Apne Apne Konark
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
About the book
अपने-अपने कोणार्क यानी कश्मीर से ओड़िशा का सफ़र। कश्मीर की सरसब्ज़ वादी में जन्मी और पली-बढ़ी चन्द्रकान्ता को भारत के अनेक प्रान्तों में रहने-बसने का मौक़ा मिला। लेकिन ओड़िशा में बिताए गए छह वर्ष उनकी सर्जनात्मकता के लिए अमूल्य बन गए। उन्होंने वहाँ की जीवन-शैली, लोक-रंगों और परम्पराओं की महक महसूस की है, जिसका जीवन्त प्रमाण है ‘अपने-अपने कोणार्क’। ओड़िशा की संस्कृति धरोहर—पुरी और कोणार्क, जीवन के दो पहलू; सम्पूर्ण जीवन का फ़लसफ़ा यहाँ मौजूद है, जिसे लेखिका ने ऐतिहासिक एवं भौगोलिक परिदृश्य के साथ वर्तमान की सच्चाइयों से जोड़कर देखा है। उपन्यास की नायिका कुनी के माध्यम से उन्होंने आम ओड़िया जन को उसके विगत और वर्तमान के साथ प्रस्तुत किया है। 'मोर गौरव जगन्नाथ' में विश्वास करता आम ओड़िया जन अपने परम्परागत आलोक से मुग्ध, रक्षणशील तथा संस्कारवान भी है और हम सबकी तरह अन्धविश्वासी और रूढ़ मानसिकता से ग्रस्त भी। कुनी इसी रक्षणशील परिवार की बड़ी बेटी है, हज़ारहा दायित्वों की साँकलों में क़ैद, गोकि वह उन्हें साँकलें समझती नहीं। वह अपनी लीक आप बनाती, वक्त की सच्चाइयों के रू-ब-रू होते अपने भीतर को जानने और पाने की कोशिश करती है। ओड़िशा की पृष्ठभूमि में वहाँ के इन्द्रधनुषी रंगों को समेटे कुनी की यह कहानी सच की तलाश है।
Read more₹
199
₹ 159.2 20% off
Available
Rachnaye membership
Pick a membership and see exactly what it gets you
- 15 Free Deliveries
- 1 Free Book up to ₹500 MRP
- 0% off every book, every time
Subscribed already? Continue to your
benefits Login
You pay ₹1,499/Year
You will be auto-charged ₹1,499 every year. Cancel auto-charge anytime.
Benefits with Rachnaye Connoisseur
1 Free Physical Book up to ₹500 MRP
Personal Recommendations
15 Free Deliveries Per Year
Format
100% Original
Fast Dispatch
Secure Payment
About the Book
अपने-अपने कोणार्क यानी कश्मीर से ओड़िशा का सफ़र। कश्मीर की सरसब्ज़ वादी में जन्मी और पली-बढ़ी चन्द्रकान्ता को भारत के अनेक प्रान्तों में रहने-बसने का मौक़ा मिला। लेकिन ओड़िशा में बिताए गए छह वर्ष उनकी सर्जनात्मकता के लिए अमूल्य बन गए। उन्होंने वहाँ की जीवन-शैली, लोक-रंगों और परम्पराओं की महक महसूस की है, जिसका जीवन्त प्रमाण है ‘अपने-अपने कोणार्क’।
ओड़िशा की संस्कृति धरोहर—पुरी और कोणार्क, जीवन के दो पहलू; सम्पूर्ण जीवन का फ़लसफ़ा यहाँ मौजूद है, जिसे लेखिका ने ऐतिहासिक एवं भौगोलिक परिदृश्य के साथ वर्तमान की सच्चाइयों से जोड़कर देखा है। उपन्यास की नायिका कुनी के माध्यम से उन्होंने आम ओड़िया जन को उसके विगत और वर्तमान के साथ प्रस्तुत किया है। 'मोर गौरव जगन्नाथ' में विश्वास करता आम ओड़िया जन अपने परम्परागत आलोक से मुग्ध, रक्षणशील तथा संस्कारवान भी है और हम सबकी तरह अन्धविश्वासी और रूढ़ मानसिकता से ग्रस्त भी। कुनी इसी रक्षणशील परिवार की बड़ी बेटी है, हज़ारहा दायित्वों की साँकलों में क़ैद, गोकि वह उन्हें साँकलें समझती नहीं। वह अपनी लीक आप बनाती, वक्त की सच्चाइयों के रू-ब-रू होते अपने भीतर को जानने और पाने की कोशिश करती है।
ओड़िशा की पृष्ठभूमि में वहाँ के इन्द्रधनुषी रंगों को समेटे कुनी की यह कहानी सच की तलाश है।
Book details
- Format
- Paperback
- Publisher
- Rajkamal Prakashan Samuh
- Edition
- 3rd
- Publication year
- 2006
- Weight
- 190 grams
- ISBN-13
- 9788126712526
- Pages
- 202
- Reading time
- ~7 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14 × 21.5 cm
- Language
- Hindi
Recommended for you
Elan Gali Zinda Hai
- Author Name:
Chandrakanta
- Book Type:

- Description:
कहा गया है कि अगर पृथ्वी पर कहीं स्वर्ग है तो वह काश्मीर ही है और ‘ऐलान गली ज़िन्दा है’ उपन्यास इसी स्वर्ग के हाशिये पर दरिद्रता, अज्ञान और अभावों में पल रहे लोगों की संस्कृति और जीवन-संघर्षों को बहुत अन्तरंग विवरणों के साथ उजागर करता है। जहाँ आज धर्म, जाति और भाषा के नाम पर आदमी-आदमी के बीच दीवारें खड़ी की जा रही हों, वहाँ ऐलान गली के अनवर मियाँ, दयाराम मास्टर, संसारचन्द आदि लोग हिन्दू-मुस्लिम साम्प्रदायिक सौहार्द के प्रतीक बनकर उभरते हैं। दूसरी ओर बेरोज़गारी के अन्धकार में पल रही युवा पीढ़ी है, जो रोज़गार की तलाश में बड़े शहरों की ओर दौड़ रही है। अवतारा ऐसी ही युवा पीढ़ी का प्रतिनिधि चरित्र है, जिसे आजीविका के लिए मुम्बई जैसे महानगर में जाना पड़ता है। महानगरीय सुविधाओं और चकाचौंध के बीच वह ख़ुद को अजनबी और अस्तित्वहीन महसूस करता है, उसके ज़ेहन में ऐलान गली प्यार के समुद्र की तरह पछाड़ें मारती है। ऐलान गली के निवासियों के आपसी सम्बन्धों के विविध आयामों को इस उपन्यास में इतने विस्तार और सूक्ष्मता से चित्रित किया गया है कि एक समूचे समाज का रूप उभरकर सामने आता है। वस्तुतः अपने तमाम पिछड़ेपन के बावजूद ऐलान गली वहाँ के प्रवासियों और निवासियों के दिल-दिमाग़ में उसी तरह ज़िन्दा है, जिस तरह फूलों में सुगन्ध।
Samay-Ashva Belagam
- Author Name:
Chandrakanta
- Book Type:

- Description:
कश्मीरी पंडितों के विस्थापन की पृष्ठभूमि में यह उपन्यास अपनी सांस्कृतिक जड़ों से विच्छिन्न मनों की पीड़ा तथा ग्लोबलाइजेशन से बौराए हमारे मौजूदा वक़्त की कथा है। एक तरफ़ लोग कहीं मजबूरन तो कहीं नए दौर के प्रवाह में अपनी जड़ों से उखड़ रहे हैं तो दूसरी तरफ़ जीना एक वैश्विक स्पर्धा होता जा रहा है। कश्मीर से जान बचाकर निकला एक पंडित परिवार अपने जैसे अनेक लोगों के साथ राजधानी दिल्ली में आकर नए सिरे से जीवन शुरू करता है। धीरे-धीरे उनके पैर नई ज़मीन पर अपनी जगह भी बनाने लगते हैं लेकिन यह अहसास कि अगर हम अपने ही देश में शरणार्थी हैं तो फिर दुनिया में कहीं भी रहें, क्या फ़र्क़ पड़ता है; भावी पीढ़ी के लिए निर्णायक बन जाता है। कश्मीरी संस्कृति और मूल्यों में रसे-पगे माता-पिता का प्रशिक्षण परिवार को बिखरने तो नहीं देता लेकिन अपने घर-ज़मीन से दूर, महानगरों के परायेपन में सम्बन्धों को उस तरह जीना भी सम्भव नहीं जैसे अपनी भूमि पर अपनी संस्कृति, अपने माहौल के बीच हो सकता था। वरिष्ठ कथाकार चन्द्रकान्ता अपने इस नए उपन्यास में कश्मीर से विस्थापित परिवार की कहानी के माध्यम से जैसे वर्तमान का पूरा चित्र ही खींच देती हैं। बुज़ुर्गों का अकेलापन, नई पीढ़ी के भटकाव, सतत एक होड़ में डूबे युवाओं का तनाव, बिखरता दाम्पत्य, पश्चिमी संस्कृति और तकनीक के दबाव, विश्व के अलग-अलग हिस्सों में हो रहा विस्थापन, सार्वजनिक स्पेस में स्त्रियों पर होनेवाले हमले और वह सब जो इस दौर को एक शान्त धारा नहीं, भीषण भँवर का रूप देता है; इन सबको लेकर एक गम्भीर चेतावनी यहाँ मौजूद है। उपन्यास के मुख्य पात्र सुरेन्द्रनाथ का यह कथन कि 'यह समय बूढ़ों का नहीं है' जैसे इस पूरे परिदृश्य पर एक सम्पूर्ण टिप्पणी है। अर्थात धीरता, गम्भीरता, ठहराव, गहराई और प्रकृति के हमक़दम चलने का यह समय नहीं है। देश से लेकर विदेश तक बेलगाम बहती एक गति है जिसके बने रहने के लिए हर किसी की साँसें उखड़ी जा रही हैं। चन्द्रकान्ता की सधी हुई क़लम एक-एक पंक्ति में वैश्विक विडम्बना की एक-एक परत खोलती है।
Pratinidhi Kahaniyan : Chandrakanta
- Author Name:
Chandrakanta +1
- Book Type:

- Description:
– चन्द्रकान्ता कश्मीर केन्द्रित अपने विपुल कथा-लेखन के लिए हिन्दी जगत में ख़ासी लोकप्रिय हैं। अपनी कहानियों में उन्होंने देश-विभाजन के तत्काल बाद कश्मीर संकट से उपजे हालात से लेकर 'जेहाद' के नाम पर जारी आतंकवाद से झुलसते कश्मीर की आबोहवा और अवाम के दुःख-दर्द का अद्यतन चित्र उकेरा है, जहाँ वे यथास्थिति का चित्रण-भर करके नहीं रुक जातीं अपितु प्यार, ईमान और इंसानियत से लबरेज़ पात्रों का सृजन कर कट्टरता एवं हिंसा के विरुद्ध पुरज़ोर आवाज़ उठाती हैं। कश्मीर ही नहीं, देश-दुनिया की हर उस मानवीय त्रासदी को चन्द्रकान्ता अपनी कहानियों में जगह देती हैं जिससे एक संवेदनशील रचनाकार का मन आहत एवं उद्वेलित होता है। वे उस भ्रष्ट व्यवस्था और मनुष्य विरोधी तंत्र को कठघरे में खड़ा करती हैं, जिसने तेज़ी से बदलते समाज में चतुर्दिक संघर्ष से घिरे मनुष्य की आन्तरिक अनुभूतियों को कहीं गहरे दफ़न कर दिया है। व्यक्ति और व्यवस्था की मुठभेड़ में वे पूरी प्रतिबद्धता के साथ प्रत्येक विषम परिस्थिति एवं प्रवृत्ति की समीक्षा करती हैं; तत्पश्चात् उन तथ्यों का अन्वेषण करती हैं जिससे मनुष्य की अन्तरात्मा को मरने से बचाया जा सके और इस प्रकार एक बेहतर कल के लिए मनुष्य के स्वप्नों, संवेदनाओं और स्मृतियों को सिरज लेने की चिन्ता चन्द्रकान्ता की कहानियों का प्रस्थान-बिन्दु बन जाती है।
Jahan-Jahan Kadam Pade
- Author Name:
Chandrakanta
- Book Type:

- Description:
वर्षों से निलम्बित साहस को बटोरकर, अपने सुरक्षित दैनिक व्यापार के दुष्चक्र को तोड़कर जब हम यात्राओं पर निकलते हैं तो वह सिर्फ बाहर की यात्रा नहीं होती, भीतर की भी होती है; अपने भीतर, अपने आपको नया करने की यात्रा। असीम तक फैले इस विराट संसार से एकमेक होकर स्वयं को एक नवीन रूप में देखने-जानने की यात्रा। ‘जहाँ-जहाँ क़दम पड़े’ पुस्तक में संकलित, वरिष्ठ कथाकार चन्द्रकान्ता के यात्रा-वृत्त इसी अहसास के साथ की गई यात्राओं का विवरण देते हैं। यात्राएँ जिनका आरम्भ उत्सुकता से हुआ, और जो पूर्ण हुईं इस बोध के साथ कि ‘छोटी-छोटी यात्राएँ कभी-कभार हमारी चेतना में दबे अनुत्तरित प्रश्नों के उत्तर’ एक आभा के साथ हमारे सम्मुख रख देती हैं। अमेरिका, सिंगापुर, डिज्नीलैंड, सी वर्ल्ड, योसिमिटी नेशनल पार्क, पशुपतिनाथ धाम, जगन्नाथ धाम और उनकी अपनी वादी श्रीनगर, कश्मीर के अलावा इस पुस्तक में अलग-अलग संस्कृतियों के बीच सामंजस्य की कोशिश करते अमेरिकावासी भारतीयों की कथा भी हमारा ध्यान खींचती है। इन यात्राओं से प्राप्त अपने अनुभव के आधार पर चन्द्रकान्ता सही ही कहती हैं कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अपने देखे-समझे को जीवन्ततापूर्वक अंकित करना भी एक तरह से इतिहास ही लिखना है, एक ‘जेनुइन इतिहास’, जो उन्होंने इन यात्रा-संस्मरणों में सम्भव किया भी है।
Hashiye Ki Ibaraten
- Author Name:
Chandrakanta
- Book Type:

- Description:
चन्द्रकान्ता की कृतियाँ जहाँ सामयिक व्यवस्था के विद्रूपों एवं स्त्री-विमर्श की जटिलताओं की तहें खोलती हैं, वहीं सम्बन्धों के विघटन और मनुष्य के यांत्रिक होते जाने की विडम्बनाओं के बावजूद मूल्यों और विश्वासों की सार्थकता को नए आयाम देती हैं। कश्मीर पर तीन महत्त्वपूर्ण उपन्यास लिखने के बावजूद चन्द्रकान्ता का लेखन समय के ज्वलन्त प्रश्नों एवं वृहत्तर मानवी सरोकारों से जुड़ा है। प्रस्तुत है, स्त्रियों की सोच, आकांक्षाओं, स्वप्नों और संघर्षों की सच्चाइयों से साक्षात्कार करवानेवाली चन्द्रकान्ता की सद्य:प्रकाशित पुस्तक : ‘हाशिए की इबारतें’। अपने आत्मकथात्मक संस्मरणों के बहाने चन्द्रकान्ता ने स्त्री-मन के भीतर रसायन को खँगाला है। वहाँ अगर अँधेरे तहख़ाने हैं, तो रोशनी के गवाक्ष भी हैं; चाहों का हिलोरता सागर भी है और प्यास से हाँफता रेगिस्तान भी। बकौल लेखिका : “मैंने इन संस्मरणों में स्त्री-समीक्षा नहीं की है, स्त्री-जीवन की भौतिकी, भीतरी कैमिस्ट्री की दख़लन्दाज़ी से बने गुट्ठिल व्यक्तित्व की कुछ गुत्थियों को खोलने की चेष्टा की है। बेटी, माँ, बहन, पत्नी, दादी, नानी के रोल निभाती स्त्री की सोच, आकांक्षाओं और स्वप्नों में सेंध लगाकर जानना चाहा है कि कई दशकों को पीछे ठेलते, प्रगति के तमाम सोपान पार करने के बाद, स्त्री से जुड़ी परिवर्तनकारी रीति-नीतियों और पुरुष वर्चस्व के अहम् पूरित सोच में कितना कुछ सार्थक बदलाव आ पाया है। घर-परिवार की धुरी स्त्री क्यों केन्द्र में क़दम जमाने से पहले ही बार-बार हाशिए पर धकेल दी जाती है? भूमंडलीकरण के इस दौर में भी क्या स्त्री के लिए कसाईघर मौजूद नहीं, जहाँ ख़ामोश, अपढ़ और बोलनेवाली तेज़-तर्रार, दोनों मिज़ाज की स्त्रियाँ, गाहे-बगाहे शहीद की जाती हैं?”
Katha Satisar
- Author Name:
Chandrakanta
- Book Type:

- Description:
शैव, बौद्ध और इस्लाम की साँझी विरासतों से रची कश्मीर वादी में पहले भी कई कठिन दौर आ चुके हैं। कभी औरंगजेब के समय, तो कभी अफ़ग़ान-काल में। लेकिन वे दौर आकर गुज़र गए। कभी धर्म की रक्षा के लिए गुरु तेगबहादुर मसीहा बनकर आए, कभी कोई और। तभी ललद्यद और नुन्दऋषि की धरती पर लोग भिन्न धर्मों के बावजूद, आपसी सौहार्द और समन्वय की लोक-संस्कृति में रचे-बसे जीते रहे। आज वही आतंक, हत्या और निष्कासन का कठिन सिकन्दरी दौर फिर आ गया है, तब सिकन्दर के आतंक से वादी में पंडितों के कुल ग्यारह घर बचे रह गए थे। गो कि नई शक्ल में नए कारणों के साथ, पर व्यथा-कथा वही है—मानवीय यंत्रणा और त्रास की चिरन्तन दु:ख-गाथा। लोकतंत्र के इस गरिमामय समय में, स्वर्ग को नरक बनाने के लिए कौन ज़िम्मेदार हैं? छोटे-बड़े नेताओं, शासकों, बिचौलियों की कौन-सी महत्त्वाकांक्षाओं, कैसी भूलों, असावधानियों और ढुलमुल नीतियों का परिणाम है—आज का रक्त-रँगा कश्मीर? पाकिस्तान तो आतंकवाद के लिए ज़िम्मेदार है ही, पर हमारे नेतागण समय रहते चेत क्यों न गए? ऐसा क्यों हुआ कि जो औसत कश्मीरी, ग़ुस्से में, ज़्यादा-से-ज़्यादा, एक-दूसरे पर काँगड़ी उछाल देता था, वही कलिशनिकोव और एके सैंतालीसों से अपने ही हमवतनों के ख़ून से हाथ रँगने लगा? ‘ऐलान गली ज़िन्दा है’ तथा ‘यहाँ वितस्ता बहती है’ के बाद कश्मीर की पृष्ठभूमि पर लिखा गया चर्चित लेखिका चन्द्रकान्ता का बृहद् उपन्यास है—‘कथा सतीसर’। लेखिका ने अपने इस उपन्यास में पात्रों के माध्यम से मानवीय अधिकार और अस्मिता से जुड़े प्रश्नों को उठाया है। इस पुस्तक में सन् 1931 से लेकर 2000 के शुरुआती समय के बीच बनते-बिगड़ते कश्मीर की कथा को संवेदना का ऐसा पुट दिया गया है कि सारे पात्र सजीव हो उठते हैं । सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य में घटे हादसों से जन-जीवन के आपसी रिश्तों पर पड़े प्रभावों का संवेदनात्मक परीक्षण ही नहीं है यह पुस्तक, वर्तमान के जवाबदेह तथ्यों को साहित्य में दर्ज करने से एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ भी बन गई है।
Chandrakanta Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Chandrakanta
- Book Type:

- Description:
इस संकलन में जिन कहानियों को शामल किया गया है, उनकी लोकप्रियता का आधार पाठकों, संपादकों के आत्मीय पत्र हैं और समीक्षकों की प्रशंसात्मक टिप्पणियाँ भी। इनकी लोकप्रियता के कई कारणों में एक कारण कथ्य एवं विषय की विविधता है। इन कहानियों में देश-विदेश के कई प्रांतों-प्रदेशों की लोक संस्कृति के इंद्रधनुंषी रंग हैं। ये कहानियाँ किसी एक खचे में बंद नहीं हैं। यहाँ प्रेम और आपसी सौहार्द की बेमसाल धरती कश्मीर और पंजाब में पनपे आतंकवाद की त्रासद परिणतियाँ ‘काली बर्फ’, ‘आवाज’, ‘आत्मबोध’ जैसी कहानियों में है, तो ‘पोशनूल की वापसी’, ‘तैंतीबाई’ में दीन-धमर्, वर्गवर्ण से ऊपर निश्छल स्नेह और आत्मीय संबंधों के अनूठे उदाहरण भी हैं। सामाजिक-राजनीतिक दुर्व्यवस्था आतंकवाद, अंधविश्वास और रूढ़ मान्यताओं का विरोध करती ये कहानियाँ मनुष्य के अधिकारों, स्वप्नों और उम्मीदों के लिए आवाज उठाती हैं। वैश्वीकरण की इस दौड़ में मूल्यों का विघटन, वृद्धों के प्रति बढ़ती संवेदनहीनता आदि सामयिक मुद्दों से जुड़ी ये कहानियाँ स्त्री-विमर्श के नारे दिए बिना स्त्री की अस्मता, अधिकारों और संघर्ष के प्रश्न शिद्दत से उठाती हैं। आज की नई स्त्री की बदली सोच और आत्मक शक्ति ‘आवाज’, ‘लगातार युद्ध’, ‘अलकटराज देखा’, ‘दहलीज पर न्याय’ आदि कहानियों में देखी जा सकती है। समय की ज्वलंत समस्याओं का परीक्षण करती ये कहानियाँ मानवीय करुणा और जिजीविषा को बचाकर मनुष्य की संवेदना को बचाए रखने की कोशिशें हैं। यही इनकी लोकप्रियता का कारण भी है।
Kali Barf
- Author Name:
Chandrakanta
- Book Type:

- Description:
मैं एक दिन आत्मीयता और मानवीय सरोकारों से पूरमपूर कहानी ‘पोशनूल की वापसी’ लिखती हूँ और दूसरे दिन आतंक, हत्या, अविश्वास और दरिंदगी से अँटी ‘काली बर्फ’। जीवन की विविधवर्णी सच्चाइयों में वहाँ कहीं आतंक के दौर में फँसे निर्दोष जनों की पीड़ा के कारण छिपे होते हैं, जो शरणदाता होते हुए पुरखों के प्यार पगे आँगनों से निष्कासित होकर शरणागत की मजबूरियाँ ढोते हैं। जहाँ हिकारत, अभाव और छोटे-छोटे स्वार्थ उसे मानवीय गरिमा से वंचित कर देते हैं, वहीं ‘शरणागत दीनार्त’ जैसी कथा जन्म लेती है। अनुभव के वृत्त कभी उपभोक्तावादी संस्कृति में वस्तु बनने की नियति से जूझती ‘पायथन’ जैसी कथाएँ पैदा करते हैं, कभी संवेदनहीन होते समाज में असहाय होते वृद्धों की नियति ‘वनवास’ कथा लिखने का कारण बन जाती है। समाज के छद्म, दोहरे मानदंड और पुरुष-वर्चस्व की धौंसियाती स्थितियाँ ‘शेष दिन’, ‘विदागीत’, ‘गलत गणित’, ‘नदी का काम बहना है’, ‘रानी भाभी’, ‘पृष्ठभूमि’ आदि कहानियों में विश्लेषित होती हैं, जहाँ स्त्रियाँ यथास्थिति के विरोध में खड़ी जीवन को अपनी शर्तों पर जीने की हिम्मत जुटा लेती हैं। राजनीतिक मूल्यहीनता, आतंकवाद, सामाजिक-आर्थिक वैषम्य से उत्पन्न मानवीय यंत्रणा के बहुविध कारणों की पड़ताल करती ये कहानियाँ बेहतर जीवन के लिए सार्थक बदलाव एवं आत्मसमीक्षा के लिए प्रेरित करती हैं और मूल्यों के पुनर्परीक्षण के लिए भी।
The Orioles are Back and Other Stories Book in English- Chandrakanta
- Author Name:
Chandrakanta
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
The Orioles are Back and Other Stories Book in English- Chandrakanta
Chandrakanta
Yeh Kothewaliya
- Author Name:
Amritlal Nagar
- Book Type:

- Description:
आज के भारतीय समाज में वेश्याओं के जीवन का हिन्दी या किसी भी अन्य भारतीय भाषा में, यह पहला विश्लेषणात्मक अध्ययन है। श्री अमृतलाल नागर ने बहुत समीप से और बहुत ही सहानुभूति से इस जीवन को देखा है, जिसे आम तौर पर रंगीन और ऐयाशी से पूर्ण समझा जाता है, लेकिन जो संघर्ष और निराशाओं से वैसे ही भरा है, जैसे कि अन्य सामान्य जीवन। इस अध्ययन में किसी उपन्यास से भी अधिक रोचकता है और सत्य पर आधारित होने के करण इसकी प्रमाणिकता अद्धितीय है। भारतीय समाज के अध्येताओं के लिए एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण पुस्तक।
Andha Ullu
- Author Name:
Sadegh Hedayat +1
- Book Type:

- Description:
ईरान के ही नहीं, विश्व के सर्वश्रेष्ठ उपन्यासों में गिने जाने वाले उपन्यास ‘अन्धा उल्लू’ का लेखन इसके लेखक ने बम्बई में अपने भारत प्रवास के दौरान किया था। एक हताश व्यक्ति के भीतरी अँधेरे और उसे चारों तरफ़ से भींचकर रखे रहने वाली दुनिया के प्रति उसका क्षोभ इस उपन्यास के शब्द-शब्द में बिंधा है जिसे सुपरिचित कथाकार नासिरा शर्मा ने बड़े मनोयोग से मूल फ़ारसी से हिन्दी में प्रस्तुत किया है। अपने असंगत अतियथार्थ में यह उपन्यास जहाँ हमें ख़ुद से दूर की कोई चीज़ लगता है, वहीं अपने उन्हीं विवरणों और प्रतिक्रियाओं में अपने बहुत क़रीब भी लगता है। संवेदनहीन ज्यामितिक आकृतियों से घिरे हमारे आधुनिक मनोजगत का वह स्याह विस्तार इसमें अंकित हुआ है, जहाँ पाँव रखने का साहस हम अक्सर नहीं कर पाते। अथाह निराशा, भयावह दुःस्वप्नों, घोर अकेलेपन और मृत्युबोध के हौलनाक चित्रण के चलते ईरान में इस उपन्यास पर प्रतिबन्ध भी लगा जिसका एक कारण यह भी बताया जाता है कि इसे पढ़ने के बाद कुछ पाठकों ने अपना जीवन समाप्त करने के प्रयास भी किए। लेकिन इस उपन्यास में अभिव्यक्त सचाई को नकार पाना कभी सम्भव नहीं हुआ और समय के साथ ‘अन्धा उल्लू’ हरेक सजग संवेदनशील व्यक्ति के लिए एक अपरिहार्य पाठ के तौर पर अधिक से अधिक मान्य होता गया।
Muhar
- Author Name:
Chandan Pandey
- Book Type:

- Description:
रोली घमंडी है, रोली अकडू है, रोली ज़िद्दी है... ऐसी तमाम तोहमतों के बीच रोली है कि नौकरी पाने, नौकरी की जगह तक पहुँच पाने और वहाँ से घर लौटने की जद्दोजेहद से रोज़ गुज़र रही है। यक़ीन कीजिए कि ये साधारण सी दिखने वाली बातें एक वर्किंग वूमन के लिये रोज़ लड़ी जाने वाली लड़ाइयाँ हैं। जेंडर, आयु और शहरी/ग्रामीण पृष्ठभूमि को केंद्र में रखकर किये जाने वाले कई सूक्ष्म और स्थूल भेदभाव हैं जिनका सामना रोली और उस जैसी तमाम कामकाजी स्त्रियों को रोज़ करना होता है। परिवार, समाज और रोज़गार के मुश्किल कुरुक्षेत्र में जूझती रोली को केंद्र में रखकर लिखी गई ये कहानियाँ हर कामकाजी स्त्री के जीवन, स्वप्न और संघर्ष का सूक्ष्म और मार्मिक दस्तावेज़ बन पड़ी हैं।
Raat Ka Reporter
- Author Name:
Nirmal Verma
- Book Type:

- Description:
रात का रिपोर्टर सम्भवत: आपातकाल के दिनों को लेकर लिखा गया हिन्दी में पहला उपन्यास है, और निर्मल जी के कथा-लेखन में नए मोड़ का सूचक भी। उपन्यास का कथा-नायक रिशी यहाँ एक ऐसे पत्रकार के रूप में सामने आता है, जिसका आन्तरिक संकट उसके बाह्य सामाजिक यथार्थ से उपजा है... हालात ने उसे जैसे अस्वस्थ और शंकालु बना दिया है। उसके चारों ओर अँधेरे का साम्राज्य है और उसका अन्तर्जगत भी उसकी ज़द में है। ऐसे में यदि वह अपने इर्द-गिर्द के अँधेरे को जाँचने-परखने की कोशिश करता है, तो स्वयं भी उसकी कसौटी पर होता है। वस्तुतः यह एक ऐसी कथाकृति है, जो एक बुद्धिजीवी की चेतना पर पड़ने वाले युगीन दबावों को रेखांकित करती है और उन्हें उसके व्यवहार में घटित होते हुए दिखाती है। इससे गुज़रते हुए हम जिस माहौल से गुज़रते हैं, वह चाहे हमारे अनुभव से बाहर रहा हो या हम उससे बाहर रहे हों, लेकिन वह हमारी दुनिया की आज़ादी के बुनियादी सवालों से परे नहीं है।
Hamara Shahar Us Baras
- Author Name:
Geetanjali Shree
- Book Type:

- Description:
आसान दीखनेवाली मुश्किल कृति ‘हमारा शहर उस बरस’ में साक्षात्कार होता है एक कठिन समय की बहुआयामी और उलझाव पैदा करनेवाली डरावनी सच्चाइयों से। बात ‘उस बरस’ की है, जब ‘हमारा शहर’ आए दिन साम्प्रदायिक दंगों से ग्रस्त हो जाता था। आगजनी, मारकाट और तद्जनित दहशत रोज़मर्रा का जीवन बनकर एक भयावह सहजता पाते जा रहे थे। कृत्रिम जीवन-शैली का यों सहज होना शहरवासियों की मानसिकता, व्यक्तित्व, बल्कि पूरे वजूद पर चोट कर रहा था। बात दरअसल उस बरस भर की नहीं है। उस बरस को हम आज में भी घसीट लाए हैं। न ही बात है सिर्फ़ हमारे शहर की। ‘और शहरों जैसा ही है हमारा शहर’—सुलगता, खदकता—‘स्रोत और प्रतिबिम्ब दोनों ही’ मौजूदा स्थिति का। एक आततायी आपातस्थिति, जिसका हल फ़ौरन ढूँढ़ना है; पर स्थिति समझ में आए, तब न निकले हल। पुरानी धारणाएँ फिट बैठती नहीं, नई सूझती नहीं, वक़्त है नहीं कि जब सूझें, तब उन्हें लागू करके जूझें स्थिति से। न जाने क्या से क्या हो जाए तब तक। वे संगीनें जो दूर हैं उधर, उन पर मुड़ीं, वे हम पर भी न मुड़ जाएँ, वह धूल-धुआँ जो उधर भरा है, इधर भी न मुड़ आए। अभी भी जो समझ रहे हैं कि दंगे उधर हैं—दूर, उस पार, उन लोगों में—पाते हैं कि ‘उधर’ ‘इधर’ बढ़ आया है, ‘वे’ लोग ‘हम’ लोग भी हैं, और इधर-उधर वे-हम करके ख़ुद को झूठी तसल्ली नहीं दी जा सकती। दंगे जहाँ हो रहे हैं, वहाँ ख़ून बह रहा है। सो, यहाँ भी बह रहा है, हमारी खाल के नीचे। अपनी ही खाल के नीचे छिड़े दंगे से दरपेश होने की कोशिश ही इस गाथा का मूल। ख़ुद को चीरफाड़ के लिए वैज्ञानिक की मेज़ पर धर देने जैसा। अपने को नंगा करने का प्रयास ही अपने शहर को समझने, उसके प्रवाहों को मोड़ देने की एकमात्र शुरुआत हो सकती है। यही शुरुआत एक ज़बरदस्त प्रयोग द्वारा गीतांजलि श्री ने ‘हमारा शहर उस बरस’ में की है। जान न पाने की बढ़ती बेबसी के बीच जानने की तरफ़ ले जाते हुए।
Punarutthan
- Author Name:
Leo Tolstoy +1
- Book Type:

- Description:
आधुनिक इतिहास में यदि किसी विचारक-लेखक की ख्याति उसकी ज़िन्दगी में ही पूरी दुनिया में फैल चुकी थी और जीते-जी ही वह एक मिथक बन गया था, तो वे लेव तोल्स्तोय ही थे। उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध के साहित्यिक परिदृश्य पर जिस तरह बाल्ज़ाक छाए हुए थे, उसी तरह उत्तरार्द्ध के साहित्यिक परिदृश्य पर तोल्स्तोय का प्रभाव-साम्राज्य फैला हुआ था। ‘पुनरुत्थान’ एक नए प्रकार का उपन्यास था जिसमें पात्रों के गहन आत्मसंघर्ष और रूपान्तरण के साथ ही, सेंट पीटर्सबर्ग के दरबार के लोगों और ग्रामीण कुलीनों से लेकर किसानों, क़ैदियों और साइबेरिया-निर्वासन पर जा रहे क़ैदियों के चरित्रों के माध्यम से तत्कालीन रूस के समूचे वैविध्यपूर्ण सामाजिक परिदृश्य को एक इतिहासकार-सदृश वस्तुपरकता और अधिकार के साथ उपस्थित कर दिया गया है। कात्यूशा का मुक़दमा और उसमें जूरी सदस्य के रूप में नेख्लूदोव की उपस्थिति सामाजिक अन्याय पर आधारित जीवन की निरर्थकता और न्यायतंत्र की कुरूपता को एकदम नंगा कर देती है। ‘पुनरुत्थान’ में तोल्स्तोय सरकार, न्यायालय, चर्च, कुलीन भूस्वामियों के विशेषाधिकारियों, भूमि के निजी स्वामित्व, मुद्रा, जेलों और वेश्यावृत्ति की मर्मभेदी आलोचना करते हैं। घनी और शक्तिशाली लोगों द्वारा उत्पीड़ित निम्न वर्गों के प्रति सहानुभूति-प्रदर्शन पर उपन्यास तीखा व्यंग्य करता है। किसानों, क्रान्तिकारियों और निर्वासित अपराधियों सहित सामान्य जनसमुदाय का चित्रण करते हुए तोल्स्तोय का ज़ोर इस बात पर है कि उत्पीड़न और अधिकारहीनता ने आमजन की आत्मिक शक्तियों को पंगु बना डाला है।
Banbhatt Ki Aatmakatha
- Author Name:
Hazariprasad Dwivedi
- Book Type:

- Description:
आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी की विपुल रचना-सामर्थ्य का रहस्य उनके विशद शास्त्रीय ज्ञान में नहीं, बल्कि उस पारदर्शी जीवन-दृष्टि में निहित है, जो युग का नहीं युग-युग का सत्य देखती है। उनकी प्रतिभा ने इतिहास का उपयोग ‘तीसरी आँख’ के रूप में किया है और अतीत-कालीन चेतना-प्रवाह को वर्तमान जीवनधारा से जोड़ पाने में वह आश्चर्यजनक रूप से सफल हुई है। 'बाणभट्ट की आत्मकथा' अपनी समस्त औपन्यासिक संरचना और भंगिमा में कथा-कृति होते हुए भी महाकाव्यत्व की गरिमा से पूर्ण है। इसमें द्विवेदी जी ने प्राचीन कवि बाण के बिखरे जीवन-सूत्रों को बड़ी कलात्मकता से गूँथकर एक ऐसी कथाभूमि निर्मित की है जो जीवन-सत्यों से रसमय साक्षात्कार कराती है। बाणभट्ट की आत्मकथा का कथानायक कोरा भावुक कवि नहीं वरन कर्मनिरत और संघर्षशील जीवन-योद्धा है। उसके लिए ‘शरीर केवल भार नहीं, मिट्टी का ढेला नहीं’, बल्कि ‘उससे बड़ा’ है और उसके मन में आर्यावर्त्त के उद्धार का निमित्त बनने की तीव्र बेचैनी है। ‘अपने को निःशेष भाव से दे देने’ में जीवन की सार्थकता देखने वाली निउनिया और ‘सबकुछ भूल जाने की साधना’ में लीन महादेवी भट्टिनी के प्रति उसका प्रेम जब उच्चता का वरण कर लेता है तो यही गूँज अंत में रह जाती हैद-‘‘वैराग्य क्या इतनी बड़ी चीज है कि प्रेम देवता को उसकी नयनाग्नि में भस्म कराके ही कवि गौरव का अनुभव करे?’’
Ajnabi
- Author Name:
Albert Camus +1
- Book Type:

- Description:
फ्रांस के अमर लेखक, नोबेल पुरस्कार-विजेता अल्बैर कामू मानव-अन्तर्मन के संवेगों और कुंठाओं को अनावृत करने में पटु हैं। नियति में उनका विश्वास है और कृत्य की स्वतंत्रता एक निर्दिष्ट परिधि में ही वह मानते हैं। आरम्भ से अन्त तक पाठक की रुचि को साधे रखनेवाले इस उपन्यास में नायक के समस्त क्रिया-कलाप और उसके साथ घटी घटनाओं में उनका यही जीवन-दर्शन व्यक्त हुआ है। विश्व के विशिष्ट उपन्यास-साहित्य में स्थान पानेवाले उपन्यास ‘अजनबी’ की कथा-वस्तु न केवल हमारे मर्म को मथ देने में सफल होती है, वरन् हमें जीवन और कर्म, और इन दोनों के उद्देश्यों के सम्बन्ध में भी सोचने पर विवश करती है। सन् 1942 में प्रकाशित इस उपन्यास को द्वितीय विश्वयुद्ध से उत्पन्न हताशा और विसंगतियों को अभिव्यक्त करनेवाली कृति माना जाता है। उपन्यास के नायक से कामू यहाँ जीवन की निरुद्देश्यता और मृत्यु की अनिवार्यता को रेखांकित करते हैं; नायक की समाज से विरक्ति और उदासीनता का जैसा मार्मिक चित्रण कामू ने इस उपन्यास में किया है, वह आज भी स्तब्ध कर देता है।
Boudam
- Author Name:
Fyodor Dostoyevsky +1
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Chittakobara
- Author Name:
Mridula Garg
- Book Type:

- Description:
जो लिखा है, उसे उपन्यास कहते मुझे संकोच हो रहा है। जिस तरह यह लिखा गया, याद करके हँसी आती है। एक कहानी थी जो मेरे अन्तर्मन में फैलती-सिकुड़ती रहती थी। फिर एक दिन उस कहानी के अन्तराल का एक-एक क्षण अपनी कड़ी से टूटकर बिखर गया। मैंने आँखें फैलाकर देखा तो दीखा, हर क्षण अलग से फैल रहा है और पूरी एक कहानी का आभास दे रहा है। यह सच है कि मैंने उन अलग-अलग क्षणों को लिखने की प्रक्रिया में अलग-अलग जिया है...आखिर मैं थक गई। लिखे हुए पन्नों को एक जगह इकट्ठा किया और यह बात मेरे लिए सुखद आश्चर्य का विषय है कि पूरी पुस्तक में एक अन्तर्धारा बहती हुई दीखती है और एकसूत्रता भी आसानी से पकड़ में आती है। इस उपन्यास में परिच्छेद नहीं हैं। मैं जानती हूँ, जीवन की इतनी प्रवहमान धारा को टुकड़ों में नहीं काटा जा सकता। अन्दर के दबाव के कारण ही शायद यह हो सका है कि क्षणों में जी और लिखी गई इस कहानी के टुकड़ों का क्रम भी बाद में तय हुआ। दरअसल, बहती नदी से किसी किनारे खड़े होकर पानी पियो - क्या फर्क पड़ता है! क्रम-निर्धारण का पूर्वग्रह तो कहानी गढ़ने में होता है; जो कहानी है, वह तो...कोई कहीं से भी साथ हो ले... - इसी पुस्तक से
Naqqashidar Cabinet
- Author Name:
Sudha Om Dhingra
- Book Type:


- Description:
सुधा ओम ढींगरा का उपन्यास नक़्क़ाशीदार केबिनेट वर्ष 2016 का अत्यंत सफल उपन्यास है। यह उपन्यास पेपरबैक और ऑडियोबुक में भी उपलब्ध है।
Customer reviews
Be the first to write a review
Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.