Until We Meet Again
(3)
Author:
Ajitabha BosePublisher:
Author'S Ink PublicationsLanguage:
EnglishCategory:
Literary-fiction₹
180
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How far will you go to meet your love again? More often than not, we rekindle our hopes in the desire to hold onto things which are to be let go. More often than not, that thing is love. That's what brought together shivangi and Karan. Two people who were Poles apart from each other But shared one common thread of love. While Karan was a simple guy from next door, shivangi was a girl with big dreams. Though she had an orthodox family, their love dared to be United. Their passion had another life to run to, and so did they, until fate played its twisted game and a mishap knocked them on the door. Bestselling author ajitabha Bose brings you another heartwarming tale of love, trust and a forever you might have never read.
Read moreAbout the Book
How far will you go to meet your love again? More often than not, we rekindle our hopes in the desire to hold onto things which are to be let go. More often than not, that thing is love. That's what brought together shivangi and Karan. Two people who were Poles apart from each other But shared one common thread of love. While Karan was a simple guy from next door, shivangi was a girl with big dreams. Though she had an orthodox family, their love dared to be United. Their passion had another life to run to, and so did they, until fate played its twisted game and a mishap knocked them on the door. Bestselling author ajitabha Bose brings you another heartwarming tale of love, trust and a forever you might have never read.
Book Details
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ISBN9789385137891
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Pages184
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Avg Reading Time3 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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Description:
‘सूरज सबका है’ ऐतिहासिक कृति से अधिक लोक-मानस की कृति है। कथा की शुरुआत 1804-15 में गोरख्याणी-गढ़वाल पर गोरखों के आक्रमण से होती है जो बीच-बीच में क्लेश की तरह सोनी गाँव की दादी की जिवेषणा, गढ़वाल की तत्कालीन राजधानी श्रीनगर में रानी कर्णावती के साहस, बुद्धि-चातुर्य, दिल्ली की मुग़ल सल्तनत के मनसबदार नजावत खाँ की मूर्खतापूर्ण लोलुपता, ईस्ट इंडिया कम्पनी की धूर्तता से गुज़रते हुए, आज़ाद भारत के शुरुआती दिनों में परगनाधिकारी देवीदत्त की सहृदयता को लक्षित करते हुए सोनी गाँव पर ही समाप्त हो जाती है। औपन्यासिक भाषिक संरचना की दृष्टि से विद्यासागर नौटियाल का समूचा कथा-संसार, विशेषकर ‘सूरज सबका है’ अद्वितीय, अप्रतिम है।
—मुहम्मद हम्माद फ़ारूक़ी
Customer Reviews
4.33 out of 5
Book
03/01/2023
Mahi Aggarwal
Yet again one more book on love from Ajitabha Bose. This book adorably added to my book shelf as I am heartfully satisfied from author's writing style and expertise. This novella is a tale between shivangi and karan . A simple boy in love with a girl who had a big dreams in her life. But destiny played a crucial role. Will there love reaches its own destination? As I always belive Love is beautiful until the loved ones reunite and finds a happy and soothing end. The author have a exemplary skill in penning the love stories. One must experience his simple writing style and can relate emotional composure throughout. Not to miss relatable vocabulary which stand unique among his contemporary authors. Ajitabha turns out to be a immediate pick when it comes to love flicks. He never disappoint young readers like me to establish a we'll connect and intriguing plot The unexpected twist and turn definitely gives you a goosebumps during the read and take you deep in the world of imagination. I would definitely recommend this one. I find Love , suspense , love attacks in the DNA of Ajitabha's writing Style 💘❤️.