Devdas
Author:
SharatchandraPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 159.2
₹
199
Available
‘देवदास’ शरतचन्द्र का पहला उपन्यास है। लिखे जाने के सोलह साल बाद तक यह अप्रकाशित रहा। शरत स्वयं इसके प्रकाशन के लिए उत्साही नहीं थे, लेकिन 1917 ई. में इसके छपने के साथ ही व्यापक रूप से इसकी चर्चा शुरू हो गई थी। विभिन्न भारतीय भाषाओं में इसके अनेक अनुवाद हुए। अनेक भारतीय भाषाओं में इस पर फ़िल्में बनीं। आख़िर ‘देवदास’ की इतनी लोकप्रियता के क्या कारण हैं? यह कृति क्यों कालजयी बन गई? असल में ‘देवदास’ सामन्ती ढाँचेवाले भारतीय समाज में घटित एक ऐसी प्रेमकथा है जिसमें गहरी संवेदनशीलता है। शरत ने उसे इतनी अन्तरंगता से लिखा है कि ‘देवदास’ की कहानी में सबको कहीं-न-कहीं अपनी ज़िन्दगी भी दिखाई दे जाती है। ‘देवदास’ भारतीय समाज-व्यवस्था की अनेक विसंगतियों पर एक कड़ी टिप्पणी भी है।</p>
<p>पत्रकार सुरेश शर्मा ने ‘देवदास’ की विस्तृत भूमिका में पहली बार इस कृति और उसके सर्जक शरतचन्द्र के बारे में अनेक नई जानकारियाँ दी हैं। यह भूमिका न सिर्फ़ इस कृति का नया मूल्यांकन करती है, बल्कि इस बात की भी तलाश करती है कि ‘देवदास’ की पारो और चन्द्रमुखी कौन थी? शरत को ये पात्र जीवन में कहाँ और कब मिले?—इन जानकारियों के साथ ‘देवदास’ को पढ़ना उसमें नया अर्थ पैदा करेगा।
ISBN: 9788183615143
Pages: 120
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Koi Baat Nahin
- Author Name:
Alka Saraogi
- Book Type:

-
Description:
“तभी हवा का एक झोंका न जाने क्या सोचकर एक बड़े से काग़ज़ के टुकड़े को शशांक के पास ले आया। उसने घास से उठाकर उसे पढ़ा—‘आदमी का मन एक गाँव है, जिसमें वही एक अकेला नहीं रहता।’ शशांक ने सोचा, आदमी मन में ही तो अपने को और अपनी सारी बातों को छिपाकर रख सकता है...’’
‘कोई बात नहीं’ जैसे एक मंत्र है—हार न मानने की ज़िद और नई शुरुआतों के नाम। समय के एक ऐसे दौर में जब प्रतियोगिता जीवन का परम मूल्य है और सारे निर्णय ताक़तवर और
समर्थ के हाथ में हैं, वेदना, जिजीविषा और सहयोग का यह आख्यान ऐसे तमाम मूल्यों का प्रत्याख्यान है।
मोटे तौर पर इसे शारीरिक रूप से कुछ अक्षम एक बेटे और उसकी माँ के प्रेम और दु:ख की
साझेदारी की कथा के रूप में देखा जा सकता है, पर इसका मर्म एक सुन्दर और सम्मानपूर्ण जीवन की आकांक्षा है, बल्कि इस हक़ की माँग है। शशांक सत्रह साल का एक लड़का है जो दूसरों से अलग है क्योंकि वह दूसरों की तरह चल और बोल नहीं सकता। कलकत्ता के एक नामी मिशनरी स्कूल में पढ़ते वक़्त अपनी ग़ैरबराबरी को जीते हुए, उसका साबिका उन तरह-
तरह की दूसरी ग़ैरबराबरियों से भी होता रहता है, जो हमारे समाज में आसपास कुलबुलाती रहती है। स्कूल में शशांक का एकमात्र दोस्त है—एक एंग्लो-इंडियन लड़का आर्थर सरकार जो उसी की तरह एक क़िस्म का जाति-बाहर या आउटकास्ट है—अलबत्ता बिलकुल अलग कारणों से।
शशांक का जीवन चारों तरफ़ से तरह-तरह के कथा-क़िस्सों से घिरा है। एक तरफ़ उसकी आरती मौसी है, जिसकी प्रायः खेदपूर्वक वापस लौट आनेवाली कहानियों का अन्त और आरम्भ शशांक को कभी समझ में नहीं आता। दूसरी तरफ़ उसकी दादी की कहानियाँ हैं—दादी के अपने घुटन-भरे बीते जीवन की, बार-बार उन्हीं शब्दों और मुहावरों में दोहराई जाती कहानियाँ, जिनका कोई शब्द कभी अपनी जगह नहीं बदलता। लेकिन सबसे विचित्र कहानियाँ उस तक पहुँचती हैं जतीन दा के मार्फ़त, जिनसे वह बिना किसी और के जाने, हर शनिवार विक्टोरिया मेमोरियल के मैदान में मिलता है। ये सभी कहानियाँ आतंक और हिंसा के जीवन से जुड़ी कहानियाँ हैं जिनके बारे में हर बार शशांक को सन्देह होता है कि वे आत्मकथात्मक हैं, पर इस सन्देह के निराकरण का उसके पास कोई रास्ता नहीं है।
तभी शशांक के जीवन में वह भयानक घटना घटती है जिससे उसके जीवन के परखच्चे उड़ जाते हैं। ऐसे समय में यह कथा-अमृत ही है जो उसे इस आघात से उतारता है; साथ ही उसे संजीवन मिलता है उस सरल, निश्छल, अद् भुत प्रेम और सहयोग से जो सब कुछ के बावजूद दुनिया को बचाए रखता आ रहा है। और तब उसकी अपनी यह कथा, जो आरती मौसी द्वारा लिखी जा रही थी, पुनः जीवित हो उठती है—कथामृत के आस्वादन से जागी कथा।
Utarti Hui Dhoop
- Author Name:
Govind Mishra
- Book Type:

-
Description:
आधुनिक भारतीय समाज में कॉलेज-जीवन का यथार्थ क्या है ? अध्ययन, प्रेम और रोमांस या कि हमारी परम्परागत सामाजिकता के विभिन्न दबाव ? निश्चय ही गोविन्द मिश्र का यह उपन्यास हमें इन सवालों के जवाब देता है, लेकिन किसी गणितीय गुणा-भाग से नहीं, बल्कि एक भावप्रवण काव्यात्मक रचाव के साथ।
समर्थ रचनाकार के नाते गोविन्द मिश्र की एक अलग पहचान है और हमारे मध्यवर्गीय जीवन में उन्होंने नारी-स्वातन्त्र्य तथा प्रेम एवं काम-सम्बन्धों की बहुस्तरीय पड़ताल की है। कहने की आवश्यकता नहीं कि उनका यह बहुचर्चित उपन्यास भी एक ऐसी ही पड़ताल का नतीजा है। इसमें उन्होंने एक कॉलेजियेट युगल के धूप-छाँही रोमांस और परवर्ती परिस्थितियों के परिणामस्वरूप उनके मोहभंग का प्रभावी अंकन किया है। प्रेमिल स्मृतियों और अधूरे सपनों के प्रति उद्दाम आकर्षण के बावजूद अन्ततः उन्हें इस सच्चाई को स्वीकार करना पड़ता है कि सामाजिक यथार्थ उनके व्यक्तिगत भावावेश से कहीं ज्यादा अहम है। संक्षेप में, अपने तमाम रागात्मक खुलेपन के बावजूद यह कथाकृति हमें सामाजिक दायित्वबोध के स्वीकार की प्रेरणा देती है।
Yeh Bhi Jhooth Hai
- Author Name:
Dinesh Nandini Dalmiya
- Book Type:

-
Description:
सामंतशाही के गर्भ से जन्मे पूंजीवाद के वीभत्स चेहरे को सामने लाने का काम भारी जोखिम और चुनौती से भरा हुआ है। पूंजीवाद के ढहते किले की कमजोर दीवारों से झड़ती रेत को देखना भी कम साहस भरा काम नहीं है। लेकिन सुपरिचित लेखिका दिनेश नंदिनी डालमिया ने अपने इस उपन्यास में ऐसी तमाम रचनात्मक चुनौतियों को स्वीकार किया है। सड़े-गले समाज में दम तोड़ते विखंडित जीवन-मूल्यों की ही अविस्मरणीय अंतरकथा है यह उपन्यास ।
जिस समाज में सच के पक्ष में खड़े होना ही एक दुर्लभ दृश्य बन गया हो, जिस समाज में सरेआम सच्चाई पर झूठ और पाखण्ड का शासन चल रहा हो, जिस समाज में सच जीवित इंसानों के सीनों में दम तोड़ते सपनों में बदल गया हो, यह उपन्यास उसी समाज में जड़ और गतिहीन सम्बन्धों के अंतर्द्वद्ध को उजागर करता है।
विघटन की अनिवार्य शर्तों के विरुद्ध मानवीय सम्वेदनाओं के पक्ष में जूझते पात्रों की त्रासदी इस उपन्यास के केन्द्र में है। पृष्ठभूमि में है, स्वार्थ का कुरुक्षेत्र। सुई की नोक-बराबर भी अधिकार न देने वाले स्वार्थों की जमीन पर लड़े जा रहे महाभारत की कहानी ही इस उपन्यास में दर्ज है।
अनुभव की प्रामाणिकता और लम्बे जीवन-संघर्ष की अमूल्य विरासत से जुड़ी लेखिका अपने समाज को जिस आत्मीयता और निजता से महसूसती, देखती और अभिव्यक्त करती है, उसमें व्यवहार और सिद्धान्त के बीच कोई खाई नहीं है।
इसके शब्द सहज घटनाओं को अपनी विश्वसनीयता सौंपते हुए पाठक को अपनी जकड़ में लिये चलते हैं। कुल मिलाकर यह उपन्यास हमारे समय की एक महत्त्वपूर्ण कृति है।
Sabke Ram
- Author Name:
Dr. Pravesh Kumar +1
- Book Type:

- Description: ‘सबके राम’ पुस्तक प्रभु श्रीराम के काज में लगे लाखों कार्यकर्ताओं के मन के भाव को उजागर करनेवाली है। पुस्तक की एक-एक पंक्ति निश्चित ही देश भर के रामभक्तों के मन में प्रभु राम के प्रति श्रद्धा, प्रेम एवं उनका जीवन कैसा बने, इसकी प्रेरणा देनेवाली होगी। पुस्तक देश भर में चले ‘निधि समर्पण अभियान’ में लगे कार्यकर्ताओं के अनुभवों को अपने भीतर समाहित करती है, वहीं प्रभु राम किस प्रकार भारत के कण-कण में व्याप्त हैं, इसे भी बताती है। हम सभी को यह विदित है कि ‘निधि समर्पण अभियान’ विश्व का सबसे बड़ा अभियान रहा है, जिसने भारत के प्रत्येक हिस्से के जनमानस को यह अवसर उपलब्ध कराया कि वह भी वर्षों से प्रतीक्षित प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में भव्य मंदिर के निर्माण का हिस्सा बन सके। इसलिए समाज के सभी वर्गों के हर आयु के बाल, युवा, महिला, पुरुष, वृद्ध ने हृदय खोलकर अपनी क्षमतानुसार निधि समर्पित की। उत्तर-पूर्व के अंतिम छोर की 95 वर्षीय महिला का समर्पण हो अथवा भारत की समुद्री सीमा एवं तटीय प्रदेश तमिलनाडु, केरल या फिर उत्तर के हिमालयी प्रदेश जम्मू-कश्मीर, लददाख आदि हों, सभी को राम-काज से जोड़ दिया। यह पुस्तक जहाँ भारत के सभी प्रांतों से प्रभु श्रीराम के संदर्भ में प्राप्त अनुभवों का संकलन है तो वहीं भारत की अस्मिता को दुनिया से परिचित करानेवाले प्रभु श्रीराम के जीवन के विभिन्न पहलुओं का भी वर्णन करती है।
Chakke Tale
- Author Name:
Hermann Hesse
- Book Type:

-
Description:
यह ज़रूरी नहीं कि विधिवत् स्कूली शिक्षा प्राप्त करनेवाले छात्र ही महान बनते हैं। सच तो यह है कि जिनसे स्कूली अध्यापक घृणा करते हैं, सज़ा देते हैं, जो झगड़ालू कहे जाते हैं, भगाए जाते हैं, अक्सर वही लोग बाद में अपने सुकृत्यों से महान बन जाते हैं। और फिर अगली पीढ़ी के स्कूली अध्यापक छात्रों के सामने इन्हीं लोगों को अनुकरणीय उदाहरण के रूप में पेश करते हैं।
प्रस्तुत उपन्यास में जहाँ वर्तमान शिक्षा-पद्धति और उसके चलते विद्यार्थियों में व्याप्त तनाव को रेखांकित किया गया है, वही एक युवक की ऐसी मार्मिक कथा है जो परिवार, समाज और व्यवस्था की अपेक्षाओं के चक्के तले दबकर दम तोड़ देता है। सुविख्यात जर्मन लेखक हेरमन हेस्से का बहुचर्चित मार्मिक उपन्यास है ‘चक्के तले’।
Jugalbandi
- Author Name:
Giriraj Kishore
- Book Type:

-
Description:
‘जुगलबन्दी’ उन द्वन्द्वात्मक स्थितियों की अभिव्यक्ति है जिनमें आज़ादी के तेवर हैं तो ग़ुलामी की मानसिकता भी। दूसरे विश्वयुद्ध से लेकर आज़ादी मिलने तक का समय जुगलबन्दी में सिमटा हुआ है। यह समय अजीब था...इसे न तो ग़ुलामी कहा जा सकता है और न आज़ादी। इसी गाथा की महाकाव्यात्मक परिणति है ‘जुगलबन्दी’।
इस उपन्यास में यह तथ्य उभरकर आया है कि रचनात्मक रूप में जो लोग क्रान्ति से जुड़े थे वे कुंठा-मुक्त नहीं थे और जिन्होंने ब्रिटिश शासन के दौरान उस व्यवस्था में अपना स्थान बना लिया था वे भी स्वयं को कुंठाग्रस्त पा रहे थे। ‘जुगलबन्दी’ में लेखक ने इसका हृदयस्पर्शी चित्रण करते हुए बहुत सजगता के साथ रेखांकित किया है कि इस द्वन्द्वात्मक स्थिति में एक तीसरी जमात भी थी जो न तो क्रान्ति में शामिल थी और न शासन में उसका कोई स्थान था। वह उस पूरे संघर्ष के दबाव को अपने शरीर और आँतों पर झेल रही थी।
टूटने और बनने की इस प्रक्रिया को ‘जुगलबन्दी’ में व्यापक कैनवस मिला है जिस पर उस पूरे युग का प्रतिबिम्बन है—आज की भाषा और आज के मुहावरों के साथ, मुग्धकारी और हृदयस्पर्शी।
Bas Yu Hi
- Author Name:
Parul Tyagi
- Book Type:

- Description: Hindi Poetry Book
Not Very Far
- Author Name:
Jinnat Saberin
- Book Type:

- Description: Fate- is the most fluctuating element of life. At times, it dissembles to be your best friend, your helping hand, your guardian. But the moment you trust it, It shatters you and your trust. It breaks you and builds you up so it can hurt you again. Fate binds the two budding teenagers- ashik and Sakshi. This pair of strangers belonging to two different corners of India seems to share numerous surprising similarities. They went from having the same letters in their names to having similar hobbies. The similarities never ceased to amaze them both. Back at the time, when Facebook and Orkut weren’t the ‘basic needs of the teens, there were those ridiculous chat rooms on channel [V]. Those that appear at the bottom of your TV screen. That’s where they talked for the first time. Who knew a real relationship would take birth there? Who knew they’d even fall in love? That’s fate! But the age was wrong- and the distance was long. Mistakes were inevitable, and trust was easy to lose. Ashik makes a mistake. An error is so bad that Sakshi finds it hard to trust him again. She leaves. They say you realise you love someone when you let them go- that’s what happened to ashik, too. Determined he would bring her back to his life, he heads off to Hyderabad from Assam, resisting all sorts of parental oppositions to study BBA- a course he was never interested in. Sakshi’s decisions were primarily governed by her emotions and not by logic. As a result, she’s either very right or wrong. Their relationship blooms yet again. But too much dependency and an uncertain career isn't a beautiful condition for a relationship.
Titli
- Author Name:
Jaishankar Prasad
- Book Type:

-
Description:
तितली ‘मनुष्य बनाम समाज’ के संघर्ष का ही उपन्यास न होकर मानव मूल्यों की प्रतिष्ठा का भी उपन्यास है। इसमें तितली, शैला, माधुरी, श्यामकुमारी, राजकुमारी आदि नारी चरित्रवर्ग चरित्र न होकर ऐसी नारियाँ हैं जो अपनी कमजोरियों के कारण टूटती भी हैं और उसी से शक्ति अर्जित करके सामाजिक जीवन को बदलती भी हैं।
इस उपन्यास में महात्मा गांधी की मूल्य चेतना के साथ ही साथ उस महत्व की भी खोज की गई है जिससे एक वैश्विक सामरस्य का सृजन सम्भव हो सकता है। पुरुष सत्तात्मक व्यवस्था के प्रति विद्रोह के साथ ही साथ संभव बराबरी का लक्ष्य इस उपन्यास से निरन्तर बना हुआ है। त्याग, प्रेम, समता और करुणा के साथ-साथ इसमें इन मूल्यों के कारण मनुष्य में होने वाली हलचलों का संकेत औपन्यासिक शिल्प के विकास और क्षमता का भी प्रमाण प्रस्तुत करता है।
अर्थमय जगत में आत्म संस्कार की आवश्यकता महात्मा गांधी की ही तरह इस उपन्यास में सृजनात्मक आदर्श की तरह संरचना के साथ बुनी हुई है। सेवा भावना निष्कामना के साथ जुड़कर वाटसन और स्मिथ आदि चरित्रों का निर्माण कर सकी है।
वर्तमान हिन्दी उपन्यास को समझने में ही नहीं बल्कि आधुनिक चेतना तथा सत्याग्रहकालीन दृष्टि के संतुलन और वैषम्य की दृष्टि से भी यह उपन्यास महत्त्वपूर्ण है।
Ve Aankhen
- Author Name:
Bimal Mitra
- Book Type:

-
Description:
इस संसार में कोई भी ऐसा नहीं है जो पूरे विश्वास के साथ कह सके, कि वह सुखी है। जो ऐसा कहता है, वह या तो जान-बूझकर झूठ बोलता है या फिर उसे समझ ही नहीं है कि सुख क्या होता है।
इस कथा-पुस्तक की केन्द्रीय विषयवस्तु यही है। अविनाश दा की कविताओं से शब्द की महत्ता का पाठ पढ़कर कथानायक जीवन की कथा कहने बैठता है जिसमें उसके पास-पड़ोस से लेकर दिल्ली-मुम्बई तक फैले पात्रों के दु:ख-कर्म शामिल हैं। इतिहास जिस तरह आगे बढ़ता है, आदमी का जीवन भी छोटे रूप में उसी तरह ऊपर-नीचे होता हुआ बढ़ता रहता है। उसमें तरह-तरह के बदलाव आते हैं, कई बार तो ऐसे कि कुछ अन्तराल के बाद उनसे मिलो तो जैसे पहचानना ही मुश्किल हो जाता है।
अलग-अलग कथा-सूत्रों के माध्यम से बिमल मित्र यहाँ जीवन और साहित्य के रिश्ते पर, मनुष्य की विचित्र नियति पर, समाज के मुखौटों पर अलग-अलग कोणों से दृष्टिपात करते हैं। अविनाश दा, सत्य सुन्दर और मिसेज राय, अशेष दत्त, मुकुल राय जैसे पात्रों की इन कहानियों में जीवन के कई चित्र ऐसे हैं जो इस संसार के प्रति प्रेम भी जगाते हैं, मोह भी और वितृष्णा भी।
Khayalon Ke Munder Se
- Author Name:
Akhilesh Bakshi
- Book Type:

- Description: Hindi Poetry Book written By Akhilesh Bakshi . This book consist of poetry related to love and life.
Prasad Ke Sampoorna Upanyas
- Author Name:
Jaishankar Prasad
- Book Type:

-
Description:
इस पुस्तक में छायावादी युग के महत्त्वपूर्ण कवि, कहानीकार, नाटककार और उपन्यासकार जयशंकर प्रसाद के तीनों उपन्यास—‘कंकाल’, ‘तितली’ और ‘इरावती’ संकलित किए गए हैं। भारतेन्दु के बाद जिन लोगों ने हिन्दी गद्य को एक परिपक्व रूप दिया उनमें प्रसाद की भूमिका भी अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है।
उनकी सांस्कृतिक अभिरुचि, यथार्थ को अपने ढंग से देखने का उनका तरीक़ा और उसे भाषा में अंकित करने का ढंग उन्हें एक अलग जगह देता है। ये उपन्यास भी इसके साक्षी हैं। उपन्यास ‘कंकाल’ और ‘तितली’ में उन्होंने तत्कालीन युग-बोध को एक भिन्न कोण से पकड़ा था। असहाय स्त्रियों के जीवन की चुनौतियों को दिखाने के लिए उन्होंने इन रचनाओं में यथार्थ के बाह्य रूपों को चित्रित करने के साथ-साथ व्यक्तिमन की आन्तरिक परतों को भी उद्घाटित किया। ‘तितली’ को कथा-शिल्प और वस्तु-विन्यास के दृष्टिकोण से प्रसाद का सर्वाधिक परिपक्व उपन्यास माना जाता है।
‘इरावती’ को वे पूरा नहीं कर सके थे। शुंगकालीन ऐतिहासिक विषय और बौद्धकालीन रूढ़ियों-विकृतियों के प्रति विद्रोह की जिस कथा-वस्तु को लेकर उन्होंने यह उपन्यास आरम्भ किया था, वह निश्चय ही एक बड़ी औपन्यासिक कृति के रूप में फलीभूत होता। यहाँ ‘इरावती’ के उपलब्ध स्वरूप को यथावत् संकलित किया गया है ताकि पाठक प्रसाद की उपन्यास-काल के मर्म को जान सकें।
Aagami Ateet
- Author Name:
Kamleshwar
- Book Type:

-
Description:
आगामी अतीत का कथ्य रोमांटिक ज़रूर लग सकता है, परन्तु इसमें निहित रोमांटिकता के भीतर भी जो गहरी टीस व्याप्त है, उसके सन्दर्भ ख़ास तौर से सामाजिक-आर्थिक निर्भरताओं से जुड़े हुए हैं। यानी रिश्ते भी किस तरह मूर्छित हो जाते हैं या किस तरह का रूप मानसिक मजबूरियों की वजह से ले जाते हैं, इसीलिए इस उपन्यास में रोमांटिकता को रोमांटिकता से ही काटने का प्रयास दिखाई देता है। जब इस उपन्यास का धारावाहिक प्रकाशन हुआ था, तब इसके उद्देश्य को लेकर गहरी बहस भी सामने आई थी और अन्ततः पाठकों ने यह पाया था कि परम्परावादी रोमांटिक कहानियों से अलग यह उपन्यास एक नए कथ्य को सामने लाता है।
पूँजीवादी समाज के स्पर्धामूलक परिवेश की विडम्बना और अन्तर्विरोध ही इस उपन्यास का मुख्य कथ्य है। सन् 1973-74 के आसपास लिखे गए इस उपन्यास की सार्थकता आज के भूमंडलीकरण के दौर में सामने आ चुकी है। आर्थिक आपाधापी के कारण टूट रहे स्त्री-पुरुष सम्बन्धों को इस उपन्यास में पहले ही हमारे सामने रख दिया गया था। और, उस नारी की पीड़ा को भी जो इस दौर की विकृतियों को सह रही है।
Arohan
- Author Name:
Sadhna Shankar
- Book Type:

-
Description:
कल्पना कीजिए कि पृथ्वी को छोड़कर मानव जाति किसी और ग्रह पर जा बसे। तकनीक इतनी विकसित हो जाए कि प्रजनन तथा उत्तरजीविता के लिए स्त्री और पुरुष एक-दूसरे पर निर्भर न हों, दोनों के दो अलग, एक-दूसरे से अनजान लोक बस जाएँ। जब जरूरत हो क्लोनिंग से नए प्राणी का सृजन कर लिए जाएँ और जब देह का कोई अंग असमर्थ लगे उसे एकदम नए अंग से और बुढ़ापे को युवावस्था से बदल लिया जाए!
इस उपन्यास में इस कल्पना को हमारी मौजूदा दुनिया के समानान्तर तमाम सम्भव उपादानों के साथ रचा गया है। विज्ञान कथाओं को जो पाठक अविश्वसनीय कल्पनाओं की उड़ान मानते हैं, और दूसरे ग्रहों से आनेवाले मनुष्य-विरोधी प्राणियों, एलियनों की विचित्र शक्लों से ऊब चुके हैं, उनके लिए यह उपन्यास एक ताजा हवा की तरह है।
उपन्यास की ताकत है कल्पना का सांगोपांग और तर्कसम्मत निरूपण और उसके भीतर पैठकर कहानी को इस तरह कहना कि जब तक आप उसमें रहते हैं, अपनी वर्तमान दुनिया से बरबस परे चले जाते हैं। एक वैश्विक दार्शनिक गल्प-यात्रा पर एक प्रति-सृष्टि में जहाँ वह सब कुछ है जिसे मनुष्य अपनी प्राकृतिक सीमाओं को लाँघकर, अपनी उत्तरजीविता की अन्तहीन आशा में रच सकता है।
Abhibhavak Kaise Hon
- Author Name:
Acharya Mayaram 'Patang'
- Book Type:

- Description: "शिक्षकों और बालकों पर पुस्तकें चाहे कम ही सही, परंतु लिखी गई हैं। माता-पिता या अभिभावक कैसे हों? इस विषय पर पहली बार ही कोई पुस्तक हिंदी साहित्य में प्रकाशित हुई है। मुझे पहल करने का गौरव प्राप्त हो रहा है। इस पुस्तक की शैली भी अनोखी है। अभिभावकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम हो रहा है। हर विषय के विशेषज्ञ उसमें अपने व्याख्यान दे रहे हैं। फिर शंका-समाधान के लिए प्रश्न एवं उत्तर की व्यवस्था से पुस्तक और अधिक सरल तथा सरस बन गई है। माता-पिता अपने बच्चों की तथा परिवार की भलाई के लिए इस पुस्तक को अवश्य पढें़। इसमें ऐसा बहुत कुछ मिलेगा, जो माता-पिता बन जाने के बाद भी हमें पता नहीं है। हमें अपने दायित्व का बोध नहीं है। हम या तो बच्चों को मारते-डाँटते हैं या शिक्षकों को दोष देते रहते हैं। मेरा दावा है कि इस पुस्तक को पढ़ने के बाद हम सच्चाई को समझेंगे, अपने कर्तव्य को जानेंगे, समझेंगे तथा निभाएँगे।
Abhishapt
- Author Name:
Dr. Kislay Panday
- Book Type:

- Description: रणविजय ने अपने आपको प्रीलिम्स परीक्षा की तैयारी में पूरी तरह से झोंक दिया, जिसका नतीजा यह हुआ कि प्रीलिम्स की परीक्षा में वह अव्वल रहा। इस नतीजे ने उसका मनोबल और बढ़ा दिया। वह और भी उत्साह के साथ मुख्य परीक्षा की तैयारी में जुट गया। अपनी पहली उपलब्धि जब उसने अपने पिता जागीर सिंह को बताई तो वे खुशी के मारे फूले नहीं समाए, और जब यही खबर जागीर सिंह ने रणविजय की माँ को बताई तो उनकी आँखें खुशी से छलछला आईं। तभी वह वार्ड बॉय हाथ में कुछ सामान लेकर हमारे पास आया। उसने रणविजय का नाम लिया तो मैंने हामी भर दी। जिसके बाद उसने वे चीजें हमारे बगल में रख दीं, जिसमें लकड़ी का एक डंडा था, जिसे रणविजय अपने आखिरी दिनों में सहारे के लिए इस्तेमाल करता था। एक पॉलिथिन में उसके कुछ कपड़े थे। एक डायरी थी, जिसमें शायद उसने कुछ नोट्स लिखे थे और एक पोटली जैसी कोई चीज थी, जिस पर रणविजय की माँ की निगाहें जाकर टिक गई थीं। उन्होंने उसी पल उस पोटली को उठा लिया और उसे सीने से लगाकर रोने लगीं। मैं समझ गया, शायद यह वही पोटली थी, जिसमें वे हर बार खाने के रूप में अपना प्यार बाँधकर अपने बेटे को देती थीं। बेटा खुद तो चला गया, मगर वह खाली पोटली माँ के लिए छोड़ गया, जिसे वे शायद दोबारा कभी नहीं भर पाएँगी। —इसी पुस्तक से अत्यंत भावपूर्ण उपन्यास, जिसके मुख्य पात्र के जीवन को लेखक ने खुद नए सिरे से जिया है। यह एक पुस्तक न होकर जीवन-दर्शन साबित होगी।
Naya Ghar
- Author Name:
Intizar Hussain
- Book Type:

- Description: नया घर एक परिवार की दास्तान है जिसका सफ़र अतीत में इस्फ़हान के घर से शुरू होता है और हिजरत करता हुआ क़ज़वीन, हिन्दुस्तान और अंत में पाकिस्तान पहुँचकर भी ज़ारी रहता है। इंतिज़ार हुसैन सीधी-सादी ज़बान में आपबीती सुनाते हैं। इनसानी मुक़द्दर, इनसानी जीवन और ब्रह्मांड से सम्बन्धित मूल प्रश्नों पर सोच-विचार के वक्श्त भी इस सहज स्वभाव को क़ाइम रखते हैं। विभाजन के नतीजे में प्रकट होनेवाली सांस्कृतिक, भावात्मक, मानसिक समस्याएँ; एक सर्वव्यापी और साझा इतिहास और उस इतिहास के बनाए हुए सामाजिक संघटन का बिखराव; देशत्याग, साम्प्रदायिक दंगे, सत्ता की राजनीति का तमाशा, पाकिस्तान में तानाशाही, राजनीतिक दमन और मूलतत्ववाद के परिणामस्वरूप सामाजिक स्तर पर प्रकट होनेवाली घुटन और सामूहिक मूर्खताओं का एहसास; फिर विरोध और अभिव्यक्ति-स्वातंत्रय की वह लहर जो वैयक्तिक सत्ता के विरुद्ध सामूहिक नफ़रतों को अभिव्यक्त करती है - नया घर में इन सारी घटनाओं का रचनात्मक चित्रण मिलता है। पिछले चालीस बरसों (‘नया घर’ 1987 ई. में प्रकाशित हुआ था) में होनेवाली हर वह राजनीतिक घटना जिससे सामूहिक दृष्टि प्रभावित हुई है, इंतिज़ार हुसैन की रचनात्मक प्रक्रिया और प्रतिक्रिया में उसकी गूँज सुनाई देती है। इंतिज़ार हुसैन ने एक बहुत बड़े कैनवस की कहानी को यहाँ ‘मिनिएचर’ रूप में प्रस्तुत किया है। कहानी का हर पात्र और हर घटना चित्रण में इस तरह गुँथा हुआ है कि सारे घटक एक दूसरे की संगति में ही अपने अर्थ तक पहुँचते हैं। अतीत की धुंध को चीरती हुई कहानी वर्तमान का भाग इस तरह बनती है कि दोनों कहानियाँ अपने अलग-अलग स्तरों पर भी जीवित रहती हैं। ‘नया घर’ एक सिलसिला भी है और विभिन्न मूल्यों, रवैयों, परम्पराओं और दो ज़मानों के बीच एक संग्राम भी।
Ve Din
- Author Name:
Nirmal Verma
- Book Type:

-
Description:
निर्मल वर्मा के कथा-शिल्प में उसी तरह मौजूद रहता है, जैसे हमारे जीवन में—लगातार मौजूद लेकिन अदृश्य। उससे हमारे दुःख और सुख तय होते हैं, वैसे ही जैसे उनके कथा-पात्रों के होते हैं। कहानी का विस्तार उसमें बस यह करता है कि इतिहास के उन मूक और भीड़ में अनचीन्हे ‘विषयों’ को एक आलोक-वृत्त से घेरकर नुमायाँ कर देता है, ताकि वे दिखने लगें, ताकि उनकी पीड़ा की सूचना एक जवाबी सन्देश की तरह इतिहास और उसकी नियन्ता शक्तियों तक पहुँच सके। इस प्रक्रिया में अगर उनकी कथा कुछ ऐसे व्यक्तियों को रच देती है जिनकी वैयक्तिकता की आभा हमारे लिए ईर्ष्या का कारण हो उठे, तो यह उनका व्यक्तिवाद नहीं है, व्यक्ति के स्तर पर एक वैकल्पिक मनुष्य का ख़ाक़ा तैयार करने की कोशिश है।
इस उपन्यास के चरित्रों की पीड़ा और उस पीड़ा को पहचानने, अंगीकार करने की उनकी इच्छा और क्षमता उन्हें हमारे मौजूदा असहिष्णु समाज के लिए मूल्यवान बनाती है। वह चाहे रायन हो, इंदी हो, फ्रांज हो या मारिया, उनमें से कोई भी अपने दुख का हिसाब हर किसी से नहीं माँगता फिरता। चेकोस्लोवाकिया की बर्फ़-भरी सड़कों पर अपने लगभग अपरिभाषित-से प्रेम के साथ घूमते हुए ये पात्र जब पन्नों पर उद्घाटित होते हैं, तो हमें एक टीसती हुई-सी सान्त्वना प्राप्त होती है, कि मनुष्य होने का जोखिम लेने के दिन अभी लद नहीं गए।
‘वे दिन’ निर्मल वर्मा का प्रथम उपन्यास है। यह क्रिसमस के चन्द शान्तिपूर्ण दिनों की गाथा है, एक अवसादपूर्ण प्रेमकथा जो बर्फ़ और धूप, छुट्टियों के ख़ालीपन, पुराने शहर के पुलों और टावरों के बीच चुपचाप चलती है। हर पात्र का अपना अतीत है, जो यूरोप की युद्धोत्तर पीढ़ी की अभिशप्त छाया से जुड़ा है, और उपन्यास के विभिन्न पात्रों को जोड़नेवाली एक ‘रहस्यमय’ नियति भी है, जो छोटी-से-छोटी घटना को अर्थवत्ता प्रदान करती है।
Shesh Kadambari
- Author Name:
Alka Saraogi
- Book Type:

-
Description:
‘सोशल वर्क’ और ‘सोशल जस्टिस’ इन दो शब्दों के बीच के स्पेश का मोहक किन्तु मार्मिक प्रतिबिम्बन है अलका सरावगी का उपन्यास—‘शेष कादम्बरी’। वृद्ध और युवा जीवन-दृष्टि के फ़र्क़ को रेखांकित करनेवाला यह उपन्यास अलका सरावगी के जीवन्त लेखन का ऐसा प्रतीक है जिसमें उन्नीसवीं सदी में जन्मे, रूबी दी के मामा देवीदत्त का व्यक्तित्व रूबी दी के लिए ‘आइडेंटिटी क्राइसिस’ का कारक बनकर उभरता है। इस ‘आइडेंटिटी क्राइसिस’ की गिरफ़्त में रूबी दी अपनी किशोरावस्था में ही आ चुकी हैं और इससे उबरने के प्रयास में वे एकरेखीय ‘सोशल-वर्क’ के आडम्बर से जुड़ी रहीं और अन्ततः अपनी नातिन ‘कादम्बरी’ में अपनी शेष कथा देखने को बाध्य हुईं। जीवन और उपन्यास का तालमेल बैठाने के लिए अलका सरावगी ने परिचित ढाँचे से बाहर निकलकर यह रेखांकित किया है कि ‘शेष कादम्बरी’ ऐसा जीवन है जिसमें उपन्यास का प्रवाह या फिर जीवन का
उद् दात है। अलका सरावगी की यह औपन्यासिक कृति उपभोक्तावादी मूल्यों के बरक्स उदारवादी मूल्यों की स्थापना भी करती है। आधुनिक जीवन के पेचोखम का रूपायण इस उपन्यास को अविस्मरणीय बनाता है।
Vyavdhan : Bikhari Aas Nikhari Preet
- Author Name:
Shanti Kumari Bajpai
- Book Type:

-
Description:
‘व्यवधान’ पर अभिमत इस उपन्यास को बड़े चाव से पढ़ गया। मुझे प्रसन्नतापूर्ण विस्मय हुआ। घर के भीतर दुनिया का इन्होंने सजीव चित्र उपस्थित किया है। इनके पात्र जाने-पहचाने से लगते हैं। अत्यन्त परिचित वातावरण के भीतर इन्होंने कई अविस्मरणीय पात्रों की सृष्टि की है और विपत्तियों की आँधी को स्वर्ग की सीढ़ी में बदल दिया है। नारी पात्र बहुत सशक्त हैं।
—आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी
इस उपन्यास में भारतीय आदर्शों एवं सात्त्विकता के प्रति असीम संवेदना है। श्रीमती शान्ति कुमारी बाजपेयी में एक सबल कलाकार है, इस उपन्यास को पढ़कर मुझे ऐसा अनुभव हुआ।...‘व्यवधान’ में किसी समस्या को नहीं उठाया गया है। प्रत्येक श्रेष्ठ कला की भाँति यह उपन्यास मानवीय संवेदना को लेकर चलता है।...भाषा मँजी हुई और गठी हुई है। मैं ऐसा समझता हूँ कि उनकी अपनी निजी शैली है, जो आगे चलकर हिन्दी साहित्य में अपना स्थान बना लेगी। यही नहीं, श्रीमती बाजपेयी में एक तरह का सन्तुलन है जो श्रेष्ठ कला का अनिवार्य अंग माना जाता है।
—भगवतीचरण वर्मा
उपन्यास का सम्पूर्ण कथानक हृदयग्राही है। पात्रों को जीवन्त रूप में प्रस्तुत करने और उनकी चारित्रिक विशेषताओं को उभारने में आपकी रोचक एवं संवेदनामयी संवाद-योजना अत्यन्त सफल हुई है। भाषा-शैली की प्रेषणीयता भी स्तुत्य है।
—डॉ. नगेन्द्र
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की प्राध्यापिका सुश्री शान्ति कुमारी बाजपेयी की कृति ‘व्यवधान’ को मैंने बड़े मनोयोग से पढ़ा। मुझे आश्चर्य हुआ। ...उनकी प्रथम रचना होकर भी यह उपन्यास अपने में सर्वथा प्रौढ़ कृति मालूम पड़ता है। कथानक के गुम्फन में सफ़ाई है और उसके भीतर क्रमागत रूप में परिस्थितियों की योजना बड़ी ही विशद है। पात्रों के चरित्र में निखार है, उनका अपना-अपना स्वतंत्र विकास हुआ है और उनके मनोवैज्ञानिक उतार-चढ़ाव की गति में पर्याप्त निर्मलता है।
—डॉ. जगन्नाथ प्रसाद शर्मा
आपकी भाषा के प्रवाह, शैली के सामर्थ्य तथा चरित्र-चित्रण के कौशल से अत्यधिक प्रभावित हुआ। नामानुसार ‘व्यवधान’ के प्रसंग यत्र-तत्र मिलते हैं तथा ‘आस’ का ‘बिखरना’ एवं ‘प्रीत’ का ‘निखरना' भी पल-पल पर दिखाई देता है। दोनों ही नामकरण पूर्णत: यथार्थ हैं। आरम्भ और अन्त के प्रकरणों ने तो मुझे बार-बार रुलाया। आपकी रचना में जो सजीवता, भावनात्मक धड़कन और स्वानुभव का पुट है, उससे इस उपन्यास ने ‘आद्य’ होते हुए भी अपना ‘प्रथम’ स्थान बना लिया है।
—डॉ. पंडित ओंकारनाथ ठाकुर
उपन्यास लेखन एक दुस्तर सेतु को पार करने सरीखा है। हर्ष का विषय है कि श्रीमती शान्ति कुमारी बाजपेयी ऐसे प्रयास में कृतकार्य हुई हैं। उनकी कृति ‘व्यवधान’ का मैं स्वागत करता हूँ और एतदर्थ उन्हें हार्दिक बधाई देता हूँ।
—श्री राय कृष्णदास
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book