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Author:
Hermann HessePublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
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यह ज़रूरी नहीं कि विधिवत् स्कूली शिक्षा प्राप्त करनेवाले छात्र ही महान बनते हैं। सच तो यह है कि जिनसे स्कूली अध्यापक घृणा करते हैं, सज़ा देते हैं, जो झगड़ालू कहे जाते हैं, भगाए जाते हैं, अक्सर वही लोग बाद में अपने सुकृत्यों से महान बन जाते हैं। और फिर अगली पीढ़ी के स्कूली अध्यापक छात्रों के सामने इन्हीं लोगों को अनुकरणीय उदाहरण के रूप में पेश करते हैं। प्रस्तुत उपन्यास में जहाँ वर्तमान शिक्षा-पद्धति और उसके चलते विद्यार्थियों में व्याप्त तनाव को रेखांकित किया गया है, वही एक युवक की ऐसी मार्मिक कथा है जो परिवार, समाज और व्यवस्था की अपेक्षाओं के चक्के तले दबकर दम तोड़ देता है। सुविख्यात जर्मन लेखक हेरमन हेस्से का बहुचर्चित मार्मिक उपन्यास है ‘चक्के तले’।
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यह ज़रूरी नहीं कि विधिवत् स्कूली शिक्षा प्राप्त करनेवाले छात्र ही महान बनते हैं। सच तो यह है कि जिनसे स्कूली अध्यापक घृणा करते हैं, सज़ा देते हैं, जो झगड़ालू कहे जाते हैं, भगाए जाते हैं, अक्सर वही लोग बाद में अपने सुकृत्यों से महान बन जाते हैं। और फिर अगली पीढ़ी के स्कूली अध्यापक छात्रों के सामने इन्हीं लोगों को अनुकरणीय उदाहरण के रूप में पेश करते हैं।
प्रस्तुत उपन्यास में जहाँ वर्तमान शिक्षा-पद्धति और उसके चलते विद्यार्थियों में व्याप्त तनाव को रेखांकित किया गया है, वही एक युवक की ऐसी मार्मिक कथा है जो परिवार, समाज और व्यवस्था की अपेक्षाओं के चक्के तले दबकर दम तोड़ देता है। सुविख्यात जर्मन लेखक हेरमन हेस्से का बहुचर्चित मार्मिक उपन्यास है ‘चक्के तले’।
Book Details
-
ISBN9788171198931
-
Pages159
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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