Chiwar
Author:
Rangeya RaghavPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 200
₹
250
Available
उपन्यासकार रांगेय राघव ने ‘सीधा सादा रास्ता’ और ‘कब तक पुकारूँ’ जैसे समकालीन विषय-वस्तु पर आधारित उपन्यासों के साथ ऐतिहासिक उपन्यासों से भी हिन्दी साहित्य को समृद्ध किया है। अपनी मार्क्सवादी विश्व-दृष्टि के आधार पर वे प्रत्येक विषय को अपने ख़ास नज़रिए से चित्रित करते हैं।</p>
<p>‘चीवर’ उनके प्रमुखतम ऐतिहासिक उपन्यासों में से एक है। इसमें उन्होंने हर्षवर्धन काल के पतनशील भारतीय सामन्तवाद को रेखांकित किया है। ब्राह्मण और बौद्ध मतों के परस्पर संघर्ष के साथ-साथ मालव गुप्तों, वर्धनों और मौखरियों के बीच राजनीतिक सत्ता के लिए होनेवाला संघर्ष भी हमें यहाँ दिखाई देता है।</p>
<p>भाषा के स्तर पर यह उपन्यास सिद्ध करता है कि शब्दावली अगर घोर तत्समप्रधान हो तब भी उसमें रस की सर्जना की जा सकती है—बशर्ते लेखनी किसी समर्थ रचनाकार के हाथ में हो। यह इस उपन्यास की प्रवहमान भाषा का ही कमाल है कि इसमें विचरनेवाले पात्र, वह चाहे राज्यश्री हो या हर्षवर्धन या कोई और हमारी स्मृति पर अंकित हो जाते हैं।
ISBN: 9788171199228
Pages: 180
Avg Reading Time: 6 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Sara Aakash
- Author Name:
Rajendra Yadav
- Book Type:

-
Description:
आज़ाद भारत की युवा-पीढ़ी के वर्तमान की त्रासदी और भविष्य का नक़्शा। आश्वासन तो यह है कि सम्पूर्ण दुनिया और सारा आकाश तुम्हारे सामने खुला है—सिर्फ़ तुम्हारे भीतर इसे जीतने और नापने का संकल्प हो—हाथ-पैरों में शक्ति हो...
मगर असलियत यह है कि हर पाँव में बेड़ियाँ हैं और हर दरवाज़ा बन्द है। युवा बेचैनी को दिखाई नहीं देता कि किधर जाए और क्या करे। इसी में टूटता है उसका तन, मन और भविष्य का सपना। फिर वह क्या करे—पलायन, आत्महत्या या आत्मसमर्पण?
आज़ादी के पचास बरसों ने भी इस नक़्शे को बदला नहीं—इस अर्थ में ‘सारा आकाश’ ऐतिहासिक उपन्यास भी है और समकालीन भी।
बेहद पठनीय और हिन्दी के सर्वाधिक लोकप्रिय उपन्यासों में से एक ‘सारा आकाश’ चालीस संस्करणों में आठ लाख प्रतियों से ऊपर छप चुका है, लगभग सारी भारतीय और प्रमुख विदेशी भाषाओं में अनूदित है। बासु चटर्जी द्वारा बनी फ़िल्म ‘सारा आकाश’ (हिन्दी) सार्थक कलाफ़िल्मों की प्रारम्भकर्ता फ़िल्म है।
Chintaghar
- Author Name:
Yashwant Vyas
- Book Type:

-
Description:
‘चिन्ताघर’ कथा–साहित्य में ताज़गी-भरा सशक्त और सन्तुलित प्रयोग है। कथा–लेखन
में और व्यंग्य–लेखन में हमारे यहाँ जो कुछेक ऊबाऊ रूढ़ियाँ बन रही हैं, लेखक उनसे सर्वथा दूर है।
यशवंत व्यास शब्दों का सधा हुआ मितव्ययी प्रयोग करते हैं और ऐसा अकारण नहीं होता है कि वे
प्रत्यक्षत: कोई अनावश्यक प्रतीत होनेवाला वाक्य लिखें या अपने कथन को दोहराएँ। ऐसे स्थलों पर
प्राय: शैली की माँग का दबाव ही ज़िम्मेदार होता है। इस प्रकार का अनुशासित लेखन दुर्लभ–सा है,
ख़ास तौर से ऐसी शैली में जहाँ भाषाई चमत्कार और आधुनिक जीवन के विविध सन्दर्भ–संकेतों का
खुलकर उपयोग किया गया हो। कुछ अलग–अलग स्थितियों, घटनाओं और फंतासियों को लेकर ही
उपन्यास का ताना–बाना तैयार किया गया है, पर उनका अन्तर्गुम्फन ऐसा है जो सहज रूप से
उपन्यास को एकसूत्रता में बाँध लेता है।
YUG GEET USI KE GAYEGA
- Author Name:
Jai Shankar Mishra
- Book Type:

- Description: प्रस्तुत कविता-संग्रह ‘युग गीत उसी के गाएगा’ श्री जय शंकर मिश्र की काव्य-यात्रा का सप्तम सोपान है। इसमें कुल 101 कविताएँ एवं गीत सम्मिलित किए गए हैं। श्री मिश्र का संपूर्ण रचना संसार उनकी निजी अनुभूतियों का ही प्राकट्य है। सूक्ष्म संवेदनाओं की सलिल सरिता उनके अंतस में निरंतर प्रवहमान रही है। इसीलिए इनकी रचनाओं में जहाँ प्रकृति अपनी संपूर्ण विविधता एवं समग्रता के साथ प्रतिबिंबित होती हुई दृष्टिगोचर होती है, वहीं दूसरी ओर जीवन-जगत्, प्रीति-प्रणय, समाज-संबंध एवं जीवन के लौकिक-अलौकिक पक्षों की भी विविधवर्णी आभा विद्यमान है। श्री मिश्र की कविताओं में भाषा की सहजता, सरलता एवं सुगमता के साथ ही अंतर्निहित पारिवारिक एवं सामाजिक समरसता की महत्ता, युग-मंगल की कामना, जीवन के उद्देश्यों के प्रति सतत चिंतन तथा परिवेश की विविध जटिलताओं के बावजूद जीवन को सौंदर्यमय एवं शिवमय बनाने की बलवती भावना रचनाकार को एक विशिष्ट पहचान देती है। सकारात्मकता और आशावाद से परिपूर्ण ये काव्य रचनाएँ पाठकों को मानवीय मूल्यों और संबंधों का बोध कराएँगी और कुछ ऐसा कर गुजरने के लिए प्रेरित करेंगी कि ‘युग गीत उसी के गाएगा’।
Shigaf
- Author Name:
Manisha Kulshreshtha
- Book Type:

- Description: विस्थापन का दर्द महज़ एक सांस्कृतिक, सामाजिक विरासत से कट जाने का दर्द नहीं है, बल्कि अपनी खुली जड़ें लिए भटकने और कहीं जम न पाने की भीषण विवशता है, जिसे अपने निर्वासन के दौरान सैनसबेस्टियन (स्पेन) में रह रही अमिता, लगातार अपने ब्लॉग में लिखती रही है। डॉन किहोते की ‘रोड टू ला मांचा’ से कश्मीर वादी में लौटने की, अमिता की भटकावों तथा असमंजस-भरी इस यात्रा को अद्भुत तरीक़े से समेटता हुआ यह उपन्यास विस्थापन और आतंकवाद की कोई व्याख्या या समाधान नहीं प्रस्तुत करता, वरन् आस्था-अनास्था की बर्बर लड़ाइयों के बीच, कुचले जाने से रह गए कुछ जीवट पलों को जिलाता है और ज़मीन पर गिर पड़े उस दिशा संकेतक बोर्ड को उठाकर फिर-फिर गाड़ता है जिस पर लिखा है—भाई मेरे, अमन का एक रास्ता इधर से भी होकर गुज़रता है। शिगाफ़ यानी एक दरार जो कश्मीरियत की रूह में स्थायी तौर पर पड़ गई है, जिसमें से धर्मनिरपेक्षता एक हद तक रिस चुकी है, इस शिगाफ़ को भरने के लिए प्रयासरत है उपन्यास का पत्रकार नायक ज़मान। अमिता और ज़मान जिनका लक्ष्य तो एक है मगर फिर भी दो विपरीत व विषम अतीत से उपजे जीवन-मूल्यों को सहेजते हुए वे कई बार प्रक्रिया तथा प्रतिक्रिया से उलझते हुए आपस में टकराते रहते हैं। अमिता के ब्लॉग, यास्मीन की डायरी, मानव बम जुलेखा का मिथकीय कोलाज, अलगाववादी नेता वसीम के एकालाप के ज़रिए कश्मीर और कश्मीरियत की विदीर्ण व्यथा-कथा को अलग कोण, नए शैलीगत प्रयोगों तथा ताज़गी-भरी भाषा के साथ अपने उपन्यास ‘शिगाफ़’ में अनूठे ढंग से प्रस्तुत कर रही हैं—मनीषा कुलश्रेष्ठ।
Moti Chune Hansa
- Author Name:
Dr. Praveen "Tanmay"
- Book Type:

- Description: मोती चुने हंसा' काव्यकृति में प्रेम के जीवनदर्शन को प्रस्तुत किया गया है। प्रेम जीवन-सागर का ऐसा मोती है, जिसे भावुक और संवेदनशील स्वभाव वाला व्यक्ति पहचान लेता है। प्रारंभ में प्रेम शारीरिक प्रतीत होता है, लेकिन आगे चलकर पता चलता है कि यह नितांत आंतरिक और सूक्ष्म है। जीवन के सुख-दु:ख में हमें कई प्रकार से इसकी अनुभूति होती रहती है। प्रेम के क्षणों की तलाश ही जीवन-यात्रा का प्रमुख लक्ष्य है। जिस प्रकार हंस बाकी सब छोड़ केवल मोती ही चुगता है, उसी प्रकार मनुष्य को भी जीवन के मूल्यवान क्षणों को अपनाकर आत्मसात् कर लेना चाहिए, क्योंकि प्रेम ही हमारे व्यक्तित्व को पूर्णता की ओर ले जाता है। यह कभी मिटता नहीं है। आत्मा की तरह अमर हो जाता है। पुनर्जन्म की संकल्पना इसी से जुड़ी है। और हाँ, प्रेम में देना ही है, लेना कुछ नहीं है। प्रेम समर्पण की भावना का आधार है। इसलिए हंस की तरह मोती चुनिए और जीवन को सार्थक बनाइए।
Friends Best Friends
- Author Name:
Dheerika Pandey
- Book Type:

- Description: What would you do if life betrays you and fate is against you when you feel alone even in a crowd and have just one more chance to improve your present? A girl fighting against all odds in life, This book is a gripping account of a changing Phase in smriti's life. Smriti is a sixteen-year-old girl who lost her parents when she was ten. After the unfortunate death of her Grandpa, she moved to her new house in Gurgaon with her grandma and her elder brother Rahul. As she soon joined her new school, she realised that people were quite different from her previous school. She was bullied and insulted in front of everyone, which mentally destroyed her even more. But luck wasn't that bad with her as she had a few classmates who immensely supported her. Kartik, Inder, SIM, AMU, Asha, Sahib and Kaira made her believe in life and true friendship, uplifting her and encouraging her to have an optimistic view of life. But on the other hand, her elder brother Rahul became quite pessimistic and felt helpless. He found life unfair and cruel. Smriti tries to encourage him but fails miserably. On the other hand, smriti's deepest secret had been revealed to her friends. Will she let her fate go against her again, or will she fight against all odds and live happily? The story gives us all the answers.
Swami
- Author Name:
Mannu Bhandari
- Book Type:

- Description: ‘स्वामी’ सुप्रसिद्ध कथाकार मन्नू भंडारी का भावप्रवण विचारोत्तेजक उपन्यास है। आत्मीय रिश्तों के बीच जिस सघन अन्तर्द्वन्द का चित्रण करने के लिए मन्नू भंडारी सुपरिचित हैं, उसका उत्कृष्ट रूप ‘स्वामी’ में देखा जा सकता है। सौदामिनी, नरेन्द्र और घनश्याम के त्रिकोण में उपन्यास की कथा विकसित हुई है। सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियाँ तो हैं ही। कथारस के साथ उपन्यास में स्थान-स्थान पर ऐसे प्रश्न उठाए गए हैं जिनकी वर्तमान में प्रासंगिकता स्वयंसिद्ध है—जैसे, ‘जिसे आत्म कहते हैं वह क्या औरतों की देह में नहीं है? उनकी क्या स्वतंत्र सत्ता नहीं है? वे क्या सिर्फ़ आई थीं मर्दों की सेवा करनेवाली नौकरानी बनने के लिए? सौदामिनी के जीवन में अथवा इस वृतान्त में ‘स्वामी’ शब्द की सार्थकता क्या है’, इसे लेखिका ने इन शब्दों में स्पस्ट किया है—‘घनश्याम के प्रति उनका पहला भाव प्रतिरोध और विद्रोह का है, जो क्रमशः विरक्ति और उदासीनता से होता हुआ सहानुभूति, समझ, स्नेह, सम्मान की सीढ़ियों को लाँघता हुआ श्रद्धा और आस्था तक पहुँचता है; और यहीं ‘स्वामी’ शीर्षक पति के लिए पारस्परिक सम्बोधन मात्र न रहकर, उच्चतर मनुष्यता का विश्लेषण बन जाता है, ऐसी मनुष्यता जो ईश्वरीय है।’ एक पठनीय और संग्रहणीय उपन्यास।
Raston Par Bhatakte Huye
- Author Name:
Mrinal Pande
- Book Type:

- Description: जिस वक़्त गाँवों का महानगरों में, पत्रकारिता का राजनीति में और राजनीति का उद्योग-उपक्रमों में विलय हो रहा हो; रास्तों पर भटकते हुए कार्य-कारण; सही-ग़लत की खोज करना तो दुनियादारी नहीं। मगर उपन्यास की नायिका मंजरी यही करती है। उसमें एक छटपटाहट है जानने की, कि जो होता रहा है वह क्यों होता रहा है ? इस दौरान वह बार-बार लहूलुहान होती है। घर-परिवार सहकर्मी सबसे विच्छिन्न होकर भाषा की, शब्दों की आदिम खोह में छिपने की कोशिश करती है, कुछ हद तक सफल भी होती है। पर तभी बंटी उसके जीवन में प्रवेश करता है, और उसके भीतर का हिमवारिधि पिघलने लगता है। किसी महत्त्वपूर्ण व्यक्ति की रहस्यमयी रखैल का यह मासूम-गर्वीला बच्चा, उँगली पकड़कर मंजरी को अपने साथ उन रास्तों पर भटकाता है, जहाँ पैर रखने से वह कतराती रही है। पहले बंटी, और उसके बाद उसकी माँ की नृशंस हत्या, और राजधानी के सुरक्षातंत्र की रहस्यमय चुप्पी मंजरी को इन हत्यारों की तह में जाने को बाध्य करती है। बंटी की स्मृति के सहारे तब मंजरी एक स्याह पाताली गंगा के दर्शन करती है, जो देश के मर्म, उसकी राजधानी के तलघर में कई रहस्यमय भेदों को छुपाए बह रही है। चाहे न चाहे मंजरी के अपने जीवन के कई स्रोत भी इससे जुड़े हुए निकलते हैं। दो मौतों की तफ़्तीश के बहाने मंजरी अपने निजी जीवन, विवेक एवं अपनी अन्तरात्मा की परिक्रमा करते हुए रास्तों पर भटकती है।
Khali Jagah
- Author Name:
Geetanjali Shree
- Book Type:

-
Description:
संवेदना और गहरी दृष्टि से भाषा के अनोखे खेल की रचना करता है गीतांजलि श्री का उपन्यास—‘ख़ाली जगह’। इस उपन्यास में लेखिका ने नैरेटिव की चिन्दियों को विस्फोट की तरह फैलने दिया है—बार-बार सत्यता के दावों में छेद करते हुए। ‘ख़ाली जगह’ में मूल तत्त्व वह हिंसा है जो हमारे, रोज़मर्रे की ज़िन्दगी में समा गई है। ‘बम’ इसका केन्द्रीय रूपक है जो ज़िन्दगियों के परखचे उड़ा देता है।
एक अनाम शह के अनाम विश्वविद्यालय के सुरक्षित समझे जानेवाले कैफ़े में एक बम फटता है—और उन्नीस लोगों की शिनाख़्त से शुरू होती है—‘ख़ाली जगह’ की कहानी। उन्नीसवीं शिनाख़्त करती है एक माँ—अपने राख हुए अठारह साल के बेटे की और यही माँ ले आती है बेटे की चिन्दियों के साथ एक तीन साल के बच्चे को, जो सलामत बच गया है, न जाने कैसे, ज़रा-सी ख़ाली जगह में...!
गीतांजलि श्री ऑब्जेक्टिव और सब्जेक्टिव यथार्थ के बीच जो तालमेल बिठाती हैं वह स्पष्ट, तार्किक क्रम को तोड़ता है। वह उसमें लेखकीय वक्तव्य देकर कोई हस्तक्षेप नहीं करतीं। पात्रों की भावनाएँ, उनके विचार और कर्म, अस्त-व्यस्त उद्घाटित होते हैं, घुटे हुए, कभी ठोस, कभी ज़बरदस्त आस और गड़बड़ाई तरतीब में हैरानी से भिंचे हुए। पूछते से कि क्या यही है जीवन, यही होता है उसका रंग-रूप, ऐसा ही होना होता है? ‘ख़ाली जगह’ गीतांजलि श्री के लेखन की कुशलता का सबूत है, वह कल्पना और यथार्थ के अभेद से बनी ज़िन्दगी बटोर लाती हैं और ‘ख़ाली जगह’ पाठकों के मन पर अपना अमिट प्रभाव छोड़ जाता है।
Khalnayak
- Author Name:
Yi Mun Yol
- Book Type:

-
Description:
इस उपन्यास की कथा साफ़ तौर से एक रूपक है जो कोरियाई राजनीति से जुड़ी है। यह कोरिया में एक अधिनायकवादी राज्य शैली से अनिश्चित क़िस्म के प्रजातंत्र में बदलने की गाथा है। इसमें ताक़त के भयंकर दुरुपयोग, आम जन के द्वारा उसे स्वीकार कर चुपचाप सहते रहने की मनोदशा, प्रजातंत्र की ओर उन्मुख करनेवाली जागृति को तो साक्षात् किया ही गया है लेकिन बड़ी बात यह है कि अधिनायक की हार के बावजूद अधिनायकवादी प्रवृत्ति के प्रति सदा सावधान बने रहने की ओर सशक्त संकेत भी किया गया है।
इस उपन्यास के दो स्तर हैं : एक सीधा-सादा और दूसरा सांकेतिक। सीधे-सीधे अर्थ के अनुसार यह कक्षा के एक ऐसे बिगड़ैल मॉनीटर की कहानी है जो अपनी ताक़त और अपने साम्राज्य का झंडा बनाए रखने के लिए कितने ही तरह के हथकंडे अपनाता है। सांकेतिक अर्थ के अनुसार यह मनुष्य के भीतर की एक ऐसी प्रवृत्ति को सामने लाता है जो ताक़तवर बनने की भरपूर कोशिश करती है। उपन्यास आत्मकथात्मक शैली में है जिसका ‘विकृत नायक’ अर्थात् ‘खलनायक’ ‘ओम सोकदे’ है।
माना जाता है कि यह उपन्यास 1980 के ग्वांगजू सामूहिक हत्याकांड से प्रेरित होकर लिखा गया था जिसमें प्रजातंत्र के लिए आन्दोलन कर रहे निहत्थे लोगों को दक्षिण कोरियाई सैनिकों (जिन्हें उत्तर कोरिया से लोहा लेने के लिए प्रशिक्षण दिया गया था और जो शायद युद्ध न होने की स्थिति में ऊब चुके थे) ने मौत के घाट उतारा था।
Pati-Patani Aur Woh
- Author Name:
Kamleshwar
- Book Type:

-
Description:
वरिष्ठ उपन्यासकार कमलेश्वर का यह उपन्यास समकालीन समाज में पुरुष मानसिकता को उघाड़कर रख देता है। देहलोलुप पुरुषों की लिप्सा और कुंठा इस उपन्यास का केन्द्रीय विषय है। पत्नी हो या प्रेमिका, स्त्री हर तरह से पुरुषों द्वारा छली जाती है। इस उपन्यास का कथ्य भले ही रोमांटिक और हलका-फुलका लगे, लेकिन यह साधारणता ही इसकी खास विशेषता है।
समकालीन जीवन की कार्यालयी संस्कृति में स्त्रियों की नियति और पुरुष की लोलुपता को लेखक ने इस उपन्यास में गहरी आन्तरिकता से रेखांकित किया है। पूँजीवादी समाज के प्रतिस्पर्द्धामूलक परिवेश की विडम्बनाओं और अन्तर्विरोधों को उजागर करनेवाला यह उपन्यास शिल्प व भाषा की सहजता के लिए भी याद किया जाएगा।
Garbhnal
- Author Name:
Manjit Thakur
- Book Type:

- Description: एक दुर्घटना का शिकार हुए अभिजीत को अचानक पता लगता है कि उसकी जिंदगी से सात साल गायब हो चुके हैं. इन सात सालों में दुनिया बदल गई थी, देश-समाज-सरकार में परिवर्तन आ गया था और बदल गए थे लोग! उसकी प्रेमिका मृगांका भी किसी और की हो चुकी थी. अभिजीत की जिंदगी में अब गिनती की सांसे बची हैं और तब वह गृहनगर और पैतृक इलाके में अपनी जड़ों की खोज-यात्रा में निकल पड़ता है. वह अपने अंतिम दिनों में उन इलाकों को एक बार देख लेना चाहता है जहां उसका बचपन गुजरा है. और तब उसको उन स्थानों के लोकदेवता (डेमी-गॉड्स) प्रत्यक्ष दिखने लगते हैं. साथ ही, वह वर्तमान और अतीत की सदेह यात्रा करने लगता है. उसके जीवन बचाने की एक दैवीय शर्त होती है, जिसको पूरा करने के लिए आगे आती है उसकी प्रेमिका मृगांका, जो अब भी उसकी प्रतीक्षा में होती है.
Hindutva : Ek Jeevan Shaili
- Author Name:
Ed. Kalraj Mishra
- Book Type:

- Description: आज भारत के राजनीतिक परिवेश में चारों ओर संकट दिखाई दे रहा है। देश में भ्रष्टाचार चरम पर है। धर्म-जाति के नाम पर वोट पाने हेतु राष्ट्रीय हितों को तिलांजलि दी जा रही है। छद्म धर्म-निरपेक्षता के नाम पर संप्रदायवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। आज के इस कलुषित वातावरण में हिंदुत्व की अप्रतिम जीवन-शैली को अपनाकर ही समाज में एक जन-जागरण पैदा किया जा सकता है, जिससे अपने संकीर्ण मतभेदों से ऊपर उठकर एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण हो सके। जीवनपर्यंत राष्ट्रवाद की राजनीति के आदर्शों पर चलनेवाले वरिष्ठ राजनेता पं. कलराज मिश्र ने हिंदुत्व की परंपराओं, वेद, पुराणों और स्मृतियों के माध्यम से सभी समस्याओं का हल खोजने का प्रयास किया है। इस पुस्तक में सम्मिलित अनेक आध्यात्मिक गुरुओं, राजनेताओं, लेखकों के मर्मस्पर्शी लेख बालविवाह, जातिप्रथा, टूटते परिवार, भ्रष्टाचार, महिलाओं के प्रति दुराचार जैसी बुराइयों को दूर करने में अवश्य सफल होंगे। हिंदुत्व की व्यापक अवधारणा, उसकी अप्रतिम जीवन-शैली, उसकी संस्कृति का दिग्दर्शन कराती एक श्रेष्ठ कृति।
Pratigya
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
I..The Loser
- Author Name:
Sumit Kumar Sambhav
- Book Type:

- Description: What are the ingredients of the recipe for a looser? What are the circumstances which make a person looser? Zandu Singh, who lives in Dharamshala city of Himalayan Pradesh, dips his life into hard work to make himself perfect in his penance. But a single lie he speaks to his love, jyotsna, one day becomes so big that he becomes a loser for her and throws him to the ultimate darkness of confusion. Will zandu Singh ever be able to come out of this dilemma? Will he ever succeed in making his banwari Lal master Ji's dream true? Come and know about the thousands of athletes burning themselves in the fire of hard work, devotion and sacrifice but still living unidentified lives. Come to peep into their life through India’s first sports fiction.
Asantosh Ke Din
- Author Name:
Rahi Masoom Raza
- Book Type:

-
Description:
हिन्दी उपन्यास-जगत् में राही मासूम रज़ा का प्रवेश एक सांस्कृतिक घटना-जैसा ही था। ‘आधा गाँव’ अपने-आप में मात्र एक उपन्यास ही नहीं, सौन्दर्य का पूरा प्रतिमान था। राही ने इस प्रतिमान को उस मेहनतकश अवाम की इच्छाओं और आकांक्षाओं को मथकर निकाला था, जिसे इस महादेश की जन-विरोधी व्यवस्था ने कितने ही आधारों पर विभाजित कर रखा है।
राही का कवि-हृदय व्यवस्था द्वारा लादे गए झूठे जनतंत्र की विभीषिकाओं को उजागर करने में अत्यन्त तत्पर, विकल, संवेदनशील और आक्रोश से भरा हुआ रहा है। यही हृदय और अधिक व्यंजनाक्षम होकर ‘असन्तोष के दिन’ में व्याप रहा है। आक्रोश और संवेदना की यह तरलता यहाँ धुर गम्भीर राजनीतिक सवालों को पेश करती है, जिनकी आँच में सारा हिन्दुस्तान पिघल रहा है।
राष्ट्र की अखंडता और एकता, जातिवाद की भयानक दमघोंटू परम्पराएँ, साम्प्रदायिकता का हलाहल, एक-से-एक भीषण सत्य, चुस्त शैली और धारदार भाषा में लिपटा चला आता है और हमें घेर लेता है। इस कृति की माँग है कि इन सवालों से जूझा और टकराया जाए। इसी समय, इनके उत्तर तलाश किए जाएँ अन्यथा मनुष्य के अस्तित्व की कोई गारंटी नहीं रहेगी।
Banbhatt Ki Aatmakatha
- Author Name:
Hazariprasad Dwivedi
- Rating:
- Book Type:

- Description: आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी की विपुल रचना-सामर्थ्य का रहस्य उनके विशद शास्त्रीय ज्ञान में नहीं, बल्कि उस पारदर्शी जीवन-दृष्टि में निहित है, जो युग का नहीं युग-युग का सत्य देखती है। उनकी प्रतिभा ने इतिहास का उपयोग ‘तीसरी आँख’ के रूप में किया है और अतीत-कालीन चेतना-प्रवाह को वर्तमान जीवनधारा से जोड़ पाने में वह आश्चर्यजनक रूप से सफल हुई है। बाणभट्ट की आत्मकथा अपनी समस्त औपन्यासिक संरचना और भंगिमा में कथा-कृति होते हुए भी महाकाव्यत्व की गरिमा से पूर्ण है। इसमें द्विवेदी जी ने प्राचीन कवि बाण के बिखरे जीवन-सूत्रों को बड़ी कलात्मकता से गूँथकर एक ऐसी कथाभूमि निर्मित की है जो जीवन-सत्यों से रसमय साक्षात्कार कराती है। इसमें वह वाणी मुखरित है जो सामगान के समान पवित्रा और अर्थपूर्ण है-‘सत्य के लिए किसी से न डरना, गुरु से भी नहीं, मंत्रा से भी नहीं; लोक से भी नहीं, वेद से भी नहीं।’ बाणभट्ट की आत्मकथा का कथानायक कोरा भावुक कवि नहीं वरन कर्मनिरत और संघर्षशील जीवन-योद्धा है। उसके लिए ‘शरीर केवल भार नहीं, मिट्टी का ढेला नहीं’, बल्कि ‘उससे बड़ा’ है और उसके मन में आर्यावर्त्त के उद्धार का निमित्त बनने की तीव्र बेचैनी है। ‘अपने को निःशेष भाव से दे देने’ में जीवन की सार्थकता देखने वाली निउनिया और ‘सबकुछ भूल जाने की साधना’ में लीन महादेवी भट्टिनी के प्रति उसका प्रेम जब उच्चता का वरण कर लेता है तो यही गूँज अंत में रह जाती हैद-‘‘वैराग्य क्या इतनी बड़ी चीज है कि प्रेम देवता को उसकी नयनाग्नि में भस्म कराके ही कवि गौरव का अनुभव करे?’’
Zindagi Zero Mile
- Author Name:
Harsh Ranjan
- Book Type:

- Description: -ध्यान से देखो, पहचानते हो? मेरा इशारा यहाँ की छोटी सी -किंतु बेजान नहीं - इस सड़क की तरफ था .....यहाँ पर चलने वाले लोगों की सीधी-साधी चाल .....सड़क किनारे मंदिर में बज रही घंटियाँ ....सालों से खड़ा बरगद और उस पर लपेटी अनगिनत डोरियाँ..... निश्चल कोमल और पवित्र खिल-खिलाहटें ....अपनी इमानदार हाटें .....यहाँ की भोली-भाली उमंग ....अपने मिट्टी की गंध .... हम दोनों गंगा के किनारे चले गये। उमड़ते-घुमड़ते काले-काले मेघ....निश्चल और निर्मल गंगा...दूर तक फैलता कल-कल का स्वर....बहती ठंढ़ी हवाएँ ....तट पर की हलचल.... इस दृश्य ने जैसे हमें बाँध लिया था। सामने से सावन की धूम-धाम जैसे धीरे-धीरे अपनी ओर बढ़ती आ रही थी। -ये है अपना उत्सव!- मैंने कहा और आनंद के पास किनारे पर ही बैठ गया। वह भी काफी देर से स्थिर बैठा, इस दृश्य को देखता रहा। दूर आकाश में काले-काले मेघ छा चुके थे और फिर जोरदार बारिश शुरू हो गयी। मौसम बिल्कुल ठंडा हो गया और चारों ओर सोंधी-सोंधी गंध फैल गयी। काफी देर की चुप्पी के बाद उसने मुझसे कहा- ऐसा लगता है कि कहीं इन्हीं में खो जाऊँ! .....कहीं मिल जाऊँ .... आज शायद उसने पहली बार अपने अंधेरे कमरे से निकलकर इस दुनिया को देखा था। मेरे मन में एक संतोष सा हुआ और आँखों में आँसू आ गये -इसके लिए इन्हें भी तो यहाँ रखना होगा ...इसी पवित्रता के साथ ...इतनी ही गरिमा से .... मैं फिर वापस आ गया।
Aanjaney Jayte
- Author Name:
Giriraj Kishore
- Book Type:

-
Description:
‘आंजनेय जयते’ गिरिराज किशोर का सम्भवत: पहला मिथकीय उपन्यास है। इसकी कथा संकटमोचन हनुमान के जीवन-संघर्ष पर केन्द्रित है। रामकथा में हनुमान की उपस्थिति विलक्षण है। वे वनवासी हैं, वानरवंशी हैं, लेकिन वानर नहीं हैं; बल्कि अपने समय के अद्भुत विद्वान, शास्त्र-ज्ञाता, विलक्षण राजनीतिज्ञ और अतुलित बल के धनी हैं। उन्होंने अपने समय के सभी बड़े विद्वान ऋषि-मुनियों से ज्ञान हासिल किया है। उन्हें अनेक अलौकिक शक्तियाँ हासिल हैं।
तमाम साहित्यिक-सांस्कृतिक स्रोतों के माध्यम से गिरिराज किशोर ने हनुमान को वानरवंशी आदिवासी मानव के रूप में चित्रित किया है, जो अपनी योग्यता के कारण वानर राजा बाली के मंत्री बनते हैं। बाली और सुग्रीव के बीच विग्रह के बाद नीतिगत कारणों से वे सुग्रीव की निर्वासित सरकार के मंत्री बन जाते हैं।
इसी बीच रावण द्वारा सीता के अपहरण के बाद राम उन्हें खोजते हुए हनुमान से मिलते हैं। हनुमान सीता की खोज में लंका जाते हैं। सीता से तो मिलते ही हैं, रावण की शक्ति और कमज़ोरियों से भी परिचित होते हैं। फिर राम-रावण युद्ध, सीता को वनवास, लव-कुश का जन्म और पूरे उत्तर कांड की कहानी वही है—बस, दृष्टि अलग है।
लेखक ने पूरी रामकथा में हनुमान की निष्ठा, समर्पण, मित्रता और भक्तिभाव का विलक्षण चित्र खींचा है। उनकी अलौकिकता को भी महज़ कपोल-कल्पना न मानकर एक आधार दिया है। लेखक ने पूरे उपन्यास में उन्हें अंजनी-पुत्र आंजनेय ही कहा है, उनकी मातृभक्ति के कारण उपन्यास में सबसे महत्त्वपूर्ण उत्तरार्ध और क्षेपक है जो शायद किसी राम या हनुमान कथा का हिस्सा नहीं।
यहाँ हनुमान सीता माता के निष्कासन के लिए राम के सामने अपना विरोध जताते हैं और उन्हें राजधर्म और निजधर्म की याद दिलाते हैं। यहाँ यह कथा अधुनातन सन्दर्भों में गहरे स्तर पर राजनीतिक हो जाती है। वैसे, मूल रामकथा में बिना कोई छेड़छाड़ किए लेखक ने आंजनेय के चरित्र को पूरी गरिमा के साथ स्थापित किया है। यह एक बड़ी उपलब्धि है।
Mere Bete Ki Kahani
- Author Name:
Nadine Gordimer
- Book Type:

-
Description:
‘नोबेल पुरस्कार’ सम्मानित लेखिका नादिन गोर्डाइमर का उपन्यास ‘मेरे बेटे की कहानी’ दक्षिण अफ्रीका के नस्लवादी, रंगभेदवादी निरंकुश, अमानवीय शासन के निषेध-दर-निषेध की चक्की में पीसे जाते उन 87 प्रतिशत बहुसंख्य कालों, अश्वेतों तथा अन्यवर्णी जनों पर 13 प्रतिशत विशेष सुविधाभोगी गोरों के संवेदनहीन अत्याचार और शोषण-चक्र की स्मृतियाँ जगानेवाली कृति है। यहाँ से गुज़रना अँधेरी सुरंग की कष्टकर किन्तु अनिवार्य यात्रा की तरह है—एक ऐसी लम्बी, काली रात जिसकी कोई सुबह नहीं है। जैसे-जैसे हम पृष्ठ पलटते हैं एक भयानक बेचैनी जकड़ती चलती है, लेकिन हम उससे भाग नहीं सकते। हमारे अन्दर बैठा मनुष्य अपने नियतिचक्र का यह उद्वेलन अपनी हर शिरा में महसूस करना चाहता है—अगले संघर्ष की तैयारी के लिए, जो कहीं, कभी शुरू हो सकता है।
‘मेरे बेटे की कहानी’ एक ऐसे संसार में ले जाती है जहाँ मनुष्य होने के हर अधिकार को निषेधों और वर्जनाओं के बुलडोज़रों के नीचे कुचल दिया गया है। लेकिन इस दमनचक्र में पीसे जाने के बावजूद संघर्ष जीवित है।
उपन्यास में कथा कई स्तरों पर चलती है। पीड़ा भोगते अधिसंख्य जन, उन्हीं के बीच से उभरकर संघर्ष करनेवाले क्रान्तिबिन्दु किशोर और युवक, जो बड़ी बेरहमी से भून दिए जाते हैं। उनकी क़ब्रों पर श्रद्धांजलि अर्पित करने जुटी भीड़ पर फिर गोलियाँ बरसाई जाती हैं। हर रोज़, हर कहीं यही होता है। कथा का आरम्भ ऐसा आभास कराता है जैसे यह विवाहेतर अवैध काम सम्बन्धों की चटपटी कथा है। ‘दूसरी औरत’ के साथ अपने क्रान्तिकारी पिता को, जो हाल ही में जेल से छूटकर आया है, देखनेवाली किशोर बेटे की आँख इस सन्दर्भ को नए आयाम देती है। एक भयानक, विद्रूपित कंट्रास्ट की क्षणिक आश्वस्ति—और पाठक को लगता है वह क्षण-भर को खुलकर साँस ले सकता है। लेकिन अन्ततः यह किंचित् रोमानी स्थिति भी हमें बेमालूम तौर पर बहुत ऊँचाई से इस संघर्ष के भँवर में फेंक देती है, और हम अन्दर ही अन्दर उतरते चले जाते हैं। स्थितियों का यह प्रतिगामी विचलन एक नए शिल्प के तहत रचना के समग्र प्रभाव को और भी धारदार बना देता है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book