Tirohit
Author:
Geetanjali ShreePublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 200
₹
250
Available
गीतांजलि श्री के लेखन में अमूमन, और ‘तिरोहित’ में ख़ास तौर से, सब कुछ ऐसे अप्रकट ढंग से घटता है कि पाठक ठहर–से जाते हैं। जो कुछ मार्के का है, जीवन को बदल देनेवाला है, उपन्यास के फ्रेम के बाहर होता है। ज़िन्दगियाँ चलती–बदलती हैं, नए–नए राग–द्वेष उभरते हैं, प्रतिदान और प्रतिशोध होते हैं, पर चुपके–चुपके। व्यक्त से अधिक मुखर होता है अनकहा। घटनाक्रम के बजाय केन्द्र में रहती हैं चरित्र–चित्रण व पात्रों के आपसी रिश्तों की बारीकियाँ।</p>
<p>पैनी तराशी हुई गद्य शैली, विलक्षण बिम्बसृष्टि और दो चरित्रों—ललना और भतीजा—के परस्पर टकराते स्मृति प्रवाह के सहारे उद्घाटित होते हैं ‘तिरोहित’ के पात्र : उनकी मनोगत इच्छाएँ, वासनाएँ व जीवन से किए गए किन्तु रीते रह गए उनके दावे।</p>
<p>अन्दर–बाहर की अदला–बदली को चरितार्थ करती यहाँ तिरती रहती है एक रहस्यमयी छत। मुहल्ले के तमाम घरों को जोड़ती यह विशाल खुली सार्वजनिक जगह बार–बार भर जाती है चच्चो और ललना के अन्तर्मन के घेरों से। इसी से बनता है कथानक का रूप। जो हमें दिखाता है चच्चो/बहन जी और ललना की इच्छाओं और उनके जीवन की परिस्थितियों के बीच की न पट सकनेवाली दूरी। वैसी ही दूरी रहती है इन स्त्रियों के स्वयं भोगे यथार्थ और समाज द्वारा देखी गई उनकी असलियत में।</p>
<p>निरन्तर तिरोहित होती रहती हैं वे समाज के देखे जाने में। किन्तु चच्चो/बहन जी और ललना अपने अन्तर्द्वन्द्वों और संघर्षों का सामना भी करती हैं। उस अपार सीधे–सच्चे साहस से जो सामान्य ज़िन्दगियों का स्वभाव बन जाता है। गीतांजलि श्री ने इन स्त्रियों के घरेलू जीवन की अनुभूतियों—रोज़मर्रा के स्वाद, स्पर्श, महक, दृश्य—को बड़ी बारीकी से उनकी पूरी सैन्सुअलिटी में उकेरा है।</p>
<p>मौत के तले चलते यादों के सिलसिले में छाया रहता है निविड़ दु:ख। अतीत चूँकि बीतता नहीं, यादों के सहारे अपने जीवन का अर्थ पानेवाले ‘तिरोहित’ के चरित्र—ललना और भतीजा—अविभाज्य हो जाते हैं दिवंगत चच्चो से। और चच्चो स्वयं रूप लेती हैं इन्हीं यादों में।
ISBN: 9788126713622
Pages: 172
Avg Reading Time: 6 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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तीखे दु:ख और दीप्तिमान मेधा की पुनरावृत्तियों के द्वारा यह उपन्यास विक्रम सेठ के लेखकीय व्यक्तित्व का एक अलग ही पहलू पाठक के सम्मुख खोलता है।
Anveshan
- Author Name:
Akhilesh
- Book Type:

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Description:
संवेदनशील कथाकार अखिलेश का पहला उपन्यास ‘अन्वेषण’ जीवन-संग्राम की एक विराट् प्रयोगशाला है जहाँ उच्छल प्रेम, श्रमाकांक्षी भुजाओं और जन-विह्वल आवेगों को हर पल एक अम्ल परीक्षण से गुज़रना पड़ता है। सहज मानवीय ऊर्जा से भरा इसका नायक एक चरित्र नहीं, हमारे समय की आत्मा की मुक्ति की छटपटाहट का प्रतीक है। उसमें ख़ून की वही सुर्ख़ी है, जो रोज़-रोज़ अपमान, निराशा और असफलता के थपेड़ों से काली होने के बावजूद सतत संघर्षों के महासमर में मुँह चुराकर जड़ता की चुप्पी में प्रवेश नहीं करती, बल्कि अँधेरी दुनिया की भयावह छायाओं में रहते हुए भी उस उजाले का ‘अन्वेषण’ करती रहती है जो वर्तमान बर्बर और आत्माहीन समाज में लगातार ग़ायब होती जा रही है। ‘अर्थ’ के इस्पाती इरादों के आगे वह बौना बनकर अपनी पहचान नहीं खोता, बल्कि ठोस धरातल पर खड़ा रहकर चुनौतियों को स्वीकार करता है। यही कारण है कि द्वन्द्व में फँसा नायक बदल रहे समय और समाज के संकट की पहचान बन गया है।
‘अन्वेषण’ की भाषा पारदर्शी है। कहीं-कहीं वह स्फटिक-सी दृढ़ और सख़्त भी हो गई है। इसमें एक ऐसा औपन्यासिक रूप पाने का प्रयत्न है, जिसमें काव्य जैसी एकनिष्ठ एकाग्रता सन्तुलित रूप में विकसित हुई है।
सही मायने में ‘अन्वेषण’ आज के आदमी के भीतर प्रश्नों की जमी बर्फ़ के नीचे दबी चेतना को मुखर करने की सफल चेष्टा है।
Gurukul : Ek Adhoori Kahani : Vol. 1
- Author Name:
Anita Rakesh
- Book Type:

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Description:
ऊपरी तौर पर एकरैखिक प्रतीत होनेवाला यह उपन्यास कथ्य और विषयवस्तु के लिहाज़ से हमें कई स्तरों पर सम्बोधित करता है। मूलतः यह ज्ञान के उद्भव और सम्प्रेषण के अभाव को महसूस करते हुए उसकी सर्जना का प्रयास करता है। दुनियादारी के प्रिज़्म से दुनिया की विविधता को जानने और पहचानने वाला कर्नल हर शाम पार्थ को सम्बोधित करता है। हर दिन एक नई सुर्ख़ी, हर दिन एक नया उद्घाटन और हर दिन वयस्कता का एक-एक क़दम चढ़ता हुआ पार्थ।
यहाँ पार्थ हमारे मध्यवर्गीय समाज के उस वर्ग का प्रतिनिधि है जो अपनी दैनिक चर्या से बाहर अक्सर नहीं देख पाता और नतीजतन उस दुनिया और व्यवस्था के बारे में उसकी कोई निर्णायक राय नहीं बन पाती जो उसकी नियति को निर्धारित करती है। कर्नल एक-एक करके उसको न्याय व्यवस्था, आतंकवाद, कारपोरेट जगत, स्त्री-पुरुष सम्बन्ध आदि पर इधर की स्थितियों से अवगत कराता है।
अन्त में वह आता है पुरुष समलैंगिकता के प्रश्न पर जिस पर आज भी भारतीय समाज और क़ानून दोहरा पैमाना लागू करता है। वह इस नज़रिए को ख़ारिज करते हुए समलैंगिकों, समलैंगिक पुरुषों की सामाजिक स्थिति, उनके भीतरी-बाहरी अकेलेपन और दूसरी पीड़ाओं को रेखांकित करता है और कहता है कि यह लोग न अपराधी हैं, न समस्या। इन्हें दंड की नहीं, समझे जाने की ज़रूरत है।
Desired By The Devil
- Author Name:
Deeksha Pandey
- Book Type:

- Description: While trying to escape from the professed love of Satan, the most dreaded Bahubali of a state, Kaira ran into another powerful man, divide. Memorised by her captivating eyes, he only wanted to hide her in his embrace, saving her from all the Malevolence around her. In the shadow of Dividend love, Satya became a story of her past for Kaira but little did she know that some stories tend to repeat themselves with time. The fear and anguish which she thought she overcame, in all its might, ran through her, shivering yet fierce, gathering all her courage; she stood in front of him again nevertheless, this time, she wasn't alone, but when time unfolded, harsh truths, her beliefs of right and wrong quivered like a dead leaf of a branch. What conspired next is an intriguing saga of love, lust, shaking truth and faith.
keertigaan
- Author Name:
Chandan Pandey
- Book Type:

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Description:
उन्माद के जाल की पैमाइश में जुटे एक पत्रकार की उथल-पुथल भरी ज़िन्दगी की कथा है—‘कीर्तिगान’, जो उस वक़्त और उलझ जाती है जब भीड़-हत्याओं और उनसे जुड़े लोगों से मिलते हुए उसके लिए प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष का भेद मिट जाता है। उसकी दुनिया उन लोगों से भर जाती है जो या तो इस दुनिया में नहीं हैं या उन भीड़-हत्याओं से जुड़े हैं।
उसकी ज़िन्दगी का एक सिरा उस स्त्री से जुड़ता है जो भीड़-हत्याओं की रिपोर्टिंग के अभियान में उसके साथ काम कर रही है और ऐसी हर घटना के साथ अपने उस अतीत के निकट पहुँच जाती है जिसकी ज़मीन एक त्रासदी की स्याही से अब तक गीली है।
अपनी नौकरी को बचाए रखने भर के लिए इस अभियान से जुड़ा पत्रकार और अपने काम को पसन्द करने वाली उसकी सहकर्मी, दोनों की अपनी-अपनी त्रासदियाँ उस समय व्यक्तिगत नहीं रह जातीं जब वे रिपोर्टिंग के दौरान समाज में अकल्पनीय ढंग से जड़ जमा चुकी उन्मादी मानसिकता से रू-ब-रू होते हैं।
इसमें जीवन से वाचक का पुनर्जागृत प्रेम है और विकसित होती हुई एक प्रेम कहानी भी, जिनसे कथा विरल ढंग से पठनीय हो उठती है।
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