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Chitralekha Ka Mahatva

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About the book

अपने प्रकाशन के लगभग तत्काल बाद से ही 'चित्रलेखा' किसी-न-किसी रूप में चर्चा और विवादों में रही है। लेकिन उसका खुमार आज भी बना हुआ है। जैसा कि प्राय: कोई न ज़मीन तोड़नेवाली हर रचना के साथ होता है, वह अपने साथ अनेक प्रश्नों और विवादों को भी लेकर आती है। 'चित्रलेखा' के साथ भी यह सच है। एक ओर यदि वैचारिक धरातल पर भगवतीचरण वर्मा और उनकी रचना का विरोध हुआ, वहीं कभी उनके स्त्री पात्रों, कभी बीजगुप्त के प्रेम-दर्शन और जीवन-पद्धति को आधार बनाकर लेखक पर अनेक सवाल उठाए गए। किसी भी रचना पर विचार और मूल्यांकन की प्रक्रिया में पहला काम उस रचना को वस्तुपरकता के साथ देखना और समझना है। ‘चित्रलेखा’ को सम्पूर्णता में समझने के लिए यहाँ बहुत से ऐसे पक्षों पर लिखवाया गया है जिनके बिना उसका कोई भी मूल्यांकन अधूरा होगा। यहाँ जो सामग्री संकलित है, उसके माध्यम से ‘चित्रलेखा’ को समूचे परिप्रेक्ष्य में अधिक पूर्णता से समझा जा सकेगा।

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अपने प्रकाशन के लगभग तत्काल बाद से ही 'चित्रलेखा' किसी-न-किसी रूप में चर्चा और विवादों में रही है। लेकिन उसका खुमार आज भी बना हुआ है।

जैसा कि प्राय: कोई न ज़मीन तोड़नेवाली हर रचना के साथ होता है, वह अपने साथ अनेक प्रश्नों और विवादों को भी लेकर आती है। 'चित्रलेखा' के साथ भी यह सच है। एक ओर यदि वैचारिक धरातल पर भगवतीचरण वर्मा और उनकी रचना का विरोध हुआ, वहीं कभी उनके स्त्री पात्रों, कभी बीजगुप्त के प्रेम-दर्शन और जीवन-पद्धति को आधार बनाकर लेखक पर अनेक सवाल उठाए गए।

किसी भी रचना पर विचार और मूल्यांकन की प्रक्रिया में पहला काम उस रचना को वस्तुपरकता के साथ देखना और समझना है। ‘चित्रलेखा’ को सम्पूर्णता में समझने के लिए यहाँ बहुत से ऐसे पक्षों पर लिखवाया गया है जिनके बिना उसका कोई भी मूल्यांकन अधूरा होगा।

यहाँ जो सामग्री संकलित है, उसके माध्यम से ‘चित्रलेखा’ को समूचे परिप्रेक्ष्य में अधिक पूर्णता से समझा जा सकेगा।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2014
Weight
200 grams
ISBN-13
9788180319327
Pages
200
Reading time
~7 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
13.5 × 21 cm
Language
Hindi

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