्यवहार के माध्यम से सामाजिक और मानवीय सहिष्णुता की तलाश का यह पहला प्रयास है। सवाल बहुत सीधा है कि स्वतंत्रता और समता के अलम्बरदार हमारे तथाकथित लोकतांत्रिक समाज में कुछ लोगों को सिर्फ़ उनके ‘सेक्सुअल प्रिफ़ेरेंस’ के कारण ही क्यों समाज की घृणा और क़ानून की क्रूरता का पात्र बना दिया जाता है? लेकिन जवाब इतना सीधा नहीं है, क्योंकि न हममें इतना नैतिक साहस है और न इतनी इंसानियत।</p>
<p>यह उपन्यास भी इसका जवाब नहीं देता, यह उसकी ज़िम्मेदारी भी नहीं है, वह बस इस सवाल के पीछे छिपे हमारे ख़ूँख़्वार और दानवी चेहरों को उघाड़ता है। वह बताता है कि हम क्या हैं, हमारी नैतिक पवित्रता क्या है, हमारी न्याय व्यवस्था क्या है और हमारी पुलिस क्या है, और इस तरह इस सवाल के जवाब की अनिवार्यता को रेखांकित करता है।
ISBN: 9788183613354
Pages: 104
Avg Reading Time: 3 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Thake Paon
- Author Name:
Bhagwaticharan Verma
- Book Type:

-
Description:
प्रस्तुत उपन्यास ‘थके पाँव’ सामाजिकता, बौद्धिकता और भावनात्मक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।
भगवतीचरण वर्मा हिन्दी जगत के जाने-माने विख्यात उपन्यासकार हैं। आपके सभी उपन्यासों में एक विविधता है। हास्य व्यंग्य, समाज, मनोविज्ञान और दर्शन सभी विषयों पर उपन्यास लिखे हैं। कवि और कथाकार होने के कारण वर्मा जी के उपन्यासों में भावनात्मक और बौद्धिकता का सामंजस्य मिलता है। वर्मा जी के उपन्यासों को पढ़ते समय यह सदा ध्यान रखना चाहिए कि वे मूलत: एक छायावादी और प्रगतिवादी कवि हैं और उनके कथा साहित्य में कविता की भावना की प्रधानता बौद्धिक यथार्थ से कभी अलग नहीं होती। उपन्यासों के अब तक परम्परागत शिथिल और बने-बनाए रूप-विन्यास और कथन-शैली की नई शक्ति और सम्पन्नता ही नहीं, वरन् कथावस्तु का नया विस्तार भी मिला।
The Carved Cabinet
- Author Name:
Sudha Om Dhingra +1
- Book Type:

- Description: Sometimes life takes everything we give and still feels like it’s giving nothing back. But somewhere within that silence, there lies a moment—a turning point—that reminds us of the power we still hold. This novel is built around that moment. The Carved Cabinet is the English translation of the Hindi novel Naqqashidar Cabinet, originally written by Sudha Om Dhingra. It was an honor for me to bring this powerful story to English readers. As my first work of literary translation, it is more than a linguistic journey—it is an emotional one, too. At its heart, this is the story of a woman who dares to stand up when the world turns its back. Drawn into a life-altering situation, she faces deceit and danger—but instead of breaking, she finds the strength to fight back. Her courage becomes a quiet revolution. Set across the vibrant land of Punjab and the layered realities of American life, the story reminds us that resilience is universal. It belongs to anyone who refuses to be silenced and chooses to rise, again and again. This work is my humble attempt to bring her powerful story to a broader audience through English. -Aravind Anil
Bevatan
- Author Name:
Asharf Shaad
- Book Type:

-
Description:
अशरफ़ शाद पेशे से पत्रकार हैं और दिल से शायर। इस उपन्यास में उन्होंने अपनी इन दोनों ख़ूबियों का भरपूर इस्तेमाल किया है। अपनी ज़मीनों से उखड़े, पराए मुल्कों में भटकते बेवतनों के आर्थिक-सामाजिक हालात का जायज़ा अगर उनका पत्रकार, बिलकुल एक शोधार्थी की तरह लेता है, तो उन लोगों के भीतर घुमड़ते दुःख को ज़बान उनका शायर देता है। तथ्यात्मक विवरणों की निर्वैयक्तिकता और इन विवरणों में गुँथे पात्रों के साथ लेखक की गहन संलग्नता के चलते ही वह तनाव जन्म लेता है जो दर्जनों कथाओं-उपकथाओं में फैली इस गाथा को अद्भुत ढंग से पठनीय बनाता है।
निस्सन्देह इसमें अशरफ़ शाद के ‘कहानीपन’ की भी भूमिका है जिसके लिए आधुनिक उर्दू कथा-साहित्य में उन्हें एक ख़ास जगह हासिल है। अपने तमाम सरोकारों, चिन्ताओं और विस्तृत कथा-फलक के बावजूद ‘बेवतन’ का कहानीपन कहीं किसी झोल का शिकार नहीं होता।
‘बेवतन’ की चिन्ता के दायरे में वे लोग हैं जो बेहतर ज़िन्दगी की तलाश में अपने घरों और मुल्कों को छोड़कर परदेसी हो जाते हैं और पूरी ज़िन्दगी अपनी ‘सम्पूर्ण’ पहचान के लिए अपने आपसे और हालात से जद्दोजहद करते रहते हैं।
Jagdamba
- Author Name:
Ravindra Bharti
- Book Type:

-
Description:
रवीन्द्र भारती का उपन्यास ‘जगदम्बा’ हिन्दी कथा-साहित्य के मौजूदा ‘तुमुल कोलाहल कलह में’ ‘हृदय की बात’ की मानिन्द है। ऐसा इसलिए क्योंकि उत्तर भारत का आँचलिक जनजीवन जिस गहरी आत्मीयता, सूक्ष्मता तथा संगीतमय भाषा के साथ इस उपन्यास में अभिव्यक्त हुआ है, वह इधर के दिनों में दुर्लभ से दुर्लभतर होता गया है। लेकिन जो बात इस उपन्यास को खास बनाती है वह है उन दारुण स्थितियों का विश्वसनीय उद्घाटन जिनकी टीस स्थानीय बोली-बानी, आस्था-अन्धविश्वास और तमाम चीज-बतुस के संक्रामक आकर्षण के बावजूद, पाठक गहरे महसूस करता है।
इस उपन्यास में ऐसी स्त्रियाँ आती हैं जो अपने बनाए आकाश में उड़ना चाहती हैं। लेकिन उन्हें उड़ना पड़ता है मर्द के बनाए आकाश में। उन्हें अपने आकाश में उड़ने की आज़ादी नहीं। उड़ेंगी तो पतुरिया कहलाएँगी। इससे बात न बने तो देवी कहकर, जगदम्बा करार देकर उनके पंख तोड़ दिए जाएँगे। उपन्यास सवाल उठाता है— इनसान कोई बाँधने की चीज है? और, जवाब भी देता है—दरअसल जानवर भी बाँधने की चीज नहीं है मगर, आदमी अपने स्वार्थ में क्या नहीं करता! न हाथ बाँधने की चीज है, न मन। जहाँ कहीं बन्धन की गाँठ पड़ेगी, वह दिखे न दिखे, इनसान कुम्हला जाता है।
यहाँ हम मर्द के साथ सोने से इनकार करने पर जगदम्बा बना दी जाने वाली एक स्त्री को, समाज और परिवार ने मुक्ति की जो स्थापना दी है, उससे अलग, नई राह पर कदम बढ़ाते देखते हैं जो उसने खुद चुनी है। वह किसी मिथ जैसी मालूम पड़ती है; लेकिन वह यथार्थ है, वर्तमान में भविष्य की दिशासूचक! उपन्यास में हमें ऐसे अनेक किरदार मिलते हैं। मसलन चटपट और खटपट जो भले ही अनगढ़, गंवार लगते हैं लेकिन अन्याय को समझने और उसका प्रतिकार करने की अपनी सहज वृत्ति के कारण अलग से ध्यान आकर्षित करते हैं। बागुन बाबा, नकछेदी, सिस्टर क्रेजी भी ऐसे ही अनूठे किरदार हैं।
वस्तुतः आँचलिक उपन्यास का यह नया आख्यान है जो न केवल बेहद पठनीय है बल्कि संग्रहणीय भी है।
I..The Loser
- Author Name:
Sumit Kumar Sambhav
- Book Type:

- Description: What are the ingredients of the recipe for a looser? What are the circumstances which make a person looser? Zandu Singh, who lives in Dharamshala city of Himalayan Pradesh, dips his life into hard work to make himself perfect in his penance. But a single lie he speaks to his love, jyotsna, one day becomes so big that he becomes a loser for her and throws him to the ultimate darkness of confusion. Will zandu Singh ever be able to come out of this dilemma? Will he ever succeed in making his banwari Lal master Ji's dream true? Come and know about the thousands of athletes burning themselves in the fire of hard work, devotion and sacrifice but still living unidentified lives. Come to peep into their life through India’s first sports fiction.
Pootonwali
- Author Name:
Shivani
- Book Type:

-
Description:
‘पूतोंवाली’ एक ऐसी स्त्री की विडम्बना-भरी जीवन-गाथा है, जो पाँच-पाँच सुयोग्य-मेधावी बेटों की माँ होकर भी अन्त तक निपूती रही। शहरी चकाचौंध और सम्पन्नता की ठसक-भरे जीवन के मद में अपने सरल लेकिन उत्कट स्वाभिमानी पिता और स्निग्ध, वात्सल्यमयी माँ के दधीचि जैसे उत्सर्ग-भरे जीवन की अवहेलना करनेवाले बेटों का ठंडा व्यवहार आज के जीवन में घर-घर की कहानी बन चला है। ‘पूतोंवाली क्षय होते पारम्परिक पारिवारिक मूल्यों के पक्ष में एक मार्मिक गुहार है।
‘कैंजा’ यानी सौतेली माँ। एक ऐसा ओहदा जिसकी मर्यादा प्राणपण से निभाने के बाद भी निष्कलुष-मना नन्दी उसका पारम्परिक कलुष नहीं उतार पाती। बेटा रोहित समाज की कानाफूसी से विह्वल हो विद्रोही बनता जाता है। उसके फेंके पत्थरों से सिर्फ़ शीशा ही नहीं टूटता, नन्दी का हृदय भी विदीर्ण हो जाता है। एक ऐसी युवती की मार्मिक कथा, जो जन्मदायिनी माँ न होते हुए भी अपने सौतेले बेटे से सच्चा प्रेम करने की भूल कर बैठी है।
...“आँधी की ही भाँति वह मुझे अपने साथ उड़ा ले गई थी, और जब लौटी तो उसका घातक विष मेरे सर्वांग में व्याप चुका था।...”
कौन थी यह रहस्यमयी प्रतिवेशिनी जो नियति के लिखे को झुठलाने अकेली उस भुतही कोठी में आन बसी थी?
‘विषकन्या’ में शिवानी की जादुई क़लम ने उकेरी है दो यकसाँ जुड़वाँ बहनों की मार्मिक कहानी और उनमें से एक के ईर्ष्या से सुलगते जीवन की केन्द्रीय विडम्बना, जो स्पर्शमात्र से किसी के जीवन में हलाहल घोल देती है।
...सावित्री के दोनों बेटे विदेश चले जाते हैं। एक यात्रा के दौरान ट्रेन में मिला लावारिस बच्चा ही अन्तिम दिनों में उसके साथ रहता है। सावित्री अपनी सारी सम्पत्ति इसी तीसरे बेटे के नाम कर जाती है, परन्तु भाभियों का यह ताना सुनकर कि उसने धन पाने के लिए माँ की सेवा की, तीसरा बेटा गंगा वसीयतनामे को फाड़कर भाइयों के मुँह पर फेंक देता है। लोकप्रिय लेखिका की क़लम से निकली एक और मार्मिक कथा।
Balgandharva : Aadhunik Marathi Rangmach Ke Ek Mithak Ki Talash
- Author Name:
Abhiram Bhadkamkar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Sailabi Tatbandh
- Author Name:
Ajit Gupta
- Book Type:

-
Description:
यह उपन्यास ढाई सदी बाद की जीवन-स्थितियों का काल्पनिक संसार रचता है; लेकिन नित्य परिवर्तित होती मौजूदा सामाजिक संरचना के परिप्रेक्ष्य में सन् 2151 का समय यथार्थ के बिलकुल पास-पास की ध्वनि देता है।
स्त्री-विमर्श के दौर में अपने ढंग से अलग और महत्त्वपूर्ण दख़ल देनेवाली अजित गुप्ता के इस अनूठे उपन्यास के केन्द्र में है सन् 2151 का समय और तब का यौन-जीवन। यहाँ परिवार नहीं है, पति-पत्नी नहीं हैं और न ही हैं घरों में बच्चे। हैं भी तो स्कूल में। धर्म पूर्णतः प्रतिबन्धित है। लेकिन प्रकृति है और वह पात्रों के जीवन में अपनी स्वाभाविक भूमिका निभाती है। मर्यादा और उच्छृंखलता का भेद इतना साफ़ नहीं है कि आतंकित करे। भोग और मनोरंजन ही जीवन के लक्ष्य हैं। लेकिन शरीर की तृष्णा कभी समाप्त नहीं होती। अन्ततः ‘मातृत्व-सुख’ जवाब बनकर सामने खड़ा हो जाता है।
उपन्यास की कथा क़िस्सागोई शैली में आगे बढ़ती है। शायद यही वजह है कि पठनीयता कहीं भी बाधित नहीं होती। रोमांस, सेक्स, प्रकृति और मातृत्व के इर्द-गिर्द बुनी इसकी कथा भविष्य की एक फैंटेसी के द्वारा हमारे मौजूदा जीवन-यथार्थ के कई कोने-अँतरे खोलती है।
Jhool
- Author Name:
Bhalchandra Nemade
- Book Type:

-
Description:
झूल उस दारुण परिणति का वृत्तान्त है जहाँ स्वातंत्र्योत्तर भारत की युवा पीढ़ी अपने व्यक्तिगत सपनों तथा जातीय आदर्शों और आकांक्षाओं के बीच के अन्तर को पाटने की कोशिश में पहुँची है। उपन्यास का नायक चांगदेव पाटील अपने अस्तित्व के उद्देश्य और नैतिक आदर्शों को समाज में व्याप्त संकीर्णताओं के बीच एकदम असंगत पाता है। यह अनुभव उस समय और प्रगाढ़ हो जाते हैं जब वह एक नए कॉलेज में प्रोफेसर बनकर आता है। पिछले कॉलेज के कटु अनुभव अभी भी उसके साथ हैं लेकिन जिस भावात्मक औदात्य को उसने अपनी जीवन-दृष्टि का आधार बनाया है, उसे भी उसने छोड़ा नहीं है। अपने एकाकी मन को वह समाज की बड़ी संरचना में विलय कर देना चाहता है लेकिन आसपास के जीवन और लोगों में कोई ऐसी मूल्य-चेतना उसे नहीं दिखती जो उन्हें उनकी तुच्छताओं से ऊपर उठा सके। समाज की यह असफलता उसके व्यक्ति को घोर निराशा से भर देती है। लगातार जगह बदलते हुए उसने जो पाया है, वह यही कि जीवन अन्ततः अर्थहीन ही है।
तीक्ष्ण दृष्टि और उतनी ही तीक्ष्ण शब्दावली के साथ भारतीय समाज की पड़ताल करने वाले नेमाड़े इस उपन्यास में ‘होने’ और ‘नहीं होने’ के द्वन्द्व को इतनी गहराई से अंकित करते हैं कि इस शृंखला के अन्य उपन्यासों की तरह यह उपन्यास भी कथा से अधिक एक अध्ययन हो जाता है।
झूल स्वतंत्र रूप से भी उतना ही दिलचस्प और पूर्ण पाठ है, जितना कि शृंखला की एक कड़ी के रूप में। यह एक बड़ी विशेषता है।
'Ba' Se Bank
- Author Name:
Suresh Kant
- Book Type:

-
Description:
हिन्दी के सुपरिचित कथाकार-व्यंग्यकार सुरेश कान्त का यह व्यंग्य-उपन्यास एक बैंक की अन्दरूनी कहानी कहता है, जिसके माध्यम से बैंक-कर्मचारियों के दैनंदिन क्रियाकलापों का जायज़ा लिया गया है। इसमें एक तरफ़ बैंक मैनेजर के अन्धविश्वासों पर चुटीली टिप्पणी है तो दूसरी ओर कर्मचारियों की कामचोरी के साथ ही उनकी समस्या और उनके सुख-दु:ख को भी लेखक ने अनदेखा नहीं किया है और बैंक का सारा कारोबार जिन ग्राहकों के बिना अधूरा है, उनकी परेशानियाँ और शिकायतें भी यहाँ मौजूद हैं। लेकिन सब कुछ इतना पूर्वग्रहमुक्त और सहज-स्फूर्त है कि व्यंग्य में कहीं कटुता नहीं आती, वह मीठी मार से अपना काम करता चलता है।
सुरेश कान्त बैंक में कार्यरत हैं, इसलिए स्वभावत: जिन घटनाओं और प्रसंगों का चित्रण उन्होंने यहाँ किया है, वे प्रामाणिक और विश्वसनीय तो हैं ही, लेखक की मानवीय दृष्टि का स्पर्श पाकर प्रभावोत्पादक भी हो गए हैं।
Koi Veerani Si Veerani Hai
- Author Name:
Vijay Mohan Singh
- Book Type:

-
Description:
यह ‘वीरानी’ किसकी है? दिल का, दिमाग़ और पूरे परिवेश का?
...उपन्यास लेकिन
‘वीरानी’ की तलाश नहीं है। तलाश है इस वीराने में अर्थ की। प्रतिभा और परिवेश सब बंजर हो रहे हैं। प्रतिभाएँ या तो कुंठित हो रही हैं या अपनी वहशत में क्रमिक हत्याओं तथा आत्महत्याओं की ओर अग्रसर। एक तीसरा रास्ता है : अपनी चतुर, कुटिल बुद्धि का लिप्सा में लिथड़ा भोगलिप्त उपयोग।यह कथा इन तीनों पथों के पथिकों की एक स्थाली ‘पुलाक् न्याय’ की जानकारी देती है। एक सामूहिक अक्षमता है जो हर कहीं जाकर अवरुद्ध हो जाती है : चाहे वह सफलता का रास्ता हो, सुविधाओं के संसार का या सम्बन्ध, साहचर्य और प्रेम के निर्वाह का।
...आज का आदमी या तो सिनिकल है या ऐसा समझदार जो हर शिकार के बाद एक ताज़ा मछली की तलाश में है लेकिन हर मछली एक मरी हुई मछली है।
...यह एक संस्कृति की कहानी भी है जो कला और प्रचलन में फ़र्क़ करना भूल गई है। यह वीरानी उस विविधता की भी है क्योंकि जितनी विविधता होगी, उतनी ही वीरानी बढ़ेगी। संकेतों, प्रतीकों तथा प्रयोजनार्थ निर्मित नाटकीय कथास्थितियों में मित कथन
को माध्यम बनाकर लिखा गया यह उपन्यास अपने व्यंजनार्थ में ही सब कुछ व्यक्त करने की चेष्टा है। सहज तथा सरल-सी प्रतीत होनेवाली इस कथा में एक काल है जो अपनी बंजरता में विस्तृत होता जा रहा है : एक सामन्ती युग के अवशेष का अन्त तो दूसरी ओर तथाकथित आधुनिक का अनुभव, अनुभूति का स्पर्शहीन अनवरत स्थानान्तरण : क़स्बा, नगर, महानगर तथा परदेश-गमन की दिशाहीन यात्राओं की ओर!इन्हीं सबके इस सर्वव्यापी ‘आइसबर्ग’ के महज़ एक नाखून का रेखांकन है यह। कम से कम दिखने और अधिक से अधिक दिखाने का प्रयास। इसीलिए इसमें सायास कुछ नहीं है : जो है वह दृश्य में। व्याख्याओं, विश्लेषणों तथा स्थापनाओं के रूप में कुछ नहीं! एक व्यक्तिगत, सामूहिक, सामाजिक अथवा सांकृतिक वीरानी अपने बयान में ही व्यक्त हो सकती हैं—व्याख्या या बड़बोलेपन में नहीं।
Lomharshini
- Author Name:
K. M. Munshi
- Book Type:

-
Description:
प्राचीन भारतीय इतिहास और संस्कृति के मर्मज्ञ विद्वान् कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी उपन्यासकार के नाते न केवल गुजराती, बल्कि समूचे भारतीय साहित्य में समादृत हैं! कई खंडों में प्रकाशित विशाल औपन्यासिक रचना ‘कृष्णावतार’, ‘भगवान परशुराम’, ‘लोपामुद्रा’ जैसे वैदिक और पौराणिक काल का दिग्दर्शन करनेवाले उपन्यासों के क्रम में ‘लोमहर्षिणी’ उनकी एक और महत्त्वपूर्ण कथाकृति है।
लोमहर्षिणी राजा दिवोदास की पुत्री और परशुराम की बाल-सखी थीं, जो युवा होने पर उनकी पत्नी बनीं। भृगुकुलश्रेष्ठ परशुराम ने अत्याचारी सहस्रार्जुन के विरुद्ध व्यूह-रचना का जो लम्बा संघर्ष किया, उसमें लोमहर्षिणी की भूमिका भारतीय नारी के गौरवपूर्ण इतिहास का एक उज्ज्वलतर पृष्ठ है। साथ ही इस उपन्यास की पृष्ठभूमि में ऋषि विश्वामित्र और मुनि वसिष्ठ के मतभेदों की कथा भी है। उनके यह मतभेद त्रित्सुओ के राजा सुदास के पुरोहित-पद को लेकर तो थे ही, इनके मूल में विश्वामित्र द्वारा आर्य और दस्युओं के भेद का विवेचन तथा वसिष्ठ द्वारा आर्यों की शुद्ध सनातन परम्परा का प्रतिनिधित्व करना भी था।
वस्तुतः लोमहर्षिणी में मुंशी जी ने नारी की तेजस्विता तथा तत्कालीन समाज, धर्म, संस्कृति और राजनीति के जटिल अन्तर्सम्बन्धों का प्राणवान उद्घाटन किया है।
Meghalay Ki Lokkathayen
- Author Name:
Madhavendra +1
- Book Type:

- Description: This book has no description
Naqqashidar Cabinet
- Author Name:
Sudha Om Dhingra
- Rating:
- Book Type:


- Description: सुधा ओम ढींगरा का उपन्यास नक़्क़ाशीदार केबिनेट वर्ष 2016 का अत्यंत सफल उपन्यास है। यह उपन्यास पेपरबैक और ऑडियोबुक में भी उपलब्ध है।
Canvased Life's Colours
- Author Name:
Vrunda Joshi
- Rating:
- Book Type:

- Description: In this book, The author has attempted to embroider her poems with a touch of self-enlightenment. The attractive feature of this book is that the lyrics here are written not just to find meaning, but these poems have a self-contained sense in them. It's an effort to ink the pages with different shades of a 'Rainbow of life'. So, the author assures readers of the book that it can touch the hearts of many.
Ek Chuhe Ki Maut
- Author Name:
Badiuzzaman
- Book Type:

-
Description:
एक लम्बा-चौड़ा चूहाख़ाना और अनगिनत चूहेमार। छोटे, बड़े और फिर और बड़े। ठौर-ठौर चूहेमार प्रस्ताव, चूहेमार योजनाएँ और चूहेमार कार्यक्रम। जगह-जगह ज़िन्दा-मुर्दा चूहों का अम्बार, हाहाकार। कटे-फटे अंगों और सड़ रही लाशों की असह्य दुर्गन्ध। फिर भी अबाध चूहेमारी— प्रतिभा, योग्यता और कार्यक्षमता का एकमात्र प्रमाण, जन-कल्याण का एकमात्र रास्ता। मजबूर हैं एक-दूसरे के मातहत चूहे मारते चूहेमार; अभिशप्त, भयभीत और नियतिबद्ध हैं चूहेमारी के लिए; अन्यथा उन्हें ख़ुद चूहों में बदल जाना होगा— मर जाना होगा एक चूहे की मौत!
वस्तुतः सुपरिचित हिन्दी कथाकार बदीउज़्ज़माँ का यह बहुचर्चित उपन्यास फ़ंतासी के माध्यम से एक ऐसी समाज-व्यवस्था का चित्रण करता है जो पूरी तरह मानव-विरोधी है और जिसमें मानवीय गरिमा तथा मानव-अस्तित्व दोनों मूल्यहीन हो चुके हैं। फ़ंतासी के बावजूद लेखक ने स्थितियों का जैसा वास्तविक चित्रण किया है उससे हम अपने समय, समाज और व्यवस्था-तंत्र को साफ़ तौर पर देख और महसूस कर सकते हैं।
Baraha Ghante
- Author Name:
Yashpal
- Book Type:

-
Description:
‘बारह घंटे’ यशपाल का अपने पाठकों के लिए एक वैचारिक आमंत्रण है। ईसाई समाज की पृष्ठभूमि में घटित इस उपन्यास के केन्द्र में विधवा विनी और विधुर फेंटम हैं जो कुछ विशेष परिस्थितियों में परस्पर भावनात्मक बन्धन में बँध जाते हैं।
उपन्यास की नायिका विनी की ओर से इस वृत्तान्त को ‘पाठकों के सम्मुख एक अपील के रूप में’ रखते हुए यशपाल इस उपन्यास के माध्यम से अनुरोध करते हैं कि ‘विनी को प्रेम अथवा दाम्पत्य निष्ठा निबाह न सकने का कलंक देने का निर्णय करते समय, विनी के व्यवहार को केवल परम्परागत धारणाओं और संस्कारों से ही न देखें। उसके व्यवहार को नर–नारी के व्यक्तिगत जीवन की आवश्यकता और पूर्ति की समस्या के रूप में तर्क तथा अनुभूति के दृष्टिकोण से, मानव में व्याप्त प्रेम की प्राकृतिक अनिवार्य आवश्यकता के रूप में भी देखें।’
वे पूछते हैं कि क्या नर–नारी के परस्पर आकर्षण अथवा दाम्पत्य सम्बन्ध को केवल सामाजिक कर्तव्य के रूप में ही देखना अनिवार्य है? आर्यसमाजी वर्जनाओं और दृष्टि की तर्कपूर्ण आलोचना करनेवाला यशपाल का एक विचारोत्तेजक उपन्यास।
Pakwa-Inar Ke Bhoot
- Author Name:
Ram Kathin Singh
- Book Type:

-
Description:
जब पूर्वांचल में सूती-मिल की स्थापना हुई, तो लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। सैकड़ों लोगों को छोटी-बड़ी नौकरियाँ मिलीं। रहने के लिए घर, बिजली-पानी आदि अनेक सुविधाएँ उन्हें प्राप्त हुईं। वे खुश थे। पर उनकी खुशी दीर्घकालिक न रह सकी। मिल अपने जीवन के दो दशक भी पूरे नहीं कर पाई और दम तोड़ दिया। लोग बेघर और बेरोज़गार हो गए। लोगों का परिवार बिखर गया। उन्हीं में एक परिवार पद्मिनी का भी था। उसके भी सपने टूटकर बिखर गए थे। उसी की कहानी से शुरू होता है, यह उपन्यास। पद्मिनी को किन्हीं कारणवश बहुत छोटी उम्र में ही माँ-बाप का घर छोड़कर नाना-नानी के साथ रहने के लिए विवश होना पड़ा था। उसके पिता मिल में अधिकारी थे। उनकी आय का एकमात्र स्रोत सूती-मिल जब बन्द हो गई, तब उसका परिवार एक गहरे संकट में पड़ गया। पद्मिनी की परेशानियाँ तब और भी बढ़ गई थीं।
पद्मिनी की कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, उसके साथ ही मिल से जुड़े अनेक चेहरे जैसे : दयालु चाचा, मार्कण्डेय भाई, राय साहब, संतोष, भीमसेन, आदि एक-एक कर किरदार बनकर खड़े होते जाते हैं। उनका संघर्ष, उनकी पीड़ा और उनके आँसू शब्द बनकर स्वयं ही कहानी रचने लगते हैं। उनकी कहानियाँ अनेक सवाल भी उठाती हैं : मिलों-कारखानों में मजदूरों के नाम पर चलाए जाने वाले आन्दोलन, क्या सचमुच उनके हित-साधक होते हैं? मरजादपुर सूती-मिल बन्द कराकर आखिर किसका फायदा हुआ? ...मजदूरों का? कर्मचारियों का? या पूर्वांचल के लोगों का? नहीं! इनमें से किसी का भी नहीं। हाँ, कुछ की तिजोरियाँ अवश्य भर गईं और कुछ लोगों की नेतागिरी भी खूब चमकी। किन्तु, जो जानें गईं, विकलांग हुए, परिवार उजड़े, उन सबका जिम्मेदार आखिर कौन है? क्या इन प्रश्नों के उत्तर ढूँढ़ने नहीं चाहिए?
Hindu : Jeene Ka Samriddh Kabaad
- Author Name:
Bhalchandra Nemade +1
- Book Type:

- Description: ‘हिन्दू’ शब्द के असीम और निराकार विस्तार के भीतर समाहित, ‘अपने-अपने ढंग’ से सामाजिक रूढ़ियों में बदलती ‘उखड़ी-पुखड़ी’, ‘जमी-बिखरी’ वैचारिक धुरियों, सामूहिक आदतों, ‘स्वार्थों’ और ‘परमार्थों’ की आपस में उलझी पड़ी अनेक बेड़ियों-रस्सियों, सामाजिक-कौटुम्बिक रिश्तों की पुख्तगी और भंगुरता, शोषण और पोषण की एक दूसरे पर चढ़ीं अमृत और विष की बेलें, समाज की अश्मीभूत हायरार्की में ‘साँस लेता-दम तोड़ता जन’, और इस सबके ऊबड़-खाबड़ से राह बनाता समय—मरण-लिप्सा और जीवनावेग की अतलगामी भँवरों में डूबता-उतराता, अपने घावों को चाटकर ठीक करता, बढ़ता काल... देसी अस्मिता का महाकाव्य यह उपन्यास भारत के जातीय 'स्व’ का बहुस्तरीय, बहुमुखी, बहुवर्णी उत्खनन है। यह न गौरव के किसी जड़ और आत्ममुग्ध आख्यान का परिपोषण करता है, न 'अपने’ के नाम पर संस्कृति की रगों में रेंगती उन दीमकों का तुष्टीकरण, जिन्होंने 'भारतवर्ष’ को भीतर से खोखला किया है। यह उस विराट इकाई को समग्रता में देखते हुए चलता है जिसे भारतीय संस्कृति कहते हैं। यह समूचा उपन्यास हममें से किसी का भी अपने आप से संवाद हो सकता है—अपने आप से और अपने भीतर बसे यथार्थ और नए यथार्थ का रास्ता खोजते रास्तों से। इसमें अनेक पात्र हैं, लेकिन उपन्यास के केन्द्र में वे नहीं, सारा समाज है, वही समग्रता में एक पात्र की तरह व्यवहार करता है। संवाद भी, पूरा समाज ही करता है, लोग नहीं। एक क्षरणशील, फिर भी अडिग समाज भीतर गूँजती, और 'हमें सुन लो’ की प्रार्थना करती जीने की ज़िद की आर्त पुकारें। कृषि संस्कृति, ग्राम व्यवस्था और अब, राज्य की आकंठ भ्रष्टाचार में लिप्त नई संरचना—सबका अवलोकन करती हुई यह गाथा—इस सबके अलावा पाठक को अपनी अँतड़ियों में खींचकर समो लेने की क्षमता से समृद्ध एक जादुई पाठ भी है।
Mulak
- Author Name:
Dalpat Chauhan
- Book Type:

-
Description:
आदिकाल से भारतीय समाज में कोढ़ की तरह फैली अस्पृश्यता की समस्या पर एक नए नज़रिए से लिखा गया उपन्यास। स्वतंत्रता के पश्चात् भारतीय संविधान में इस सामाजिक अवरोध से समाज को विमुक्त करने का प्रयास किया गया पर वैधानिक उपायों का समाज में व्यावहारिक अनुपालन नहीं हो सका। यह उपन्यास जाति-प्रथा की वर्तमान अवस्थिति को रेखांकित करते हुए इसके अतीत पर भी दृष्टिपात करता है जब सत्ताधारी समाज ने सवर्ण-अवर्ण की लक्ष्मण-रेखाएँ बनाकर मानवीय संवेदनाओं का तिरस्कार किया, अपने ही जैसी चमड़ी और ख़ून वाले व्यक्ति के साथ पाशविक व्यवहार किया और असंख्य लोगों को नारकीय जीवन जीने को विवश किया।
उपन्यास की कहानी में शोषित समाज के एक युवक का उपयोग उच्चवर्ण द्वारा अपना वंश बढ़ाने के लिए किया जाता है लेकिन उससे मिलती-जुलती मुखाकृति वाली सन्तान पैदा होने पर शोषक समाज उसे लोक-लज्जा से भयभीत होकर समाप्त करने की साज़िश में जुट जाता है। उपन्यास अतीत और वर्तमान की एक कड़ी के रूप में सामने आता है और सवाल उठाता है कि क़ानून की बन्दिशों के बावजूद क्या यह सामाजिक बुराई समाप्त हो पाई? क्या संस्कारों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी घोली गई इस घृणा से समाज विमुक्त हो पाया? वर्तमान महानगरीय संस्कृति में अब जाति का कितना महत्त्व रह गया है और वर्तमान ग्रामीण समाज में क्या जाति ने कोई नया रूप लिया है? एक और सवाल जिस पर यह उपन्यास फ़ोकस करता है, वह है स्थानान्तरण—अपनी मूलभूमि को छोड़कर कहीं और जाकर सिर छिपाना। कहने की ज़रूरत नहीं कि यह भी हमारे वर्तमान की एक ज्वलन्त समस्या है। कह सकते हैं कि तमाम सवालों के बीच इस उपन्यास में यह सवाल बराबर मौजूद रहता है। यह औपन्यासिक कृति पाठकों को निश्चय ही इन सभी सवालों से दो-चार होने को प्रेरित करेगी।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book