Shmshan Champa
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‘चम्पा तुझ में तीन गुण, रूप, रंग अरु बास।</p> <p> अवगुण तुझमें एक है, भ्रमर न आवत पास।।’</p> <p>एक थी चम्पा। रूप, रंग और गुणों की मादक कस्तूरी गंध लिए चम्पा। लेकिन पिता की मृत्यु, बिगड़ैल छोटी बहन की कलंक-गाथा और स्वयं उसके दुर्भाग्य ने उसे बुरी तरह झकझोर डाला।</p> <p>बाहर से आत्मतुष्ट, संयमी और आत्मविश्वासी दीखनेवाली डॉक्टर चम्पा के अभिशप्त जीवन की वेदना की मार्मिक कहानी है ‘श्मशान चम्पा’। एक परम्परा प्रेमी और आज्ञाकारी बेटी जो सबको इलाज और निर्बाध सेवा दे सकती थी, पर अपने अभिशप्त एकाकी जीवन का सन्नाटा भंग नहीं कर पाती है। सुख के शिखर पर पहुँचाकर स्वयं नियति ही निर्ममता से उसे बार-बार नीचे गिराती अनिश्चय की घाटियों में भटकने को भेजती रहती है।
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‘चम्पा तुझ में तीन गुण, रूप, रंग अरु बास।</p>
<p> अवगुण तुझमें एक है, भ्रमर न आवत पास।।’</p>
<p>एक थी चम्पा। रूप, रंग और गुणों की मादक कस्तूरी गंध लिए चम्पा। लेकिन पिता की मृत्यु, बिगड़ैल छोटी बहन की कलंक-गाथा और स्वयं उसके दुर्भाग्य ने उसे बुरी तरह झकझोर डाला।</p>
<p>बाहर से आत्मतुष्ट, संयमी और आत्मविश्वासी दीखनेवाली डॉक्टर चम्पा के अभिशप्त जीवन की वेदना की मार्मिक कहानी है ‘श्मशान चम्पा’। एक परम्परा प्रेमी और आज्ञाकारी बेटी जो सबको इलाज और निर्बाध सेवा दे सकती थी, पर अपने अभिशप्त एकाकी जीवन का सन्नाटा भंग नहीं कर पाती है। सुख के शिखर पर पहुँचाकर स्वयं नियति ही निर्ममता से उसे बार-बार नीचे गिराती अनिश्चय की घाटियों में भटकने को भेजती रहती है।
Book Details
-
ISBN9788183610728
-
Pages123
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: भारत उत्सवों का देश है। यहाँ प्रत्येक महत्वपूर्ण अवसर को उत्सव के रूप में मनाया जाता है, जैसे जन्म होने पर उत्सव, और एक साल पूरी होने पर फिर से जन्मोत्सव। अब तो जन्मदिन मनाने का चलन बहुत लोकप्रिय हो गया है। पहले बच्चे जब पाठशाला जाते थे, तो कई परिवार अक्षरोत्सव भी मनाते थे। वसंतोत्सव भी मनती है। होली, दीवाली, दशहरा जैसी परंपरागत त्योहारों को तो छोड़ ही दीजिए; वे तो बड़े-बड़े उत्सव हैं। इन वर्षों में इश्कोत्सव भी प्रचलित हो रहा है। ‘वेलेंटाइन-डे’ के अवसर पर शहरों के बाजारों में खूब उत्साह दिखता है। विवाहोत्सव का तो ही बात छोड़ दीजिए। यह उत्सव व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक सभी स्तरों का है, और उससे भी अधिक यह एक आर्थिक उत्सव बन गया है, जिसमें सैकड़ों उद्योग फलते-फूलते हैं। परन्तु, एक उत्सव है जो अभी भी उपेक्षित है—मरणोत्सव। मैं सोचता हूँ, क्यों अभी तक यह उत्सव नहीं बन पाया? बाजार ने इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया? कुछ पश्चिमी और पूर्वी देशों में बाजार इस ओर ध्यान दे रहा है। ज्ञात है कि यदि बाजार लगा लिया जाए तो क्या-क्या संभव है? जीवन बीमा भी इसी पर आधारित एक अरबों-खरबों रुपए का व्यवसाय है, जो मृत्यु की आशंका पर टिका है। मृत्यु से जुड़े अन्य उद्योग भी विकसित हो सकते हैं। शादी से कुछ लोग बच तो जाते हैं, लेकिन मरने से कोई नहीं बच सकता, इसलिए यह सबसे बड़ा बाजार है। यहाँ से हमें प्रसिद्ध व्यंग्यकार श्री दीनानाथ मिश्र का स्मरण होता है, जिनके व्यंग्यपूर्ण लेखों ने समाज में व्याप्त कुरीतियों और समस्याओं पर तीखा प्रहार किया। यह संग्रह उन्हीं का धारदार व्यंग्यों का संकलन है।
Angoor
- Author Name:
Gulzar
- Book Type:

- Description: साहित्य में मंज़रनामा एक मुकम्मिल फ़ॉर्म है। यह एक ऐसी विधा है जिसे पाठक बिना किसी रुकावट के रचना का मूल आस्वाद लेते हुए पढ़ सकें। लेकिन मंज़रनामा का अन्दाज़े-बयान अमूमन मूल रचना से अलग हो जाता है या यूँ कहें कि वह मूल रचना का इन्टरप्रेटेशन हो जाता है। मंज़रनामा पेश करने का एक उद्देश्य तो यह है कि पाठक इस फ़ॉर्म से रू-ब-रू हो सकें और दूसरा यह कि टी.वी. और सिनेमा में दिलचस्पी रखनेवाले लोग यह देख-जान सकें कि किसी कृति को किस तरह मंज़रनामे की शक्ल दी जाती है। टी.वी. की आमद से मंज़रनामों की ज़रूरत में बहुत इजाफ़ा हो गया है। यह बेहद लोकप्रिय कॉमेडी ‘अंगूर’ का मंज़रनामा है। दो जुड़वाँ जोड़ियों के बीच बुनी घटनाओं की यह कहानी आज भी दर्शकों को उतना ही लुभाती है जितना अपने समय में लुभाती थी। शेक्सपीयर के नाटक ‘द कॉमेडी ऑफ़ एरर्स’ से प्रेरित इस फ़िल्म ने स्वस्थ और चुटीले हास्य का एक मानक फ़िल्म-उद्योग के सामने रखा था। विश्वास है, पुस्तक के रूप में इस फ़िल्म की यह प्रस्तुति पाठकों की स्मृति में रचे चित्रों को पुनः गतिमान करेगी और साथ ही एक उपन्यास का आनन्द भी देगी।
Gandi Baat
- Author Name:
Kshitiz Roy
- Book Type:

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Description:
एक लड़का था—कुछ लोफर, लफुआ, दीवाना-सा! जिसका दिल था नए रैपर में वही पुराना—शहीदाना। शहर पटना पूरा अपना लगे उसे!
लड़की थी अलबेली-सी, सोचने का कारख़ाना, हिम्मत की एनीटाइम लोडेड गन जैसी, पुरानी जीन्स और एकदम नया गाना!
दिल्ली शहर में मौसम था अन्ना आन्दोलन का,
चुनाव के घुमड़ रहे थे बादल।
डेजी आई पढ़ने एलएसआर में। बन गई ड्रमर।
गोल्डन आया डेजी के पीछे बावला। बन गया ड्राइवर।
दोनों थे ख़ालिस ग़ैर-राजनीतिक युवा।
पढ़िए उन्हीं के घोर राजनीतिक रोमांस की दिलचस्प दास्ताँ, जिसमें उनकी निजता में शहर, समाज और परिस्थितियाँ दे रही हैं बराबरी से दख़ल...जहाँ कुछ भी नहीं है निश्चित और अनिश्चित ही है उनका
सबसे बड़ा रोमांस...
जिसे कहते हैं सब गंदी बात,
क्या होती है वाक़ई वह
गंदी-सी कोई बात!
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