Tukdon Tukdon Mein Aurat
Author:
Mamta MehrotraPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
UrduCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 80
₹
100
Unavailable
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ISBN: 9789352665860
Pages: 127
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: मैं नाज़रीन अंसारी एक लेखिका के रूप में आप सबके समक्ष फिर से पहली पुस्तक ‘माँ’ एक बेटी के अहसास की कहानी, माँ से मेरे रिश्ते के अनुभव की कुछ और कड़ी आपसे जोडऩे आई हूँ। माँ के निश्छल प्रेम को, अथाह परिश्रम को, माँ के त्याग और बलिदान का थोड़ा और बखान करने की खातिर मैं इस पुस्तक में अपने दिल की कुछ और मर्मस्पर्शी यादों को जोडक़र आप सबसे बाँटने आई हूँ। माँ के लिए जितना भी लिखूँ, कम ही है। इस पुस्तक में मैंने पिछले सारे अहसासों के साथ कुछ और जज़्बातों को जोड़ा है। यह मेरी पहली पुस्तक से ही जुड़ा हुआ भाग है। माँ के लिए बहुत-कुछ कहना है, माँ के लिए और क्या-क्या महसूस करती हूँ, आप सबसे साझा करना है। मेरे दिल की बातें, मेरे जज़्बातों के बहाव की रवानी आपको जरूर प्रसन्नचित्त करेगी। मेरे अहसास आपकी आँखों को पुरनम कर जाएँगे। माँ की ममता की गरिमा का अहसास दिलाएँगे और आपके हृदय को एक मार्मिक स्पर्श का अनुभव कराएँगे। आप सब पाठकों को मेरी पुस्तक पसंद आएगी, बस यही कामना करती हूँ। बहुत सारी कविताओं और यादों के कुछ और पन्ने अपनी इस पुस्तक में जोड़ रही हूँ। आपसे अनुरोध है कि आप इस पुस्तक को पढ़ें, यह पुस्तक आप सबको अपने माता-पिता के और करीब ले जाएगी, क्योंकि माता-पिता के प्रेम से सुंदर अनुभूति इस दुनिया में और कुछ नहीं है। आप सब लोग यह मत सोचिएगा कि फिर से इस पुस्तक को क्यों पढ़ा जाए, क्योंकि इस पुस्तक में आपको बहुत-कुछ अलग पढऩे को मिलेगा। माँ से जुड़े अपने कुछ और विचारों से मैं आप सबको अवगत कराना चाहती हूँ। कृपया इस पुस्तक को अपना प्यार ज़रूर दीजिएगा। माँ हम सबकी जहान, माँ खुशियों का मकाम। माँ हौसलों का गुमान, माँ हमारे वजूद की पहचान। माँ हमारे गमों की निदान, माँ हर घर की शान। माँ हमारे घर की बागबान, माँ का हमेशा रहे मान।
NISHANK : Ek Antrang Path
- Author Name:
Gopal Sharma
- Book Type:

- Description: जिन केंद्रीय शिक्षा मंत्रियों ने साहित्यकार के रूप में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है उनमें श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ का नाम प्रमुख है। साहित्य की विविध विधाओं (कविता, कहानी, उपन्यास, यात्रा-वृत्तांत, संस्मरण, जीवनी, जीवनोपयोगी लेखन आदि) में अपने विपुल लेखन से भारतीयता और भारतीय जीवन मूल्यों की स्थापना करते हुए उन्होंने देश-देशांतर में अपने पाठकों का अपार स्नेह प्राप्त किया है। इस पुस्तक के माध्यम से निशंकजी की अब तक प्रकाशित कृतियों का एक ऐसा अंतरंग पाठ प्रस्तुत किया गया है, जो एक साथ ही अंतरिम भी है और विस्तृत भी। यहाँ देखा जा सकता है कि विविध पाठक-वर्गों की अपेक्षाओं की एक साथ पूर्ति करते हुए निशंक-साहित्य किसी एक सहृदय पाठक के मर्म को किस प्रकार आंदोलित करता है। भूमिका और यवनिका से आबद्ध ग्यारह अध्यायों के शीर्षक मात्र आपको यह आभास करा देंगे कि यह पाठ सर्वथा अधुनातन और अनौपचारिक शैली में लिखा गया है। लेखक से अधिक उसके लेखन पर केंद्रित प्रस्तुत अध्ययन का जब आप पाठ करेंगे तो आप स्वयं भी समूची साहित्य-रचना प्रक्रिया की शास्त्रीय समझ विकसित करते चले जाएँगे। हिंदी साहित्य के संपूर्ण सर्जनात्मक संसार से विश्वसनीय और प्रामाणिक तथ्य-सामग्री जुटाकर और उसमें निशंकजी के साहित्यिक योगदान को स्थापित और रेखांकित करती यह पुस्तक आपको विरल भी लगेगी और अनूठी भी।
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