Nirmohi Bhanvara
Author:
Prabodh Kumar SanyalPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 60
₹
75
Unavailable
सुबह के पक्षी का प्रभात-वन्दना सुनकर तो हम उसकी प्रशंसा करते हैं<strong>, </strong>किन्तु पक्षी का धर्म स्वीकार करने में क्यों हिचकिचाते हैं? पक्षी का धर्म यानी स्वतंत्रता का उछाह-भरा आवेग और अपने जमाए-जुटाए से निर्मोह!</p>
<p>बांग्ला के प्रख्यात कथाकार प्रबोध कुमार सान्याल के चर्चित उपन्यास ‘बिबागी भ्रमर’ का यह अनुवाद बांग्ला के माधुर्य को बरकरार रखते हुए संलग्नता और विराग की इस कथा को हम तक पहुँचाता है।</p>
<p>पार्थ<strong>, </strong>नवेन्दु और हिना की यह कहानी रिश्तों के त्रिकोण की उतनी नहीं है जितनी पक्षी-धर्म यानी स्वातंत्र्य की चाहना की है। हिना अपनी व्यक्ति-चेतना को पत्नी की उस सीमित परिभाषा में नहीं ढल पाती जिसकी उम्मीद अन्तत: हर पुरुष करने लगता है<strong>, </strong>वह चाहे अपनी मान्यताओं में कितना भी प्रगतिशील क्यों न हो। पार्थ एक ठिकाना है जहाँ वे दोनों न सिर्फ़ अपना मन खोल पाते हैं<strong>, </strong>बल्कि स्वयं को भी नए सिरे से देखने की कोशिश करते हैं।</p>
<p>बांग्ला उपन्यासों-कहानियों की पठनीयता का प्रवाह और पात्रों का अपने जीवन-जगत में गहरे तक पैठे होना उन्हें लेखक से मुक्त करके हर पाठक की अपनी रचना बना देता है। यह कौशल इस उपन्यास में भी है। साथ ही है मानव-प्रकृति की अज्ञात तहों में उतरने का साहस जो समाजशास्त्रीय-वैचारिक आग्रहों से नहीं<strong>, </strong>जीवन को जस का तस देखने<strong>, </strong>उसे समझने की कोशिश करने और वास्तविकता को यथारूप ग्रहण करने की तैयारी से आता है।</p>
<p>
ISBN: 9788180311413
Pages: 198
Avg Reading Time: 7 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: यू.आर. अनन्तमूर्ति के इस कन्नड़ उपन्यास को युगान्तरकारी उपन्यास माना गया है। ब्राह्मणवाद, अन्धविश्वासों और रूढ़िगत संस्कारों पर अप्रत्यक्ष लेकिन इतनी पैनी चोट की गई है कि उसे सहना सनातन मान्यताओं के समर्थकों के लिए कहीं–कहीं दूभर होने लगता है। ‘संस्कार’ शब्द से अभिप्राय केवल ब्राह्मणवाद की रूढ़ियों से विद्रोह करनेवाले नारणप्पा के दाह–संस्कार से ही नहीं है। अपने लिए सुरक्षित निवास–स्थान, अग्रहार आदि के ब्राह्मणों के विभिन्न संस्कारों पर भी रोशनी डाली गई है—स्वर्णाभूषणों और सम्पत्ति–लोलुपता जैसे संस्कारों पर भी! ब्राह्मण–श्रेष्ठ और गुरु प्राणेशाचार्य तथा चन्द्री, बेल्ली और पद्मावती जैसे अलग और विपरीत दिखाई देनेवाले पात्रों की आभ्यन्तरिक उथल–पुथल के सारे संस्कार अपने असली और खरे–खोटेपन समेत हमारे सामने उघड़ आते हैं। धर्म क्या है? धर्मशास्त्र क्या है? क्या इनमें निहित आदेशों में मनुष्य की स्वतंत्र सत्ता के हरण की सामर्थ्य है, या होनी चाहिए? ऐसे अनेक सवालों पर यू.आर. अनन्तमूर्ति जैसे सामर्थ्यशील लेखक ने अत्यन्त साहसिकता से विचार किया है, और यही वैचारिक निष्ठा इस उपन्यास को विशिष्ट बनाती है।
Gora
- Author Name:
Rabindranath Thakur
- Book Type:

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Description:
भारतीय मनीषा के आधुनिक महानायक रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने ‘गोरा’ की रचना एक शताब्दी पहले की थी और यह उपन्यास भारतीय साहित्य की पिछली पूरी शताब्दी के भीतर मौजूद जीवन-रेखाओं के भीतरी परिदृश्य की सबसे प्रामाणिक पहचान बना रहा। वर्तमान विश्व के तेज़ी से घूमते चक्र में जब एक बार फिर सभी महाद्वीपों के समाज इस प्राचीन राष्ट्र की ज्ञान-गरिमा, चिन्तन-परम्परा तथा विवेक पर आधारित नव-सृजन-शक्ति की ओर आशा-भरी दृष्टि घुमा रहे हैं, तो ‘गोरा’ की ऊर्जस्वी चेतना की प्रासंगिकता नए सिरे से अपनी विश्वसनीयता अर्जित कर रही है।
आज हम भारतीय साहित्य की परिकल्पना को लेकर जिस आत्म-संघर्ष से गुज़र रहे हें, उसे रवीन्द्रनाथ के विचारों और उनके ‘गोरा’ के सहारे प्रत्यक्ष करने का प्रयास किया जा सकता है। ‘गोरा’ की भाषिक संरचना और इसकी सांस्कृतिक चेतना भारतीय साहित्य की अवधारणा के नितान्त अनुकूल हैं। इस उपन्यास में रवीन्द्रनाथ ने पश्चिम बंग की साधु बांग्ला, पूर्वी बांग्ला (वर्तमान बांग्लादेश) की बंगाल-भाषा, लोक में व्यवहृत बांग्ला के विविध रूपों, प्राचीन पारम्परीण शब्दों, सांस्कृतिक शब्दावली, नव-निर्मित शब्दावली आदि का समन्वय करके एक बहुत अर्थगर्भी कथा-भाषा का व्यवहार किया है। भौगोलिक शब्दावली के लोक प्रचलित रूप भी ‘गोरा’ की कथा-भाषा की सम्पत्ति हैं। इसी के साथ रवीन्द्रनाथ ने ‘गोरा’ में अपनी कविता और गीत पंक्तियों तथा बाउल गीतों व लोकगीतों की पंक्तियों का प्रयोग भी किया है। अनुवाद करते समय कथा-भाषा तथा प्रयोगों के इस वैशिष्ट्य को महत्त्व दिया गया है।
‘गोरा’ में कितने ही ऐसे विभिन्न कोटियों के शब्द और प्रयोग हैं, जिनके सांस्कृतिक, भौगोलिक, ऐतिहासिक और लोकजीवन के दैनिक प्रयोगों से जुड़े सन्दर्भों को जाने बिना ‘गोरा’ का मूल पाठ नहीं समझा जा सकता। अनुवाद में इनके प्रयोग के साथ ही पाद-टिप्पणियों में इनकी व्याख्या कर दी गई है।
अब तक देशी या विदेशी भाषाओं में ‘गोरा’ के जितने भी अनुवाद हुए हैं, उनमें से किसी में भी यह विशेषता मौजूद नहीं है।...और यह ‘गोरा’ का अब तक का सबसे प्रामाणिक अनुवाद है।
Beetiaap Beetiaap
- Author Name:
Vipin Kumar Agarwal
- Book Type:

- Description: ‘बीतीआप बीतीआप’ एक नए ढंग का उपन्यास है। भाषा और शैली के नवोन्मेषी प्रयोग के माध्यम से यह एक रचनाशील व्यक्ति की कहानी बताता है। इलाहाबाद की साहित्यिक पृष्ठभूमि में नायक की सफल कवि बनने की आकांक्षा उसे प्रेम और जीवन की विचित्र परिस्थितियों में ले जाती है, जहाँ वह निराला के सार्वभौमिक भाव का साक्षात्कार करता है। लेकिन इस बीच वह अपने परिवेश, अपने जीवन और उससे जुड़े लोगों की कहानियाँ भी बताता चलता है। विपिन कुमार अग्रवाल की विशेषता है कि दैनिक जीवन की साधारण घटनाओं को भी वे अपने भाषा-चातुर्य तथा कल्पना द्वारा विशेष अर्थ से भर देते हैं। भाषिक प्रयोग, परिस्थिति वर्णन और व्यक्तियों के चित्र खींचने की शैली इस उपन्यास को प्रयोगधर्मिता के एक भिन्न स्तर पर ले जाती है।
Naqqashidar Cabinet
- Author Name:
Sudha Om Dhingra
- Rating:
- Book Type:


- Description: सुधा ओम ढींगरा का उपन्यास नक़्क़ाशीदार केबिनेट वर्ष 2016 का अत्यंत सफल उपन्यास है। यह उपन्यास पेपरबैक और ऑडियोबुक में भी उपलब्ध है।
Things End But Memories Last Forever
- Author Name:
Kumar Milan
- Rating:
- Book Type:

- Description: One often meets his destiny on the road he takes to avoid it� Have you ever: Been in true love? Not love at first sight but love at every sight? Met the love of your life after 4 years only to lose her again? Faced a psycho stalker? Messed with family of cops? Get caught boozing by none other than your mother on your own birthday? Well, if this excites you even a bit, this would be an enthralling read for you. Things End But Memories Last Forever. The book tells the real life bitter-sweet incidents and discloses a candid narration by a mad, love struck and bemused guy, Abhi, who confesses about every last details of his past life to his best friend after a near death escape in a car accident. The tale of his first love Nikita, and much more. As time goes on, you�ll understand. What lasts, lasts; what doesn�t, doesn�t. We are habituated to miss those people the most, who left us for no reason�
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